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TTE ने टिकट रख लिया और यात्री को गाली दी तो क्या करें? Railway Act और BNS के तहत पूरी कानूनी जानकारी

TTE ने टिकट रख लिया और यात्री को गाली दी तो क्या करें? Railway Act और BNS के तहत पूरी कानूनी जानकारी

क्या TTE यात्री का जनरल टिकट अपने पास रख सकता है? गाली, धमकी और वीडियो बनाने पर जेल भेजने की बात—कानून क्या कहता है?

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Focus Keyword: TTE द्वारा टिकट रखने और यात्री से दुर्व्यवहार की शिकायत

Meta Description: क्या TTE जनरल टिकट चेक करते समय यात्री का टिकट अपने पास रख सकता है? क्या ड्यूटी के दौरान TTE का वीडियो बनाना अपराध है? गाली, धमकी और टिकट वापस न करने पर Rail Madad, GRP और न्यायालय में शिकायत कैसे करें—जानिए पूरी कानूनी जानकारी।

URL Slug: tte-ticket-retain-passenger-abuse-complaint-law


एक कहानी से समझिए पूरा मामला

राकेश को लखनऊ से कानपुर जाना था। उसने रेलवे स्टेशन के टिकट काउंटर से वैध जनरल टिकट खरीदा और जनरल डिब्बे में बैठकर यात्रा शुरू कर दी।

कुछ देर बाद एक स्टेशन से एक व्यक्ति डिब्बे में आया। उसने टिकट चेक करना शुरू किया और यात्रियों ने उसे TTE समझकर अपने-अपने टिकट दिखाने शुरू कर दिए।

राकेश ने भी अपना जनरल टिकट दिखाया।

व्यक्ति ने टिकट अपने हाथ में ले लिया।

राकेश ने पूछा—

“साहब, टिकट वापस कर दीजिए।”

उसने कहा—

“अभी मेरे पास रहेगा।”

इसी बीच कुछ यात्रियों ने मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया।

TTE ने यात्रियों से कहा—

“ड्यूटी के दौरान मेरा वीडियो बनाना गैरकानूनी है। अभी GRP बुलाकर सबको जेल भेज दूंगा।”

एक यात्री ने अपना टिकट वापस मांगते हुए कहा कि उसका टिकट वैध है और उसे आगे यात्रा करनी है।

इस पर TTE ने उसे कथित रूप से अपशब्द और मां-बहन की गालियां देना शुरू कर दिया।

कुछ यात्रियों ने फिर अपना टिकट वापस मांगा, लेकिन टिकट वापस नहीं किए गए।

अगले स्टेशन पर वह व्यक्ति ट्रेन से उतर गया।

अब यात्रियों के सामने कई प्रश्न थे—

  • क्या TTE को टिकट चेक करने का अधिकार था?

  • क्या वह वैध जनरल टिकट अपने पास रख सकता था?

  • क्या टिकट वापस न करना कानूनी है?

  • क्या ड्यूटी के दौरान TTE का वीडियो बनाना अपराध है?

  • क्या गाली देना अपराध हो सकता है?

  • क्या “GRP बुलाकर जेल भेज दूंगा” कहना criminal intimidation है?

  • क्या Rail Madad पर शिकायत की जा सकती है?

  • अगर Railway Department कार्रवाई नहीं करता तो क्या Magistrate के सामने मामला ले जाया जा सकता है?

आइए एक-एक प्रश्न समझते हैं।


1. क्या TTE को जनरल डिब्बे में टिकट चेक करने का अधिकार है?

हां।

Railways Act, 1989 की धारा 54 के अनुसार अधिकृत railway servant मांग किए जाने पर यात्री को यात्रा के दौरान या यात्रा के अंत में टिकट examination के लिए प्रस्तुत करने को कह सकता है।

रेलवे के Commercial Manual में भी Travelling Ticket Examiners के कर्तव्यों में यात्रियों के टिकटों की जांच, irregular travel का पता लगाना और रेलवे के वैध dues की recovery शामिल है।

इसलिए केवल यह तथ्य कि TTE जनरल डिब्बे में टिकट चेक कर रहा था, अपने-आप में गलत नहीं है।


2. लेकिन क्या वैध टिकट लेकर यात्रा कर रहे यात्री का टिकट TTE हमेशा अपने पास रख सकता है?

