सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

दहेज मृत्यु क्या है? BNS Section 80, सजा, सबूत और सुप्रीम कोर्ट के फैसले

police के द्वारा गिरफ्तार किये गये व्यक्ति के सामान की वापसी के लिये प्रार्थना पत्र कैसे लिखें?

               गिरफ्तार किये गये व्यक्तियों की तलाशी

[search of arrested Person]

              भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 [BNSS] की धारा 49 में गिरफ्तार किये गये व्यक्तियों की तलाशी के सम्वन्ध में प्रावधान है :-


1. जब किसी Police officer द्वारा ऐसे warrunt के अधीन जो जमानत किये जाने का उपबन्ध नहीं करता है, या ऐसे वॉरन्ट के अधीन जो, जमानत लिये जाने का उपबन्ध करता है, किन्तु गिरफ्तार किया गया व्यक्ति जमानत नहीं दे सकता, कोई व्यक्ति गिरफ्तार किया जाता है तथा जब कभी कोई व्यक्ति वॉरंट के बिना या प्राइवेट व्यक्ति द्वारा वॉरंट के अधीन गिरफ्तार किया जाता है और वैध रुप से उसकी जमानत नहीं ली जा सकती, या वह जमानत देने में असमर्थ है ।



           तब गिरफ्तार करने वाला अधिकारी या जब गिरफ्तारी प्राइवेट व्यक्ति द्वारा की जाती है. तब वह पुलिस अधिकारी, जिसे वह व्यक्त्ति गिरफ्तार किये गये व्यक्त्ति को सौपता है, उस व्यक्ति की तलाशी ले सकता है और पहनने के आवश्यक वस्त्रों को छोड़कर उसके पास पायी गयी सब वस्तुओं को सुरक्षित अभिरक्षा में रख सकता है और जहाँ गिरफ्तार किये गये व्यक्ति द्वारा कोई वस्तु अधिगृहीत की जाती है। वहाँ ऐसे ऐसे व्यक्ति एक रसीद दी जायेगी, जिसूमें पुलिस अधिकारी द्वारा कब्जे में की गयी 'वस्तुयें वस्तुयें दबिति होगीं। 


       इसका मुख्य उद्देश्य गिरफ्तार व्यक्ति से किसी भी हथियार, आपत्तिजनक वस्तु या सबूत को सुरक्षित करना जिससे जांच को बाधित न किया जाये।




उदाहरण: कोई व्यक्ति मोटर साइकिल पर सवार होकर जा रहा है और ऐसी स्थिति में आगे यातायात वाहन चेकिंग के दौरान वह व्यक्त्ति नहीं रुकता है, और अपनी बाइक को वहाँ से तेजी के साथ ले जाता है, आगे कुछ पुलिस वाली द्वारा उसको पकड लिया जाता है। अब वे पुलिस वाले उसके नाम पता पूछ सकते हैं और तलाशी भी ले सकते हैं, तलाशी के दौरान उसके पास कुछ आपत्ति जनक वस्तु मिलती है तो उसका चालान करके उसको मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश करते हैं। 


Important Point:→ यदि गिरफ्तार व्यक्ति महिला है, तो तलाशी केवल महिला पुलिस अधिकारी द्वारा और सम्मान की भावना को ध्यान में रखकर की जानी चाहिये। 


(2) Memo of Seizure:→

 memo of seizure यानी की पुलिस द्वारा जब किसी व्यक्ति की तलाशी ली जाती है और तलाशी के दौरान पुलिस को कोई आपत्ति जनक वस्तु दिखायी देती है तो वह उस समय को यानी सरल शब्दों में कहे तो तलाशी में जो वस्तु जब्त की जाती है उनका लिखित विवरण memo of seizure यानी की तलाशी का मेमो कहलाता है। जिसमें तलाशी के दौरान जब्त की गयी वस्तुओ का पूरा लेखा-जोखा होता है।

 सुप्रीम कोर्ट ने state of maharashtra munity welfare Council of -: V. Christian community कहा है कि महिला की तलाशी केवल महिला पुलिस अधिकारी द्वारा ही होनी चाहिये अन्यथा यह सविधान के अनुच्छेद 21 जीवन और व्यक्तिगत से स्वतंत्रता का अधिकार का उल्लघंन मानी जागेगी। इसको हम ऐसे समझते हैं कि करीब रात को 12 बजे के आस-पास के समय एक शादी-शुदा जोड़ा जो कि वास्तविक रुप में पति-पत्नि है नाइट शो देखकर अपनी बाइक पर अपने घर वापस आ रहे थे। तभी एक पुलिस चेकिंग टीम द्वारा उनको रोका गया और गाड़ी के कागज के साथ-साथ उन लोगों की पुलिस द्वारा तलाशी ली गई। जब उस महिला कि तलाशी ली जा रही थी तो वहां पर कोई भी महिला पुलिस कर्मी मौजूद नहीं थी। ऐसी स्थिति में पुरुष पुलिस द्वारा उस महिला के शरीर को तलाशी के दौरान स्पर्श किया गया। जिससे वह अपने आप को इस स्थिति में असहज  महसूस कर रही थी। 

