बलवा (Rioting) और दंगा (Affray) क्या है? BNS की धारा 191 और 194 की पूरी जानकारी
बलवा क्या होता है? दंगा और बलवा में क्या अंतर है? पांच या उससे अधिक लोगों के समूह द्वारा हिंसा करने पर कौन-सी धारा लगती है? क्या हर व्यक्ति को केवल भीड़ में मौजूद रहने से बलवा का आरोपी बनाया जा सकता है? BNS Section 191 और Section 194 में क्या प्रावधान है?
ये प्रश्न आपराधिक मामलों में बहुत महत्वपूर्ण हैं।
पुराने भारतीय दंड संहिता (IPC) में बलवा से संबंधित मुख्य प्रावधान धारा 146 और 147 तथा Affray यानी दंगा से संबंधित प्रावधान धारा 159 और 160 में थे। अब 1 जुलाई 2024 से लागू भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) में इन विषयों के लिए नए section लागू हैं।
वर्तमान कानून में BNS Section 189 unlawful assembly, Section 190 common-object liability, Section 191 rioting और Section 194 affray से संबंधित है।
इस लेख में इन सभी प्रावधानों को उदाहरण और न्यायिक निर्णयों के माध्यम से आसान भाषा में समझेंगे।
1. बलवा (Rioting) क्या है?
साधारण भाषा में जब कोई unlawful assembly यानी विधि-विरुद्ध जमाव अपने common object को आगे बढ़ाने के लिए force या violence का इस्तेमाल करता है, तो वह स्थिति rioting यानी बलवा के अंतर्गत आ सकती है।
BNS की धारा 189 के अनुसार पांच या उससे अधिक व्यक्तियों का समूह कुछ निर्धारित गैर-कानूनी common object के साथ unlawful assembly बन सकता है। इसके बाद यदि ऐसी assembly या उसका कोई सदस्य उस common object की पूर्ति में force या violence का प्रयोग करता है, तो BNS Section 191 का प्रश्न उठता है।
आसान उदाहरण
मान लीजिए किसी जमीन के विवाद में 8 लोग एक व्यक्ति के घर पहुंचते हैं।
उनका उद्देश्य केवल बातचीत करना नहीं बल्कि बलपूर्वक कब्जा लेना है। वे वहां पहुंचकर दरवाजा तोड़ते हैं और मारपीट शुरू कर देते हैं।
ऐसी स्थिति में केवल यह नहीं देखा जाएगा कि किस व्यक्ति ने किसे मारा।
पहले यह देखा जाएगा कि:
क्या पांच या अधिक लोगों की unlawful assembly थी?
उसका common object क्या था?
क्या force या violence का प्रयोग हुआ?
क्या वह force common object को आगे बढ़ाने के लिए इस्तेमाल हुआ?
इन प्रश्नों के उत्तर से BNS Section 191 और अन्य संबंधित अपराधों की applicability तय होगी।
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2. Unlawful Assembly क्या है?
BNS Section 189 के अनुसार पांच या अधिक व्यक्तियों का समूह कुछ निर्धारित unlawful common objects के साथ unlawful assembly बन सकता है।
इनमें उदाहरण के लिए ऐसे उद्देश्य शामिल हैं:
criminal force या उसके प्रदर्शन द्वारा सरकार या public servant को डराना/दबाव में लेना;
कानून या legal process के execution का विरोध करना;
mischief, criminal trespass या अन्य offence करना;
criminal force के माध्यम से property या किसी legal right पर कब्जा/अधिकार प्राप्त करना;
किसी व्यक्ति को ऐसा काम करने के लिए मजबूर करना जिसे वह कानूनन करने के लिए बाध्य नहीं है, या ऐसा काम न करने के लिए मजबूर करना जिसे वह कानूनन कर सकता है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि कोई assembly शुरुआत में lawful हो सकती है और बाद में circumstances के कारण unlawful बन सकती है।
3. क्या केवल पांच लोगों का इकट्ठा होना बलवा है?