यहां महत्वपूर्ण अंतर है।

Railways Act की धारा 54 कहती है कि यात्री को टिकट examination के लिए प्रस्तुत करना होता है और टिकट को surrender करने की बात यात्रा के अंत में या specified-period ticket की अवधि समाप्त होने पर आती है।

Railway Commercial Manual में भी टिकट checking और collection के लिए अलग व्यवस्था है। Destination पर टिकट collection की व्यवस्था बताई गई है।

इसलिए यदि:

  • यात्री के पास वैध टिकट था,

  • TTE ने केवल जांच के लिए टिकट लिया,

  • टिकट में कोई irregularity नहीं थी,

  • कोई excess fare/EFT की कार्रवाई नहीं की गई,

  • और TTE टिकट लेकर अगले स्टेशन पर उतर गया,

तो शिकायत में यह तथ्य स्पष्ट रूप से दर्ज करना चाहिए

यह कहना अधिक सही होगा कि:

“टिकट जांचने के नाम पर मेरा वैध टिकट अपने पास रख लिया गया और यात्रा समाप्त होने से पहले मुझे वापस नहीं दिया गया।”

अंतिम कानूनी निष्कर्ष उपलब्ध तथ्यों और रेलवे के लागू procedure पर निर्भर करेगा।


3. अगर टिकट में कमी थी तो TTE क्या कर सकता है?

यदि किसी यात्री के पास proper ticket नहीं है या वह अधिक दूरी/उच्च श्रेणी में यात्रा कर रहा है, तो Railways Act की धारा 138 के तहत excess fare और applicable excess charge की प्रक्रिया हो सकती है।

ऐसी स्थिति में TTE को नियम के अनुसार charge recover करना और prescribed document/receipt देना चाहिए।

Railway के official ticket-checking material में भी TTE द्वारा dues collect करने और receipt issue करने की व्यवस्था का उल्लेख है।

इसलिए यदि TTE ने पैसा लिया लेकिन receipt नहीं दी, तो complaint में यह तथ्य विशेष रूप से लिखना चाहिए।


4. क्या TTE को अपनी पहचान बतानी चाहिए?

इस मामले में भी एक महत्वपूर्ण distinction है।

हर ticket-checking situation में यात्री के सामने कोई अलग से सरकारी ID card लटकाना ही अनिवार्य है—ऐसा सामान्य निष्कर्ष केवल इस आधार पर नहीं निकाला जाना चाहिए।

लेकिन Railway के official training material में ticket-checking staff के लिए prescribed uniform, name badge/name plate और पहचान योग्य official equipment जैसी requirements दिखाई देती हैं। उदाहरण के लिए official Railway material में Ticket Collectors के लिए prescribed uniform, name badge और name plate का उल्लेख है।

इसलिए यदि कोई व्यक्ति:

  • uniform/identity नहीं दिखाता,

  • नाम नहीं बताता,

  • पहचान बताने से इनकार करता,

  • टिकट लेता है,

  • पैसे मांगता है,

तो यात्री को उसकी identity verify करने और शिकायत में उसका नाम/बकल नंबर/पद/ट्रेन/कोच/समय लिखने का पूरा प्रयास करना चाहिए।

यदि व्यक्ति वास्तव में रेलवे कर्मचारी नहीं था और TTE बनकर यात्रियों से पैसे/टिकट ले रहा था, तो मामला और गंभीर हो सकता है।


5. क्या TTE के ड्यूटी के दौरान वीडियो बनाना अपराध है?

