BNSS Section 35 Notice क्या है? पुलिस का नोटिस मिलने पर क्या करें? गिरफ्तारी से बचने के कानूनी नियम
BNSS Section 35 Notice क्या है?
अगर पुलिस को किसी व्यक्ति के खिलाफ किसी संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) में उचित शिकायत, विश्वसनीय सूचना या उचित संदेह मिलता है, लेकिन उस व्यक्ति की गिरफ्तारी तत्काल आवश्यक नहीं है, तो पुलिस उसे BNSS Section 35(3) के तहत उपस्थित होने का नोटिस दे सकती है।
सरल भाषा में इसे ऐसे समझें:
Section 35(3) BNSS का Notice पुलिस की जांच में व्यक्ति की उपस्थिति सुनिश्चित करने का कानूनी माध्यम है। यह अपने-आप में गिरफ्तारी वारंट नहीं है।
BNSS यानी Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 ने CrPC की जगह आपराधिक प्रक्रिया की नई व्यवस्था लागू की है। Section 35 में पुलिस द्वारा बिना वारंट गिरफ्तारी से संबंधित परिस्थितियों के साथ-साथ उस स्थिति में notice देने की व्यवस्था भी है, जब गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात है—Section 35 Notice को हल्के में लेना भी गलत है। नोटिस मिलने के बाद उसके terms का पालन करना कानूनन महत्वपूर्ण है।
BNSS Section 35 किस विषय से संबंधित है?
BNSS की Section 35 का शीर्षक है:
“When police may arrest without warrant”
अर्थात यह धारा मुख्य रूप से इस बात से संबंधित है कि पुलिस किन परिस्थितियों में बिना Magistrate के आदेश और बिना warrant के गिरफ्तारी कर सकती है।
इसी Section 35 के भीतर sub-section (3) पुलिस को उस व्यक्ति को notice देने की व्यवस्था देता है जिसकी गिरफ्तारी उस समय आवश्यक नहीं है।
इसलिए SEO में जिसे आम तौर पर “BNSS Section 35 Notice” कहा जाता है, वह मुख्यतः Section 35(3) से संबंधित है।
Section 35(3) BNSS में क्या कहा गया है?
Section 35(3) का मूल उद्देश्य यह है कि जहां किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है, वहां पुलिस उसे अपने सामने या notice में निर्धारित किसी अन्य स्थान पर उपस्थित होने के लिए निर्देशित करे।
अर्थात:
Arrest आवश्यक नहीं → Notice → Police के सामने Appearance → Investigation में Cooperation
यही Section 35(3) की मूल व्यवस्था है।
BNSS Section 35 Notice कब दिया जाता है?
Section 35(3) के तहत notice उस स्थिति में दिया जा सकता है जब:
किसी व्यक्ति के खिलाफ reasonable complaint हो;
उसके खिलाफ credible information प्राप्त हुई हो; या
उसके किसी cognizable offence में शामिल होने का reasonable suspicion हो;
और उस समय उसकी गिरफ्तारी आवश्यक न हो।
यहां “arrest की आवश्यकता नहीं” वाला हिस्सा अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पुलिस के पास केवल गिरफ्तारी की शक्ति होना और उस शक्ति का इस्तेमाल करना—दो अलग बातें हैं।
क्या Section 35 Notice का मतलब FIR दर्ज हो चुकी है?
जरूरी नहीं कि हर स्थिति में केवल notice देखकर यह निष्कर्ष निकाल लिया जाए कि FIR दर्ज हो चुकी है।
Notice किसी जांच/अपराध संबंधी कार्यवाही में जारी हो सकता है, लेकिन notice मिलने पर व्यक्ति को यह पता करना चाहिए कि:
FIR नंबर क्या है?
कौन-सी धाराएं लगी हैं?
शिकायत/केस किस घटना से संबंधित है?
Investigating Officer कौन है?
कब और कहां उपस्थित होना है?
