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Supreme Court Judgments February 2026

रेंट एग्रीमेंट क्या होता है और क्यों जरूरी है? →पूरी जानकारी उदाहरण सहित बताओ।

रेंट एग्रीमेंट (किरायानामा) एक कानूनी दस्तावेज होता है, जो मकान मालिक और किरायेदार के बीच किया जाता है। इसमें दोनों पक्षों के अधिकार, जिम्मेदारियां, किराये की अवधि, किराया भुगतान की शर्तें, और अन्य नियम तय किए जाते हैं। यह समझौता विवादों से बचाने में मदद करता है और दोनों पक्षों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।

रेंट एग्रीमेंट का महत्व:→

रेंट एग्रीमेंट सिर्फ कागजी औपचारिकता नहीं होती, बल्कि यह मकान मालिक और किरायेदार दोनों के लिए कानूनी सुरक्षा का एक सशक्त साधन है। अगर कोई विवाद होता है, तो यह दस्तावेज कोर्ट में सबूत के रूप में काम करता है। उदाहरण के लिए, अगर मकान मालिक किरायेदार को बेवजह घर खाली करने के लिए कहता है, तो किरायेदार इस एग्रीमेंट को अदालत में दिखाकर अपनी किरायेदारी की सुरक्षा कर सकता है।

 रेंट एग्रीमेंट में क्या शामिल होता है?

1. मकान मालिक और किरायेदार का नाम और पता:→यह स्पष्ट होना चाहिए कि किसके बीच एग्रीमेंट हो रहा है।
   
2. संपत्ति का विवरण:  →किराये पर दी जा रही संपत्ति का पूरा विवरण, जैसे कि उसका पता, कितने कमरे हैं, और क्या-क्या सुविधाएं हैं, इसमें लिखा होता है।

3. किराया और जमा राशि:→इसमें मासिक किराये की राशि, जमा राशि (सिक्योरिटी डिपॉजिट), और कब और कैसे किराया जमा किया जाएगा, इसका जिक्र होता है।

4. किरायेदारी की अवधि:  →इसमें यह तय होता है कि किरायेदारी कितने समय तक चलेगी, जैसे कि 11 महीने या 1 साल। इसके बाद एग्रीमेंट को नवीनीकृत करना होता है।

5. नियम और शर्तें :→ इसमें बताया जाता है कि मकान के उपयोग के क्या नियम होंगे, जैसे पालतू जानवरों की अनुमति है या नहीं, घर में कोई बदलाव या मरम्मत किसकी जिम्मेदारी होगी।

रेंट एग्रीमेंट के लाभ :→

1. कानूनी सुरक्षा:→रेंट एग्रीमेंट दोनों पक्षों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। अगर कोई पक्ष नियमों का उल्लंघन करता है, तो दूसरा पक्ष कानूनी कार्रवाई कर सकता है।

2. विवाद से बचाव:  →रेंट एग्रीमेंट में साफ-साफ लिखा होता है कि किरायेदार और मकान मालिक की जिम्मेदारियां क्या होंगी। इससे गलतफहमियां और विवाद होने की संभावना कम हो जाती है।

3. किरायेदारी का सबूत:→यह दस्तावेज यह साबित करता है कि किरायेदार कानूनी रूप से उस संपत्ति में रह रहा है। अगर मकान मालिक बिना पूर्व सूचना के उसे निकालने की कोशिश करता है, तो यह एग्रीमेंट किरायेदार के लिए रक्षा कवच का काम करता है।

रेंट एग्रीमेंट कैसे बनाएं?

रेंट एग्रीमेंट बनाने के लिए आप एक वकील की मदद ले सकते हैं, या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स का उपयोग कर सकते हैं जो इसे आसान तरीके से तैयार करते हैं। उदाहरण के तौर पर, मान लीजिए आप एक मकान किराये पर लेना चाहते हैं, तो निम्नलिखित जानकारी एग्रीमेंट में होनी चाहिए:  →

मकान मालिक का नाम और पता: रमेश शर्मा, XYZ कॉलोनी, नई दिल्ली।
•किरायेदार का नाम: सुमित वर्मा, XYZ कॉलोनी, नई दिल्ली।
•किराया:  →15,000 रुपये प्रति माह, हर महीने की 5 तारीख को भुगतान किया जाएगा।
सिक्योरिटी डिपॉजिट:  →30,000 रुपये, जो कि किरायेदारी खत्म होने पर मकान मालिक वापस करेगा, बशर्ते कोई नुकसान न हो।
•किरायेदारी की अवधि:  →1 साल (1 जनवरी 2024 से 31 दिसंबर 2024 तक)।

