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Showing posts from March, 2022

दहेज हत्या क्या होती है ? इसमें किन किन लोगों को कितनी सजा हो सकती है ? विस्तार से बताओ।

तथ्येन मान्यता और विधिक मान्यता मे क्या अन्तर होता है ?( What is different between defacto recognition and dejure recognition ?)

तथ्येन मान्यता (Defactor Recognition ): जब कोई राज्य पूर्ण मान्यता अथवा विधि मान्यता में देरी करना चाहता है तो वह प्रथम चरण में तथ्येन मान्यता  प्रदान करता है। तथ्येन मान्यता को देने का कारण यह होता है कि मान्यता प्रदान किए जाने वाले राज्य के बारे में यह संदेह होता है कि वह स्थाई है अथवा नहीं तथा वह अंतर्राष्ट्रीय विधि के अंतर्गत अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए इच्छुक तथा योग्य है अथवा नहीं। तथ्येन मान्यता से तात्पर्य है कि मान्यता प्रदान किए जाने वाला राज्य वास्तव में मान्यता के आवश्यक गुण रखता है तथा अंतर्राष्ट्रीय विधि का विषय माने जाने का अधिकारी है। ओपेनहाइम के अनुसार ,"किसी राज्य अथवा सरकार तथ्येन मान्यता  तब प्रदान की जाती है, जब मान्यता देने वाले राज्य  की निगाह में नई सत्ता की, बावजूद इस बात के कि वह वस्तुतः स्वतंत्र है और अपने अधीनस्थ  क्षेत्र में प्रभावपूर्ण शांति रखता है।यथेष्ट स्थायित्व नहीं  प्राप्त होता है और उसमें अंतरराष्ट्रीय उत्तरदायित्व को पूरा करने की योग्यता अथवा अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने की संभावना नहीं दिखलाई पड़ती है। उदाहरण के लिए प्रथम विश्व युद्ध

मान्यता प्रदान करने की कौन-कौन सी विधियां होती हैं?( what is the mode of giving recognition?)

मान्यता प्रकट या परोक्ष किसी भी रीति से की जा सकती है। प्रकट मान्यता(Direct recognition ) किसी औपचारिक रीति से संकेत, घोषणा या मान्यता देने का मंतव्य प्रकट करके दी जाती है। परोक्ष मान्यता(indirect recognition ) ऐसे कार्यों द्वारा दी जाती है जिसमें मान्यता देने का उल्लेख नहीं होता परन्तु  फिर भी उसके मिलने में  संन्देह नहीं होता।            जब विद्यमान राज्य कुछ औपचारिक घोषणा करके नए राज्य को मान्यता देते हैं, तब मान्यता को अभिव्यक्त मान्यता कहा जाता है। औपचारिक घोषणा सार्वजनिक कथन के रूप में हो सकती है जिसके मूल पाठ को राज्य के रूप में मान्यता प्राप्त करने वाले राज्य को भेजा जाता है। इस प्रकार की मान्यता राज्य के प्रमुख या विदेशी मामलों के मंत्री राजनयिक  विवरण(Deplomatic note) मौखिक विवरण(Note verbal) व्यक्तिगत संदेश(Personal message ) द्वारा या संसदीय घोषणा द्वारा भी दी जा सकती है।            जब विद्यमान राज्य नये राज्य की मान्यता के संबंध में कोई औपचारिक घोषणा ना करने के बावजूद भी  कुछ ऐसे कृत्य करते हैं जिससे नए राज्य को मान्यता देने का आशय निर्दिष्ट होता है तो इसे विवर

मान्यता से क्या अभिप्राय है?मान्यता से सम्बन्धित विभिन्न सिद्धातों का संक्षेप में उल्लेख करो।what do you mean by Recognition ?

मान्यता शब्द की परिभाषा तथा अर्थ:- मान्यता एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके द्वारा नए राज्य को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सदस्य के रूप में स्वीकार किया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय पटल पर जब किसी नये राज्य का उदय होता है तो ऐसा राज्य तब तक अंतरराष्ट्रीय समुदाय का सदस्य नहीं हो सकता जब तक कि अन्य राष्ट्र उसे मान्यता प्रदान ना कर दें। कोई नया राष्ट्र दूसरे राष्ट्रों द्वारा मान्यता प्राप्त होने पर ही अंतर्राष्ट्रीय व्यक्तित्व प्राप्त करता है। प्रोफेसर स्वार्जनबर्जर(C.Schwarzenberger) के अनुसार मान्यता को अंतर्राष्ट्रीय विधि को विकसित करती हुई उस प्रक्रिया द्वारा अच्छी तरह समझा जा सकता है जिसके द्वारा राज्यों ने एक दूसरे को नकारात्मक सार्वभौमिकता को स्वीकार कर लिया है और सहमति के आधार पर वह अपने कानूनी संबंधों को बढ़ाने को तैयार है। अतः सामान्य शब्दों में मान्यता का अर्थ अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा किसी नए राज्य को एक सदस्य के रूप में स्वीकार या सत्ता में परिवर्तन को स्वीकार करना है।       प्रोफ़ेसर ओपेनहाइम के अनुसार" किसी नये राज्य को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सदस्य के रूप में मान्यता प्

तटस्थ राज्य कौन से होते हैं?( what do you mean by neutralization country?)