नहीं।
पांच लोगों का एक स्थान पर होना अपने-आप unlawful assembly या rioting नहीं बनाता।
संख्या के साथ-साथ common object और assembly की प्रकृति महत्वपूर्ण है।
उदाहरण के लिए:
पांच लोग किसी दुर्घटना को देखने के लिए सड़क पर खड़े हैं।
यह मात्र भीड़ है।
दूसरी ओर पांच लोग किसी व्यक्ति पर हमला करने या कानून की कार्यवाही को बलपूर्वक रोकने के common object से इकट्ठे हुए हैं, तो Section 189 का प्रश्न उठ सकता है।
यदि उसी unlawful assembly द्वारा common object की पूर्ति में force या violence किया जाता है, तो Section 191 लागू हो सकता है।
4. बलवा के आवश्यक तत्व
BNS Section 191 को समझने के लिए निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए:
पहला तत्व — Unlawful Assembly
पहले यह स्थापित होना चाहिए कि पांच या अधिक लोगों की ऐसी assembly थी जो BNS Section 189 के अर्थ में unlawful थी।
दूसरा तत्व — Common Object
Assembly का एक common object होना चाहिए।
तीसरा तत्व — Force या Violence
Assembly या उसके किसी सदस्य द्वारा force या violence का इस्तेमाल होना चाहिए।
चौथा तत्व — Common Object से संबंध
Force या violence का प्रयोग assembly के common object को आगे बढ़ाने के लिए होना चाहिए।
BNS Section 191 स्पष्ट करता है कि unlawful assembly या उसके किसी सदस्य द्वारा common object की prosecution में force या violence का प्रयोग होने पर assembly का प्रत्येक सदस्य rioting के अपराध के दायरे में आ सकता है।
5. बलवा की सजा कितनी है?
BNS Section 191(2) के अनुसार rioting के लिए:
अधिकतम 2 वर्ष का कारावास, या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।
यदि rioting करते समय आरोपी के पास deadly weapon या ऐसा कोई instrument हो जो weapon की तरह इस्तेमाल किए जाने पर मृत्यु का कारण बनने की संभावना रखता हो, तो BNS Section 191(3) के तहत:
अधिकतम 5 वर्ष का कारावास, या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं।
6. क्या जिसने किसी को नहीं मारा, उसे भी बलवा का आरोपी बनाया जा सकता है?
यह एक बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है।
उत्तर है—परिस्थितियों के आधार पर हां, लेकिन केवल मौजूदगी अपने-आप पर्याप्त नहीं है।
BNS Section 190 के अनुसार यदि unlawful assembly का कोई सदस्य common object की prosecution में कोई offence करता है, या ऐसा offence करता है जिसे assembly के सदस्य उस common object की prosecution में likely जानते थे, तो उस समय assembly में मौजूद प्रत्येक qualifying member पर उस offence की liability आ सकती है।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि पुलिस या अदालत बिना evidence के भीड़ में मौजूद हर व्यक्ति को automatically दोषी मान ले।
Supreme Court ने पुराने IPC Section 149 के संदर्भ में बार-बार कहा है कि common object और आरोपी की membership को evidence और circumstances से स्थापित करना आवश्यक है।
7. सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण सिद्धांत — Common Object
Lalji v. State of U.P. में Supreme Court ने स्पष्ट किया कि unlawful assembly का common object assembly की प्रकृति, हथियारों, सदस्यों के व्यवहार तथा घटना के पहले और आसपास की परिस्थितियों से determine किया जा सकता है।
Common object कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे हर मामले में direct evidence से साबित करना संभव हो; उसे circumstances से infer किया जा सकता है।
लेकिन constructive liability को mechanically लागू नहीं किया जाना चाहिए।
8. Masalti Case का महत्व
Masalti v. State of Uttar Pradesh unlawful assembly के मामलों में बहुत महत्वपूर्ण निर्णय है।
इसमें Supreme Court ने स्पष्ट किया कि अभियोजन को यह साबित करना होता है कि आरोपी unlawful assembly का सदस्य था और उसने assembly का common object share किया था।
इसका मतलब यह है कि केवल किसी घटना के आसपास मौजूद होना और unlawful assembly का वास्तविक सदस्य होना एक ही बात नहीं है।
इसलिए defence की दृष्टि से यह प्रश्न महत्वपूर्ण हो जाता है:
आरोपी वास्तव में वहां था या नहीं?
