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धारा 511 में अपराध को कैसे परिभाषित किया गया है ?

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 511 में आपराधिक प्रयत्न के अपराध का वर्णन किया गया है। जिसका मतलब है कि किसी अपराध करने का प्रयास करना अपराध की श्रेणी में जब तक नहीं आयेगा । परन्तु भारतीय दण्ड संहिता के अनुसार आजीवन कारावास या कारावास के दण्डनीय अपराध की करने या करवाने की चेष्टा करना और उसके फलस्वरूप उस अपराध दशा में कोई कार्य किये जाने पर यदि इस संहिता में उसके लिये कोई दण्ड की अवस्था न हो तो आजीवन कारावास के दण्ड वाले मामले में अधिकतम कारावास की अवधि के आधे तक के लिगे या दोनो से दण्डित किया जा सकता है।       धारा 511 को समझने के लिये एक उदाहरण के हम समझते है कि जिसमें किसी अभियुक्त द्वारा एक लड़की को पकड़ा और उसे बलपूर्वक झाडियो के पास ले गया उसे जमीन पर गिराकर उसके अंदरुनी कपडे हटाये, उसके ऊपर चढ़ गया और घुसाने का प्रयास किया लेकिन वह सफल होता इससे पहले ही लड़की को रक्तस्राव होने लगा। यहाँ पर अभियुक्त धारा 511 के अधीन बलात्कार के प्रयास का दोषी होगा । यहाँ पर अभियुक्त ने धारा 376 के अपराध की कारित करने का प्रयत्न किया है।        इसीप्रकार से यदि A नामक व्यक्ति नकली नोट "

SC/ST Act क्या है ? इसमें कितनी सजा हो सकती है ?

SC/ST Act संसद द्वारा 1989 पारित किया गया। इसके बाद राष्ट्रपति ने 30 जनवरी 1990 को इस पर मुहर लगाई और ये कानून लागू किया गया।      हिन्दी में बात की जाये अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण कानून) कहा जाता है। इस कानून के अन्तर्गत कुल 5 अध्याय एवं 23 धारायें हैं। इसमें 2018 में संशोधन हो चुका है।       SC/ST Act अध्याय-1 में [ खख] आश्रितं से पीडित का ऐसा पति या पत्नी बालक माता -पिता भाई और बहिन जो ऐसे पीडित पर अपनी सहायता और भरण-पोषण के लिये पूर्णतः या मुख्यता आश्रित है:  [ख ग] "आर्थिक बहिष्कार से निम्नलिखित अभिप्रेत है -  [[i] अन्य व्यक्ति से भांडे पर कार्य से सम्बन्धित किसी अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति को उसके कार्य का मेहनताना न दिया जाना।  [ खड़] वन अधिकार का वह अर्थ होगा जो अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम 2006 (2007 का 2) की धारा 3 की उपधारा (2) में है। [([खच] हाथ से मैला उठाने वाले कर्मी का वह अर्थ होगा जो हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम (2013 (2013 का 25 ) क

भारतीय दंड संहिता की धारा 499 क्या कहती है ? इसका मानहानि के दावा करने से क्यों सम्बंधित है?

मानहानि (Defamation) - "मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है।" उसका समाज में अपना अस्तित्व होता है और हर प्राणी अपने अस्तित्व को बनाये रखता है। मनुष्य को अनेक सामाजिक कर्तव्यों का निर्वाह करना होता है रोज उसके लिए अनेक संघर्षों का सामना भी करना पड़ता है। उसे सामाजिक आर्थिक एवं व्यक्तिगत सुरक्षा के अनेक कार्यकार उपलब्ध हैं। वह इन अधिकारों में किसी प्रकार का हस्तक्षेप या अवरोध पसन्द नहीं करता। खासतौर से वह  किसी प्रकार का विघ्न नहीं चाहता, क्योंकि सभी अधिकारों में प्रतिष्ठा का कार्यकार एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यदि कोई व्यक्ति उसके प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाता है, तो वह दण्डनीय माना जाता है। अतः व्यक्ति की प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए भारतीय दण्ड संहिता की धारा, धारा 499 से 502 तक के मानहानि के बारे में प्रावधान किया गया है। इस संहिता की धारा 499 में 'मानहानि' अपराध की परिभाषा इस प्रकार दी गई है कि जो कोई या तो बोले गये या पढ़े जाने के लिए आशयित शब्दों द्वारा संकेतों द्वारा या दृश्य रूपेण द्वारा किसी व्यक्ति के बारे में कोई लांछन इस आशय से लगाता या प्रकाशित करता है कि ऐसे लांछन स

भारतीय दंड संहिता की धारा 141 क्या है ?What is Section 141 of the Indian Penal Code?