 supreme Court of Indian ने 1997 में D.K. Basu v. State of west Bengel AIR 1997 SC 610 में गिरफ्तारी और तलाशी से सम्बन्धित कुछ Important दिशानिर्देश दिये हैं जिसमें Supreme court का कहना है कि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी वैद्य है अवैध इसका निर्णय तो अदालते करेगें लेकिन गिरफ्तारी के दौरान जब्त की गयी वस्तुओं जब वह आरोपी छूटे तो आरोपी को दी जानी चाहिये। 


•गिरफ्तार व्यक्ति को तलाशी के वक्त उसकी उपस्थिति में सूची दी जानी चाहिये।

• तलाशी के दौरान प्राप्त वस्तुओं की रसीद आरोपी को दी जानी चाहिये।

•यह सुनिश्चित किया जाना चाहिये कि तलाशी और गिरफ्तारी मानवीय गरिमा के।


 Important facts:-

•महिला की तलाशी केवल महिला पुलिस कर्मी द्वारा ही लेनी चाहिये। 

•अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा और प्रक्रिया का पालन




       Draft application for return of goods seized at the time of arrest of the accused]
         (अभियुक्त की गिरफ्तारी के समय जप्त किये गये सामानों को लौटाने हेतु आवेदन पत्र ]


              न्यायालय श्रीमान C.J.M. महोदय बांदा 

                                                         थाना.........

                       सरकार बनाम अभियुक्त 


      मु.अ.स...                                                     धारा .........

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 49 (BNSS) के अन्तर्गत प्रार्थना पत्र । 


विषय :- गिरफ्तारी के समय जब्त किये गये व्यक्तिगत सामान की वापसी हेतु आवेदन ।

           प्रार्थना पत्र प्रार्थी अभियुक्त (नाम).............. पुत्र....... निवासी..........…......थाना-...............जिला ....…............. निम्नलिखित निवेदन करता है। 


 1. यह कि प्रार्थी को उक्त मुकदमें में थाना- .........….......की पुलिस द्वारा दिनांक................ समय................ बजे शाम को अजमानतीय वॉरण्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था।


                गिरफ्तारी के समय पुलिस द्वारा प्रार्थी के पास से निम्नलिखित सामान जब्त किया गया था: 

[1] एक पर्स

 [2] एक मोवाइल फोन (ब्रांड और मॉडल यदि ज्ञात हो)

 3. एक कलाई घड़ी 

4. नकद राशि र २३००० (तेईस हजार रुपये माल)


          प्रार्थी उक्त सामान का वैध स्वामी है और उक्त सामान का किसी भी प्रकार से आपराधिक घटना से कोई लेना-देना नहीं है। यह सामान प्रार्थी के निजी उपयोग में था।

   मामले की विवेचना में उक्त वस्तुयें केवल औपचारिकता के तौर पर जब्त की गयी थी तथा अब अभियोजन पक्ष की उक्त वस्तुओं की आगे की विवेचना में कोई आवश्यकता नहीं है। 


2. यह कि माननीय न्यायालय द्वारा प्रार्थी अभियुक्त के मुकदमें की नियमित सुनवाई के पश्चात दिनांक.........…..... को दोष मुक्त कर दिया गया। 

3. यह कि प्रार्थी पुलिस द्वारा जब्त सामानों की वापसी चाहता है। 


            अतः माननीय न्यायालय से विनम्र अनुरोध है कि प्रार्थी के सामानों को लौटाने हेतु जो कि गिरफ्तारी के समय जब्त किया गया था। पुलिस को आदेश प्रदान करने की कृपा करें।



 स्थान..........                                                                                                           प्रार्थी
                                                                                                                        ........................
 दिनांक............ 
                                                                                                    निवासी........…..............
                        