सिर्फ वीडियो बनाना अपने-आप में अपराध है—ऐसा blanket rule नहीं है।

यदि यात्री केवल यह रिकॉर्ड कर रहा है कि रेलवे कर्मचारी उसके साथ कैसा व्यवहार कर रहा है, तो केवल “आप मेरा वीडियो बना रहे हैं इसलिए आपको जेल भेज दूंगा” कहना अपने-आप कोई कानूनी आदेश नहीं बन जाता।

लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं कि हर परिस्थिति में रिकॉर्डिंग की कोई सीमा नहीं हो सकती।

यदि कोई व्यक्ति:

  • TTE के काम में वास्तविक physical obstruction करे,

  • मारपीट करे,

  • सुरक्षा व्यवस्था में बाधा डाले,

  • restricted railway area में unauthorized entry करे,

  • या किसी अन्य स्वतंत्र अपराध को अंजाम दे,

तो अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं।

लेकिन “ड्यूटी के दौरान मेरा वीडियो बनाना = सीधे जेल” कहना बहुत व्यापक दावा है।


6. क्या यात्रियों को गाली देना अपराध हो सकता है?

हाँ, परिस्थितियों के अनुसार।

BNS की धारा 352 intentional insult से संबंधित है। यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी को insult करता है और ऐसी परिस्थिति पैदा करता है जिससे public peace breach होने की संभावना हो, तो यह अपराध बन सकता है।

इसके लिए दो वर्ष तक का imprisonment, fine या दोनों का प्रावधान है।

इसलिए यदि TTE ने किसी यात्री को जानबूझकर अपमानित करने के उद्देश्य से गालियां दीं, तो complaint में केवल “दुर्व्यवहार किया” न लिखकर, यदि संभव हो तो exact words और घटना के witnesses का उल्लेख करना बेहतर होगा।


7. “तुम्हें GRP बुलाकर जेल भेज दूंगा”—क्या यह Criminal Intimidation हो सकता है?

BNS की धारा 351 criminal intimidation से संबंधित है।

यदि धमकी देकर किसी व्यक्ति में alarm पैदा किया जाता है या उसे कोई काम करने/न करने के लिए मजबूर किया जाता है, तो परिस्थितियों के अनुसार criminal intimidation का मामला बन सकता है।

सामान्य criminal intimidation के लिए दो वर्ष तक की सजा, fine या दोनों हो सकते हैं।

लेकिन हर कठोर या गुस्से में कही गई बात automatically criminal intimidation नहीं बनती।

इसलिए complaint में पूरा context लिखना जरूरी है:

“जब हमने अपना वैध टिकट वापस मांगा और घटना की recording करने लगे, तब TTE ने कहा कि वीडियो बनाना गैरकानूनी है और GRP बुलाकर जेल भेज देगा।”

इस तरह Magistrate/police पूरी परिस्थिति देख सकती है।


8. अगर TTE ने यात्री को मारा भी हो तो?

यदि केवल गाली नहीं बल्कि physical assault भी हुआ हो, तो BNS में hurt/assault से संबंधित धाराएं facts के अनुसार लागू हो सकती हैं।

ऐसी स्थिति में तुरंत:

  • medical examination,

  • photographs,

  • video,

  • witnesses,

  • Rail Madad complaint,

  • GRP complaint

जैसे evidence सुरक्षित करना चाहिए।

2024 में Barauni-Lucknow Express में एक TTE द्वारा passenger को थप्पड़ मारने और abuse करने का video सामने आने पर Railway ने TTE को suspend कर inquiry शुरू की थी। Railway Minister ने भी मामले में “zero tolerance” की बात कही थी।

इससे यह स्पष्ट है कि TTE की official position उसे passenger के साथ physical assault या abusive conduct का अधिकार नहीं देती।


9. TTE के खिलाफ Railway में शिकायत की जा सकती है?

बिल्कुल।

Rail Madad के official FAQ में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि Railway staff के खिलाफ “Staff Behavior” category में complaint दर्ज की जा सकती है। Complaint Web/App, SMS और 139 helpline के माध्यम से की जा सकती है।

Complaint के प्रमुख माध्यम

Rail Madad

139

और Railway की grievance mechanism.