तटस्थीकरण और तटस्थता(Neutralization and Neutrality) तटस्थीकरण और तटस्थता में मौलिक रूप से बड़ा अंतर है । तटस्थीकरण (Neutralization )की नीति का युद्ध तथा शांति काल में समान रूप से अनुकरण किया जाता है जबकि तटस्थता(Neutrality) में यह आवश्यक नहीं होता है कि तटस्थ रहा ही जाए। यदि कोई देश उचित समझे तो उसका परित्याग करके युद्ध में सम्मिलित हो सकता है।      तटस्थीकरण स्थायी होता है जबकि तटस्थता अस्थायी। ओपेनहाइम(Oppenheim) ने तटस्थीकरण की परिभाषा इस प्रकार दी है: तटस्थीकरण  इच्छुक शक्तियों(राज्यों ) द्वारा किया गया स्थाई समझौता है जिसे उन सब की सहमति के बिना भंग नहीं किया जा सकता। ( neutralization is a permanent agreement with interested powers without whose consent it can be relinquished)  तटस्थता का तात्पर्य किसी राज्य की उस नीति से है जिसके अनुसार वह किसी विवाद में या आक्रामक कार्यवाही में नहीं पड़ता।        (the neutralization devotes to policy of a state not to involve itself in any conflict of defensive Alliance)                तटस्थता के निम्नलिखित प्रमुख तत्व है: (1) तटस्थ

अंतर्राष्ट्रीय विधि के दृष्टिकोण से राज्यों का वर्गीकरण कैसे करते हैं।( explain the classification of state for the purpose of international law)

राज्य की सबसे बडी विशेषता होती है उसको  अपने आंतरिक वाह्य  मामलों में पूर्ण स्वतंत्रता। परंतु प्रत्येक राज्य इस प्रकार की स्वतंत्रता का उपभोग नहीं करता।            राज्यों का वर्गीकरण इस बात पर निर्भर करता है कि उनको कितनी और किस सीमा तक स्वतंत्रता प्राप्त है। अतः उन्हें अंतर्राष्ट्रीय विधि के उद्देश्य से निम्नलिखित भागों में बांटा जा सकता है: (1) पूर्ण  प्रभुत्व संपन्न और स्वतंत्र राज्य(Independent states) (2) परतंत्र अंतरराष्ट्रीय राज्य(Dependent States ) (3) संयुक्त अंतरराष्ट्रीय राज्य(composite international states) (4) वास्तविक संघ(Real Union ) (5) व्यक्तिगत संघ(Personal union ) (6) बहुमंडलीय राज्य(Confederation States ) (7) वंशवर्ती राज्य(vassal States ) (8)संरक्षित राज्य (Protectorate States ) (9)राष्ट्र मण्डल (Common Wealth of Nations) (10)तटस्थकृत राज्य (Neutralized States ) (1)स्वतंत्र राज्य (Independent States ): अंतर्राष्ट्रीय परिवार का सदस्य वही माना जाता है जो प्रभुसत्ता संपन्न हो अपने आंतरिक तथा बाह्य मामलों में निपटने में पूर्ण सक्षम हो।उदाहरण के लिये अमेरिका और फ्रांस

राज्य क्या होता है? राज्य के आवश्यक तत्व को बताइए.( what do you understand by State? Discuss the essential element of state.

 राज्य अंतर्राष्ट्रीय विधि का प्राथमिक विषय है। राष्ट्रीय विधि के अंतर्गत संपूर्ण अधिकार तथा कर्तव्य धारण करते हैं।अंतर्राष्ट्रीय विधि की दृष्टि से राज्य शब्द महत्वपूर्ण है, क्योंकि जो समुदाय राज्य नहीं है, वे अंतर्राष्ट्रीय विधि में क्षमता धारणा से वर्जित किए गए हैं। राज्य की परिभाषा देना कठिन है फिर भी विभिन्न विधि वेत्ताओं ने राज्य की परिभाषा विभिन्न प्रकार से दी है: सामण्ड के अनुसार राज्य मनुष्य का वह समुदाय है जो किसी निश्चित सीमा के अंतर्गत शक्ति द्वारा शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थापित किया जाता है। प्रोफेसर हार्ट के अनुसार राज्य शब्द से निम्नलिखित दो तत्वों का बोध होता है: (क) किसी निश्चित क्षेत्र में लोग एक व्यवस्थित सरकार के अंतर्गत रहते हैं तथा यह सरकार एक विधिक प्रणाली द्वारा स्थापित हो,विधायिन न्यायालय तथा प्राथमिक नियम( primary rules) हो, तथा (ख) उक्त सरकार स्वतंत्र हो फेनविक(fenvick) के अनुसार राज्य स्थाई रूप से संगठित एक राजनीतिक समाज है जोकि निश्चित प्रदेश में विद्यमान होता है। अपनी सीमा के भीतर वह किसी अन्य राज्य के नियंत्रण से स्वतंत्र होता है और इस प्रकार यह

ग्रोशियस को क्यों अंतर्राष्ट्रीय विधि का जनक कहा जाता है?