इसलिए केवल फोन पर “थाने आ जाइए” कहे जाने और विधिवत Section 35(3) notice के बीच अंतर समझना जरूरी है।
Section 35 Notice और Arrest Warrant में क्या अंतर है?
| आधार | Section 35 Notice | Arrest Warrant |
|---|---|---|
| उद्देश्य | पुलिस के सामने उपस्थिति | गिरफ्तारी |
| जारी कौन करता है | पुलिस अधिकारी | सक्षम न्यायालय |
| क्या यह खुद गिरफ्तारी है? | नहीं | हां, warrant की execution से गिरफ्तारी हो सकती है |
| व्यक्ति से क्या अपेक्षा है? | निर्धारित समय/स्थान पर उपस्थित होना | warrant के अनुसार custody में लिया जाना |
| मुख्य उद्देश्य | Investigation में cooperation | व्यक्ति को गिरफ्तार करके Court के सामने लाना |
इसलिए Section 35 Notice को Arrest Warrant समझना कानूनी रूप से गलत है।
Section 35(4) BNSS: Notice मिलने के बाद क्या करना जरूरी है?
Section 35(4) के अनुसार जब किसी व्यक्ति को ऐसा notice दिया जाता है तो उस व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह notice की terms का पालन करे।
इसका सीधा अर्थ है:
अगर notice में लिखा है कि आपको:
किसी निश्चित तारीख को,
किसी निश्चित समय पर,
किसी निश्चित police station या officer के सामने
उपस्थित होना है, तो आपको उस निर्देश का पालन करना चाहिए।
सबसे बड़ी गलती क्या है?
Notice मिलने के बाद बिना उचित कारण:
“मैं पुलिस के सामने नहीं जाऊंगा।”
ऐसा रवैया अपनाना जोखिम पैदा कर सकता है।
Section 35(5) BNSS में आरोपी को क्या सुरक्षा मिलती है?
यह Section 35 की सबसे महत्वपूर्ण protections में से एक है।
यदि व्यक्ति notice का पालन करता है और लगातार उसके terms का पालन करता रहता है, तो उसे उस offence के संबंध में गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए, जब तक पुलिस अधिकारी reasons record करके यह राय न बनाए कि उसे गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
इसका मतलब यह नहीं है कि notice मिलने के बाद गिरफ्तारी किसी भी परिस्थिति में असंभव है।
बल्कि इसका अर्थ है:
Notice का compliance व्यक्ति के पक्ष में महत्वपूर्ण procedural protection पैदा करता है।
2026 का Supreme Court फैसला: Section 35 Notice पर बड़ा बदलाव
15 जनवरी 2026 को Supreme Court ने Section 35 BNSS की व्याख्या करते हुए महत्वपूर्ण बातें स्पष्ट कीं।
Court ने कहा कि 7 वर्ष तक की सजा वाले अपराधों में Section 35(3) का notice rule है, जबकि arrest exception है।
Court ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस अधिकारी को गिरफ्तारी करने से पहले यह विचार करना चाहिए कि गिरफ्तारी वास्तव में investigation के लिए आवश्यक है या नहीं।
अर्थात केवल यह कारण पर्याप्त नहीं है कि:
“पुलिस के पास गिरफ्तारी की power है।”
गिरफ्तारी की necessity भी देखनी होगी।
Supreme Court ने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में arrest को routine तरीके से नहीं किया जाना चाहिए और Section 35(3) का notice सामान्यतः जारी किया जाना चाहिए।
क्या Section 35 Notice मिलने पर गिरफ्तारी हो सकती है?
हां, कुछ परिस्थितियों में हो सकती है।
यह समझना गलत होगा कि:
“Section 35 Notice मिल गया, इसलिए अब कभी arrest नहीं हो सकती।”
Section 35 में गिरफ्तारी की परिस्थितियां अलग से निर्धारित हैं।
विशेषकर ऐसे offences जिनमें अधिकतम सजा 7 वर्ष तक है, Supreme Court ने Section 35(1)(b) और Section 35(3) से (6) को साथ पढ़ते हुए गिरफ्तारी को necessity-based बनाया है।
इसलिए सही कानूनी स्थिति यह है:
Notice = गिरफ्तारी नहीं
लेकिन:
Notice = गिरफ्तारी से पूर्ण immunity भी नहीं।
Section 35(6) BNSS क्या कहता है?
यदि कोई व्यक्ति Section 35(3) के notice की terms का पालन नहीं करता या अपनी पहचान बताने को तैयार नहीं होता, तो Section 35(6) के तहत पुलिस के पास आगे की कार्रवाई की शक्ति हो सकती है, subject to the statutory requirements and applicable court orders.
