निदेशकों की वैधानिक स्थिति ( legal position of directors) कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 2(34) में यह उपबंधित है कि निदेशक वह व्यक्ति होता है जिसे कंपनी के निदेशक मंडल में निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया हो। अतः स्पष्ट है कि निदेशक वे व्यक्ति होते हैं जो कंपनी के कारोबार का संचालन एवं प्रबंध करने के लिए अंश धारियों द्वारा चुने गए हो। कोई व्यक्ति कंपनी का निदेशक है अथवा नहीं जानने के लिए उसके पदनाम को विशेष महत्व ना देकर यह देखना होता है कि क्या वह कंपनी के निदेशक मंडल में निदेशक पद पर कार्य करने हेतु नियुक्त किया गया है। लार्ड बोवेन के मतानुसार निदेशकों को कभी अभिकर्ता कहा जाता है कभी न्यासी कभी प्रबंधक साझेदार। परंतु इसमें से कोई भी प्रास्थिति उनकी शक्तियों और दायित्वों को पूर्ण रूप से स्पष्ट नहीं करती है। उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश सुब्बाराव( जो बाद में मुख्य न्यायाधीश भी रहे) ने कंपनी के निदेशकों की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए रामचंद्र एंड संस बनाम कन्हैयालाल के वाद में कहा है कि इनकी प्रास्थिति को समझना उतना आसान नहीं है। ये ऐसे व्यवसा...
कानून समझें • अपने अधिकार जानें • सही कदम उठाएँ”