Rail Madad complaint को track करने की सुविधा भी उपलब्ध है।


10. शिकायत में क्या-क्या लिखना चाहिए?

एक मजबूत complaint में केवल यह न लिखें—

“TTE ने बदतमीजी की।”

बल्कि इस प्रकार details दें:

यात्रा की जानकारी

  • Train number

  • Train name

  • यात्रा की तारीख

  • boarding station

  • destination

  • coach/general compartment

  • approximate time

TTE की पहचान

  • नाम

  • designation

  • badge/name plate number, यदि दिखाई दिया

  • uniform का विवरण

  • किस स्टेशन से चढ़ा

  • किस स्टेशन पर उतरा

घटना

  • किस तरह टिकट check किया

  • टिकट कब लिया

  • टिकट वापस मांगा या नहीं

  • क्या टिकट वापस किया गया

  • क्या पैसे लिए

  • receipt दी या नहीं

  • क्या गाली दी

  • exact abusive words, यदि आवश्यक हो

  • क्या धमकी दी

  • क्या video बनाने पर रोकने की कोशिश की

  • कितने passenger eyewitness थे


11. CCTV और Video सबसे महत्वपूर्ण evidence हो सकता है

यदि घटना ट्रेन में हुई है तो:

  • passenger का original video,

  • अन्य passengers के videos,

  • train CCTV जहां उपलब्ध हो,

  • station CCTV,

  • Rail Madad complaint number,

  • ticket/UTS details,

  • witnesses

बहुत महत्वपूर्ण evidence बन सकते हैं।

Original video को edit करके social media पर डालने से पहले उसे सुरक्षित रखें।

Original file, metadata और backup रखें।


12. एक महत्वपूर्ण न्यायिक उदाहरण — Harish Tewari v. Travelling Ticket Examiner

Harish Tewari v. Vimal Kumar Singh, Travelling Ticket Examiner & Others, 1995 Cri LJ 3859 में passenger ने आरोप लगाया था कि TTE और senior ticket examiner ने पैसे लेने के बाद receipt देने में विवाद होने पर उसे filthy language में abuse किया, धमकाया और मारपीट की। मामला criminal proceedings तक गया था।

यह फैसला पुराने IPC framework से संबंधित है, इसलिए आज के मामले में वर्तमान BNS/BNSS provisions देखे जाएंगे; लेकिन यह case यह दिखाने के लिए उपयोगी है कि रेलवे कर्मचारी के खिलाफ passenger के साथ abuse/threat/assault के आरोप न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच सकते हैं।


13. एक और महत्वपूर्ण मामला — P. Tejeswar Rao v. South Eastern Railway

2025 के एक मामले में एक Railway CTI के विरुद्ध passenger की Rail Madad complaint के बाद misconduct के आरोप सामने आए और passenger ने GRP में FIR भी दर्ज कराई थी। मामले में CCTV footage का भी उल्लेख हुआ।

इससे एक महत्वपूर्ण बात सामने आती है:

Rail Madad complaint और criminal complaint दो अलग-अलग रास्ते हो सकते हैं।

एक departmental action के लिए और दूसरा criminal offence के लिए।


14. Railway Department कार्रवाई न करे तो क्या मामला न्यायालय में जा सकता है?

हां।

लेकिन यहां दो अलग रास्ते समझना जरूरी है।

पहला रास्ता — Departmental complaint

Rail Madad/रेलवे अधिकारियों के समक्ष complaint देकर departmental inquiry/action की मांग की जा सकती है।

Railway Servants (Discipline & Appeal) Rules, 1968 के तहत Railway employee के विरुद्ध disciplinary proceedings हो सकती हैं। Railway Board ने 2026 में भी इन Rules के तहत disciplinary proceedings की procedure पर instructions जारी किए हैं।

