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Cheque Bounce में कितने दिन में Notice दें? गलत Amount वाले Notice का जवाब

Cheque Bounce में कितने दिन में Notice दें? गलत Amount वाले Notice का जवाब

 Cheque Bounce में कितने दिन में Notice देना होता है? Notice में गलत Amount लिख दिया हो तो क्या करें?

Cheque Bounce Notice Time Limit in Hindi | Section 138 NI Act | Wrong Amount in Cheque Bounce Notice

मान लीजिए आपने किसी व्यक्ति को ₹2,00,000 उधार दिए। उसने आपको भुगतान के लिए चेक दिया, लेकिन जब आपने बैंक में चेक लगाया तो वह बाउंस हो गया। अब आपके मन में सवाल है कि कितने दिन के भीतर कानूनी नोटिस भेजना होगा? दूसरी तरफ, यदि आपको चेक बाउंस का नोटिस मिलता है और उसमें ₹2,00,000 के बजाय ₹3,00,000 की मांग की गई है, तो क्या वह नोटिस अपने आप गलत हो जाएगा?

ऐसे मामलों में छोटी-सी कानूनी गलती भी महत्वपूर्ण हो सकती है। लेकिन हर गलती के कारण नोटिस अमान्य हो जाए, ऐसा जरूरी नहीं है।

इस लेख में हम कहानी और उदाहरण के माध्यम से समझेंगे कि Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत नोटिस कब भेजना चाहिए, नोटिस में गलत रकम होने पर क्या करना चाहिए और दोनों परिस्थितियों में सही कानूनी कदम क्या हैं।

1. Cheque Bounce में कितने दिन में Legal Notice देना होता है?

चेक बाउंस के मामलों में कानूनी नोटिस भेजने की समय-सीमा Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 138 के Proviso (b) में दी गई है।

कानून के अनुसार: बैंक से चेक के अनादरण की सूचना प्राप्त होने के बाद चेक धारक को 30 दिनों के भीतर भुगतान की लिखित मांग वाला नोटिस देना होता है।

यहाँ 30 दिन की गणना सामान्यतः उस तारीख से की जाती है जिस दिन बैंक से चेक बाउंस होने की सूचना प्राप्त हुई, न कि केवल चेक जमा करने की तारीख से।

उदाहरण से समझिए

रमेश ने सुरेश को ₹1,50,000 उधार दिए। भुगतान के लिए सुरेश ने रमेश को चेक दिया।

  • चेक बैंक में जमा किया गया: 1 अक्टूबर

  • बैंक से चेक बाउंस की सूचना मिली: 5 अक्टूबर

  • नोटिस भेजने की सामान्य अंतिम समय-सीमा: 4 नवंबर के आसपास, लागू गणना के अधीन

रमेश को बैंक की सूचना प्राप्त होने के बाद 30 दिनों के भीतर कानूनी नोटिस भेजने की कार्रवाई करनी चाहिए। विवाद से बचने के लिए आखिरी दिन का इंतजार नहीं करना चाहिए।

ध्यान दें: वास्तविक मामले में बैंक की सूचना प्राप्त होने की तारीख, दस्तावेजों और लागू कानूनी गणना की जाँच जरूरी है।

2. Legal Notice मिलने के बाद कितने दिन में भुगतान करना होता है?

धारा 138 के अंतर्गत वैध मांग-नोटिस मिलने के बाद चेक जारी करने वाले व्यक्ति को नोटिस प्राप्त होने से 15 दिनों के भीतर चेक की संबंधित राशि का भुगतान करने का अवसर दिया जाता है।

यदि वह निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करता, तो अन्य कानूनी शर्तें पूरी होने पर शिकायत दायर करने का कारण उत्पन्न हो सकता है।

उदाहरण के लिए:

  • नोटिस प्राप्त हुआ: 10 नवंबर

  • भुगतान के लिए निर्धारित अवधि: 15 दिन

  • भुगतान नहीं होने पर: संबंधित समय-सीमा और अन्य शर्तों के अनुसार शिकायत की जा सकती है।

