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IPC की धारा 353 और BNS की धारा 132 लोक सेवकों की सुरक्षा से जुड़े कानून का पूरा विश्लेषण

कंपनी निदेशक की परिभाषा दीजिए. Give the definition of company director mention the qualification and disqualification of director

कंपनी निदेशक( company director) कंपनी अधिनियम,2013 की धारा2(34) के अनुसार निदेशक वह व्यक्ति होता है जिसे कंपनी के निदेशक मंडल में निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया हो। अन्य शब्दों में, निदेशक वह व्यक्ति होते हैं जो कंपनी के कारोबार का संचालन तथा प्रबंधन करने के लिए कंपनी के अंश धारक( shareholder) के द्वारा चुने गए हो। पूर्वर्ती कंपनी अधिनियम,2013  की धारा 303 अनुसार ऐसे प्रत्येक व्यक्ति को निदेशक माना जाएगा  जिसके तथा निर्देशानुसार कंपनी का निदेशक मंडल कार्य करने का अभ्यस्त है।


       लिण्डले बनाम ऑटोमेटिक टेलीफोन कंपनी,1902 C.H.56 के मामले में यह निर्धारित हुआ कि कंपनी के निदेशक गढ़ अपने अधिकारों का प्रयोग अंश धारियों के हितों की उपेक्षा करते हुए केवल अपने निजी हित के लिए नहीं कर सकते। न्यास(trust ) शब्द के वास्तविक अर्थों के अनुसार तो निदेशक कंपनी के न्यास धारी नहीं होते देवल कंपनी के प्रति होने वाले उनके कुछ दायित्व न्यास धारी से मिलते जुलते हैं। उन्हें अपने विशेष अधिकारी का प्रयोग सद्भावना के साथ कंपनी के लाभ के लिए करना होता है। निदेशकगण कंपनी की संपत्ति के वास्तविक स्वामी नहीं होते। वह एक व्यापारिक व्यक्ति मात्र है, जो कंपनी के व्यापार का अंश धारियों के हित की दृष्टि से संचालन करते हैं।


कंपनी निदेशको की योग्यताएं( qualification of company director)

(1) कंपनी अधिनियम की धारा 270 तथा272 के संदर्भ में निर्देशक द्वारा केवल नियुक्ति के समय या उसकी नियुक्ति के बाद 2 महीने की अवधि तक योग्यता अंश खरीद लेना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि उसे अपने सेवा काल की अवधि तक उन्हें निरंतर धारण किए रहना अनिवार्य होता है। यदि किसी भी समय निदेशक के योग्यता अंशों में कमी हो जाती है तो तुरन्त ही उसे उसके पद से मुक्त कर दिया जाएगा। परंतु यदि किसी निदेशक ने अपनी नियुक्ति के लिए अनिवार्य योग्यता अंश खरीद लिए हैं तथा बाद में कंपनी द्वारा योग्यता अशों में वृद्धि कर दी गई हो तो वह निदेशक इस वृद्धि से किसी भी प्रकार से प्रभावित नहीं होगा तथा उसके लिए यह आवश्यक नहीं होगा कि वह बढ़े हुए अंशों  को खरीदें।

(2) कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 290 के अनुसार किसी निदेशक की नियुक्ति के हो जाने के बाद उसके कार्यकाल में यदि योग्यता अंश  संबंधी किसी अनियमितता के कारण उसकी नियुक्ति त्रुटिपूर्ण पाई जाती है तो उक्त कार्यकाल में उस निदेशक द्वारा किए गए कार्य केवल इस कारण मात्र से अवैध नहीं होंगे तथापि इस अनियमितता का पता लगने के बाद उस निदेशक द्वारा किए गए सभी कार्य वैद्य होंगे।

(3) योग्यता अंशों के अतिरिक्त कंपनी द्वारा निदेशकों की नियुक्ति के लिए अन्य योग्यताएं भी निर्धारित की जा सकती है

(a) इस उद्देश्य से किसी निदेशकों की कंपनी के कार्यों में रुचि बनी रहे कंपनियां प्रायः अपने  अंतर नियमों में ही निदेशकों आवश्यक न्यूनमत अंशों के क्रय का उल्लेख कर देती है परंतु इस प्रकार निर्धारित अंक संख्या कम ज्यादा की जा सकती है।