उदाहरण:→

सुमित ने रमेश से एक घर किराये पर लिया। दोनों ने एक रेंट एग्रीमेंट तैयार किया, जिसमें साफ-साफ लिखा था कि किराया 15,000 रुपये प्रति महीना होगा और सुमित ने 30,000 रुपये की सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा की। एग्रीमेंट में यह भी तय हुआ कि मकान में किसी भी प्रकार की बड़ी मरम्मत का खर्चा मकान मालिक उठाएगा, जबकि छोटे-मोटे रखरखाव का खर्चा किरायेदार को करना होगा। 

इस रेंट एग्रीमेंट की वजह से दोनों के बीच कोई गलतफहमी नहीं हुई और किरायेदारी की अवधि के दौरान सब कुछ सुचारू रूप से चलता रहा।

रेंट एग्रीमेंट क्यों जरूरी है?

1. किराया नियंत्रण:→एग्रीमेंट में किराया तय होता है, जिससे मकान मालिक मनमाना किराया नहीं बढ़ा सकता। अगर मकान मालिक किराया बढ़ाना चाहता है, तो उसे एग्रीमेंट में तय नियमों का पालन करना होगा।

2. संपत्ति की सुरक्षा:→मकान मालिक को यह अधिकार होता है कि वह अपनी संपत्ति का सही उपयोग सुनिश्चित करे। रेंट एग्रीमेंट में साफ होता है कि किरायेदार संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाएगा।

3. निर्धारित समय सीमा:  →एग्रीमेंट में यह तय होता है कि किरायेदारी कितने समय तक चलेगी, और इसे बढ़ाने या खत्म करने की प्रक्रिया क्या होगी। इससे दोनों पक्षों को स्पष्टता मिलती है।

रेंट एग्रीमेंट के प्रकार:  →

1. रहने के लिए किराया (Residential Rent Agreement):  →इसमें व्यक्ति मकान किराये पर लेता है, जिसमें आमतौर पर 11 महीने की अवधि होती है।
   
2. कार्यालय या व्यवसाय के लिए किराया (Commercial Rent Agreement):  → इसमें कार्यालय या व्यवसाय के लिए संपत्ति किराये पर दी जाती है।

3. सीजनल किराया (Seasonal Rent Agreement):→यह विशेष मौकों पर किराये के लिए संपत्ति का उपयोग होता है, जैसे किसी फसल के मौसम या त्योहारी सीजन के दौरान।

निष्कर्ष→

रेंट एग्रीमेंट मकान मालिक और किरायेदार के बीच एक सुरक्षित और पारदर्शी समझौता होता है, जो दोनों पक्षों की सुरक्षा और हितों को सुनिश्चित करता है। इसे तैयार करना न सिर्फ कानूनी सुरक्षा देता है बल्कि भविष्य में होने वाले विवादों से बचने में भी मदद करता है। 

इसलिए, अगर आप मकान किराये पर ले रहे हैं या दे रहे हैं, तो हमेशा एक लिखित रेंट एग्रीमेंट बनाएं।

रेंट एग्रीमेंट से जुड़े कुछ रोचक और महत्वपूर्ण कानूनी मामले हुए हैं, जो यह दिखाते हैं कि कैसे रेंट एग्रीमेंट विवादों को सुलझाने में मदद करता है। यहां कुछ केस उदाहरण दिए जा रहे हैं जो आपको रेंट एग्रीमेंट से संबंधित कानूनी चुनौतियों और उनके समाधान के बारे में बताएंगे:→

1. सुप्रीम कोर्ट केस:→

 प्रभा सिंह बनाम रमेश कुमार (2020)→
   
मामला:→
यह केस एक मकान मालिक और किरायेदार के बीच किराए में वृद्धि को लेकर था। प्रभा सिंह मकान मालिक थीं, और उन्होंने अपने किरायेदार से किराया बढ़ाने के लिए अनुरोध किया। किरायेदार रमेश कुमार ने यह तर्क दिया कि रेंट एग्रीमेंट में किराया बढ़ाने का कोई उल्लेख नहीं था, और इसलिए यह कानूनी रूप से मान्य नहीं है।

