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BNS धारा 109 “Attempt to murder” है, जबकि Regular Bail की प्रक्रिया

BNS धारा 109 “Attempt to murder” है, जबकि Regular Bail की प्रक्रिया

न्यायालय श्रीमान सत्र न्यायाधीश, जनपद _________ के न्यायालय में

जमानत प्रार्थना-पत्र संख्या : ____ / 2026

प्रकरण

राज्य बनाम रामकिशोर एवं अन्य

अपराध संख्या: 124/2026
थाना: कोतवाली नगर, जनपद _________
धाराएं: 109 BNS एवं अन्य धाराएं, यदि कोई हों
अभियुक्त: रामकिशोर पुत्र हरिप्रसाद, निवासी ग्राम _________, थाना _________, जनपद _________

धारा 483 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के अंतर्गत नियमित जमानत प्रार्थना-पत्र

माननीय न्यायालय के समक्ष अभियुक्त रामकिशोर की ओर से सादर प्रस्तुत है :

1. अभियुक्त का निर्दोष होना

कि आवेदक/अभियुक्त रामकिशोर को उपर्युक्त मुकदमे में पुलिस द्वारा गिरफ्तार करके दिनांक 10.08.2026 से न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार _________ में निरुद्ध किया गया है।

आवेदक स्वयं को निर्दोष बताता है तथा उसे वर्तमान प्रकरण में गलत एवं अतिरंजित आरोपों के आधार पर अभियुक्त बनाया गया है।

आवेदक का किसी प्रकार का आपराधिक इतिहास नहीं है।

2. अभियोजन का संक्षिप्त कथानक

कि अभियोजन के अनुसार दिनांक 05.08.2026 को लगभग शाम 7:30 बजे ग्राम _________ में शिकायतकर्ता सुरेश कुमार एवं उसके भाई का आवेदक तथा अन्य व्यक्तियों से विवाद हुआ।

अभियोजन का आरोप है कि उक्त विवाद के दौरान आवेदक ने शिकायतकर्ता पर लोहे की रॉड से हमला किया तथा उसके साथ मौजूद मोहन एवं दीपक नामक दो सह-अभियुक्तों ने भी घटना में भाग लिया।

इसी आधार पर आवेदक के विरुद्ध धारा 109 BNS सहित अन्य धाराओं में अभियोग पंजीकृत किया गया।

3. आवेदक की विशिष्ट भूमिका

कि FIR एवं उपलब्ध अभियोजन कथानक का अवलोकन करने पर आवेदक की भूमिका को अन्य सह-अभियुक्तों के साथ सामान्य एवं सामूहिक रूप से प्रस्तुत किया गया है।

आवेदक के विरुद्ध ऐसा कोई स्वतंत्र एवं विश्वसनीय material प्रथम दृष्टया उपलब्ध नहीं है जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि उसके पास मृत्यु कारित करने का आवश्यक intention या knowledge था।

धारा 109 BNS का मूल तत्व केवल यह नहीं है कि कोई व्यक्ति मारपीट में शामिल था; अभियोजन को उस act के साथ आवश्यक intention या knowledge भी स्थापित करना होगा कि यदि उस act से मृत्यु हो जाती तो वह murder होता।

4. कथित हथियार की बरामदगी

कि अभियोजन द्वारा कथित लोहे की रॉड की बरामदगी आवेदक की निशानदेही पर बताई गई है, तथापि उक्त बरामदगी का स्वतंत्र evidentiary value trial के दौरान परीक्षण का विषय है।

आवेदक से अब किसी महत्वपूर्ण recovery की आवश्यकता नहीं है और उसकी निरंतर custody investigation के उद्देश्य से आवश्यक नहीं रह गई है।

[नोट: यदि वास्तव में recovery pending है तो इस paragraph को ज्यों का त्यों न रखें। Facts के अनुसार बदलें।]

