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Showing posts from February, 2024

SC/ST Act क्या है ? इसमें कितनी सजा हो सकती है ?What is SC/ST Act? How much punishment can there be in this?

SC/ST Act संसद द्वारा 1989 पारित किया गया। इसके बाद राष्ट्रपति ने 30 जनवरी 1990 को इस पर मुहर लगाई और ये कानून लागू किया गया।      हिन्दी में बात की जाये अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण कानून) कहा जाता है। इस कानून के अन्तर्गत कुल 5 अध्याय एवं 23 धारायें हैं। इसमें 2018 में संशोधन हो चुका है।       SC/ST Act अध्याय-1 में [ खख] आश्रितं से पीडित का ऐसा पति या पत्नी बालक माता -पिता भाई और बहिन जो ऐसे पीडित पर अपनी सहायता और भरण-पोषण के लिये पूर्णतः या मुख्यता आश्रित है:  [ख ग] "आर्थिक बहिष्कार से निम्नलिखित अभिप्रेत है -  [[i] अन्य व्यक्ति से भांडे पर कार्य से सम्बन्धित किसी अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति को उसके कार्य का मेहनताना न दिया जाना।  [ खड़] वन अधिकार का वह अर्थ होगा जो अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम 2006 (2007 का 2) की धारा 3 की उपधारा (2) में है। [([खच] हाथ से मैला उठाने वाले कर्मी का वह अर्थ होगा जो हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम (2013 (2013 का 25 )

केवल जमानत शर्तों का उल्लंघन जमानत रद्ध करने के लिये पर्याप्त नहीं होगा।

राजिया बनाम हरियाणा राज्य  पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने न्यायमूर्ति जसजीत सिंह बेदी द्वारा जमानत शर्तों की स्वचालित रूप से रद्द करने पर यह कहा गया है कि एक बार जमानत मिलने के बाद उसे रद्द करने के लिये ठोस कारण होने चाहिये। केवल जमानत शर्तों का उल्लंघन जमानत रद्द करने के लिये पर्याप्त नहीं होगा।  सुप्रीम कोर्ट के कथनानुसार जमानत को रद्द किया जा सकता है यदि साक्ष्य अपराध के रहस्य या सामाजिक प्रभाव पर ध्यान नहीं दिया गया हो।         राजिया बनाम हरियाणा राज्य के मामले में जमानत देने के आदेश में एक शर्त शामिल थी जिसमें कहा गया था, "यह स्पष्ट है कि अगर जमानत देने के आदेश  में कोई अन्य मामला शामिल है तो मामले में जमानत दी जायेगी।   धारा 482 CrPC के तहत यदि आवेदक समान प्रकृति के किसी दूसरे मामले में शामिल है तो मौजूदा मामले में दी गयी जमानत को खारिज कर दिया जायेगा। सत्र न्यायाधीश  फरीदाबाद ने पुलिस स्टेशन सुराजकुण्ड फरीदाबाद हरियाणा में एनडीपीएस अधिनियम की धारा 20-61-85 के तहत दर्ज था जिससे याचिकाकर्ता को दी गयी जमानत को रद्द कर दिया गया। क्योंकि याचिकाकर्ता के खिलाफ NDPS अधिन

भारतीय दंड संहिता की धारा 76 क्या कहती है? इसमें प्रयुक्त शब्द तथ्य की भूल क्षम्य है लेकिन कानून की भूल क्षम्य नहीं है क्या संबंध है?What does section 76 of the Indian Penal Code say? The words used in it are excusable mistake of fact but not excusable mistake of law what is the relation?

 भारतीय दण्ड संहिता की धारा 76 में यह उपबन्धित किया गया है कि " कोई बात अपराध नहीं है जो किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाय जो उसे करने के लिए विधि द्वारा आबद्ध हो या जो तथ्य की भूल के कारण न कि विधि की भूल के कारण , सद्भावनापूर्वक विश्वास करता हो कि उसे करने के लिए विधि द्वारा आबद्ध है ।   उदाहरण 2  ( क ) विधि के समादेशों के अनुवर्तन में अपने वरिष्ठ ऑफिसर के आदेश से एक सैनिक ' क ' भीड़ पर गोली चलाता है । ' क ' ने कोई अपराध नहीं किया ।  ( ख ) न्यायालय का ऑफिसर ' क ' , ' म ' को गिरफ्तार करने के लिए उसे न्यायालय द्वारा अदिष्ट किये जाने पर और सम्यक् जाँच के पश्चात् यह विश्वास करके कि ' य ' , ' म ' है , ' य ' को , गिरफ्तार कर लेता है । ' क ' ने कोई अपराध नहीं किया ।   इस धारा में तथ्य की भूल को आपराधिक दायित्व से बचने के लिए एक उचित आधार के माना गया है । स्टोरी के अनुसार , " भूल से अभिप्राय एक ऐसी निरुद्देश्य कार्य अथवा चूक ( act or omission ) से है जो अज्ञान , विस्मय अथवा गलती से किये गये विश्वास के कारण नि हुई है ।

cyber crime क्या होता है?