लेकिन Supreme Court ने यह भी स्पष्ट किया है कि notice का पालन न करने मात्र से automatic arrest आवश्यक नहीं हो जाता।
Arrest फिर भी statutory necessity और applicable safeguards के अधीन रहती है।
इसलिए notice को ignore करना समझदारी नहीं है।
क्या Section 35 Notice मिलने पर तुरंत Bail लेनी पड़ती है?
आम तौर पर सिर्फ Section 35(3) Notice मिलने का अर्थ यह नहीं है कि व्यक्ति को उसी समय regular bail लेने की आवश्यकता है।
क्योंकि notice का मूल उद्देश्य ही यह है कि व्यक्ति को बिना तत्काल custody में लिए investigation में उपस्थित कराया जाए।
लेकिन यदि मामले के facts में arrest की वास्तविक आशंका हो, offence की प्रकृति गंभीर हो या अन्य कानूनी परिस्थितियां मौजूद हों, तो व्यक्ति को अपने अधिवक्ता से तत्काल सलाह लेनी चाहिए।
हर मामले की रणनीति अलग हो सकती है।
Section 35 Notice मिलने पर व्यक्ति को क्या करना चाहिए?
सबसे पहले घबराने की जरूरत नहीं है।
Step 1: Notice को ध्यान से पढ़ें
देखें:
Police Station
Investigating Officer
Case/FIR number
Sections
Date
Time
Place of appearance
Notice का reference
हस्ताक्षर/अधिकारी की पहचान
Step 2: FIR की जानकारी प्राप्त करें
यदि FIR दर्ज है तो उसकी copy और sections की जानकारी लें।
Step 3: Criminal Lawyer से सलाह लें
विशेषकर तब जब धाराएं गंभीर हों या arrest की वास्तविक आशंका हो।
Step 4: Notice का compliance करें
जहां तक notice वैध रूप से लागू है, उसके terms के अनुसार उपस्थित होना महत्वपूर्ण है।
Step 5: Documents तैयार रखें
यदि आपके पक्ष में कोई document है तो उसे व्यवस्थित करके रखें।
उदाहरण:
Bank records
Messages
Emails
Agreements
Medical records
Location records
Relevant photographs/videos
Previous complaints
Legal notices
अन्य संबंधित documents
Step 6: अनावश्यक बहस से बचें
Police station में emotional argument या aggressive behaviour आपकी स्थिति को खराब कर सकता है।
क्या Section 35 Notice का जवाब लिखित में दिया जा सकता है?
परिस्थितियों के अनुसार व्यक्ति अपने पक्ष की relevant facts/documents investigating officer के सामने रख सकता है।
कई मामलों में written representation उपयोगी हो सकता है, विशेषकर जब:
आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत हों;
महत्वपूर्ण documents उपलब्ध हों;
घटना की timeline स्पष्ट करनी हो;
कोई महत्वपूर्ण defence material हो।
लेकिन written reply में अनावश्यक confession, अनुमान या ऐसी बात नहीं लिखनी चाहिए जिसे बाद में गलत अर्थ में इस्तेमाल किया जा सके।
Police Station में Section 35 Notice के बाद क्या होता है?
यह case-to-case अलग होता है।
सामान्य रूप से investigation में police:
व्यक्ति की उपस्थिति दर्ज कर सकती है;
उससे relevant questions पूछ सकती है;
documents/evidence देख सकती है;
अन्य witnesses से पूछताछ कर सकती है;
उपलब्ध material का मूल्यांकन कर सकती है;
investigation आगे बढ़ा सकती है।
इसका मतलब यह नहीं कि notice पाने वाला व्यक्ति दोषी सिद्ध हो गया है।
Notice investigation का हिस्सा है, conviction नहीं।
क्या Section 35 Notice मिलने का मतलब आरोपी दोषी है?
बिल्कुल नहीं।
Police investigation में किसी व्यक्ति के खिलाफ suspicion या complaint होना और Court द्वारा guilt establish होना अलग-अलग बातें हैं।
किसी व्यक्ति को केवल notice मिलने से:
दोषी नहीं माना जा सकता;
conviction नहीं हो जाती;
अपराध साबित नहीं हो जाता।
Criminal trial में guilt का निर्धारण कानून के अनुसार evidence और judicial process से होता है।
Section 35 Notice और पुराने CrPC Section 41A Notice में संबंध
CrPC के पुराने Section 41A में police officer द्वारा notice of appearance की व्यवस्था थी।
BNSS लागू होने के बाद arrest और notice की व्यवस्था अब Section 35 BNSS के framework में आती है।
इसलिए पुराने articles में यदि आपको:
“41A Notice”
लिखा मिलता है, तो वर्तमान कानून के संदर्भ में BNSS Section 35 को भी देखना जरूरी है।
आसान तुलना
CrPC → Section 41 / 41A
BNSS → Section 35
हालांकि दोनों provisions को केवल number बदलकर बिल्कुल समान मानना सही नहीं है। नए कानून की exact statutory language और Supreme Court की वर्तमान interpretation को देखना आवश्यक है।
Section 35 Notice मिलने पर कौन-सी गलतियां नहीं करनी चाहिए?
