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अगर पुलिस ने झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया तो क्या करें? – एक ऐसी कहानी जो हर निर्दोष व्यक्ति को अपने अधिकार समझाएगी
मैंने कुछ किया ही नहीं... फिर मेरे खिलाफ FIR कैसे दर्ज हो गई?" रात के करीब 9 बजे थे। आदित्य अपने घर पर परिवार के साथ बैठा था। अचानक उसका मोबाइल बजा। दूसरी तरफ़ उसका दोस्त घबराई हुई आवाज़ में बोला— "आदित्य! तुम्हारे खिलाफ थाने में FIR दर्ज हो गई है। पुलिस तुम्हें ढूँढ रही है।" यह सुनते ही आदित्य के हाथ काँपने लगे। उसने घबराकर कहा— "लेकिन मैंने तो कोई अपराध किया ही नहीं... फिर मेरे खिलाफ मामला कैसे दर्ज हो गया?" अगली सुबह वह सीधे अपने वकील के चैंबर पहुँचा। उसकी आँखों में डर था। उसने केवल एक सवाल पूछा— "अगर मुकदमा झूठा है, तो क्या कानून मेरी भी रक्षा करेगा?" वकील ने मुस्कुराते हुए कहा— "यही तो कानून की सबसे बड़ी ताकत है। पहले पूरी बात समझो।" क्या हर FIR सच होती है? वकील ने समझाया— "FIR किसी अपराध की सूचना होती है, अदालत का फैसला नहीं।" FIR दर्ज होने का मतलब केवल यह है कि पुलिस को एक शिकायत मिली है और वह उसकी जाँच करेगी। इसका अर्थ यह नहीं कि आरोपी स्वतः दोषी हो गया। अब पुलिस क्या करेगी? आदित्य ने पूछा— "तो क्या पुलिस म...