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 141 में दी गई विधि विरुद्ध जमाव की परिभाषा अनुसार, “पाँच या पाँच से अधिक व्यक्तियों के ऐसे जमाव को जिसका सामान्य उद्देश्य के इस धारा में प्रमाणित किसी उद्देश्य के लिये हुआ हो, विधि विरुद्ध जमाव कहा जायेगा। इस धारा के स्पष्टीकरण के अनुसार कोई जमाव, जो इकट्ठा होते समय विधि विरुद्ध न हो बाद में विधि-विरुद्ध जमाव हो सकेगा।   विधि विरुद्ध जमाव के निम्नलिखित आवश्यक तत्व हैं-  (1) विधि विरुद्ध जमाव में पाँच या इससे अधिक व्यक्ति होने चाहिए ।  (2) विधि विरुद्ध जमाव के अपराध के लिये सदस्यों का सामान्य उद्देश्य होना चाहिए।  (3) ऐसा सामान्य उद्देश्य विधि विरुद्ध होना चाहिये ।   विधि विरुद्ध जमाव का सदस्य होना— जब कोई व्यक्ति उन तथ्यों से जिनके लिये कानून के विरुद्ध जमाव हुआ हो, परिचित होने के बाद उस जमाव में साशय सम्मिलित होता है, बना रहता है तो यह कहा जाता है कि वह उस विधि विरुद्ध जमाव का सदस्य है।  दण्ड — “जो कोई विधि विरुद्ध जमाव का सदस्य होगा, वह तीनों में से किसी भाँति के कारावास से जिसकी अवधि 6 मास भी हो सकेगी, या जुर्माने से, या दोनों से दण्डित किया जा सकेगा।&qu

भारतीय दंड संहिता में धारा 375 क्या बताती है?What does Section 375 in the Indian Penal Code tell?

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 375 के बलात्कार के अपराध का वर्णन किया गया है । इस अपराध के निम्नलिखित आवश्यक तत्व हैं-  (1) किसी पुरुष के द्वारा किसी स्त्री के साथ लैंगिक सम्भोग (Sexual intercourse) किया जाना, एवं   (2) ऐसे लैंगिक सम्भोग का निम्नलिखित परिस्थियों में से किसी के अन्तर्गत किया जाना  (i) उस स्त्री की इच्छा के विरुद्ध,  (ii) उस स्त्री की सम्मति (Consent) के बिना,  (iii) उस स्त्री की मृत्यु या चोट का भय बताकर सम्मति प्राप्त करके ।  (iv) उसे अपने को पति बनाकर जबकि वास्तव में वह उसका पति नहीं है।  (v) उसकी सम्मति या. बिना सम्मति के, जबकि उसकी आयु 16 वर्ष से कम है।  (vi) उस स्त्री की सम्मति से, जबकि सम्मति देने के समय वह मन की विकृत चिन्तन मदत्त अथवा किसी मादक या अस्वास्थ्यकर पदार्थ के सेवन के कारण कार्य की प्रकृति एवं  परिणाम जान सकने में असमर्थ रही हो । The crime of rape is described in Section 375 of the Indian Penal Code.  Following are the essential elements of this offence:  (1) Sexual intercourse by a man with a woman, and  (2) Such sexual intercourse taking pla

यातायात के चिन्ह लगवाने के कौन -कौन से लाभ होते है?What are the benefits of installing traffic signs?

  यातायात चिह्न लगवाने की शक्ति-  (1) (क) राज्य सरकार या राज्य सरकार द्वारा इन निमित्त प्राधिकृत कोई अधिकारी धारा 112 को उपधारा (2) के अधीन नियत किन्हीं गति सीमाओं को या धारा 115 के अधीन अधिरोपित किन्हीं प्रतिषेधों या निर्बन्धनों को या साधारणतया मोटर यान यातायात के विनियमन के प्रयोजन के लिए यातायात चिह्न को सार्वजनिक स्थान में रखवा या लगवा सकेगा अथवा रखने वा लगाने देगा।  Power to install traffic signs-  (1) (a) The State Government or any officer authorized by the State Government in this behalf may enforce any speed limits fixed under sub-section (2) of section 112 or any prohibitions or restrictions imposed under section 115 or the regulation of motor vehicle traffic generally;  For this purpose, a traffic sign may be placed or installed or allowed to be placed or installed in a public place. (ख) राज्य सरकार या राज्य सरकार द्वारा इन निमित्त प्राधिकृत कोई प्राधिकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा या अनुसूची के भाग क में निर्दिष्ट समुचित यातायात चिह्न को उपयुक्त स्थानों में लग