1. Notice को फाड़ देना
यह समस्या को खत्म नहीं करता।
2. Police को धमकी देना
यह स्थिति को और खराब कर सकता है।
3. झूठी कहानी बनाना
Investigation में contradictions बाद में नुकसान पहुंचा सकते हैं।
4. WhatsApp पर गुस्से में message भेजना
Digital communication बाद में evidence के रूप में सामने आ सकती है।
5. बिना पढ़े documents sign करना
किसी document पर हस्ताक्षर करने से पहले उसे समझना जरूरी है।
6. बिना legal advice के गंभीर बयान देना
गंभीर criminal allegations में पहले अपने advocate से सलाह लेना prudent हो सकता है।
7. Notice को लगातार ignore करना
यह सबसे खराब रणनीतियों में से एक हो सकती है।
क्या Section 35 Notice का मतलब Police आपको गिरफ्तार नहीं करेगी?
यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जाता है।
इसका सही जवाब है:
नहीं, ऐसा absolute rule नहीं है।
Section 35(5) compliance करने वाले व्यक्ति को महत्वपूर्ण protection देता है, लेकिन कानून में specified circumstances में arrest की संभावना बनी रहती है।
15 जनवरी 2026 के Supreme Court निर्णय ने विशेष रूप से यह स्पष्ट किया कि 7 वर्ष तक की सजा वाले offences में notice सामान्य नियम है और arrest exception है।
इसलिए व्यक्ति को:
Notice का पालन + Investigation में Cooperation + Legal Rights की रक्षा
इन तीनों पर ध्यान देना चाहिए।
Section 35 Notice का एक Practical Example
मान लीजिए किसी व्यक्ति के खिलाफ ऐसा cognizable offence alleged है जिसकी maximum punishment 7 years तक है।
Police को investigation के दौरान लगता है कि:
व्यक्ति उपलब्ध है;
उसके भागने की तत्काल संभावना नहीं है;
वह investigation में cooperation कर सकता है;
उसकी custody के बिना investigation आगे बढ़ सकती है।
ऐसी स्थिति में Section 35(3) का notice महत्वपूर्ण विकल्प बन सकता है।
व्यक्ति notice के अनुसार police के सामने उपस्थित होता है।
अब वह investigation में cooperate करता है।
ऐसी स्थिति में Section 35(5) का protection महत्वपूर्ण हो सकता है और arrest routine तरीके से नहीं की जानी चाहिए।
लेकिन यदि बाद में नए material से arrest की वास्तविक necessity सामने आती है, तो स्थिति अलग हो सकती है।
क्या Police केवल पूछताछ के लिए Arrest कर सकती है?
15 जनवरी 2026 के Supreme Court judgment में यह महत्वपूर्ण बात सामने आई कि arrest को केवल सामान्य पूछताछ के लिए routine तरीके से इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
Court ने arrest को strict objective necessity के संदर्भ में देखा है।
अर्थात:
“कुछ सवाल पूछने हैं, इसलिए arrest कर लो”
अपने-आप में पर्याप्त justification नहीं है।
Investigation और arrest को एक ही चीज समझना गलत है।
Section 35 Notice मिलने पर Advocate की भूमिका
Criminal lawyer की भूमिका केवल bail application तक सीमित नहीं है।
वह व्यक्ति को यह समझने में मदद कर सकता है:
कौन-सी धाराएं लगी हैं;
offence bailable है या non-bailable;
arrest की वास्तविक legal position क्या है;
notice के terms क्या हैं;
police station में किस प्रकार cooperate करना है;
कौन से documents relevant हैं;
क्या written representation देना चाहिए;
anticipatory bail की आवश्यकता है या नहीं;
आगे High Court/Sessions Court का remedy उपलब्ध है या नहीं।
इसलिए serious criminal case में notice को legal strategy का शुरुआती चरण समझना अधिक उचित है।
Section 35 BNSS पर 2026 Supreme Court Judgment का महत्व
15 जनवरी 2026 का Supreme Court judgment Section 35 के practical application को समझने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Court ने broadly यह स्पष्ट किया कि:
arrest automatic नहीं है;
police को arrest की necessity पर विचार करना चाहिए;
7 वर्ष तक की सजा वाले offences में Section 35(3) notice सामान्य नियम है;
notice का compliance महत्वपूर्ण है;
compliance करने वाले व्यक्ति की arrest के लिए reasons record करने की आवश्यकता है;
arrest exception है, routine procedure नहीं।
यह judgment lawyers, law students और accused persons—तीनों के लिए महत्वपूर्ण है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Q1. BNSS Section 35 Notice क्या है?