5. मेडिकल रिपोर्ट से संबंधित आधार

कि घायल सुरेश कुमार की medical report में चोटें अंकित हैं, परंतु उपलब्ध medical material से यह स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं होता कि आवेदक द्वारा किया गया कथित act ऐसा था जिससे मृत्यु कारित करने का आवश्यक intention अथवा knowledge स्वतः सिद्ध हो जाए।

चोट की प्रकृति, injury weapon, injury location तथा prosecution version के बीच संबंध का परीक्षण trial में evidence के दौरान किया जाना है।

[यदि injury “dangerous to life” है तो इस ground को facts के अनुसार सावधानी से modify करना आवश्यक होगा।]

6. FIR में विलंब

कि घटना दिनांक 05.08.2026 की बताई गई है जबकि FIR दिनांक 06.08.2026 को लगभग ______ बजे दर्ज की गई।

FIR में हुई देरी का prosecution द्वारा दिया गया explanation record पर उपलब्ध है, जिसकी सत्यता एवं पर्याप्तता trial में परीक्षण का विषय है।

अतः FIR में हुई देरी भी आवेदक की bail के लिए एक relevant circumstance है।

[यदि FIR में कोई delay नहीं है तो यह ground हटाया जाए।]

7. आवेदक की गिरफ्तारी एवं custody

कि आवेदक दिनांक 10.08.2026 से लगातार judicial custody में है।

आवेदक की continued incarceration को केवल इस आधार पर जारी रखना उचित नहीं है कि आरोप गंभीर है, जबकि bail के स्तर पर Court को उपलब्ध material, accused की specific role, custody की आवश्यकता और अन्य relevant circumstances को समग्र रूप से देखना है।

8. दो सह-अभियुक्तों के फरार होने का आवेदक से कोई स्वचालित संबंध नहीं

कि अभियोजन के अनुसार सह-अभियुक्त मोहन एवं दीपक वर्तमान में फरार हैं।

आवेदक विनम्रतापूर्वक निवेदन करता है कि उक्त दोनों व्यक्तियों का फरार होना स्वतः आवेदक की bail अस्वीकार करने का आधार नहीं बनाया जा सकता, क्योंकि प्रत्येक अभियुक्त की भूमिका, conduct तथा उपलब्ध material का स्वतंत्र मूल्यांकन आवश्यक है।

आवेदक स्वयं पुलिस की अभिरक्षा में है और उसके विरुद्ध किसी प्रकार का absconding conduct नहीं है।

आवेदक न्यायालय के समक्ष उपस्थित है और यदि जमानत प्रदान की जाती है तो वह प्रत्येक तारीख पर उपस्थित रहने तथा न्यायालय द्वारा लगाई जाने वाली प्रत्येक वैधानिक शर्त का पालन करने के लिए तैयार है।

9. आवेदक फरार नहीं होगा

कि आवेदक _________ जनपद का स्थायी निवासी है।

उसका परिवार एवं सामाजिक संबंध इसी क्षेत्र में हैं और उसके फरार होकर न्यायिक प्रक्रिया से बचने की कोई संभावना नहीं है।

आवेदक अपना स्थायी पता न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने तथा आवश्यक होने पर अपना मोबाइल नंबर/अन्य संपर्क विवरण उपलब्ध कराने को तैयार है।

10. गवाहों को प्रभावित करने की संभावना नहीं

कि आवेदक शिकायतकर्ता अथवा अभियोजन के गवाहों को किसी प्रकार की धमकी, प्रलोभन अथवा दबाव नहीं देगा।

आवेदक न्यायालय द्वारा लगाई जाने वाली किसी भी ऐसी condition का पालन करने को तैयार है जिसका उद्देश्य गवाहों की सुरक्षा एवं निष्पक्ष trial सुनिश्चित करना हो।

11. साक्ष्य से छेड़छाड़ नहीं करेगा

कि मुकदमे से संबंधित documentary एवं अन्य material यदि पुलिस द्वारा संकलित किया जा चुका है तो आवेदक उसके साथ किसी प्रकार की छेड़छाड़ करने की स्थिति में नहीं है।

