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Showing posts from July, 2024

अपराध शास्त्र के सम्प्रदायों के बारे में आलोचनात्मक विवेचना कीजिए?

अपराध शास्त्र एक व्यापक और बहु-विषयक क्षेत्र है जो अपराध, अपराधियों, और न्यायिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करता है। इस क्षेत्र में विभिन्न सम्प्रदाय और दृष्टिकोण हैं जो अपराध के विभिन्न पहलुओं को समझने और उनका विश्लेषण करने का प्रयास करते हैं। प्रमुख सम्प्रदाय निम्नलिखित हैं:-→  1.शास्त्रीय सम्प्रदाय (Classical School):-→   शास्त्रीय सम्प्रदाय का उदय 18वीं शताब्दी में हुआ और इसके प्रमुख विचारक सेसर बेक्कारिया और जेरेमी बेंथम थे। इस सम्प्रदाय का मानना है कि अपराध एक स्वेच्छापूर्ण क्रिया है और अपराधियों को उनकी पसंद के लिए जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। इस दृष्टिकोण के अनुसार, कानून को स्पष्ट और निष्पक्ष होना चाहिए और दंड को अपराध के अनुपात में होना चाहिए ताकि यह अपराधियों को पुनः अपराध करने से रोक सके।    (2. )सकारात्मक सम्प्रदाय (Positivist School):→  सकारात्मक सम्प्रदाय 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में उभरा और इसके प्रमुख विचारक सीज़र लोम्ब्रोसो, एनरिको फेर्री, और रैफेल गारोफालो थे। इस सम्प्रदाय का मानना है कि अपराध एक सामाजिक, जैविक, और मनोवैज्ञानिक कारकों के संयोजन का परिणाम है। लोम्ब्रोसो न

cesare lombroso theory of crime क्या है?विस्तार से बताओ। तथा लोम्ब्रोसी theory की आलोचना क्यों की जाती है।

Cesare Lomboroso एक इतालवी चिकित्सक और अपराधशास्त्री थे। लोम्ब्रोसो को Positive विचारधारा का प्रमुख प्रवर्तक कहते हैं। Lomboroso इटली की थल सेना में एक डाक्टर के रूप में कार्यरत थे। लोम्बोसो 19वीं शताब्दी में अपराध के कारणों का अध्ययन करने वाले अग्रणी थे। उन्होंने लोगों की शारीरिक बनावट तथा उनकी विशेषताओं का अध्ययन किया । उन्होंने सर्वप्रथम यह प्रतिपादित किया कि व्यक्ति की शारीरिक बनावट ही अपराध का प्रमुख कारण है। जिसमें उन्होंने दावा किया कि कुछ लोग जन्मजात रुप से अपराधी होने के लिये प्रवृत होते हैं।   According to Lombaroso अपराधी जन्मजात होते हैं, वे बनते नहीं है। यह अपराधी जन्म से - बनावट में विशेष प्रकार के होते हैं। उनके इस -Theory को आतविक अपराधी [ Born criminal] सिद्धांत  के नाम से भी जाना जाता है। लोम्ब्रोसो का मानना था कि अपराधियों के शारीरिक और मानसिक गुणधर्म उनके आपराधिक व्यवहार को निर्धारित करते हैं।   Intraduction! Cesare Lomboroso का जन्म 1835 में इटली में हुआ था। उन्होने.. चिकित्सा की पढ़ाई की और बाद में अपराध विज्ञान में गहरी रुचि विकसित की । उनका प्रमुख क

भारत में Adoption की प्रक्रिया क्या होती है? Adoption के लिये किन शर्तों को पूरा किया जाना अति आवश्यक है ? विस्तार से बताओ।

हिन्दू दत्तक ग्रहण [Hindu Adoption] भारतीय समाज की एक प्राचीन और महत्वपूर्ण प्रथा है, जो धार्मिक, सामाजिक और कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यह प्रक्रिया न केवल बच्चों के जीवन को सुधारने का एक माध्यम है बल्कि यह उन परिवारों के लिये भी एक नई उम्मीद की किरण है जो संतान की कमी से जूझ रहे होते हैं।           कानूनी भाषा में दत्तक ग्रहण को परिभाषित किया जाये तो अपनी सन्तान के समान किसी अन्य व्यक्ति की सन्तान को विधिक प्रास्थिति [ Legal Status ] प्रदान करने को दत्तक ग्रहण कहते हैं। दत्तक ग्रहण से माना जाता है कि Adopt बच्चे का दत्तक ग्रहीता के घर में पुनार्जन्म [Re-Birth हुआ है तथा दत्तक देने वाले के घर में उसकी कानूनी मृत्यु [Legal Death] हो गयी है।                                                                      ऐतिहासिक पृष्ठभूमि :   Adoption की प्रथा का उल्लेख प्राचीन हिन्दु धर्मग्रन्थों जैसे मनुस्मृति और धर्मशास्त्रों में मिलता है। वेदों में इसे पुण्य कार्य माना गया है और इसे संतानहीन दंपतियों के लिये वरदान के रूप में देखा गया है। प्राचीन काल में दत्तक ग्रह