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Showing posts from March, 2023

कानूनी मामलों में चिकित्सा साक्ष्य की क्या भूमिका होती है?What role does medical evidence play in legal cases?

अपराध की क्या परिभाषा होती है ?अपराध और दुष्कृति मे क्या अन्तर होता है ?What is the definition of crime? What is the difference between crime and torts?

अपराध वह कृत्य है जो न केवल विधि द्वारा वर्जित है बल्कि वह समाज की नैतिक मान्यताओं के प्रतिकूल भी है जिसके लिये किसी देश की दण्ड विधि के अधीन दण्ड का प्रावधान हो । उदाहरणार्थ - हत्या , चोरी , डकैती , बलात्कार आदि अपराध हैं क्योंकि ये न केवल दण्ड विधि के अन्तर्गत दण्डनीय हैं , बल्कि समाज विरोधी कृत्य भी हैं । इसके ठीक विपरीत संपरिवर्तन ( conversion) मानसिक आघात आदि समाज के हित में न होते हुए भी अपराध नहीं है बल्कि केवल अपकृत्य है क्योंकि इनके लिए दण्ड का प्रावधान न होकर अपकृत्य विधि में क्षतिपूर्ति की व्यवस्था है ।    वास्तव में अपराध एक ऐसा रोग और बुराई है जिससे सम्पूर्ण सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन उद्वेलित हो उठता है । समाज के लिए यह घातक है । इसी रोग के निदान के लिए दण्ड विधि का प्रादुर्भाव हुआ ।          अपराध शब्द जितना प्रचलित है उसकी परिभाषा देना ही कठिन है । रसेल का भी ऐसा ही विचार है । वे कहते हैं कि " अपराध को परिभाषित करना एक ऐसा कार्य है जो अब तक किसी लेखक ने सन्तोषजनक रूप से नहीं किया है । वास्तव में अपराध मूल रूप से समय - समय पर समाज के उन वर्गों द्वारा अपनाई गई नीति

भारतीय दंड सहिता मे दुराशय का क्या मतलब होता है ?What is the meaning of mensrea in the Indian Penal Code?

दुराशय ( Mensrea ) - ' दुराशय ' से अभिप्राय है -- दोषपूर्ण अथवा आपराधिक आशय । सामान्यतया कोई भी कार्य तब तक अपराध नहीं माना जाता जब तक कि वह ' दुराशय ' से प्रेरित होकर न किया गया हो । दुराशय को हम अपराधी की वह मानसिक स्थिति कह सकते हैं , जिसकी परिणति अपराध में होती है । लेकिन यह धारणा सिर्फ आँग्ल विधि की है , भारतीय विधि की नहीं । आंग्ल - विधि में चूँकि अपराध के आवश्यक तत्व निर्धारित कर दिये गये हैं , अतः ' दुराशय ' अपराध गठन के लिए एक अनिवार्य शर्त है । यह इस सूत्र पर आधारित है कि  Actus nom facit reum nisi mens sit rea . ' अर्थात् " आशय के बिना केवल कार्य किसी व्यक्ति को अपराधी नहीं बनाता । " उदाहरणार्थ , झाड़ी के पीछे छिपे किसी आदमी को जानवर समझ कर शिकारी उस पर गोली चलाता है और उसकी मृत्यु कारित कर देता है । यहाँ अपराध होते हुए भी उसे आपराधिक उत्तरदायित्व से मुक्त रखा जायेगा , क्योंकि उनके मन कोई आशय नहीं था ।  Mischief (Mensrea) - ' Malice' means - Wrongful or criminal intent.  Ordinarily, no act is considered a crime unless it is motiv

धारा 34एवं धारा 149 कब लागू होती है? यह किस तरह के अपराध का बोध कराती है?When is section 34 and section 149 applicable? What kind of crime does it suggest?

  सामान्य आशय ( Common Intention ) - भारतीय दण्ड सहिता की धारा 34  में यह उपबन्धित किया गया है जबकि कोई आपराधिक कार्य कई व्यक्तियों द्वारा अपने सबके सामान्य आशय को अग्रसर करने में किया जाता है तब ऐसे व्यक्तियों में से हर एक व्यक्ति , इस कार्य के लिये उसी प्रकार दायित्व के  अधीन है मानो कि यह कार्य अकेले उसी ने किया हो ।  यह धारा आपराधिक विधि में " संयुक्त उत्तरदायित्व के बारे में एक बहुत महत्वपूर्ण सिद्धान्त प्रतिपादित करती है । इसके अनुसार जब कई व्यक्ति किसी आपराधिक कार्य को अपने  सबके सामान्य आशय करने में करते हैं तो उनमें से प्रत्येक व्यक्ति का उस कार्य के लिए उसी प्रकार दायित्व होगा जैसा उसने यदि वह कार्य स्वयं अकेले किया होता तो होता ।  जब कई व्यक्तियों द्वारा किए गए कार्य , जो आपराधिक ज्ञान या आशय से किए जाने के कारण ही आपराधिक हैं तब उसमें सम्मिलित सभी व्यक्ति उस ज्ञान या आशय का विचार किए बिना उस कार्य के लिए दायित्वाधीन नहीं होंगे । Common Intention - In section 34 of the Indian Penal Code, it has been provided that when a criminal act is done by several persons in furth

वादी को अचल सम्पत्ति बेचने के लिये संविदा के पालन के लिये वादपत्र कैसे लिखे ?उसका प्रारुप क्या होगा ?How to write plaint for execution of contract to sell immovable property to the plaintiff? What will be its format?