आवेदक न्यायिक प्रक्रिया में सहयोग करेगा तथा prosecution evidence को प्रभावित करने का कोई प्रयास नहीं करेगा।

12. आपराधिक इतिहास नहीं

कि आवेदक का कोई पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है।

[यदि antecedents हैं तो उन्हें छिपाना नहीं चाहिए; प्रत्येक case number, sections और वर्तमान status को स्पष्ट करना चाहिए।]

13. सह-अभियुक्तों का फरार होना bail का automatic bar नहीं

कि केवल इसलिए कि दो सह-अभियुक्त फरार हैं, आवेदक को अनिश्चितकाल तक custody में रखना उचित नहीं होगा।

आवेदक के विरुद्ध आरोप एवं उसकी व्यक्तिगत भूमिका का स्वतंत्र परीक्षण आवश्यक है।

यदि अभियोजन को किसी विशेष recovery अथवा investigation की आवश्यकता हो तो आवेदक न्यायालय द्वारा निर्धारित उपयुक्त conditions के अधीन investigation में सहयोग करने के लिए तैयार है।

14. Trial में समय लगने की संभावना

कि वर्तमान मामले में अभियोजन पक्ष के अनेक गवाह हैं और trial को पूर्ण होने में पर्याप्त समय लगने की संभावना है।

आवेदक को trial से पहले अनावश्यक रूप से लंबे समय तक custody में रखना, जबकि वह trial में सहयोग करने को तैयार है, उसके व्यक्तिगत liberty के प्रश्न को गंभीर बनाता है।

15. Bail का स्थापित सिद्धांत

कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने Satender Kumar Antil v. CBI में bail jurisprudence तथा pre-trial detention से संबंधित महत्वपूर्ण principles पर विचार किया है।

Bail के प्रश्न पर Court को आरोप की प्रकृति के साथ-साथ custody, investigation की आवश्यकता, accused के conduct, absconding की संभावना तथा evidence/witnesses को प्रभावित करने के risk जैसे relevant factors पर विचार करना होता है।

अतः केवल आरोप की गंभीरता को देखकर, अन्य relevant circumstances की उपेक्षा करते हुए, प्रत्येक मामले में bail को अस्वीकार करना उचित approach नहीं है।

16. धारा 109 BNS की प्रकृति

कि BNS Section 109 attempt to murder से संबंधित है। इसके लिए prosecution को ऐसा act और ऐसी intention/knowledge establish करनी होती है कि यदि उस act से मृत्यु हो जाती तो accused murder का दोषी होता।

इस मामले में आवेदक की कथित भूमिका, medical evidence, alleged weapon तथा घटनास्थल से संबंधित परिस्थितियां trial में evidence द्वारा परीक्षण की जानी हैं।

अतः वर्तमान stage पर उपलब्ध material के आधार पर आवेदक को लंबे समय तक custody में रखना आवश्यक नहीं है।

17. आवेदक bail conditions स्वीकार करता है

कि आवेदक निम्नलिखित शर्तों का पालन करने के लिए तैयार है:

  1. वह trial की प्रत्येक तारीख पर उपस्थित रहेगा;

  2. वह किसी गवाह को धमकी या प्रलोभन नहीं देगा;

  3. वह prosecution evidence से छेड़छाड़ नहीं करेगा;

  4. वह शिकायतकर्ता को अनावश्यक रूप से संपर्क/प्रभावित नहीं करेगा;

  5. वह न्यायालय की अनुमति के बिना jurisdiction से बाहर जाने संबंधी किसी condition का उल्लंघन नहीं करेगा;

  6. वह investigation/trial में पूर्ण सहयोग करेगा;

