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भारत में जब भी किसी व्यक्ति के विरुद्ध हत्या, चोरी, धोखाधड़ी, मारपीट, लूट, आपराधिक धमकी या अन्य आपराधिक अपराध का मामला दर्ज होता है, तो उस अपराध की परिभाषा और उसके लिए निर्धारित दंड किसी न किसी आपराधिक कानून में दिए गए होते हैं। लगभग 164 वर्षों तक यह कार्य भारतीय दंड संहिता, 1860 (Indian Penal Code - IPC) करती रही। IPC ब्रिटिश शासन के समय बनाई गई थी और लंबे समय तक भारतीय आपराधिक न्याय व्यवस्था का आधार बनी रही। समय के साथ अपराधों की प्रकृति बदल गई। साइबर अपराध, डिजिटल साक्ष्य, संगठित अपराध, आतंकवाद, मॉब लिंचिंग, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और आधुनिक तकनीक से जुड़े अपराध तेजी से बढ़े। ऐसे में एक अधिक आधुनिक आपराधिक संहिता की आवश्यकता महसूस की गई। इसी उद्देश्य से संसद ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 (Bharatiya Nyaya Sanhita – BNS) बनाई, जो 1 जुलाई 2024 से लागू हुई। भारतीय न्याय संहिता (BNS) क्या है? भारतीय न्याय संहिता, 2023 भारत का मुख्य आपराधिक कानून है। इसमें यह निर्धारित किया गया है कि कौन-सा कार्य अपराध माना जाएगा, उसके आवश्यक तत्व क्या हैं और उस अपराध के लिए क्या दंड निर्धारित है। सरल ...