वह कब आया?
कब चला गया?
क्या उसे assembly के unlawful object की जानकारी थी?
क्या उसके खिलाफ कोई credible evidence है?
क्या prosecution witnesses की भूमिका संबंधी बातें consistent हैं?
9. Ram Shanker Case — Common Object कैसे तय होगा?
Ram Shanker v. State of U.P. में common object और Section 149 IPC की liability पर महत्वपूर्ण चर्चा की गई।
न्यायालय ने माना कि common object के लिए पहले से formal meeting या written agreement आवश्यक नहीं है। परिस्थितियों के आधार पर common object घटना के दौरान भी विकसित हो सकता है।
लेकिन constructive liability के लिए common object और alleged offence के बीच आवश्यक connection स्थापित होना चाहिए। केवल किसी अपराध के हो जाने से assembly के हर व्यक्ति को हर अपराध के लिए automatically liable नहीं बनाया जा सकता।
10. Ram Charan Case — केवल भीड़ में होना पर्याप्त नहीं
Ram Charan v. State of U.P. में Supreme Court के पुराने महत्वपूर्ण निर्णयों को discuss करते हुए यह principle सामने आया कि Section 149 की liability के लिए unlawful assembly और common object के संबंध को evidence से establish करना जरूरी है।
Court ने यह भी बताया कि हर सदस्य के खिलाफ अलग-अलग overt act होना हमेशा आवश्यक नहीं है, लेकिन यह स्थापित होना चाहिए कि वह unlawful assembly का सदस्य था और relevant common object को share करता था।
11. दंगा या Affray क्या है?
अब बलवा और Affray को अलग समझना जरूरी है।
BNS Section 194 के अनुसार जब दो या दो से अधिक व्यक्ति किसी public place में fighting करके public peace disturb करते हैं, तो वे affray करते हैं।
इस अपराध के लिए:
दो या अधिक व्यक्ति होने चाहिए;
fighting होनी चाहिए;
fighting public place में होनी चाहिए;
उससे public peace disturb होना चाहिए।
BNS Section 194(2) के तहत affray के लिए:
एक महीने तक का कारावास, या ₹1,000 तक का जुर्माना, या दोनों का प्रावधान है। यह offence cognizable और bailable है तथा Any Magistrate द्वारा triable है।
12. Affray का उदाहरण
मान लीजिए दो व्यक्ति बाजार में किसी बात को लेकर आपस में मारपीट करने लगते हैं।
लोगों की भीड़ इकट्ठी हो जाती है और सार्वजनिक शांति प्रभावित होती है।
यदि आवश्यक ingredients evidence से साबित होते हैं तो BNS Section 194 का प्रश्न उठ सकता है।
लेकिन केवल गाली-गलौज या verbal argument हर परिस्थिति में affray नहीं बन जाता।
Fighting और public peace disturbance दोनों महत्वपूर्ण हैं।
13. बलवा और Affray में मुख्य अंतर
| आधार | बलवा (Rioting) | Affray |
|---|---|---|
| संबंधित BNS | Section 191 | Section 194 |
| व्यक्तियों की संख्या | Unlawful assembly में 5 या अधिक | 2 या अधिक |
| स्थान | Public या private परिस्थितियों के अनुसार | Public place |
| Unlawful assembly | आवश्यक | आवश्यक नहीं |
| Common object | आवश्यक तत्व | आवश्यक नहीं |
| Force/violence | आवश्यक | Fighting आवश्यक |
| Public peace | घटना की प्रकृति से संबंधित | Public peace disturbance आवश्यक |
| सामान्य सजा | 2 वर्ष तक | 1 माह तक |
| Deadly weapon | 5 वर्ष तक | Section 194 में अलग aggravated punishment नहीं |
BNS Section 191(2) और 191(3) तथा Section 194(2) की statutory punishments क्रमशः 2 वर्ष, deadly weapon की स्थिति में 5 वर्ष और affray में 1 माह तक हैं।
14. एक कहानी से समझिए
जमीन के विवाद में दो गुट आमने-सामने
मान लीजिए राम के पास एक खेत है।
एक दिन श्याम अपने सात साथियों के साथ वहां पहुंचता है।
श्याम कहता है:
“आज इस जमीन पर कब्जा लेकर ही जाएंगे।”
सभी लोग लाठी लेकर राम के खेत में प्रवेश करते हैं।
राम विरोध करता है।
इसके बाद समूह के कुछ लोग राम और उसके भाई पर हमला कर देते हैं।
यहां केवल मारपीट देखना पर्याप्त नहीं होगा।
जांच में मुख्य प्रश्न होंगे:
क्या सात लोगों की assembly थी?