धारा 138 के अंतर्गत शिकायत दायर करने की सामान्य समय-सीमा भुगतान के लिए दिए गए 15 दिन समाप्त होने के बाद उत्पन्न कारण से एक महीने की होती है, जैसा कि धारा 142 में निर्धारित है। पर्याप्त कारण होने पर विलंब माफ करने का प्रश्न भी उठ सकता है।

इसलिए Notice भेजने की 30 दिन की समय-सीमा और Notice मिलने के बाद भुगतान के 15 दिन—दोनों को अलग-अलग समझना चाहिए।

3. कहानी: नोटिस में ₹2 लाख के बदले ₹3 लाख मांग लिए गए

अमित ने विकास को ₹2,00,000 उधार दिए। विकास ने भुगतान के लिए ₹2,00,000 का चेक दिया। बैंक में चेक लगाने पर वह बाउंस हो गया।

अमित के वकील ने कानूनी नोटिस तैयार किया। लेकिन नोटिस टाइप करते समय गलती से ₹3,00,000 की मांग लिख दी गई।

विकास को नोटिस मिला। उसने सोचा कि रकम गलत है, इसलिए वह इसे नजरअंदाज कर सकता है।

यहीं विकास से गलती हो सकती थी।

क्या गलत रकम लिखने से पूरा Notice अमान्य हो जाता है?

इसका उत्तर परिस्थितियों पर निर्भर करता है। हर मामले में एक ही निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

यह देखना जरूरी होगा:

  1. चेक पर लिखी गई राशि कितनी है?

  2. चेक वास्तव में किस कानूनी देनदारी के भुगतान के लिए दिया गया था?

  3. नोटिस में मांग की गई राशि कितनी है?

  4. नोटिस में चेक की राशि और अतिरिक्त रकम का अलग-अलग विवरण दिया गया है या नहीं?

  5. क्या नोटिस में चेक की राशि की स्पष्ट और वैध मांग की गई है?

  6. क्या गलती केवल टाइपिंग की है या वास्तव में अतिरिक्त रकम की मांग की जा रही है?

धारा 138 के अंतर्गत नोटिस में चेक की राशि के भुगतान की स्पष्ट मांग का विशेष महत्व है। यदि नोटिस में चेक की राशि से अधिक रकम एकमुश्त मांगी गई है और चेक की वास्तविक राशि की स्पष्ट मांग नहीं है, तो नोटिस की वैधता पर गंभीर कानूनी सवाल उठ सकता है।

लेकिन यदि नोटिस में चेक की राशि की स्पष्ट मांग अलग से की गई है और अन्य रकम ब्याज, खर्च या किसी अन्य दावे के रूप में अलग दर्शाई गई है, तो उसका कानूनी प्रभाव अलग हो सकता है।

इसलिए केवल रकम गलत होने के आधार पर नोटिस को स्वतः अमान्य मान लेना सही नहीं है। नोटिस का पूरा पाठ, चेक और लेन-देन के दस्तावेज देखकर ही निष्कर्ष निकालना चाहिए।

4. यदि आपको गलत Amount वाला Cheque Bounce Notice मिला है तो क्या करें?

मान लीजिए विकास को ₹2,00,000 के चेक के बदले ₹3,00,000 मांगने वाला नोटिस मिला है।

उसे निम्नलिखित कदम उठाने चाहिए:

पहला कदम: नोटिस और चेक का मिलान करें

चेक की राशि, बैंक का रिटर्न मेमो, लेन-देन के दस्तावेज और नोटिस में मांगी गई रकम की तुलना करें।

दूसरा कदम: नोटिस की पूरी भाषा पढ़ें

यह देखें कि क्या नोटिस में चेक की वास्तविक राशि का स्पष्ट उल्लेख और भुगतान की मांग है, या अधिक रकम को एकमुश्त मांग के रूप में लिखा गया है।

