Skip to main content

पत्नी मायके चली गई और वापस आने से मना कर दिया – मेरा असली अनुभव और कानूनी समाधान (2026)

अंकेक्षक के प्रमुख अधिकार( main right of an auditor)

अंकेक्षक के प्रमुख अधिकार( main right of an auditor)

अंकेक्षक  प्रमुख अधिकार निम्न प्रकार है:

(1) यह देखना कि कंपनी के व्यक्तिगत खर्च को राजस्व खर्च में दर्शाया गया है या नहीं।

(2) कंपनी के अंकेक्षक को कंपनी की सभाओं  में उपस्थित होने का अधिकार है जिसमें वह कंपनी के सदस्यों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर भी देता है।

(3) कंपनी के अंकेक्षक को उन सभी सूचनाओं को प्राप्त करने का अधिकार है जिन्हें प्राप्त करने का अधिकार कंपनी के सदस्यों को होता है।

(4) कंपनी के अंकेक्षक को कंपनी की सभाओं से संबंधित सभी सूचनाओं को प्राप्त करने का अधिकार है। यदि कंपनी उसे उन सूचनाओं को उपलब्ध नहीं कराती है तो वह कंपनी के विरुद्ध कंपनी अधिकरण में कार्य नहीं कर सकता है।

(5) कंपनी के अंकेक्षक का कर्तव्य के साथ ही साथ यह अधिकार भी है कि वह यह प्रमाणित करें की कंपनी का वित्तीय विवरण तुलन पत्र तथा लाभ हानि खाता मानकों के अनुसार ही तैयार किए गए हैं।

(6) जांच करना कि कंपनी की लेखा पुस्तिकाओं में की गई लेनदेन संबंधी प्रविष्टियां के लिए अहितकर तो नहीं है।

(7) यह देखना कि कंपनी द्वारा दिए गए निर्णय अग्रिम राशि को जमा खाते में जमा के रूप में दर्शाया गया है या नहीं।

(8) यह देखना कि कंपनी द्वारा दिए गए ऋण या अग्रिम धनराशि पर समुचित प्रतिभूतियां ली गई हैं या नहीं तथा ऐसे ऋण से संबंधित शर्तें कंपनी के लिए हितकर या अहितकर है।

(9)यह देखना कि कंपनी के अंशों पर प्राप्त राशि का पूर्ण  लेखा संबंधित पुस्तकों तथा अभिलेखों में सही ढंग से लिखा गया है या नहीं।

(10) इसकी जांच करना कि कंपनी ने अंशों पर चुकता एवं अचुकता  राशि का विवरण अपने तुलन पत्र मे दर्शाया है या नहीं।


वार्षिक अधिवेशन का महत्व( importance of Annual General Meeting) कंपनी के अंश धारकों के हित की सुरक्षा के लिए वार्षिक अधिवेशन महत्वपूर्ण साधन है। कंपनी का नियंत्रण तथा भविष्य अंश धारकों के हाथ में होता है इसलिए यह आवश्यक समझा जाता है कि कंपनी के कार्यों की जांच करने के लिए वे वर्ष भर में कम से कम एक बार एकत्रित हों। इस अधिवेशन में कुछ निदेशक पद से हटते हैं तथा उन पदों के लिए फिर से चुनाव होता है। अंश धारक ऐसे व्यक्तियों को नियुक्त ना करने का अवसर पाते हैं जो उनकी नीतियों का पालन नहीं करते रहते हैं। इसी अधिवेशन में लेखा संपरिक्षक भी अपने पद से हटते हैं और अंश धारको को यह विचार प्रकट करने का अवसर मिलता है कि उन्हें नियुक्त किया जाए या किसी अन्य लेखा संपरिक्षक को। इसी अधिवेशन में लाभांश घोषित किए जाते हैं। कंपनी का अधीक्षक अपने भाषण द्वारा कंपनी की वार्षिक उन्नति की ओर ध्यान आकर्षित करता है। निदेशक अपनी रिपोर्ट तथा कंपनी के लेखे प्रस्तुत करते हैं। अंश  धारक लिखो तथा कारोबार के संबंध में कोई सवाल कर सकते हैं।

             इस अधिवेशन की जो कार्यवाही अनुच्छेदों में बताएं रहती है और कंपनी अधिनियम द्वारा अपेक्षित है उसे साधारण कारवाही कहते हैं। इसके अतिरिक्त कोई भी कार्यवाही विशेष कार्यवाही कही जाती है।

    

Comments

Popular posts from this blog

बलवा और दंगा क्या होता है? दोनों में क्या अंतर है? दोनों में सजा का क्या प्रावधान है?( what is the riot and Affray. What is the difference between boths.)