निर्णय:→
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर रेंट एग्रीमेंट में किराया वृद्धि के प्रावधान का उल्लेख नहीं है, तो मकान मालिक एकतरफा तरीके से किराया नहीं बढ़ा सकता। कोर्ट ने एग्रीमेंट को वैध माना और मकान मालिक को किराया नहीं बढ़ाने का आदेश दिया। इस केस ने किराएदारों को किराये में मनमानी वृद्धि से बचाने में मदद की।

2.दिल्ली हाई कोर्ट केस:→

 सुनीता देवी बनाम रोहित मल्होत्रा (2018)→

मामला:→
इस केस में किरायेदार रोहित मल्होत्रा ने रेंट एग्रीमेंट में निर्धारित समय से पहले मकान खाली कर दिया और सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस करने की मांग की। मकान मालिक सुनीता देवी ने कहा कि किरायेदार ने समझौते के उल्लंघन में मकान खाली किया और सिक्योरिटी डिपॉजिट नहीं लौटाया जाएगा।

निर्णय:→
दिल्ली हाई कोर्ट ने किरायेदार के पक्ष में निर्णय दिया, क्योंकि एग्रीमेंट में यह स्पष्ट नहीं था कि यदि किरायेदार पहले मकान खाली करता है तो सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस नहीं होगा। कोर्ट ने मकान मालिक को सिक्योरिटी डिपॉजिट वापस करने का आदेश दिया।

सीख:→

 इस केस से यह स्पष्ट हुआ कि रेंट एग्रीमेंट में सभी शर्तों का स्पष्ट होना जरूरी है, ताकि विवाद की स्थिति में कानूनी आधार पर निर्णय लिया जा सके।

3. महाराष्ट्र रेंट कंट्रोल केस:→

 सुनील गुप्ता बनाम अरुणा जोशी (2016)→

मामला:→
इस केस में सुनील गुप्ता एक मकान किराये पर दे रहे थे और उन्होंने किरायेदार अरुणा जोशी को समय पर किराया न देने के लिए मकान खाली करने का आदेश दिया। किरायेदार ने कोर्ट में तर्क दिया कि उन्होंने मकान मालिक से मरम्मत और मेंटेनेंस की मांग की थी, लेकिन वह पूरी नहीं की गई, इसलिए किराया नहीं चुकाया गया।

निर्णय:→
महाराष्ट्र रेंट कंट्रोल एक्ट के तहत कोर्ट ने निर्णय दिया कि किराएदार को बिना किसी कारण के किराया रोकने का अधिकार नहीं है। अगर मरम्मत की समस्या थी, तो उसे कोर्ट में केस दर्ज करना चाहिए था। कोर्ट ने मकान मालिक के पक्ष में निर्णय दिया और किराएदार को घर खाली करने का आदेश दिया।

सीख:→यह मामला बताता है कि किरायेदारों को किसी भी समस्या के समाधान के लिए कानूनी तरीके अपनाने चाहिए, बजाय खुद से फैसला लेने के।

4. बॉम्बे हाई कोर्ट केस:→दीपक मेहरा बनाम शांति शर्मा (2014)→

मामला:→
इस मामले में मकान मालिक दीपक मेहरा ने किरायेदार को यह कहते हुए बेदखल करने की कोशिश की कि वे मकान को खुद उपयोग करना चाहते हैं। किरायेदार शांति शर्मा ने तर्क दिया कि मकान मालिक ने अपनी संपत्ति को व्यक्तिगत इस्तेमाल के लिए बताकर उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की, जबकि मकान मालिक का मकसद किराये में वृद्धि करना था।

निर्णय:→
बॉम्बे हाई कोर्ट ने किरायेदार के पक्ष में निर्णय दिया, और कहा कि मकान मालिक केवल उचित कारणों से किरायेदार को बेदखल कर सकता है। मकान मालिक की मनमानी से किरायेदार को सुरक्षा दी गई।

सीख:→यह केस दिखाता है कि मकान मालिक केवल व्यक्तिगत उपयोग के बहाने किरायेदार को बेदखल नहीं कर सकता, जब तक कोई वास्तविक कारण न हो।

