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Showing posts from June, 2024

वेश्यावृत्ति से आप क्या समझते हो सरकार इसको कैसे रोक सकती है?

वेश्यावृत्ति की समस्या { Problem of Prostitution ):- वेश्यावृत्ति की उत्पत्ति और विकास का वर्णन करते हुये टैफ्ट ने कहा है कि "जब विवाह की प्रथा कमजोर हुई वेश्यावृत्ति भी पतन की ओर उन्मुख होती गयी। अतः एक प्रकार से वेश्यावृत्ति नैतिकता का एक आवरण है।" पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव तथा भारतीय नैतिक दृष्टिकोण में तेजी से व्हास के कारण भारत में आज वेश्यावृति को एक अपरिहार्य आवश्यकता तथा लोगों के सामान्य नैतिक आचरण को रक्षा के साधन के रूप में स्वीकार कर लिया लिया गया है।        इतिहास बताता है कि भारत में वेश्यावृ‌त्ति की प्रथा प्राचीन काल में चली आ रही है। हिन्दु राजाओं के समय में देवदासियाँ आदि होती थी। इस काल में नगर वधु के नाम से वेश्याओं को बुलाया जाता था। मुस्लिम शासक ऐश्वर्यवान और कामुक्त होते थे। वेश्यावृत्ति को अपनाने वाले लोगों के बीच नैतिक मूल्यों के प्रति  श्रद्धा और आत्म-नियंत्रण की भावना का विकास होगा तभी इसे रोका जा सकेगा।                वेश्यावृत्ति जिसे देह व्यापार या जिस्मफरोशी के नाम से भी जाना जाता है। एक ऐसा सामाजिक मुद्दा है जिसकी जड़ें गहरी हैं और

धारा 125 के तहत एक पति द्वारा भरण पोषण की drafting करो?Drafting of maintenance by a husband under section 125?

[1] यदि कोई व्यक्ति जो किसी स्त्री, पुरुष या बच्चे का पति या पत्नी, पुत्र या पुत्री, पिता या माता, दादा या दादी, नाती या पोता, या पराश्रयी हो और जो उस व्यक्ति के साथ रहने का हकदार हो, भरण-पोषण प्राप्त करने में असमर्थ हो, तो वह व्यक्ति, जिसके साथ रहने का हकदार है से भरण-पोषण के लिये आवेदन कर सकता है।  [2] उपधारा [1] के तहत आवेदन, न्यायालय में दायर किया जायेगा, जिसके क्षेत्राधिकार में वह व्यक्ति रहता है  जिससे भरण-पोषण का दावा किया जा रहा है।  [3] न्यायालय, आवेदन पर विचार करने के बाद यदि यह पाता है कि आवेदक भरण-पोषण प्राप्त करने में असमर्थ है और प्रतिवादी भरण-पोषण देने में सक्षम है तो न्यायालय  प्रतिवादी को आवेदक की भरण-पोषण के लिये एक उचित राशि का भुगतान करने का आदेश दे सकता है।  [4] न्यायालय, आदेश में भरण-पोषण की राशि, भुगतान की विधि और समय और अन्य आवश्यक शर्ते निर्धारित करेगा।  [5] न्यायालय समय-समय पर आदेश की समीक्षा कर सकता है और यदि आवश्यक हो तो इसमें संशोधन कर सकता है।   स्पष्टीकरण :  [a] "स्त्री शब्द में विधवा स्त्री भी भरण-पोषण प्राप्त करने की अधिकारी है।  [b] पुरुष शब्द में

किशोर जमानत प्रार्थना पत्र कैसे लिखें यदि व्यक्ति जेल में है?How to write a juvenile bail application if the person is in jail?

                                      न्यायालय श्रीमान किशोर न्याय बोर्ड महोदय  मु० अ० सं० XXX/2024                                                                                    थाना XXXX                                                                                सरकार बनाम XXXX                                                                   धारा 354, 323, 504, 506 आई०पी०सी. व 3(2) 5क एस० सी० एस० टी० एक्ट                    किशोर जमानत प्रार्थना पत्र द्वारा xxxx पुत्र XXXX निवासी xxxx थाना xxxx जिला xxxx निम्नलिखित है: - [1] यह कि प्रार्थी निर्दोष है उक्त प्रकरण में झूठा फसाया गया है।  [२] यह कि एफ० आई० आर० बिलम्ब से है । बिलम्ब का कोई स्पष्टीकरण नहीं है।  [३] यह कि प्रथम सूचना रिपोर्ट बनावटी व मनगढन्त तथा पेशबन्दी में फर्जी पड़ोस की रंजिश के कारण फर्जी व झूठी की गयी है।  [4] यह कि प्रार्थी की साइकिल चोरी गयी थी जिसकी चौकी में दरख्वास्त दी थी और उसकी खोज में पुलिस ने वादिया के पति को पकड़कर पूछ ताछ की थी क्योंकि वह अपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति है जिससे बुराई मानकर पेशबन्दी में