बल्बा(Riot):- भारतीय दंड संहिता की धारा 146 के अनुसार यह विधि विरुद्ध जमाव द्वारा ऐसे जमाव के समान उद्देश्य को अग्रसर करने के लिए बल या हिंसा का प्रयोग किया जाता है तो ऐसे जमाव का हर सदस्य बल्बा करने के लिए दोषी होता है।बल्वे के लिए निम्नलिखित तत्वों का होना आवश्यक है:- (1) 5 या अधिक व्यक्तियों का विधि विरुद्ध जमाव निर्मित होना चाहिए  (2) वे किसी सामान्य  उद्देश्य से प्रेरित हो (3) उन्होंने आशयित सामान्य  उद्देश्य की पूर्ति हेतु कार्यवाही प्रारंभ कर दी हो (4) उस अवैध जमाव ने या उसके किसी सदस्य द्वारा बल या हिंसा का प्रयोग किया गया हो; (5) ऐसे बल या हिंसा का प्रयोग सामान्य उद्देश्य की पूर्ति के लिए किया गया हो।         अतः बल्वे के लिए आवश्यक है कि जमाव को उद्देश्य विधि विरुद्ध होना चाहिए। यदि जमाव का उद्देश्य विधि विरुद्ध ना हो तो भले ही उसमें बल का प्रयोग किया गया हो वह बलवा नहीं माना जाएगा। किसी विधि विरुद्ध जमाव के सदस्य द्वारा केवल बल का प्रयोग किए जाने मात्र से जमाव के सदस्य अपराधी नहीं माने जाएंगे जब तक यह साबित ना कर दिया जाए कि बल का प्रयोग कि...

असामी कौन है ?असामी के क्या अधिकार है और दायित्व who is Asami ?discuss the right and liabilities of Assami

अधिनियम की नवीन व्यवस्था के अनुसार आसामी तीसरे प्रकार की भूधृति है। जोतदारो की यह तुच्छ किस्म है।आसामी का भूमि पर अधिकार वंशानुगत   होता है ।उसका हक ना तो स्थाई है और ना संकृम्य ।निम्नलिखित  व्यक्ति अधिनियम के अंतर्गत आसामी हो गए (1)सीर या खुदकाश्त भूमि का गुजारेदार  (2)ठेकेदार  की निजी जोत मे सीर या खुदकाश्त  भूमि  (3) जमींदार  की बाग भूमि का गैरदखीलकार काश्तकार  (4)बाग भूमि का का शिकमी कास्तकार  (5)काशतकार भोग बंधकी  (6) पृत्येक व्यक्ति इस अधिनियम के उपबंध के अनुसार भूमिधर या सीरदार के द्वारा जोत में शामिल भूमि के ठेकेदार के रूप में ग्रहण किया जाएगा।           वास्तव में राज्य में सबसे कम भूमि आसामी जोतदार के पास है उनकी संख्या भी नगण्य है आसामी या तो वे लोग हैं जिनका दाखिला द्वारा उस भूमि पर किया गया है जिस पर असंक्रम्य अधिकार वाले भूमिधरी अधिकार प्राप्त नहीं हो सकते हैं अथवा वे लोग हैं जिन्हें अधिनियम के अनुसार भूमिधर ने अपनी जोत गत भूमि लगान पर उठा दिए इस प्रकार कोई व्यक्ति या तो अक्षम भूमिधर का आसामी होता ह...

कंपनी के संगम ज्ञापन से क्या आशय है? What is memorandum of association? What are the contents of the memorandum of association? When memorandum can be modified. Explain fully.

संगम ज्ञापन से आशय  meaning of memorandum of association  संगम ज्ञापन को सीमा नियम भी कहा जाता है यह कंपनी का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। हम कंपनी के नींव  का पत्थर भी कह सकते हैं। यही वह दस्तावेज है जिस पर संपूर्ण कंपनी का ढांचा टिका रहता है। यह कह दिया जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि यह कंपनी की संपूर्ण जानकारी देने वाला एक दर्पण है।           संगम  ज्ञापन में कंपनी का नाम, उसका रजिस्ट्री कृत कार्यालय, उसके उद्देश्य, उनमें  विनियोजित पूंजी, कम्पनी  की शक्तियाँ  आदि का उल्लेख समाविष्ट रहता है।         पामर ने ज्ञापन को ही कंपनी का संगम ज्ञापन कहा है। उसके अनुसार संगम ज्ञापन प्रस्तावित कंपनी के संदर्भ में बहुत ही महत्वपूर्ण अभिलेख है। काटमेन बनाम बाथम,1918 ए.सी.514  लार्डपार्कर  के मामले में लार्डपार्कर द्वारा यह कहा गया है कि "संगम ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य अंश धारियों, ऋणदाताओं तथा कंपनी से संव्यवहार करने वाले अन्य व्यक्तियों को कंपनी के उद्देश्य और इसके कार्य क्षेत्र की परिधि के संबंध में अवग...