5. चेन्नई हाई कोर्ट केस:→प्रकाश राज बनाम सुनील अग्रवाल (2019)
मामला:→
प्रकाश राज ने किराये के मकान में अवैध तरीके से सबलेटिंग (subletting) कर दी थी, जो कि रेंट एग्रीमेंट में स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित था। मकान मालिक सुनील अग्रवाल ने इस आधार पर प्रकाश को बेदखल करने की प्रक्रिया शुरू की। किरायेदार ने दावा किया कि सबलेटिंग एक अस्थायी व्यवस्था थी और उसे इसकी अनुमति थी।

निर्णय:→
चेन्नई हाई कोर्ट ने मकान मालिक के पक्ष में निर्णय सुनाया और कहा कि रेंट एग्रीमेंट की शर्तों का पालन करना अनिवार्य है। किरायेदार बिना मकान मालिक की सहमति के संपत्ति को सबलेट नहीं कर सकता।

सीख:→रेंट एग्रीमेंट में लिखी शर्तों का पालन करना दोनों पक्षों के लिए आवश्यक है, खासकर जब सबलेटिंग जैसी शर्तें स्पष्ट रूप से प्रतिबंधित हों।

 निष्कर्ष:→

इन केसों से यह स्पष्ट होता है कि रेंट एग्रीमेंट मकान मालिक और किरायेदार दोनों के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है। किसी भी विवाद के समाधान के लिए रेंट एग्रीमेंट का होना जरूरी है, और इसके नियमों का पालन करने से कानूनी समस्याओं से बचा जा सकता है। यह दस्तावेज मकान मालिक और किरायेदार दोनों के हितों की रक्षा करता है और किसी भी स्थिति में समाधान प्रदान करता है।

रेंटल एग्रीमेंट कई कारणों से अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह एक कानूनी दस्तावेज होता है जो मकान मालिक और किरायेदार दोनों के अधिकारों और जिम्मेदारियों को स्पष्ट करता है। आइए जानें कि यह क्यों जरूरी है:→

1.कानूनी सुरक्षा (Legal Protection)→
रेंट एग्रीमेंट दोनों पक्षों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है। यह मकान मालिक और किरायेदार के बीच किसी भी विवाद की स्थिति में कानूनी सबूत के रूप में काम करता है। अगर कोई पक्ष नियमों का उल्लंघन करता है, तो दूसरा पक्ष कानूनी सहायता ले सकता है और अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है।

2.स्पष्टता और पारदर्शिता (Clarity and Transparency)→
रेंटल एग्रीमेंट में सभी शर्तें जैसे कि किराया, सुरक्षा जमा, मेंटेनेंस, नोटिस अवधि, आदि का स्पष्ट विवरण होता है। यह दोनों पक्षों को स्पष्टता प्रदान करता है और किसी भी प्रकार की गलतफहमी को दूर करता है। यह सुनिश्चित करता है कि दोनों पक्ष अपने अधिकारों और कर्तव्यों को पूरी तरह से समझते हैं।

 3.किराया विवाद से बचाव (Avoidance of Rent Disputes)→
बिना रेंटल एग्रीमेंट के, किराया विवाद उत्पन्न हो सकता है। अगर किराया, किराया वृद्धि या भुगतान की तारीखों पर कोई विवाद होता है, तो रेंटल एग्रीमेंट इस तरह की समस्याओं को सुलझाने में मदद करता है। यह दस्तावेज किराये के भुगतान की स्पष्ट रूपरेखा देता है।

4.संपत्ति की स्थिति की सुरक्षा (Protection of Property Condition)→
रेंटल एग्रीमेंट में संपत्ति के रखरखाव और मरम्मत के संबंध में जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया जाता है। यह सुनिश्चित करता है कि किरायेदार और मकान मालिक दोनों को यह पता हो कि संपत्ति की देखभाल कौन करेगा। इससे संपत्ति की स्थिति और उसके मूल्य की रक्षा होती है।

 5.बेदखली के नियम (Eviction Rules)→
रेंट एग्रीमेंट में यह शर्त होती है कि कब और किन परिस्थितियों में मकान मालिक किरायेदार को बेदखल कर सकता है। यह अनियमित या जबरन बेदखली से किरायेदार की सुरक्षा करता है, और साथ ही मकान मालिक को भी यह अधिकार देता है कि अगर किरायेदार नियमों का उल्लंघन करता है तो उसे निष्कासित किया जा सकता है।