क्या उनका common object property पर forcefully कब्जा करना था?
क्या वे उसी उद्देश्य से वहां पहुंचे?
क्या force/violence उसी common object की prosecution में इस्तेमाल हुआ?
कौन-कौन लोग assembly के सदस्य थे?
किसके पास हथियार थे?
CCTV, video, independent witnesses और medical evidence क्या बताते हैं?
यदि evidence इन ingredients को support करता है तो BNS Section 189, 191 और facts के अनुसार Section 190 तथा अन्य offences भी विचारणीय हो सकते हैं।
15. अगर केवल दो व्यक्ति सड़क पर लड़ें तो क्या होगा?
यदि दो व्यक्ति public place में fighting करते हैं और उससे public peace disturb होती है, तो BNS Section 194 का मामला बन सकता है।
लेकिन इसे BNS Section 191 का rioting कहने के लिए unlawful assembly के आवश्यक ingredients को देखना पड़ेगा।
यही कारण है कि हर लड़ाई बलवा नहीं होती और हर भीड़ riot नहीं होती।
16. क्या private property में भी Rioting हो सकती है?
हां, rioting को केवल public place तक सीमित समझना सही नहीं है।
BNS Section 191 में rioting की definition unlawful assembly और force/violence के संबंध पर आधारित है। वहीं Section 194 में affray के लिए expressly public place में fighting और public peace disturbance आवश्यक है।
इसलिए place का distinction बलवा और affray के बीच महत्वपूर्ण है।
17. पुलिस शिकायत में कौन-कौन से evidence लगाने चाहिए?
यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ पांच या अधिक लोग एकत्र होकर हमला करते हैं, तो शिकायत में केवल “उन्होंने बलवा किया” लिखना पर्याप्त नहीं है।
जहां उपलब्ध हो, वहां:
CCTV footage
मोबाइल video
photographs
चोट की medical report
MLC
independent witnesses
call recordings, जहां कानूनन admissible हों
threatening messages
damaged property की photographs
emergency call/112 information
घटना के तत्काल बाद की शिकायत
घटनास्थल से संबंधित अन्य electronic evidence
सुरक्षित रखना चाहिए।
शिकायत में घटना का समय, स्थान, आरोपियों की संख्या, उनका common object, specific acts और injuries/damage स्पष्ट रूप से लिखना अधिक उपयोगी होता है।
18. यदि पुलिस FIR दर्ज नहीं करे तो क्या करें?
यदि शिकायत में cognizable offence के ingredients सामने आते हैं और पुलिस सूचना दर्ज नहीं करती, तो उपलब्ध procedural remedies का उपयोग किया जा सकता है।
वर्तमान प्रक्रिया Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 (BNSS) के अनुसार होगी।
व्यक्ति परिस्थितियों के अनुसार:
थाना प्रभारी को लिखित शिकायत,
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को शिकायत,
Magistrate के समक्ष उचित application/complaint,
जैसी remedies पर विचार कर सकता है।
कौन-सा procedural route उपयुक्त होगा, यह allegations और लागू sections पर निर्भर करेगा।
19. बलवा/दंगा मामले में आरोपी की Defence Strategy
यदि किसी व्यक्ति पर गलत तरीके से riot का आरोप लगा दिया गया है तो defence में कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न हो सकते हैं:
1. क्या पांच या अधिक लोगों की unlawful assembly वास्तव में थी?