(b) निर्देशकों की योग्यता अंशों का अंकित मूल्य ₹5000 से अधिक नहीं होगा।अतः यदि प्रत्येक अंश का मूल्य ₹5000 से अधिक हो तो निदेशक एक अंश से अधिक योग्यता अंश धारण नहीं करेगा।

(c) योग्यता अशों की गणना के लिए निदेशकों द्वारा धारण किए गए अधिपत्र को सम्मिलित नहीं किया जाएगा। उन्हें आवश्यक राशि के अंश ही ग्रहण करने होंगे।

(d) यदि कोई निदेशक 2 मास पूर्ण हो जाने पर भी योग्यता अंश नहीं खरीदता है परंतु वह निदेशक के रूप में कार्य करता रहता है तो दोष की अवधि के लिए उससे ₹50 प्रतिदिन के हिसाब से दंडित किया जा सकेगा। यह नियम प्राइवेट कंपनी के प्रति लागू नहीं होगा जब तक कि वह किसी लोक कंपनी की सहायक कंपनी ना हो।

कंपनी निदेशकों की योग्यताएं( disqualification of a company director):

कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 164 के अनुसार जिनमें कोई भी व्यक्ति कंपनी उनके स्वयं के डायरेक्टर में कार्य करने के लिए अयोग्य होता है

(1) अगर किसी व्यक्ति को न्यायालय तथा अधिकरण के आदेश के अंतर्गत निदेशक के पद के लिए अनर्ह घोषित किया गया हो तथा ऐसा आदेश अब भी प्रभावित हो। या

(2) अब किसी व्यक्ति ने स्वयं द्वारा धारण किए गए अंशों पर मांग किए जाने पर मांग की राशि का भुगतान 6 माह तक नहीं किया हो। या

(3) कोई व्यक्ति पिछले 5 वर्षों में संबंधी पक्ष कार सम व्यवहार से जुड़े किसी अपराध के लिए कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 188 के अंतर्गत दण्डादिष्ट की किया गया हो।

(4) यदि किसी व्यक्ति ने कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 152 की उप धारा(3) के प्रावधानों का अनुपालन ना किया हो:

परंतु है कि:

(a) उपयुक्त मद संख्या(4),(5) एवं(7) मे वर्णित निर्योग्यतायें व्यक्ति को दण्डादिष्ट की तारीख या निर्योग्यता आदेश की तारीख से 30 दिनों तक समाप्ति तक प्रभावी नहीं होगी।

(b) जहां व्यक्ति द्वारा निर्योग्यता के विरुद्ध कोई अपील या याचिका प्रस्तुत कर दी गई हो तो ऐसी अपील या याचिका पर निर्णय के 7 दिनों की समाप्ति तक प्रभावी नहीं होगी।

(c) यदि वह विकृत मस्तिष्क का है तथा क्षेत्र के सक्षम न्यायालय द्वारा इसे घोषित कर दिया गया है।

(6) जब वह दिवालिया घोषित कर दिया गया है।

(7) जब किसी व्यक्ति ने स्वयं को दिवालिया घोषित किए जाने के है तूने आलय में प्रार्थना पत्र दिया हो तथा ऐसा प्रार्थना पत्र न्यायालय में लंबित हो

(8) ऐसा व्यक्ति जो न्यायालय द्वारा किसी अनैतिक अपराध के लिए 6 महीने या उससे अधिक के कारावास से दंडित किया गया हो। ऐसा व्यक्ति जेल से मुक्त होने से 5 वर्ष की अवधि तक निदेशक के पद पर नियुक्त नहीं किया जा सकता। परंतु केंद्रीय सरकार विशेष परिस्थितियों में इस अनहर्ता को शासकीय गजट में सूचना जारी करके हटा सकती है परंतु अगर कोई व्यक्ति किसी अपराध के लिए दंडित किया जा कर 7 वर्ष या अधिक से कारावास की सजा पा चुका है तो ऐसे व्यक्ति को किसी भी कंपनी में निदेशक के रूप में नियुक्त नहीं किया जा सकता है।

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