                                                                   द्वारा अधिवक्ता।   

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

बलवा (Rioting) और दंगा (Affray) क्या है? BNS की धारा 191 और 194 की पूरी जानकारीi

बलवा (Rioting) और दंगा (Affray) क्या है? BNS की धारा 191 और 194 की पूरी जानकारी बलवा क्या होता है? दंगा और बलवा में क्या अंतर है? पांच या उससे अधिक लोगों के समूह द्वारा हिंसा करने पर कौन-सी धारा लगती है? क्या हर व्यक्ति को केवल भीड़ में मौजूद रहने से बलवा का आरोपी बनाया जा सकता है? BNS Section 191 और Section 194 में क्या प्रावधान है? ये प्रश्न आपराधिक मामलों में बहुत महत्वपूर्ण हैं। पुराने भारतीय दंड संहिता (IPC) में बलवा से संबंधित मुख्य प्रावधान धारा 146 और 147 तथा Affray यानी दंगा से संबंधित प्रावधान धारा 159 और 160 में थे। अब 1 जुलाई 2024 से लागू भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) में इन विषयों के लिए नए section लागू हैं। वर्तमान कानून में BNS Section 189 unlawful assembly, Section 190 common-object liability, Section 191 rioting और Section 194 affray से संबंधित है। इस लेख में इन सभी प्रावधानों को उदाहरण और न्यायिक निर्णयों के माध्यम से आसान भाषा में समझेंगे। 1. बलवा (Rioting) क्या है? साधारण भाषा में जब कोई unlawful assembly यानी विधि-विरुद्ध जमाव अपने common object को ...

पुलिस स्पेशल सेल द्वारा मोटरसाइकिल जब्त करने पर क्या करें, जब कोई मुकदमा पंजीकृत न हो?

यहाँ एक विस्तृत,  ब्लॉग पोस्ट है जो कि कभी आपकी या  किसी व्यक्ति की मोटरसाइकिल को पुलिस विभाग की स्पेशल सेल पकड़ लेती है और किसी भी थाने में मुकदमा पंजीकृत नहीं करती है तो ऐसे स्थिति में क्या करें की गाड़ी को रिलीज करवा लिया जाये इस पर एक  blog post लिखकर मेरे द्तवारा  जितना सम्भव है उतना विशेष जानकारी के साथ  उदाहरण सहित समझाने की आप लोगों को कोशिश है ।🔥🔥🔥🔥 पुलिस स्पेशल सेल द्वारा मोटरसाइकिल जब्त करने पर क्या करें, जब कोई मुकदमा पंजीकृत न हो? कई बार ऐसी स्थिति सामने आती है जब पुलिस विभाग की स्पेशल सेल किसी व्यक्ति की मोटरसाइकिल या अन्य वाहन को रोककर अपने कब्जे में ले लेती है, लेकिन किसी भी थाने में उसके संबंध में FIR या मुकदमा पंजीकृत नहीं करती। इस तरह की परिस्थिति में वाहन मालिक के लिए यह समझना जरूरी है कि कानूनी प्रक्रिया क्या है और वाहन को रिलीज कराने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाएं। 1. सबसे पहले स्थिति की पुष्टि करें जिस पुलिस टीम या स्पेशल सेल ने गाड़ी पकड़ी है, उनसे लिखित या मौखिक रूप से पूछें कि वाहन क्यों रोका गया है। यह ...

असामी कौन है ?असामी के क्या अधिकार है और दायित्व who is Asami ?discuss the right and liabilities of Assami

अधिनियम की नवीन व्यवस्था के अनुसार आसामी तीसरे प्रकार की भूधृति है। जोतदारो की यह तुच्छ किस्म है।आसामी का भूमि पर अधिकार वंशानुगत   होता है ।उसका हक ना तो स्थाई है और ना संकृम्य ।निम्नलिखित  व्यक्ति अधिनियम के अंतर्गत आसामी हो गए (1)सीर या खुदकाश्त भूमि का गुजारेदार  (2)ठेकेदार  की निजी जोत मे सीर या खुदकाश्त  भूमि  (3) जमींदार  की बाग भूमि का गैरदखीलकार काश्तकार  (4)बाग भूमि का का शिकमी कास्तकार  (5)काशतकार भोग बंधकी  (6) पृत्येक व्यक्ति इस अधिनियम के उपबंध के अनुसार भूमिधर या सीरदार के द्वारा जोत में शामिल भूमि के ठेकेदार के रूप में ग्रहण किया जाएगा।           वास्तव में राज्य में सबसे कम भूमि आसामी जोतदार के पास है उनकी संख्या भी नगण्य है आसामी या तो वे लोग हैं जिनका दाखिला द्वारा उस भूमि पर किया गया है जिस पर असंक्रम्य अधिकार वाले भूमिधरी अधिकार प्राप्त नहीं हो सकते हैं अथवा वे लोग हैं जिन्हें अधिनियम के अनुसार भूमिधर ने अपनी जोत गत भूमि लगान पर उठा दिए इस प्रकार कोई व्यक्ति या तो अक्षम भूमिधर का आसामी होता ह...