2. क्या common object साबित है?
3. क्या आरोपी उस assembly का सदस्य था?
4. क्या आरोपी को alleged unlawful object की जानकारी थी?
5. क्या prosecution witnesses की presence reliable है?
6. क्या CCTV या electronic evidence prosecution version से मेल खाता है?
7. क्या medical evidence alleged assault को support करता है?
8. क्या accused को केवल general allegation के आधार पर फंसाया गया है?
9. क्या आरोपी घटना के समय किसी अन्य स्थान पर था?
10. क्या independent witnesses उपलब्ध होते हुए भी केवल interested witnesses पर prosecution निर्भर है?
इन सवालों के आधार पर bail, discharge, trial defence या अन्य appropriate remedy की रणनीति तय की जा सकती है।
20. महत्वपूर्ण न्यायिक सिद्धांत
Lalji v. State of U.P.
Common object को assembly की प्रकृति, हथियारों और सदस्यों के व्यवहार सहित परिस्थितियों से determine किया जा सकता है।
Masalti v. State of U.P.
Unlawful assembly की membership और common object का evidence आवश्यक है।
Ram Shanker v. State of U.P.
Common object परिस्थितियों और conduct से निर्धारित हो सकता है और unlawful assembly का object घटना के दौरान भी विकसित हो सकता है।
Ramachandran v. State of Kerala
हर member द्वारा अलग-अलग overt act साबित होना अनिवार्य नहीं है, लेकिन prosecution को membership और common object establish करना होता है।
21. पुराने IPC और वर्तमान BNS में महत्वपूर्ण बदलाव
यदि किसी पुराने कानून की पुस्तक में आप पढ़ते हैं:
IPC 146 — Rioting
तो वर्तमान कानून में नए मामलों के लिए संबंधित provision:
BNS 191 — Rioting
है।
इसी तरह:
IPC 141 → BNS 189
IPC 149 → BNS 190
IPC 146/147 → BNS 191 के corresponding rioting provisions
IPC 159/160 → BNS 194
इसलिए पुराने नोट्स पढ़ते समय केवल पुरानी section number देखकर वर्तमान मुकदमे में वही section लिख देना उचित नहीं है।
22. निष्कर्ष
बलवा (Rioting) और Affray (दंगा) एक ही अपराध नहीं हैं।
बलवा के लिए unlawful assembly, common object तथा उस common object की prosecution में force या violence महत्वपूर्ण हैं।
Affray में दो या अधिक व्यक्तियों का public place में fighting करना और public peace disturb होना आवश्यक है।
BNS Section 191 के तहत सामान्य rioting के लिए अधिकतम 2 वर्ष, जबकि deadly weapon वाली स्थिति में अधिकतम 5 वर्ष तक की imprisonment का प्रावधान है।
BNS Section 194 के तहत affray के लिए एक महीने तक की imprisonment या ₹1,000 तक fine या दोनों का प्रावधान है।
लेकिन किसी भी व्यक्ति को केवल भीड़ में दिखाई देने या घटना के आसपास मौजूद होने मात्र से automatically दोषी नहीं माना जाना चाहिए। अभियोजन को कानून के आवश्यक ingredients और आरोपी की relevant membership/common object को evidence के आधार पर स्थापित करना होता है।
कानूनी मामलों में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि FIR में section लिखने से अपराध सिद्ध नहीं होता; अंततः prosecution को आवश्यक ingredients और evidence अदालत के सामने स्थापित करने होते हैं।
थाना प्रभारी को प्रार्थना पत्र
अवैध जमाव, बलवा, मारपीट एवं अन्य संबंधित अपराधों के संबंध में
सेवा में,
थाना प्रभारी महोदय,
थाना ____________
जनपद ____________