 6.भविष्य की योजनाओं के लिए आधार (Basis for Future Planning)→
किरायेदार और मकान मालिक दोनों के लिए रेंटल एग्रीमेंट एक महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, क्योंकि यह उनके भविष्य की योजनाओं को स्थिरता प्रदान करता है। किरायेदार को पता होता है कि वे कितनी अवधि के लिए मकान में रह सकते हैं, और मकान मालिक को यह जानकारी होती है कि वे कब तक किराया प्राप्त करेंगे या अपनी संपत्ति का पुनः उपयोग कर सकते हैं।

7. किरायेदारी की अवधि का निर्धारण (Fixed Tenure of Tenancy)→
रेंट एग्रीमेंट में यह तय किया जाता है कि किरायेदारी की अवधि कितनी होगी, जैसे कि 11 महीने, 1 साल, या अन्य समयावधि। यह दोनों पक्षों को स्पष्टता देता है कि कब तक किरायेदारी जारी रहेगी और कब इसे समाप्त किया जा सकता है।

 8.वित्तीय सुरक्षा (Financial Security)→
रेंटल एग्रीमेंट में सिक्योरिटी डिपॉजिट का उल्लेख होता है, जो कि मकान मालिक की संपत्ति को किसी भी नुकसान से बचाने के लिए लिया जाता है। यह दस्तावेज यह भी सुनिश्चित करता है कि सिक्योरिटी डिपॉजिट किस स्थिति में वापस किया जाएगा।

 9.प्रूफ ऑफ रेजिडेंसी (Proof of Residency)→
रेंट एग्रीमेंट किरायेदार के लिए एक वैध निवास प्रमाण पत्र के रूप में काम करता है। इसे सरकारी कार्यों में उपयोग किया जा सकता है, जैसे कि आधार कार्ड, पासपोर्ट, या ड्राइविंग लाइसेंस के लिए निवास प्रमाण के रूप में।

10. टैक्स बेनिफिट्स (Tax Benefits)→
किरायेदार और मकान मालिक दोनों को रेंटल एग्रीमेंट की मदद से टैक्स लाभ मिल सकते हैं। किरायेदार हाउस रेंट अलाउंस (HRA) का दावा कर सकता है, जबकि मकान मालिक को अपनी आय के हिस्से के रूप में किराया दिखाना होगा।

निष्कर्ष:→
रेंटल एग्रीमेंट एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है जो मकान मालिक और किरायेदार दोनों की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करता है। यह कानूनी विवादों को कम करता है, वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है, और संपत्ति के प्रबंधन को सुचारू बनाता है। इसलिए, हर किरायेदारी के लिए एक लिखित रेंट एग्रीमेंट बनाना अत्यंत जरूरी है।


घर के लिए एक रेंटल एग्रीमेंट का प्रारूप इस प्रकार हो सकता है। इस ड्राफ्ट में सभी आवश्यक शर्तें और जानकारी शामिल की गई है, जिन्हें आप अपनी जरूरत के अनुसार जोड़ या संशोधित कर सकते हैं।

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रेंटल एग्रीमेंट→

यह रेंट एग्रीमेंट इस तारीख को __________ (तारीख) __________ के दिन किया गया है, जो कि मकान मालिक और किरायेदार के बीच एक समझौता है, जिसमें मकान मालिक __________ (मकान मालिक का नाम) __________, निवासी __________ (मकान मालिक का पता) __________, और किरायेदार __________ (किरायेदार का नाम) __________, निवासी __________ (किरायेदार का पता) __________ हैं।

1. किराये की संपत्ति का विवरण:→

मकान मालिक ने किरायेदार को निम्नलिखित पता स्थित संपत्ति किराये पर दी है:→

पता:→
__________ (संपत्ति का पूरा पता) __________

यह संपत्ति एक __________ (कमरों की संख्या, जैसे 2 BHK या 3 BHK) घर है, जिसमें __________ (संपत्ति में शामिल सुविधाएं, जैसे बाथरूम, किचन, बालकनी आदि) शामिल हैं।

