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Supreme Court Judgments February 2026

IPC धारा 317 और BNS धारा 93 शिशु को त्यागने पर भारतीय कानून के दंड और प्रावधान

IPC की धारा 317 और BNS की धारा 93: →

 शिशु को त्यागने और कानूनी दंड पर विस्तार से विश्लेषण →

भारतीय दंड संहिता (IPC) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत शिशु की देखभाल और सुरक्षा को अत्यधिक प्राथमिकता दी जाती है। IPC की धारा 317 और BNS की धारा 93, शिशु को जानबूझकर त्यागने या अव्यवस्थित तरीके से छोड़ने से संबंधित हैं, जो समाज में असुरक्षा का कारण बन सकता है। इस ब्लॉग में हम इन दोनों धाराओं का विस्तार से विश्लेषण करेंगे, उदाहरणों के माध्यम से इसे समझेंगे, और यह जानेंगे कि ये धाराएँ शिशु और बच्चे की सुरक्षा को कैसे सुनिश्चित करती हैं।

 IPC की धारा 317: शिशु को त्यागने का अपराध →

IPC की धारा 317 के तहत किसी भी व्यक्ति द्वारा शिशु को त्यागने, छोड़ने या उसे छोड़कर असुरक्षित स्थान पर छोड़ने का अपराध माना जाता है। इस धारा का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिशु को जानबूझकर त्यागने वाले अपराधी को सजा मिले, ताकि समाज में शिशुओं की सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी को बढ़ावा मिल सके।

IPC धारा 317 के तहत दंड →

IPC की धारा 317 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी शिशु को त्यागता है और उसे किसी असुरक्षित स्थिति में छोड़ता है, तो वह दोषी ठहराया जा सकता है। इसके तहत, अपराधी को 7 साल तक की सजा, जुर्माना, या दोनों का दंड हो सकता है। यह दंड शिशु की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ऐसे अपराधियों को सजा देने का उद्देश्य रखता है।

BNS की धारा 93: नए कानून में शिशु को त्यागने पर प्रावधान →

BNS की धारा 93 में IPC की धारा 317 का स्थान लिया है, और इसमें शिशु को त्यागने या छोड़ने से संबंधित अपराधों को नियंत्रित करने का काम किया गया है। इस धारा का उद्देश्य शिशु की सुरक्षा सुनिश्चित करना और शिशु के लिए जिम्मेदारी तय करना है, ताकि कोई भी व्यक्ति किसी शिशु को असुरक्षित स्थानों पर छोड़ने की सोच भी न सके।

BNS धारा 93 के तहत दंड →

BNS की धारा 93 के तहत भी शिशु को त्यागने या असुरक्षित स्थानों पर छोड़ने के मामले में कठोर दंड का प्रावधान है। इस धारा के तहत, अपराधी को 7 साल तक की सजा, जुर्माना, या दोनों का सामना करना पड़ सकता है। इस दंड का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शिशुओं को किसी भी स्थिति में असुरक्षित न छोड़ा जाए।

 उदाहरण: IPC धारा 317 और BNS धारा 93 का व्यावहारिक दृष्टांत →

उदाहरण 1: किसी महिला द्वारा शिशु को त्यागना →

मान लीजिए एक महिला किसी कठिन परिस्थिति के कारण अपने नवजात शिशु को एक सुनसान जगह पर छोड़ देती है। इस मामले में, महिला पर IPC धारा 317 और BNS धारा 93 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। महिला को इसके लिए 7 साल तक की सजा और जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। यह मामला शिशु की सुरक्षा से संबंधित गंभीर अपराध है और कानून इसे सख्ती से नियंत्रित करता है।

उदाहरण 2: शिशु को सड़क पर छोड़ना →

एक व्यक्ति अपने घर के पास एक नवजात शिशु को सड़क पर छोड़ देता है, जो पूरी तरह से असुरक्षित है। इस स्थिति में, आरोपी पर IPC धारा 317 और BNS धारा 93 के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। दोषी को अपराधी ठहराते हुए, उसे कठोर सजा दी जा सकती है, ताकि भविष्य में ऐसा अपराध न हो।

उदाहरण 3: अपराधी द्वारा शिशु को छोड़ने के परिणामस्वरूप मृत्यु →

एक व्यक्ति अपने शिशु को जानबूझकर त्याग देता है और उसे एक सुनसान स्थान पर छोड़ देता है। शिशु को समय पर मदद नहीं मिल पाती और उसकी मृत्यु हो जाती है। इस मामले में आरोपी पर IPC धारा 317 और BNS धारा 93 के तहत हत्या या शिशु की जान को खतरे में डालने का मामला भी दर्ज हो सकता है। इस स्थिति में अपराधी को कड़ी सजा दी जाएगी।

उदाहरण 4: माता-पिता द्वारा शिशु को छोड़ना →

एक परिवार अपने नवजात शिशु को केवल इसलिए त्याग देता है क्योंकि वह शिशु उनके लिए अवांछित होता है। वे उसे किसी दूरस्थ इलाके में छोड़ देते हैं, जहां शिशु को जीवन के लिए आवश्यक देखभाल नहीं मिलती। इस मामले में भी IPC धारा 317 और BNS धारा 93 के तहत दंड का प्रावधान है, और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि अपराधी को सजा मिले।

 निष्कर्ष: IPC धारा 317 और BNS धारा 93 का महत्व →

IPC धारा 317 और BNS धारा 93 शिशु की सुरक्षा और देखभाल से संबंधित महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान हैं। इन धाराओं के अंतर्गत शिशु को जानबूझकर त्यागने या उसे असुरक्षित स्थान पर छोड़ने वाले अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है। 

इन धाराओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी व्यक्ति शिशु को असुरक्षित तरीके से छोड़ने का प्रयास न करे और इस तरह के अपराधों को रोकने के लिए कानून में कड़ी सजा का प्रावधान हो। शिशु की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इन धाराओं को लागू करना बहुत महत्वपूर्ण है, ताकि समाज में शिशुओं की सुरक्षा की दिशा में जागरूकता और जिम्मेदारी बढ़े।

इस प्रकार, IPC धारा 317 और BNS धारा 93 ने समाज में शिशु और बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, और इन कानूनी प्रावधानों का पालन करना हमारे समाज की जिम्मेदारी है।

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