विषय: पांच या उससे अधिक व्यक्तियों द्वारा एकत्र होकर मारपीट, बल प्रयोग, धमकी एवं शांति भंग करने के संबंध में प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई किए जाने हेतु प्रार्थना पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि प्रार्थी __________ पुत्र __________ निवासी __________ थाना __________ जनपद __________ का निवासी है।
दिनांक __________ को लगभग __________ बजे प्रार्थी अपने __________ स्थान पर मौजूद था। उसी समय अभियुक्तगण—
__________ पुत्र __________ निवासी __________
__________ पुत्र __________ निवासी __________
__________ पुत्र __________ निवासी __________
__________ पुत्र __________ निवासी __________
__________ पुत्र __________ निवासी __________
__________ पुत्र __________ निवासी __________
तथा उनके अन्य अज्ञात साथी एकत्र होकर मौके पर आए।
उक्त व्यक्तियों ने आपस में एक समान उद्देश्य के साथ प्रार्थी के साथ विवाद किया तथा प्रार्थी को डराने/दबाव में लेने/मारपीट करने/संपत्ति को नुकसान पहुंचाने/जबरन कब्जा करने का प्रयास किया।
अभियुक्तगण में से __________ ने __________ से प्रार्थी पर हमला किया, जबकि __________ ने प्रार्थी को पकड़ लिया तथा अन्य व्यक्तियों ने प्रार्थी को घेर लिया। घटना के दौरान बल एवं हिंसा का प्रयोग किया गया, जिससे प्रार्थी को __________ चोटें आईं तथा __________ संपत्ति को नुकसान पहुंचा।
घटना के समय मौके पर उपस्थित व्यक्तियों में __________, __________ एवं __________ मौजूद थे। घटना के संबंध में __________ का CCTV/video/electronic evidence भी उपलब्ध है।
अभियुक्तगण के उक्त कृत्यों से प्रार्थी को गंभीर भय एवं नुकसान हुआ तथा मौके पर लोक शांति भंग हुई।
अतः निवेदन है कि प्रकरण के तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच करते हुए भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 189, 190, 191 तथा घटना से संबंधित अन्य लागू धाराओं के अंतर्गत उचित कानूनी कार्रवाई की जाए। यदि जांच में कोई अन्य संज्ञेय अपराध पाया जाता है तो उसकी संबंधित धाराएं भी जोड़ी जाएं।
प्रार्थी की चोटों का चिकित्सीय परीक्षण/MLC कराया जाए, घटनास्थल का निरीक्षण किया जाए, उपलब्ध CCTV/electronic evidence सुरक्षित कराया जाए तथा स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज किए जाएं।
प्रार्थी को एवं उसके परिवार को अभियुक्तों से भविष्य में किसी प्रकार की धमकी या नुकसान की आशंका है। अतः आवश्यक preventive/legal action भी किया जाए।
अतः श्रीमान से प्रार्थना है कि प्रार्थी की शिकायत पर विधि के अनुसार प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच एवं आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की कृपा करें।
दिनांक: __________
स्थान: __________
प्रार्थी
नाम: __________
पिता का नाम: __________
पता: __________
मोबाइल: __________
हस्ताक्षर: __________
संलग्नक
चोट/MLC की प्रति
फोटो/वीडियो/CCTV संबंधी सामग्री
क्षतिग्रस्त संपत्ति की photographs
उपलब्ध गवाहों की सूची
पूर्व शिकायत की प्रति, यदि कोई हो
अन्य संबंधित दस्तावेज
महत्वपूर्ण Disclaimer
यह लेख केवल सामान्य कानूनी जानकारी और educational purpose के लिए है। किसी वास्तविक मामले में लागू धाराएं घटना की तारीख, facts, evidence, चोट, हथियार, स्थान, आरोपियों की भूमिका तथा अन्य परिस्थितियों के आधार पर अलग हो सकती हैं। 1 जुलाई 2024 के बाद की घटनाओं में BNS/BNSS के प्रावधानों को ध्यान में रखना आवश्यक है। किसी FIR, complaint, bail application या court proceeding से पहले case-specific legal advice लेना उचित है।
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