न्यायालय श्रीमान सिविल जज (सी.डि.) महोदय  (जिला) वाद संख्या ...........                    .........सन् 2023 कैलाश पुत्र हरिओम मोहल्ला निवासी जिला ......वादी बनाम काशीनाथ पुत्र साधुनाम मोहल्ला निवासी जिला ...प्रतिवादी  वादी निम्नलिखित कथन करता है 1.यह कि 25.06. 2022  को वादी और प्रतिवादी के बीच एक लिखित करार हुआ  जिसके अनुसार प्रतिवादी ने अपना मकान जिसका पूर्ण विवरण वाद - पत्र के अन्त में दिया है , वादी को बेचने का संविदा कानपुर शहर  में किया ।  2. यह कि संविदा की प्रमुख शर्तें निम्न प्रकार तय हुई  ( अ ) मकान का मूल्य ₹ 90,000 तय हुआ ।  ( ब ) वादी ने संविदा के समय 25.06.2023 को ₹ 50,000 नगद दे दिये और मूल्य ₹ 40,000 विक्रय पत्र की रजिस्ट्री के समय देना तय हुआ ।  3. यह कि वादी ने प्रतिवादी से बार बार कहा है कि वह संविदा दिनांक 15-1-95 अनुसार वादी से ₹ 40,000 लेकर बैनामा लिख दे परन्तु वह कोई सुनवाई नहीं करता ।  4. यह कि वादी संविदा के अनुसार बराबर उस पर पालन करते हुये बैनामा लिखानेें के लिये इच्छुक एवं प्रयत्नशील रहा है और अब भी है । 5. यह कि वादी को वाद का कारण दिनांक 26 जून 2023 संविदा

कौन गोद ले सकता है ? गोदनामे का एक प्रारूप तैयार कीजिए । ( Who can adopt ? Draft an adoption deed . )

 दत्तक ग्रहण एक ऐसी औपचारिक मान्यता है जिसके अधीन किसी एक व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति की सन्तान मान लिया जाता है । यह प्रथा केवल हिन्दुओं में ही प्रचलित है । हिन्दू अनिवार्यताएँ है दत्तक ग्रहण तथा पोषण अधिनियम , 1956 के अन्तर्गत दत्तक ग्रहण सम्बन्धी निम्नलिखित  अनिवार्यताऐ है  ( 1 ) हिन्दू पुरुष दत्तक ग्रहण करने की सामर्थ्य ( Capacity ) — दत्तक ग्रहण करने वाले व्यक्ति को दत्तक ग्रहण करने के लिए सक्षम ( capable ) होना चाहिए । कोई भी हिन्दू पुरुष जो स्वस्थ मस्तिष्क ( Sound mind ) का है तथा 18 वर्ष से कम उम्र का नहीं है किसी भी बालक को गोद ले सकता है । सक्षम विवाहित हिन्दू अपनी पत्नी की स्वीकृति से यदि उसके एक से अधिक पत्नी हैं तो सबकी  स्वीकृति से गोद ले सकता है । पत्नी की असहमति या किसी भी एक पत्नी की असहमति होने पर वह गोद नहीं ले सकता है क्योंकि पत्नी की सहमति के बिना लिया गया दत्तक शून्य है । उस पत्नी की सहमति लेना आवश्यक नहीं है जो   ( अ ) पूर्ण और अन्तिम रूप से संसार त्याग चुकी है ,  ( ब ) हिन्दू नहीं रही है , या  ( स ) सक्षम अधिकारिता वाले न्यायलय द्वारा विकृत चित्त घोषित कर दी गई है

भारतीय दंड संहिता की धारा 19 के अनुसार कौन व्यक्ति न्यायाधीश हो सकता है?Who can be a judge as per section 19 of the Indian Penal Code?r

न्यायाधीश:- न्यायाधीश शब्द न केवल हर ऐसे व्यक्ति का द्योतक  है जो पद के रूप में न्यायाधीश अभिहित हो किंतु उस हर व्यक्ति का भी द्योतक  है   - या दूसरे शब्दों में भारतीय दंड संहिता की धारा 19 के अनुसार न्यायाधीश शब्द ना केवल हर ऐसे व्यक्ति का   द्योतक  है   जो पद से न्यायाधीश अभिहित हो किंतु उस हर व्यक्ति का भी द्योतक  है -           जो किसी विधि कार्यवाही में चाहे वह सिविल हो या दांडिक अंतिम निर्णय ऐसा निर्णय जो उसके विरुद्ध अपील होने पर अंतिम हो जाए या ऐसा निर्णय जो अन्य प्राधिकारी द्वारा पुष्ट  किए जाने पर अंतिम हो जाए देने के लिये  विधि द्वारा सशक्त  किया गया हो अथवा जो उस व्यक्ति निकाय में से एक हो जो व्यक्ति निकाय  ऐसा निर्णय लेने के लिए विधि द्वारा सशक्त  किया गया हो ।  ( i ) सन् 1859 के अधिनियम 10 के अधीन किसी वाद की अधिकारिता का प्रयोग करने वाला कलेक्टर ( collector ) न्यायाधीश है ।  ( ii ) किसी आरोप के संबंध में जिसके लिए उसे जुर्माना या कारावास देने की शक्ति प्राप्त हो , चाहे उसकी अपील होती हो या ना होती हो अधिकारिता का प्रयोग करने वाला मजिस्ट्रेट न्यायाधीश है  । ( ii ) मद्रास