भारतीय न्यायपालिका का सर्वोच्च स्तंभ सुप्रीम कोर्ट समय-समय पर ऐसे ऐतिहासिक और मार्गदर्शक निर्णय देता है, जो न केवल न्यायिक प्रक्रिया बल्कि आम नागरिकों के अधिकारों, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और सरकारी नीतियों को भी प्रभावित करते हैं।
8 फरवरी 2026 से 14 फरवरी 2026 के बीच दिए गए रिपोर्टेबल जजमेंट्स में व्यक्तिगत स्वतंत्रता, जमानत, भूमि अधिग्रहण, देरी की माफी (Condonation of Delay), पर्यावरण संरक्षण, पेंशन, दिवालियापन कानून (IBC) और खेल संघों के अधिकार जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।
1. STATE OF ODISHA v. MANAGING COMMITTEE OF NAMATARA GIRLS HIGH SCHOOL (2026 INSC 148)
मुख्य विषय: देरी की माफी और सरकारी लापरवाही
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल सरकारी प्रक्रिया में देरी या फाइलों के लंबित रहने को "पर्याप्त कारण" (Sufficient Cause) नहीं माना जा सकता।
महत्वपूर्ण बिंदु:
धारा 5, लिमिटेशन एक्ट के तहत देरी की माफी के लिए वास्तविक और उचित कारण आवश्यक है।
“सरकारी मशीनरी की सुस्ती” को अदालत ने अस्वीकार्य माना।
न्यायालय ने कहा कि सरकार भी सामान्य वादकारी (litigant) की तरह जवाबदेह है।
प्रभाव:
अब सरकारें केवल प्रशासनिक देरी का हवाला देकर अपील में देरी को सही नहीं ठहरा पाएंगी।
2. SUMIT v. STATE OF U.P. (2026 INSC 145)
मुख्य विषय: अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) की अवधि
इस निर्णय में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अग्रिम जमानत केवल चार्जशीट दाखिल होने तक सीमित नहीं हो सकती।
प्रमुख निष्कर्ष:
धारा 438 CrPC के तहत दी गई जमानत सामान्यतः पूरे ट्रायल तक प्रभावी रहती है।
इसे किसी प्रक्रिया-आधारित चरण तक सीमित करना अनुचित है।
अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता सर्वोपरि है।
महत्व:
यह फैसला उन लोगों के लिए राहतकारी है जो झूठे मामलों में फंसाए जाते हैं।
3. THE DEPUTY COMMISSIONER v. M/S S.V. GLOBAL MILL LIMITED (2026 INSC 138)
मुख्य विषय: भूमि अधिग्रहण और लिमिटेशन एक्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 की धारा 74 के तहत अपील में भी लिमिटेशन एक्ट की धारा 5 लागू होगी।
प्रभाव:
मुआवजा मामलों में अपील की देरी को उचित कारण होने पर माफ किया जा सकेगा।
यह निर्णय भूमि मालिकों के हित में है।
4. DR. ANAND RAI v. STATE OF MADHYA PRADESH (2026 INSC 141)
विषय: आरोप तय करते समय न्यायिक कर्तव्य
कोर्ट ने कहा:
आरोप तय करते समय prima facie साक्ष्य होना आवश्यक है।
SC/ST एक्ट के तहत अपील में स्वतंत्र परीक्षण आवश्यक है।
संदेश:
न्यायालय केवल औपचारिकता के आधार पर आरोप तय नहीं कर सकते।
5. HEMLATA EKNATH PISE v. SHUBHAM BAHU UDDESHIYA SANSTHA (2026 INSC 147)
विषय: हाई कोर्ट द्वारा सभी मुद्दों का निर्णय
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट केवल एक मुद्दे के आधार पर केस को रिमांड नहीं कर सकता; उसे सभी मुद्दों पर निर्णय देना होगा।
6. K. RAJAIAH v. THE HIGH COURT FOR THE STATE OF TELANGANA (2026 INSC 142)