2. किरायेदारी की अवधि:→

यह रेंट एग्रीमेंट __________ तारीख से शुरू होगा और __________ (महीनों की संख्या, जैसे 11 महीने) के लिए वैध होगा। किरायेदारी की अवधि समाप्त होने से पहले, दोनों पक्षों के बीच सहमति से इसे नवीनीकृत किया जा सकता है।

3. किराये की राशि:→

किरायेदार मासिक किराया __________ रुपये (₹__________) मकान मालिक को प्रत्येक महीने की __________ तारीख तक बैंक हस्तांतरण/चेक/नकद द्वारा भुगतान करेगा।

मकान मालिक का बैंक विवरण:→
बैंक का नाम: __________  
खाता संख्या: __________  
IFSC कोड: __________  

4. सुरक्षा जमा (Security Deposit):→

किरायेदार मकान मालिक को __________ रुपये (₹__________) का सुरक्षा जमा देगा, जो कि संपत्ति की किसी भी क्षति के लिए जिम्मेदार होगा। यदि कोई क्षति नहीं होती है, तो यह राशि किरायेदारी समाप्त होने पर पूरी तरह से वापस की जाएगी।

5. किराये में वृद्धि:→

किराया हर __________ (साल या समय अवधि) में __________ प्रतिशत (%) की वृद्धि होगी, अगर किरायेदारी जारी रहती है।

6. संपत्ति की स्थिति और मरम्मत:→

किरायेदार संपत्ति को उसकी मूल स्थिति में बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होगा। मामूली मरम्मत (जैसे नल, बल्ब, दरवाजे की मरम्मत) किरायेदार द्वारा की जाएगी, जबकि बड़ी मरम्मत (जैसे छत, पाइपलाइन, दीवार की दरारें) मकान मालिक द्वारा की जाएगी।

7. उपयोगिता बिल:→

बिजली, पानी, गैस, और अन्य उपयोगिता बिल किरायेदार द्वारा समय पर भुगतान किए जाएंगे।

8. पालतू जानवर:→

इस संपत्ति में पालतू जानवरों को __________ (अनुमति है/अनुमति नहीं है)।

9. संपत्ति का उपयोग:→

किरायेदार संपत्ति को केवल आवासीय उद्देश्यों के लिए उपयोग करेगा और इसे व्यवसायिक उद्देश्यों या अवैध गतिविधियों के लिए उपयोग नहीं करेगा।

10. नोटिस अवधि:→

रेंट एग्रीमेंट को समाप्त करने के लिए, किसी भी पक्ष को कम से कम __________ (नोटिस की अवधि, जैसे 1 महीने) का लिखित नोटिस देना होगा।

11. अनुबंध की समाप्ति:→

मकान मालिक निम्नलिखित स्थितियों में किरायेदार को बेदखल कर सकता है:→
• किराए का भुगतान न करने पर।
•संपत्ति का अनुचित उपयोग करने पर।
• एग्रीमेंट की किसी शर्त का उल्लंघन करने पर।

12. विवाद का समाधान:→

यदि मकान मालिक और किरायेदार के बीच कोई विवाद उत्पन्न होता है, तो इसे __________ (शहर का नाम) के क्षेत्राधिकार में सुलझाया जाएगा।

13. अन्य शर्तें:→

•संपत्ति की उप-लीज (Sub-lease) बिना मकान मालिक की लिखित अनुमति के नहीं की जा सकती।
•किरायेदार बिना मकान मालिक की अनुमति के किसी बड़े बदलाव (renovation) या मरम्मत का काम नहीं कर सकता।

हस्ताक्षर:

यह एग्रीमेंट निम्नलिखित पक्षों द्वारा सहमति से किया गया है और हस्ताक्षरित है।

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मकान मालिक का नाम: ________________________  
हस्ताक्षर: ________________________  
तारीख:________________________  

किरायेदार का नाम: ________________________  
हस्ताक्षर: ________________________  
तारीख: ________________________  

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गवाह 1:
नाम: ________________________  
हस्ताक्षर: ________________________  
तारीख: ________________________  

गवाह 2:
नाम: ________________________  
हस्ताक्षर: ________________________  
तारीख: ________________________  

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यह ड्राफ्ट रेंटल एग्रीमेंट का एक बेसिक प्रारूप है, जिसे आप अपनी विशेष आवश्यकताओं के अनुसार संशोधित कर सकते हैं।

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