आज का युग कम्प्यूटर और इंटरनेट की बढ़ती हुई उपयोगिता का युग है । जिसने हमको तकनीकी क्षेत्र  में बहुत आगे पहुंचा दिया है। आज हमारी रोज मर्रा के काम इस इन्टरनेट और मोबाइल के बिना आधे-अधूरे से लगते हैं। इस तकनीक क्षेत्र में  हमारी प्रगति के कारण हमारे जीवन को बदलने के लिये काफी मौके दे रहा है। जैसे की  इन्टरनेट बैंकिंग, के माध्यम से पैसों की निकासी जैसे कई कार्य कम्प्यूटर और इन्टरनेट के उपयोग ने तकनीकी क्षेत्र में हमें बहुत आगे पहुंचा दिया है लेकिन ये तकनीक अपने साथ कई ऐसे खतरे लायी है जिनके बारे में आपको पता होना चाहिये।  साइबर अपराध एक ऐसा खतरा है जो बीते कुछ वर्षो में तेजी से बढ़ा है और इसने दुनिया भर में इन्टरनेट इस्तेमाल करने वाले लाखों लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। हैकर्स और स्पमर्श इन साइवर अटैक से किसी भी व्यक्ति की पर्सनल जानकारी से लेकर किसी व्यापारिक संस्थान को कही भी सिर्फ बैठे-बैठे निशाना बना सकते हैं। इस तरह के साइबर हमलों से एक ही पल में कोई व्यक्ति और संस्थान बर्बाद किये जा सकते हैं। अपने आप को इन साइबर हमलों से बचाने के लिये आप को इनके बारे में जानकारी रखना बहुत ही आव

हत्या के लिए आई पी सी की कौन सी धाराएं लगती हैं?

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302 हम लोगो ने कभी न कभी जरूर सुना होगा। किसी घटना में प्राय: लोगों द्वारा यह सुना ही गया होगा कि किसी व्यक्ति के खिलाफ पुलिस द्वारा 302 का मुकदमा लिखा गया है। लेकिन क्या IPC के इस act का पूरा मतलब हम लोग सही प्रकार से समझने में थोड़ा सा असहजता जरूर दिखाई देती है कि 302 का मुकदमें से हम यह समझते है कि किसी व्यक्ति द्वारा यदि किसी दूसरे व्यक्ति कि हत्या की जाती है तो वह व्यक्ति भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302 के तहत अपराधी होगा। लेकिन यहाँ पर धारा 302 के तहत अपराधी नहीं बल्कि धारा 302 में हत्या की सजा का प्रावधान की धारा है।      जो व्यक्ति मृत्यु करने के इरादे से या ऐसा शारीरिक आघात पहुंचाने के उद्देश्य से जिसमे उसकी पूरी मंशा हो कि वह किसी दूसरे व्यक्ति कि मृत्यु किया जाना सम्भव हो और यह जानते हुये कि उस कार्य से मृत्यु होने की सम्भावना है कोई कार्य करके मृत्यु करता है तो वह सदोष मानव वध का अपराध करता है तो वह भारतीय दण्ड संहिता की धारा २११ के अन्तर्गत आता है।     इस श्रेणी में निम्नलिखित सामाज में घटित होने वाली घटनायें ही सकती है जो कि इस श्रेणी

भारतीय दंड संहिता में धारा 375 क्या बताती है?What does Section 375 in the Indian Penal Code tell?

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 375 के बलात्कार के अपराध का वर्णन किया गया है । इस अपराध के निम्नलिखित आवश्यक तत्व हैं-  (1) किसी पुरुष के द्वारा किसी स्त्री के साथ लैंगिक सम्भोग (Sexual intercourse) किया जाना, एवं   (2) ऐसे लैंगिक सम्भोग का निम्नलिखित परिस्थियों में से किसी के अन्तर्गत किया जाना  (i) उस स्त्री की इच्छा के विरुद्ध,  (ii) उस स्त्री की सम्मति (Consent) के बिना,  (iii) उस स्त्री की मृत्यु या चोट का भय बताकर सम्मति प्राप्त करके ।  (iv) उसे अपने को पति बनाकर जबकि वास्तव में वह उसका पति नहीं है।  (v) उसकी सम्मति या. बिना सम्मति के, जबकि उसकी आयु 16 वर्ष से कम है।  (vi) उस स्त्री की सम्मति से, जबकि सम्मति देने के समय वह मन की विकृत चिन्तन मदत्त अथवा किसी मादक या अस्वास्थ्यकर पदार्थ के सेवन के कारण कार्य की प्रकृति एवं  परिणाम जान सकने में असमर्थ रही हो । The crime of rape is described in Section 375 of the Indian Penal Code.  Following are the essential elements of this offence:  (1) Sexual intercourse by a man with a woman, and  (2) Such sexual intercourse taking pla