भारतीय संविधान में स्त्रियों के मूल कर्तव्य में क्या प्रावधान किये गये हैं?What provisions have been made regarding the fundamental duties of women in the Indian Constitution?

भारतीय संविधान के  भाग 4A में मौलिक कर्तव्यों को शामिल किया गया है। जो न केवल नागरिकों के अधिकारों को परिभाषित करते हैं, बल्कि समाज के प्रति उनके नैतिक दायित्वों को भी रेखांकित करते हैं। इन कर्तव्यों में से एक है स्त्रियों के प्रति सम्मान और गरिमा का भाव रखना।       संविधान का अनुच्छेद 51 -क [30] यह व्यवस्था करता है कि भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह भारत के लोगों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण कर जो धर्म भाषण और प्रदेश या वर्ग पर आधारित भेदभाव मिटाती हैं, ऐसी प्रथा का त्याग करे जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हो।        मौलिक कर्तव्य 5( e) में कहा गया है कि हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह स्त्रियों के प्रति अपमानजनक रीति - रिवाजों का त्याग करे। यह कर्तव्य निम्नलिखित बिन्दुओं पर प्रकाश डालता है-  • समानता का सम्मानः स्त्रियों की पुरुषों के समान अधिकार और अवसर प्राप्त होने चाहिये। उन्हें शिक्षा, रोजगार स्वास्थ्य सेवा और 'राजनीतिक भागीदारी में समानता को अधिकार है।  • गरिमा का सम्मान: स्त्रियों को सम्मान और गरिमा के साथ जीने का अधिकार

तलाक क्या होता है? तलाक को कितने भागों में बांट सकते हैं जोकि महत्वपूर्ण हो?What is divorce? How many parts can divorce be divided into that are important?

विवाह, एक पवित्र बंधन, जिसके माध्यम से दो व्यक्ति जीवन भर साथ रहने का वादा करते हैं। इस्लाम में भी विवाह को अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन कुछ परिस्थितियों में तलाक का विकल्प भी मौजूद है। मुस्लिम विधि में तलाक को तलाक कहा जाता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से विवाहित जोड़ा कानूनी रूप से अलग हो जाता है।      मुस्लिम विधि में तलाक अर्थात विवाह-विच्छेद अत्यन्त आसान है। । यहाँ पति तीन बार तलाक शब्द का उच्चारण कर आपनी पत्नी को कभी भी तलाक दे सकता है। पत्नी की विशेष परिस्थितियों में अपने पति को तलाक देने का अधिकार है। यदि तलाक लिखित में दिया जाता है तो उसे तलाकनामा कहा जाता है। इसका यथासम्भव अरबी भाषा में होना अपेक्षित है।  तलाक के प्रकार:  [1] रज्जी तलाक : यह तलाक पति द्वारा तीन बार तलाक शब्द उच्चारण करने से होता है। प्रत्येक उच्चारण के बीच एक ईद्दा काल होता है। जिसमें सुलह की संभावना रहती है।  [2] खुला तलाक : इसमें पत्नी पति को तलाक के बदले में मेहर  विवाह अनुबन्ध में निर्धारित धनराशि का त्याग करके तलाक प्राप्त कर सकती है। खुला का अर्थ है परित्याग करना । इसम

राजस्व न्यायालय क्या होते हैं? इनका क्या कार्य होता है। वर्णन करो।What are revenue courts? What is their function? Describe.

