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Showing posts from December, 2022

मकान सम्पत्ति से होने वाली आय का निर्धारण कैसे किया जाता है ? ( How can be income from house property assessed ? )

मकान सम्पत्ति से आय का निर्धारण ( Computation of Income from House Property )  आयकर अधिनियम की धारा -23 के अनुसार मकान सम्पत्ति से होने वाली आय का निर्धारण निम्नलिखित दो प्रकार से किया जा सकता है - ( 1 ) किराये पर उठायी गयी सम्पत्ति की आय - धारा 23 ( 1 )  ( 2 ) स्वयं के रहने वाले मकान सम्पत्ति से आय - धारा -23 ( II )  किराये पर उठायी गयी सम्पत्ति की आय धारा 23 ( 1 ) – किसी ऐसी सम्पत्ति जो कि वार्षिक मूल्य निकाला जाता है । इसी वार्षिक मूल्य के आधार पर मकान सम्पत्ति की आय पर किराये पर उठायी गयी हो के सन्दर्भ में आय का निर्धारण निम्न प्रकार से किया जायेगा ।   ( a ) वार्षिक मूल्य का निर्धारण - किसी मकान सम्पत्ति पर कर लगाने के लिए उस सम्पत्ति से प्राप्त होने वाले वास्तविक किराये उचित किराये आदि के आधार पर उस सम्पत्ति का आय पर आय की गणना की जाती है । मकान सम्पत्ति का वार्षिक मूल्य वह माना जाता है जो कि निम्न में से सबसे अधिक हो-  ( i ) वह राशि जिस पर वह मकान सम्पत्ति सम्भावित है कि उचित किराये पर उठायी जा सकती है , या  ( ii ) अगर वास्तविक किराया ( प्रति वर्ष ) उक्त उचित किराये से ज्यादा

व्यापार से सम्बन्धित स्वीकृति कटौतियों को विस्तार से समझाइए [ Explain in detail admissible deduction in the contaxt of business . ]

 व्यापार से सम्बन्धित स्वीकृत कटौतियाँ ( Admissible Deductions From Business )  कटौतियाँ निम्नलिखित प्रकार की होती है:-                                                               व्यापार से सम्बन्धित स्वीकृत हानियाँ :-      किसी व्यापार में व्यय एवं हानियाँ दोनों ही हो सकते हैं । व्यावसायिक व्ययों एवं हानियों दोनों में अन्तर है । व्यय ऐसा भुगतान है जो करदाता द्वारा स्वयं चुकाया जाता है , जबकि हानियाँ करदाता द्वारा उसकी इच्छा के न होते हुए दबाव के अन्तर्गत सहन की जाती है । इन हानियाँ को हानियों के कुछ उदाहरण इस तरह है :-  ( i ) जमा की गई प्रतिभूति के जब्त होने पर हानि - माल की पूर्ति हेतु निविदा देते समय पहले से जमा कराई गयीं  प्रतिभूति के जब्त होने के कारण हुई हानि स्वीकृत व्यापारिक हानि होगी ।  ( Ii ) कच्चे अथवा निर्मित माल की मार्ग में हानि ।    ( iii ) अनुबन्ध भंग के कारण हानि - व्यवसाय के अन्तर्गत पक्षकार द्वारा माल की सुपुर्दगी हेतु किये गये अनुबन्ध को पूरा न करने के कारण हुई हानि व्यापारिक हानि कहलायेगी ।  Admissible Deductions From Business   The deductions are of the followi

धारा 22 में मकान पर आयकर लगाने के लिये कौन सी शर्तें होनी चाहिए ?(What should be the conditions for levying income tax on house under Section 22?)

मकान सम्पत्ति की आय पर कर लगाने की प्रमुख शर्ते ( Main Conditions on the Income from House Property ) :- किसी करदाता की उन आयों को आयकर व अधिनियम की धारा 22 के अन्तर्गत कर योग्य माना जाता है जो कि करदाता को उन मकानों या उनसे लगी हुई जमीनों के माध्यम से प्राप्त होती है जिनका स्वामित्व करदाता के पास है और उन्हें वह किसी ऐसे प्रयोग में नहीं लाता है जहाँ पर उससे प्राप्त होने वाले लाभों पर कर लगता हो । ऐसी आय पर कर लगाने के लिए निम्न प्रकार वर्णित शर्तों का पालन किया जाना जरूरी है  । Main Conditions on the Income from House Property :-  Those incomes of a taxpayer are considered taxable under Section 22 of the Income Tax Act, which the taxpayer receives through those houses or lands adjacent to them, which are owned by the taxpayer and are not used in any such way.  where the profits derived from it are taxed.  In order to charge such income to tax, the following conditions have to be satisfied: ( 1 ) मकान सम्पत्ति व्यापार पेशे के लिए प्रयुक्त न होने पर जब किसी करदाता द्वारा अपन

Income tax of house property क्या होता है ? मकान पर tax किस तरह ले सकते हैं

मकान सम्पत्ति से आशय ( Meaning of House Property )  आयकर अधिनियम की धारा 22 के अनुसार , " मकान - सम्पत्ति से आय शीर्षक में करदाता के स्वामित्व वाले मकानों अथवा उनसे लगी जमीनों के वार्षिक मूल्य पर आयकर लगता है , किन्तु इस सम्पत्ति के ऐसे भागों को छोड़ दिया जाता है जिन्हें वह स्वयं के द्वारा संचालित किसी ऐसे व्यापार अथवा पेशे के लिए प्रयुक्त करता है जिसके लाभों पर आयकर लगता है । "  मकान सम्पत्ति पर आयकर ( Income Tax on House Property )  कोई भी आय मकान शीर्षक के अन्तर्गत कर योग्य ठहरायी जा सकती है । जबकि वह धारा 22 के अन्तर्गत दी गयी शर्तों को पूरी करती हैं , धारा 22 में निम्न शर्तें दी गई है :-  ( 1 ) मकान अथवा उनसे लगी जमीनों से आय ( Income from building or lands attached there to ) - आयकर अधिनियम की धारा 22 के अन्तर्गत ऐसी भूमि से होने वाली आय पर कर लगेगा जो कि मकान से जुड़ी हुई हो या मकान से लगी हो । आयकर अधिनियम में मकान की परिभाषा नहीं दी गई है , किन्तु विभिन्न न्यायालयों के निर्णयों में मकान को परिभाषित किया गया है । सामान्यतया मकान का आशय दीवारों से घिरी जगह से है , भले