  7. वह किसी नए अपराध में संलिप्त नहीं होगा।


प्रार्थना

अतः माननीय न्यायालय से विनम्र प्रार्थना है कि न्यायहित में आवेदक/अभियुक्त रामकिशोर पुत्र हरिप्रसाद को अपराध संख्या 124/2026, थाना कोतवाली नगर, जनपद _________, धारा 109 BNS एवं अन्य धाराओं में, विचारण के दौरान, उचित शर्तों एवं व्यक्तिगत bond तथा sureties पर नियमित जमानत पर रिहा किए जाने की कृपा की जाए।

यह भी न्यायहित में होगा कि माननीय न्यायालय आवेदक की जमानत पर ऐसी शर्तें आरोपित करे जिन्हें आवेदक पूर्ण रूप से स्वीकार एवं पालन करने को तैयार है।

दिनांक: //2026
स्थान: _________

आवेदक/अभियुक्त
रामकिशोर
Through Counsel

अधिवक्ता


नाम: _____________
Enrollment No.: _____________


संलग्नक

  1. FIR की प्रति

  2. FIR के साथ उपलब्ध relevant documents

  3. गिरफ्तारी/Remand order की प्रति

  4. Medical report/MLC की प्रति

  5. आवेदक के criminal antecedents का विवरण/affidavit, यदि आवश्यक हो

  6. Address proof

  7. अन्य relevant documents


इस Draft में असली “Advocate Point” क्या है?

इस hypothetical case में मैंने जानबूझकर “दो सह-अभियुक्त फरार हैं” वाली स्थिति को मुख्य defence के रूप में नहीं बनाया है।

आपको Court में यह नहीं कहना चाहिए:

“मेरे दो co-accused फरार हैं, इसलिए मुझे bail दे दीजिए।”

बल्कि argument होना चाहिए:

“My Lord, the abscondence of co-accused may be considered on their own conduct, but the applicant's case has to be examined on his own role, custody, antecedents, investigation requirement and possibility of tampering or absconding.”

यही ज्यादा mature bail advocacy है।

Section 109 BNS में सबसे महत्वपूर्ण defence areas

इस प्रकार के मामले में FIR पढ़ते समय सबसे पहले ये चीजें निकालिए:

① किसने क्या किया?
② किस हथियार की specific attribution है?
③ चोट किसे और कहां लगी?
④ MLC में injury की nature क्या है?
⑤ क्या injury weapon से correspond करती है?
⑥ क्या कोई independent witness है?
⑦ FIR में delay है या नहीं?
⑧ CCTV/CDR/electronic evidence क्या है?
⑨ recovery किसके कहने पर हुई?
⑩ applicant का criminal antecedent क्या है?
⑪ co-accused की role applicant से identical है या अलग?
⑫ investigation में applicant की custody वास्तव में अभी क्यों चाहिए?

BNS 109 का statutory test intention/knowledge + act + circumstances पर केंद्रित है; इसलिए केवल “चोट लगी” कहकर पूरे offence के mental element को स्वतः स्थापित नहीं मान लेना चाहिए। Supreme Court के पुराने Section 307 jurisprudence और नए BNS 109 के मामलों में भी यह distinction महत्वपूर्ण बना हुआ है।

एक हालिया 2026 उदाहरण में Punjab & Haryana High Court ने Section 109 BNS वाले मामले में अलग-अलग accused को attributed injuries, medical material और custodial interrogation की आवश्यकता जैसे factors पर विचार किया—इससे drafting में “मेरे client की specific role क्या है?” वाला point कितना महत्वपूर्ण है, यह समझ आता है।

महत्वपूर्ण: ऊपर के facts पूरी तरह काल्पनिक हैं। वास्तविक bail application में केवल वही ground रखें जिसे FIR, case diary/available papers, medical evidence और judicial record से support किया जा सके; fabricated facts या गलत precedent डालना bail advocacy को नुकसान पहुंचा सकता है। BNSS Section 483 Sessions Court को custody में आरोपी को bail देने की विशेष power देता है।

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