विषय: अनुशासनात्मक कार्रवाई की न्यायिक समीक्षा
कोर्ट ने पाया कि जालसाजी का आरोप विशेषज्ञ जांच के बिना लगाया गया था।
निर्णय:
सेवा से हटाने का आदेश रद्द।
पुनः नियुक्ति का आदेश।
7. N. MANOHARAN v. THE ADMINISTRATIVE OFFICER (2026 INSC 143)
विषय: ग्रेच्युटी एक्ट का दायरा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा:
जो कर्मचारी CCS Pension Rules के अधीन हैं, वे Payment of Gratuity Act के तहत कर्मचारी की परिभाषा में नहीं आते।
8. ZEBA KHAN v. STATE OF U.P. (2026 INSC 144)
विषय: जमानत में आपराधिक इतिहास छिपाना
कोर्ट ने कहा:
जमानत आवेदन में पूर्व मामलों की पूरी जानकारी देना अनिवार्य।
तथ्य छिपाने पर जमानत रद्द की जा सकती है।
9. B. PRASHANTH HEGDE v. STATE BANK OF INDIA (2026 INSC 155)
विषय: IBC और लिमिटेशन
कोर्ट ने स्पष्ट किया:
बैलेंस शीट में ऋण की स्वीकृति लिमिटेशन बढ़ा सकती है।
पुनर्गठन समझौता भी लिमिटेशन को प्रभावित करता है।
10. R. SAVITHRI NAIDU v. THE COTTON CORPORATION OF INDIA LTD (2026 INSC 150)
विषय: Lis Pendens सिद्धांत
मुकदमे के दौरान संपत्ति हस्तांतरण करने वाला व्यक्ति डिक्री के निष्पादन में बाधा नहीं डाल सकता।
11. UNION OF INDIA v. SGT GIRISH KUMAR (2026 INSC 149)
विषय: विकलांगता पेंशन
ब्रॉड बैंडिंग लाभ 3 वर्ष तक सीमित नहीं।
जब अधिकार स्थापित हो जाए, तो पूर्ण लाभ मिलना चाहिए।
12. BALMUKUND SINGH GAUTAM v. STATE OF MADHYA PRADESH (2026 INSC 157)
विषय: फरार आरोपी और अग्रिम जमानत
जो आरोपी न्याय से भाग रहा है, उसे अग्रिम जमानत नहीं।
सह-आरोपी की बरी होने से स्वतः समानता का अधिकार नहीं मिलता।
13. HARBINDER SINGH SEKHON v. THE STATE OF PUNJAB (2026 INSC 159)
विषय: पर्यावरण और मास्टर प्लान
प्रशासनिक अनुमति मास्टर प्लान से ऊपर नहीं।
पर्यावरणीय सुरक्षा कमजोर करना असंवैधानिक।
14. MANOJ v. THE STATE OF MAHARASHTRA (2026 INSC 152)
विषय: आवश्यक वस्तु अधिनियम
यदि नियंत्रण आदेश समाप्त हो चुका है, तो अभियोजन जारी नहीं रह सकता।
15. STATE BANK OF INDIA v. UNION OF INDIA (2026 INSC 153)
विषय: स्पेक्ट्रम और IBC
स्पेक्ट्रम प्राकृतिक संसाधन है।
यह कॉर्पोरेट देनदार की संपत्ति नहीं माना जाएगा।
16. THE TIRUCHIRAPPALLI DISTRICT CRICKET ASSOCIATION v. ANNA NAGAR CRICKET CLUB (2026 INSC 154)
विषय: खेल संघों की स्वायत्तता
सामान्य खेल सुधार नियम क्रिकेट संघों पर स्वतः लागू नहीं।
न्यायालय आंतरिक संरचना में सीमित हस्तक्षेप करेगा।
17. ZUBAIR P. v. STATE OF KERALA (2026 INSC 151)
विषय: शिक्षा नियमों की व्याख्या
SET योग्यता उसी विषय से संबंधित होनी चाहिए जिसमें नियुक्ति हो रही है।
शैक्षणिक मानकों को बनाए रखना आवश्यक।
निष्कर्ष
8 फरवरी से 14 फरवरी 2026 के बीच सुप्रीम कोर्ट के ये निर्णय भारतीय कानून के विभिन्न क्षेत्रों में मार्गदर्शक सिद्ध हुए हैं।
इन फैसलों से स्पष्ट है कि:
व्यक्तिगत स्वतंत्रता सर्वोपरि है।
प्रशासनिक लापरवाही को संरक्षण नहीं मिलेगा।
पर्यावरणीय और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व अनिवार्य है।
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