तीसरा कदम: समय-सीमा को नजरअंदाज न करें

सिर्फ इसलिए नोटिस को अनदेखा न करें कि उसमें रकम गलत है। नोटिस की प्राप्ति और अन्य तारीखें सुरक्षित रखें। यदि भुगतान योग्य राशि स्वीकार है, तो वकील से सलाह लेकर समय-सीमा के भीतर सही कदम उठाएँ।

चौथा कदम: लिखित जवाब भेजने पर विचार करें

जवाब में वास्तविक चेक राशि और मांगी गई राशि के बीच अंतर स्पष्ट किया जा सकता है। यदि मांग गलत है, तो उसके समर्थन में उपलब्ध दस्तावेजों का उल्लेख करें।

ध्यान रहे, धारा 138 में नोटिस का जवाब देना हर परिस्थिति में अलग से अनिवार्य वैधानिक शर्त नहीं है। लेकिन उचित जवाब कई मामलों में विवाद का रिकॉर्ड स्पष्ट कर सकता है।

पाँचवाँ कदम: भुगतान और कानूनी सलाह पर विचार करें

यदि वास्तविक देनदारी स्वीकार है, तो यह समझना आवश्यक है कि केवल नोटिस में अतिरिक्त राशि होने के कारण वास्तविक चेक राशि की जिम्मेदारी समाप्त नहीं हो जाती। भुगतान, समझौते और बचाव की रणनीति मामले के तथ्यों के अनुसार तय करें।

5. यदि आप Notice भेज रहे हैं और रकम गलत लिख दी गई है तो क्या करें?

अब अमित की स्थिति समझिए। उसने विकास को नोटिस भेज दिया, लेकिन बाद में पता चला कि मांग की राशि गलत लिखी गई है।

ऐसी स्थिति में जल्दबाजी में यह न मानें कि दूसरा नोटिस भेजने से पहली गलती हमेशा ठीक हो जाएगी।

आपको निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना चाहिए:

  • नोटिस में चेक की सही राशि स्पष्ट रूप से मांगी गई थी या नहीं।

  • नोटिस भेजने की 30 दिन की अवधि अभी बाकी है या नहीं।

  • पहला नोटिस कानूनी रूप से पर्याप्त है या नहीं।

  • क्या नया या सुधारित नोटिस भेजने से समय-सीमा और शिकायत की वैधता पर कोई प्रभाव पड़ेगा।

यदि समय-सीमा बाकी है, तो वकील सही रकम के साथ सुधारित नोटिस भेजने की संभावना पर विचार कर सकता है। यदि समय-सीमा समाप्त हो गई है, तो नया नोटिस भेजना अपने आप पहले नोटिस की कमी को ठीक नहीं करता। ऐसे में मूल नोटिस और तारीखों की कानूनी समीक्षा आवश्यक है।

6. Cheque Bounce Notice का सही Format कैसा होना चाहिए?

धारा 138 का मांग-नोटिस तैयार करते समय उसमें सामान्यतः निम्नलिखित विवरण होने चाहिए:

  1. चेक जारी करने वाले व्यक्ति का नाम और पता।

  2. चेक धारक का नाम और पता।

  3. चेक नंबर, तारीख, राशि और बैंक का विवरण।

  4. चेक किस देनदारी के भुगतान के लिए जारी किया गया था।

  5. बैंक द्वारा चेक लौटाए जाने की तारीख और कारण।

  6. बैंक की सूचना प्राप्त होने और नोटिस भेजने की तारीखें।

  7. चेक की राशि के भुगतान की स्पष्ट मांग।

  8. नोटिस प्राप्त होने के बाद कानून में निर्धारित 15 दिनों के भीतर भुगतान करने की मांग।

  9. अधिवक्ता का नाम और हस्ताक्षर, यदि अधिवक्ता के माध्यम से नोटिस भेजा जा रहा हो।

ये सामान्य मार्गदर्शक बिंदु हैं। वास्तविक नोटिस में तथ्य, कानूनी मांग और समय-सीमा सही होना आवश्यक है।