Departmental punishment और criminal punishment अलग चीजें हैं।


15. दूसरा रास्ता — Criminal case

यदि TTE के conduct से किसी cognizable offence के ingredients बनते हैं, तो complaint police/GRP को दी जा सकती है।

यदि police complaint/FIR दर्ज नहीं करती, तो वर्तमान BNSS के तहत:

BNSS Section 173(4)

Senior police officer/SP को written complaint भेजने का रास्ता उपलब्ध है।

और circumstances के अनुसार:

BNSS Section 175(3)

Magistrate के समक्ष application देकर investigation/FIR के लिए appropriate direction मांगी जा सकती है।

यह रास्ता केवल इसलिए बंद नहीं हो जाता कि आरोपी Railway employee है।


16. क्या सीधे Magistrate के सामने private complaint भी हो सकती है?

हाँ, facts और applicable procedure के अनुसार Magistrate के समक्ष complaint case का रास्ता भी हो सकता है।

लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात है।

यदि आरोपी सरकारी कर्मचारी है और alleged act उसके official duty के दौरान/official duty से जुड़ा बताया जाता है, तो prosecution में statutory sanction/procedural protection के प्रश्न उठ सकते हैं।

इसलिए Railway employee के खिलाफ criminal case file करते समय केवल धाराएं लिख देना पर्याप्त नहीं है।

यह देखना जरूरी है कि:

  • alleged act क्या था?

  • क्या वह official duty का हिस्सा था?

  • क्या sanction की आवश्यकता है?

  • कौन-सा court competent है?

  • घटना किस jurisdiction में हुई?


17. क्या TTE के खिलाफ BNS की धारा 352 और 351 लग सकती है?

संभव है, लेकिन facts पर निर्भर करेगा।

उदाहरण के लिए:

गाली

यदि जानबूझकर insult किया गया और statutory ingredients पूरे होते हैं:

BNS 352

धमकी

यदि धमकी देकर alarm पैदा करने या व्यक्ति को कोई कार्य करने/न करने के लिए मजबूर करने का element है:

BNS 351

मारपीट

यदि physical assault/hurt हुआ:

Facts के अनुसार संबंधित BNS provisions

सरकारी कार्य में obstruction

यदि यात्री ने TTE के lawful duty को obstruct किया, तो passenger के खिलाफ भी अलग कानून लागू हो सकता है।

इसलिए शिकायतकर्ता को भी यह ध्यान रखना चाहिए कि complaint सच्चे facts पर आधारित हो और fabricated allegations न हों।


18. क्या “GRP बुलाकर जेल भेज दूंगा” कहने से TTE वास्तव में किसी को जेल भेज सकता है?

TTE स्वयं न्यायालय नहीं है।

यदि passenger ने कोई अपराध किया है तो Railway staff परिस्थितियों के अनुसार GRP/RPF/Police को सूचना दे सकता है और applicable legal procedure अपनाया जा सकता है।

लेकिन:

“मैं तुम्हें जेल भेज दूंगा”

को किसी कर्मचारी का व्यक्तिगत दंडादेश नहीं माना जा सकता।

किसी व्यक्ति को अपराधी घोषित करना और अंतिम punishment देना न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।


19. अगर TTE ने टिकट रख लिया और बाद में वापस नहीं किया तो क्या करें?

सबसे पहले तुरंत ये details लिखें:

Train Number:
Date:
Coach: General
Boarding Station:
Destination:
Ticket Number/UTS Number:
Ticket Amount:
TTE का नाम/पहचान:
किस स्टेशन से चढ़ा:
किस स्टेशन पर उतरा:
कितने यात्रियों के टिकट लिए:
किस-किस passenger ने घटना देखी:

फिर Rail Madad complaint में स्पष्ट रूप से लिखें:

“Valid general tickets were collected by the ticket-checking staff during journey and were not returned before the staff member got down at the next station. When passengers asked for their tickets, the staff allegedly abused passengers and threatened them with GRP/jail action for recording the incident. Kindly preserve CCTV/video evidence, identify the concerned staff member from duty roster and take appropriate departmental and legal action.”