BNSS Section 35(3) का notice पुलिस द्वारा उस व्यक्ति को investigation के लिए उपस्थित होने का निर्देश है जिसकी तत्काल गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है।
Q2. क्या Section 35 Notice Arrest Warrant है?
नहीं। Section 35 notice और arrest warrant अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं।
Q3. Section 35 Notice मिलने पर Police Station जाना जरूरी है?
यदि वैध Section 35(3) notice जारी हुआ है तो उसके terms का पालन करना व्यक्ति का statutory duty है।
Q4. Notice मिलने के बाद गिरफ्तारी हो सकती है?
कुछ परिस्थितियों में हां। लेकिन notice का compliance व्यक्ति को महत्वपूर्ण statutory protection देता है और arrest routine तरीके से नहीं की जानी चाहिए।
Q5. क्या Notice मिलने का मतलब FIR हो गई?
जरूरी नहीं। Notice के context में FIR/complaint और applicable sections की वास्तविक स्थिति जांचना जरूरी है।
Q6. क्या Section 35 Notice मिलने पर Anticipatory Bail लेनी चाहिए?
हर मामले में नहीं। यह facts, offence और वास्तविक arrest apprehension पर निर्भर करता है।
Q7. Section 35(5) क्या कहता है?
Notice का पालन करते रहने वाले व्यक्ति को उसी offence में arrest करने के लिए police officer को reasons record करके arrest की आवश्यकता की राय बनानी होती है।
Q8. Section 35(6) क्या है?
Notice की terms का पालन न करने या पहचान बताने से इनकार करने की स्थिति में कानून पुलिस को आगे की कार्रवाई की शक्ति देता है, subject to statutory requirements और applicable court orders।
Q9. क्या Notice ignore करने पर तुरंत arrest हो जाती है?
नहीं। Supreme Court ने स्पष्ट किया है कि non-compliance अपने-आप automatic arrest का आदेश नहीं बनता। फिर भी notice को ignore करना गंभीर रूप से अनुचित हो सकता है।
Q10. क्या Advocate को Section 35 Notice दिखाना चाहिए?
यदि criminal allegation गंभीर है तो अपने advocate को notice और उपलब्ध documents दिखाकर legal advice लेना prudent है।
निष्कर्ष
BNSS Section 35 Notice को न तो गिरफ्तारी का आदेश समझना चाहिए और न ही ऐसा कागज जिसे नजरअंदाज किया जा सकता है।
यह criminal investigation में police और व्यक्ति के बीच एक महत्वपूर्ण procedural mechanism है।
विशेषकर 7 वर्ष तक की सजा वाले offences में 15 जनवरी 2026 के Supreme Court judgment के बाद Section 35(3) notice और arrest की necessity को समझना और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
इसलिए Section 35 Notice मिलने पर सही approach है:
Notice पढ़ें → FIR/Sections की जानकारी लें → Lawyer से सलाह लें → निर्धारित terms का पालन करें → Investigation में lawful cooperation करें → अपने documents सुरक्षित रखें → अनावश्यक बयान/विवाद से बचें।
महत्वपूर्ण कानूनी अस्वीकरण
यह लेख सामान्य कानूनी जानकारी और educational purpose के लिए है। किसी वास्तविक criminal case में केवल इस article के आधार पर रणनीति तय न करें। FIR, आरोपों, sections, evidence और case की परिस्थितियों के आधार पर योग्य criminal-law advocate से स्वतंत्र कानूनी सलाह लेना उचित है।
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