7. Cheque Bounce Notice में गलत Amount पर महत्वपूर्ण कानूनी सिद्धांत

धारा 138 के अंतर्गत नोटिस की वैधता का मूल्यांकन केवल शीर्षक या एक गलत संख्या देखकर नहीं किया जाना चाहिए। न्यायालय नोटिस की पूरी भाषा, उसमें की गई मांग और मामले के तथ्यों को देख सकता है।

इसलिए किसी नोटिस को वैध या अवैध घोषित करने से पहले निम्नलिखित सवालों की जाँच करें:

  • क्या चेक की राशि स्पष्ट रूप से मांगी गई है?

  • क्या अतिरिक्त राशि को अलग से बताया गया है?

  • क्या नोटिस से चेक जारी करने वाले व्यक्ति को भुगतान की वास्तविक मांग समझ में आती है?

  • क्या मूल देनदारी कानूनी रूप से वसूल योग्य थी?

  • क्या नोटिस और शिकायत निर्धारित कानूनी समय-सीमाओं के अनुसार हैं?

किसी वास्तविक मुकदमे में न्यायिक निर्णयों का उपयोग करते समय संबंधित निर्णय का नाम, न्यायालय, निर्णय की तारीख और लागू कानूनी सिद्धांत मूल निर्णय से सत्यापित करना चाहिए।

8. आम गलतियाँ जिनसे बचना चाहिए

  • बैंक की सूचना प्राप्त होने के बाद 30 दिन की समय-सीमा भूल जाना।

  • नोटिस प्राप्त होने के बाद 15 दिन की भुगतान अवधि को नजरअंदाज करना।

  • गलत रकम वाले नोटिस को बिना जवाब या सलाह के छोड़ देना।

  • केवल WhatsApp संदेश को हर मामले में वैध कानूनी सेवा मान लेना।

  • बिना दस्तावेजों की जाँच के नया नोटिस भेज देना।

  • यह मान लेना कि नोटिस में कोई भी गलती होने से पूरा मामला समाप्त हो जाता है।

9. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1. Cheque Bounce होने के कितने दिन के अंदर Notice देना होता है?

बैंक से चेक बाउंस की सूचना प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर धारा 138 के तहत लिखित मांग-नोटिस भेजना होता है।

Q2. Cheque Bounce Notice मिलने के बाद कितने दिन में भुगतान करना होता है?

नोटिस प्राप्त होने के बाद 15 दिनों के भीतर संबंधित चेक राशि का भुगतान करने का अवसर दिया जाता है।

Q3. यदि ₹2 लाख के चेक पर ₹3 लाख का Notice आ जाए तो क्या करें?

चेक, बैंक मेमो और नोटिस का मिलान करें। नोटिस में वास्तविक चेक राशि की स्पष्ट मांग है या नहीं, इसकी जाँच करें। समय-सीमा को अनदेखा न करें और आवश्यकता होने पर लिखित जवाब भेजें।

Q4. क्या गलत Amount वाला Notice अपने आप Cancel हो जाता है?

नहीं। इसका निर्णय नोटिस की भाषा, मांग की प्रकृति और मामले के तथ्यों पर निर्भर करता है।

Q5. क्या Notice का जवाब देना अनिवार्य है?

धारा 138 के तहत नोटिस का जवाब देना हर मामले में स्वतंत्र वैधानिक शर्त नहीं है। फिर भी गलत मांग या विवादित देनदारी के मामले में उचित जवाब उपयोगी हो सकता है।

Q6. क्या Notice में गलती होने पर दूसरा Notice भेज सकते हैं?