ह्यगो ग्रोशियस(Hugo Grotious): अंतर्राष्ट्रीय विधि के एक विख्यात विधि शास्त्री थे ।इनका जन्म सन 1583 में हालैंड में हुआ था ।15 वर्ष की आयु में उन्हें लीडेन(Leyden) विश्वविद्यालय से डॉक्टर ऑफ़ law की डिग्री मिल गई थी ।सन 1609 में उनकी पहली पुस्तक "Mare Liborum" प्रकाशित हुई ।इस पुस्तक में उन्होंने समुद्र की स्वतंत्रता के संबंध में विवेचना की तथा प्रभावशाली तर्क दिये। इसके पश्चात ग्रोशियस पेरिस चले गए तथा 10 वर्षों तक वहां अध्ययन में लगे रहे । सन 1625 में उनकी सबसे विख्यात पुस्तक "युद्ध तथा शांति की विधि"(De jure belli ac Pacis) प्रकाशित हुई। इस पुस्तक में उन्हें ख्याति प्रदान की। इस पुस्तक का एक विस्तार पूर्वक संस्करण सन 1631 में प्रकाशित हुआ। ओपेनहाइम ने उचित ही लिखा है कि आधुनिक अंतर्राष्ट्रीय विधि का विज्ञान ग्रोशियस कि इस पुस्तक से प्रारंभ होता है, क्योंकि सर्वप्रथम अंतर्राष्ट्रीय विधि की पूर्ण प्रणाली को विधि के विज्ञान की एक स्वतंत्र शाखा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ग्रोशियस के सिद्धांत: ग्रोशियस(Grotious) प्रकृति के नियमों में विशेष आस्था रखते

अंतर्राष्ट्रीय विधि के प्रमुख स्रोत क्या होते हैं? What is the various sources of international law?

स्टार्क के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय विधि के स्रोत से हमारा अभिप्राय उस वास्तविक सामग्री से है जो अंतर्राष्ट्रीय विधि शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय झगड़ों के नियम निर्मित करने के लिए प्रयोग करता है ।अंतर्राष्ट्रीय विधि के स्त्रोतों  से तात्पर्य उन तरीकों तथा प्रक्रियाओं से है जिनके द्वारा अंतर्राष्ट्रीय विधि का जन्म होता है। विधि के स्रोत उन विशिष्ट नियमों से संबंधित होते हैं जिनसे प्रणाली बनती है तथा उन प्रक्रियाओं से संबंधित होते हैं जिनसे नियमों की पहचान विधि के नियमों के रूप में होती है। अंतर्राष्ट्रीय विधि के स्त्रोत अंतर्राष्ट्रीय विधि के आधार से भिन्न होते हैं। अंतर्राष्ट्रीय विधि का आधार अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सामान्य सहमति होती है। अंतर्राष्ट्रीय विधि के स्रोतों को हम निम्नलिखित भागों में विभाजित कर सकते हैं: (1) अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय( international convention) (2) अंतर्राष्ट्रीय प्रथाएं( international customs) (3) सभ्य राष्ट्रों द्वारा स्वीकृति विधि के सामान्य नियम( general principle of law organised by civilized Nations) (4) न्यायाधिकरियों एवं न्यायालयों के निर्णय( decision of judici

अंतर्राष्ट्रीय विधि के स्वरूप क्या होते हैं? What is the nature of international law?

अंतर्राष्ट्रीय विधि का आधार (Basic of International Law): वर्तमान समय में अंतर्राष्ट्रीय विधि को सच्चे अर्थों में विधि माना गया है ।राज्य अपने अभ्यास में इनके नियमों का पालन करते हैं ।प्रश्न उठता है कि अंतर्राष्ट्रीय विधि का आधार क्या है ?अर्थात इस विधि के नियम किन बातों पर आधारित है ।अंतर्राष्ट्रीय विधि के आधार के संबंध में निम्नलिखित सिद्धांत प्रचलित हैं: (1) प्रकृतिवादी मत(Naturalist) (2) व्यवहारवादी मत(Positivists) (3)ग्रोशियसवादी मत (Grotious) (1) प्रकृतिवादी मत(Naturalist): इस विचारधारा का मुख्य प्रवर्तक सैम्युअल प्यूनडार्फ(Samul Puendraf) है। ग्रीक लोगों की प्रकृति की विधि(Law of nature ) की अवधारणा पर जो धार्मिक आचरण चढ़ा था उसको समान लोगों के विवेकशील स्वभाव पर आधारित करने का उल्लेखनीय कार्य ग्रोशियस(Grotious) ने किया। इस विचारधारा के अनुसार दुनिया के सभी राष्ट्र अनतर्राष्ट्रीय विधि को विधि केवल इसलिए मानते हैं कि उनके पारस्परिक संबंधों को उस प्रकृति की विधि में उच्चतर और श्रेष्ठ होने की संज्ञा दी जा सके। फ्यूफेनडार्फ(Pufendarf) का विचार था  कि विभिन्न देशों की प्राकृतिक कान