राजस्व न्यायालय:-   राजस्व न्यायालय, भारत में भूमि,और कर से संबन्धित  सम्पत्ति मामलों को निपटाने वाली विशेष अदालतें है। इनकी स्थापना राजस्व कानूनों के तहत की जाती है। और इनका अधिकार क्षेत्र विभिन्न राज्यों में भिन्न हो सकता है। राजस्व न्यायालयों के मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं।-   [1] भूमि विवादों का समाधान: इसमें जमीन के स्वामित्व, सीमा विवाद पट्टे के अधिकार, और मुआवजे से संबन्धित मामले शामिल हैं।  [ 2] कर निर्धारण और वसूली: इसमें सम्पत्ति कर कृषि आयकर, और अन्य करों का आकलन, निर्धारण और वसूली से सम्बन्धित मामले शामिल है।  [ 3] विरासत और उत्तराधिकार: इसमें राजस्व कानूनों के तहत आने वाले अन्य मामले शामिल है, जैसे कि अवैध कब्जा, भूमि अधिग्रहण, और मुआवजा ।  राजस्व न्यायालयों का पदानुक्रम  राजस्व न्यायालयों का पदानुक्रम राज्य से राज्य में भिन्न होता है। लेकिन, सामान्य तौर पर, इसमें निम्नलिखित  स्तर शामिल होते हैं।  • प्राथमिक राजस्व न्यायालय: यह निचला स्तर का न्यायालय होता है, जो आमतौर पर तहसील या उप- विभागीय स्तर पर होता है।  • अपीलीय राजस्व न्यायालय: यह जिला स्तर का न्यायालय हो

दहेज हत्या क्या होती है ? इसमें किन किन लोगों को कितनी सजा हो सकती है ? विस्तार से बताओ।

परिचय :→   दहेज हत्या, एक जघन्य सामाजिक बुराई, भारत में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की एक भयावह सूची में शामिल है। भारतीय दण्ड संहिता [ आईपीसी में दहेज हत्या को अपराध घोषित किया गया है। और इसके लिये कड़ी सजा का प्रावधान है।      दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 की धारा 2 के अनुसार दहेज ऐसी सम्पत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति है जो विवाह के एक पक्षकार द्वारा दूसरे पक्षकार के लिये या विवाह के किसी पक्ष के माता-पिता या अन्य व्यक्ति द्वारा विवाह के दूसरे पक्ष या किसी अन्य व्यक्ति के लिये विवाह करने के सम्बन्ध में विवाह के समय या उससे पहले या बाद में किसी भी समय प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मांगी जाने या दी जाने वाली प्रतिज्ञा के रुप  में किया गया वादा दहेज की श्रेणी में आता है। इसको एक उदाहरण के रूप में समझते हैं। कि A नामक दूल्हे के पिता द्वारा शादी के वक्त B नाम वधू के पिता से ₹ 500000 की माँग की जाती है या दूल्हे द्वारा कार या मोटरसाइकिल की माँग की जाती है और वधु का पिता उसे विवाह बाद देने की बात करता है। यह दहेज है।      यदि विवाह के पश्चात अतिरिक्त दहेज के कप में टी०वी० और गाडी की माँग की

भारतीय संविधान में स्त्रियों और बच्चों को कौन -कौन से अधिकार प्रदान किये गये हैं?

  भारतीय संविधान महिलाओं और बच्चों की चाबी मानवाधिकारों की रक्षा के लिये -  दोस्तों भारतीय संविधान सिर्फ कानूनों का संग्रह नहीं है। बल्कि ये सामाजिक न्याय और समानता का दस्तावेज भी है। आज हम बात करेंगे इसी संविधान के उन खास पहलुओं की जो महिलाओं और बच्चों के मानवाधिकारों की रक्षा करते हैं।  संविधान का सुरक्षा कवचः  हमारा संविधान महिलाओं और बच्चों को कई महत्व पूर्ण अधिकार देता है । आइये देखें कुछ खास  • समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18]:  ये अनुच्छेद लिंग जाति, धर्म या जन्म स्थान के आधार पर किसी भी तरह के भेदभाव को रोकता है।   स्वतन्नता का अधिकार [अनुच्छेद 19-22]: शोषण से मुक्ति, शिक्षा का अधिकार और स्वतन्त्र रूप से काम करने का अधिकार - ये वे चीजें हैं जिसकी गारण्टी संविधान देता है।  शोषण के खिलाफ संरक्षण [अनुच्छेद 23-24)-  • ये अनुच्छेद मानव तस्करी, बन्धुआ मजदूरी और बाल श्रम को रोकता है। संवैधानिक उपचारों का अधिकार [अनुच्छेद 32]- ये अधिकार महिलाओं और बच्चों को उनके मौलिक अधिकारों के उल्लघन के मामले में सीधे अदालत का दरवाजा खटखटाने का बल देता है। कभी-कभी संविधान का इस्तेमाल अन