कुछ परिस्थितियों में सुधारित नोटिस भेजने पर विचार किया जा सकता है, लेकिन समय-सीमा और पहले नोटिस की कानूनी स्थिति की जाँच जरूरी है। दूसरा नोटिस भेजना हर मामले में समाधान नहीं है।

निष्कर्ष

Cheque Bounce के मामलों में समय-सीमा और नोटिस की सही मांग बहुत महत्वपूर्ण हैं। बैंक से सूचना मिलने के बाद 30 दिनों के भीतर नोटिस भेजना, नोटिस प्राप्त होने के बाद 15 दिनों की भुगतान अवधि को समझना और शिकायत की समय-सीमा का पालन करना आवश्यक है।

यदि नोटिस में गलत रकम लिखी गई है, तो उसे न तो बिना जाँच के अमान्य मानें और न ही बिना सोचे स्वीकार करें। चेक, बैंक मेमो, लेन-देन के दस्तावेज और नोटिस की पूरी भाषा देखकर ही सही कानूनी कदम तय करें।

Legal4Helps.in का उद्देश्य: आम लोगों को कानूनी जानकारी सरल हिंदी में उपलब्ध कराना, ताकि वे अपने अधिकारों और कानूनी प्रक्रिया को बेहतर ढंग से समझ सकें।

अस्वीकरण: यह लेख सामान्य कानूनी जानकारी के लिए है, व्यक्तिगत कानूनी सलाह नहीं। वास्तविक मामले में दस्तावेजों और नवीनतम लागू कानून की जाँच किसी योग्य अधिवक्ता से कराएँ।


10. इस विषय से जुड़े महत्वपूर्ण Case Laws

ब्लॉग में कानूनी आधार मजबूत करने के लिए इन निर्णयों का उल्लेख करना उपयोगी होगा।

1. Suman Sethi v. Ajay K. Churiwal (2000) 2 SCC 380

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नोटिस को पूरी तरह पढ़कर समझना चाहिए। चेक की वास्तविक रकम स्पष्ट रूप से मांगी गई हो और ब्याज, खर्च या अन्य अतिरिक्त रकम अलग से बताई गई हो, तो केवल अतिरिक्त मांग होने से नोटिस अमान्य नहीं हो जाता। लेकिन चेक की रकम स्पष्ट न हो और केवल कुल रकम की अस्पष्ट मांग हो, तो नोटिस में कानूनी कमी हो सकती है।



2. Central Bank of India v. Saxons Farms (1999) 8 SCC 221

इस निर्णय में नोटिस का उद्देश्य समझाया गया: चेक जारी करने वाले को भुगतान करने का अवसर देना। नोटिस का मूल्यांकन उसके वास्तविक उद्देश्य और भाषा के संदर्भ में किया जाता है।

CaseMine

कानूनी सावधानी: यदि नोटिस में चेक की रकम ही गलत लिखी गई है, उदाहरण के लिए ₹2 लाख के चेक के बदले केवल ₹3 लाख की मांग है, तो यह स्थिति सही चेक राशि के साथ अलग से ब्याज या खर्च मांगने से भिन्न है। ऐसे मामले में नोटिस और संबंधित दस्तावेजों की व्यक्तिगत समीक्षा जरूरी है।


कानूनी नोटिस का जवाब

विषय: चेक बाउंस के संबंध में भेजे गए नोटिस में गलत राशि की मांग के संबंध में जवाब।

प्रति,
श्रीमान अधिवक्ता __________
पता: __________

महोदय,

आपके मुवक्किल श्री __________ की ओर से मुझे दिनांक __________ को प्राप्त कानूनी नोटिस के संबंध में मेरा जवाब निम्नलिखित है:

  1. यह कि आपके मुवक्किल द्वारा भेजे गए नोटिस में चेक संख्या __________, दिनांक , बैंक __________ के संबंध में ₹ की राशि का उल्लेख किया गया है।

  2. यह कि उक्त चेक पर अंकित वास्तविक राशि ₹__________ है, जबकि आपके नोटिस में ₹__________ की मांग की गई है। इस प्रकार नोटिस में वर्णित राशि और चेक की वास्तविक राशि के बीच अंतर है।

  3. यह कि नोटिस में मांगी गई अतिरिक्त राशि का आधार, गणना और विवरण स्पष्ट नहीं है। अतः आपके मुवक्किल से अनुरोध है कि वे अपने दावे का आधार और संबंधित दस्तावेज स्पष्ट करें।