Rail Madad पर staff behavior complaint का facility officially उपलब्ध है।


20. सबसे महत्वपूर्ण बात — TTE का भी एक duty standard है

Railway के official Ticket Checking Organisation document में साफ कहा गया है कि ticket-checking organization को passengers के साथ courteous, polite and sympathetic व्यवहार करना चाहिए और passengers को सही information और guidance देना चाहिए।

Official Railway material में यह भी बताया गया है कि टिकट checking इस तरह होनी चाहिए जिससे passengers को least inconvenience हो।

इसलिए टिकट check करने का statutory authority होना और passenger के साथ मनमाना व्यवहार करने का अधिकार होना—दो अलग बातें हैं।


21. “कहां-कहां सजा के लिए भेजना चाहिए?”

यह भाषा थोड़ी बदलकर समझना बेहतर होगा।

यात्री किसी TTE को स्वयं “सजा के लिए कहीं भेज” नहीं सकता।

सही प्रक्रिया यह है:

Departmental misconduct

Rail Madad → Divisional Commercial authorities → disciplinary authority

Criminal offence

GRP/Police → Investigation → Charge-sheet/Final report → Magistrate/Court

Police FIR न लिखे

SP → फिर आवश्यकता होने पर Magistrate

Department action न करे

Departmental representation/appropriate higher authority और परिस्थितियों के अनुसार judicial remedy.

अर्थात सजा देने का अधिकार competent disciplinary authority या criminal court के पास होता है।


22. क्या वीडियो शिकायत में लगाया जा सकता है?

हां, यदि वह घटना का genuine recording है तो वह महत्वपूर्ण supporting evidence हो सकता है।

लेकिन वीडियो के साथ:

  • original file रखें,

  • editing न करें,

  • date/time details रखें,

  • जिस passenger ने recording की उसकी पहचान रखें,

  • अन्य eyewitnesses की जानकारी रखें।

यदि वीडियो में TTE की पहचान स्पष्ट है तो यह departmental inquiry में बहुत उपयोगी हो सकता है।


निष्कर्ष

इस कहानी में TTE का टिकट चेक करना अपने-आप में गैरकानूनी नहीं है। Railways Act की धारा 54 अधिकृत railway servant को टिकट examination की शक्ति देती है।

लेकिन इसके साथ passenger के अधिकार और Railway employee के conduct standards भी महत्वपूर्ण हैं।

यदि कोई TTE:

  • वैध टिकट जांचता है,

  • बिना स्पष्ट प्रक्रिया के टिकट अपने पास रख लेता है,

  • टिकट वापस नहीं करता,

  • receipt के बिना पैसे लेता है,

  • यात्रियों को गाली देता है,

  • वीडियो बनाने पर बिना कानूनी आधार के “जेल भेजने” की धमकी देता है,

तो passenger को घटना को केवल “TTE से बहस” मानकर छोड़ देना आवश्यक नहीं है।

Rail Madad/139 पर staff-behaviour complaint, Railway अधिकारियों के समक्ष departmental complaint और यदि facts से criminal offence बनता है तो GRP/Police तथा आवश्यकता पड़ने पर Magistrate के समक्ष कानूनी remedy उपलब्ध हो सकती है।

सबसे मजबूत शिकायत वही होगी जिसमें केवल आरोप न हों, बल्कि train number + date + coach + ticket details + TTE की पहचान + exact words + witnesses + video/CCTV + ticket वापस न करने का तथ्य स्पष्ट रूप से दर्ज हो।

कानूनी अस्वीकरण: यह लेख सामान्य कानूनी जानकारी के लिए है। वास्तविक मामले में कौन-सी BNS धाराएं लागू होंगी, यह exact words, conduct, evidence, ticket की स्थिति और घटना की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। पुराने IPC के मामलों को आज के मामले में BNS की धाराओं के साथ mechanically समान नहीं माना जाना चाहिए।

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