  4. यह कि नोटिस की वैधता का निर्धारण उसकी पूरी भाषा, चेक की वास्तविक राशि तथा लागू कानून के अनुसार किया जाना चाहिए। इस जवाब के माध्यम से मैं नोटिस में वर्णित प्रत्येक आरोप या मांग को स्वीकार नहीं करता/करती, सिवाय उन तथ्यों के जिन्हें स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया हो।

  5. यह कि मेरे सभी वैधानिक अधिकार एवं बचाव सुरक्षित हैं। इस जवाब को किसी ऐसी देनदारी की स्वीकृति न माना जाए जिसे मैंने स्पष्ट रूप से स्वीकार नहीं किया है।

अतः आपसे अनुरोध है कि अपने मुवक्किल को वास्तविक तथ्यों और दस्तावेजों के अनुरूप अपना दावा स्पष्ट करने की सलाह दें।

यह जवाब मेरे सभी उपलब्ध कानूनी अधिकारों और बचावों को सुरक्षित रखते हुए भेजा जा रहा है।

दिनांक: __________
स्थान: __________

भवदीय,
नाम: __________
पता: __________
हस्ताक्षर: __________


12. ड्राफ्ट नंबर 2 — सही राशि के लिए Cheque Bounce Legal Notice

यह चेक धारक की ओर से धारा 138 NI Act के अंतर्गत नोटिस का सामान्य नमूना है। इसे निर्धारित समय-सीमा में वास्तविक तथ्यों के अनुसार तैयार किया जाना चाहिए।


कानूनी मांग-नोटिस

धारा 138, परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 के अंतर्गत

प्रेषक की ओर से:
श्री __________
पता: __________

प्रति:
श्री __________
पता: __________

महोदय/महोदया,

मेरे मुवक्किल श्री __________ के निर्देशानुसार आपको यह कानूनी नोटिस निम्नलिखित तथ्यों के आधार पर भेजा जा रहा है:

  1. यह कि आपने मेरे मुवक्किल से __________ के संबंध में ₹__________ की राशि प्राप्त की थी/आपके ऊपर ₹__________ की वैध देनदारी थी। इस देनदारी का वास्तविक आधार संबंधित दस्तावेजों के अनुसार है।

  2. यह कि उक्त देनदारी के भुगतान के लिए आपने मेरे मुवक्किल के पक्ष में चेक संख्या __________, दिनांक __________, बैंक __________, शाखा , राशि ₹ जारी किया था।

  3. यह कि मेरे मुवक्किल ने उक्त चेक को अपने बैंक में भुगतान हेतु प्रस्तुत किया, लेकिन बैंक ने इसे दिनांक __________ को __________ कारण से अनादृत कर दिया। बैंक का रिटर्न मेमो उपलब्ध है।

  4. यह कि बैंक से चेक अनादरण की सूचना प्राप्त होने के बाद, लागू कानूनी समय-सीमा के भीतर आपको यह लिखित मांग-नोटिस भेजा जा रहा है।

  5. अतः आपको इस नोटिस की प्राप्ति से 15 दिनों के भीतर चेक की वास्तविक राशि ₹__________ का भुगतान मेरे मुवक्किल को करने की मांग की जाती है।

  6. यदि आप उक्त निर्धारित अवधि में चेक की राशि का भुगतान नहीं करते हैं, तो मेरे मुवक्किल लागू कानून के अनुसार सक्षम न्यायालय में शिकायत एवं अन्य उचित कानूनी कार्यवाही करने के लिए स्वतंत्र होंगे। ऐसी कार्यवाही के परिणाम कानून के अनुसार निर्धारित होंगे।

यह नोटिस मेरे मुवक्किल के उपलब्ध कानूनी अधिकारों एवं अन्य वैध दावों को सुरक्षित रखते हुए भेजा जा रहा है।

दिनांक: __________
स्थान: __________

अधिवक्ता: __________
नाम एवं हस्ताक्षर: __________
पता: __________


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