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पत्नी ने मायके में आत्महत्या की तो पति पर कौन-सी धारा लगेगी?

हत्या के प्रयास में कानूनी बचाव: आरोपों से बचने के लिए वकील के प्रमुख तर्क और जमानत के आधार

एक blog post लिखो जिसमें एक व्यक्ति के ऊपर आरोप लगाया गया है कि उसने जान से मारने की नियत से दूसरे व्यक्ति पर एक देशी तमंचे से फायर किया ।जब उस व्यक्ति ने तमंचे से उसके सीने पर लगाया तो तो हाथापाई में जिस व्यक्ति के सीने पर वह फायर करने वाला था तो गोली उसके पैर में लगी गयी । पुलिस द्वारा उस व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उस व्यक्ति को जेल में दिया ऐसी स्थिति में उसके ऊपर कौन-कौन सी धाराएं पुलिस द्वारा लगायी जायेगी ।जिस व्यक्ति को पुलिस ने जेल भेज दिया है वह व्यक्ति अगर एक वकील नियुक्त करता है अपनी पैरवी के लिए तो वकील किन तर्कों से उसको निर्दोष साबित करेगा और उसकी इस घटनाक्रम को बेबुनियाद और षड्यंत्रकारी सिद्ध कर अपने clint  को बचायेगा सबकुछ विस्तार से बताओ कोई भी बात  छूटनी नहीं चाहिए हर एक बार को वकील द्वारा विस्तार से देखकर चेक किया जाये?


परिचय:→
यह मामला एक अपराध से जुड़ा हुआ है जिसमें आरोप लगाया गया है कि आरोपी ने जान से मारने की नियत से एक देशी तमंचे का उपयोग करके एक व्यक्ति पर फायर किया। गोली मारने का प्रयास करने पर यह गोली हाथापाई में गलत दिशा में जाकर व्यक्ति के सीने के बजाय पैर में जा लगी। पुलिस ने इस घटना के आधार पर आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया और उसे जेल भेज दिया। 

इस ब्लॉग में हम चर्चा करेंगे कि पुलिस इस मामले में किन धाराओं के तहत मामला दर्ज कर सकती है और बचाव पक्ष का वकील किस प्रकार से उसे निर्दोष साबित करने के तर्क दे सकता है।

पुलिस द्वारा लगाई जाने वाली धाराएं
पुलिस इस मामले में निम्नलिखित धाराएं लगा सकती है:→

1. भारतीय दंड संहिता की धारा 307 (हत्या का प्रयास):→
   यह धारा उन मामलों में लागू होती है जहां किसी व्यक्ति ने जान से मारने की नियत से दूसरे पर हमला किया हो। यहां सीने में फायर करने का उद्देश्य इसे समर्थन देता है, भले ही गोली पैर में लगी हो।

2. धारा 324 (खतरनाक हथियार से चोट पहुंचाना):→
   इस धारा का उपयोग तब किया जाता है जब चोट खतरनाक हथियार से पहुंचाई जाती है। देशी तमंचा एक खतरनाक हथियार है, और इस प्रकार से गोली चलाने के मामले में इसे जोड़ा जा सकता है।

3. आर्म्स एक्ट, 1959 की संबंधित धाराएं:→
   देशी तमंचा अवैध हथियार के रूप में आता है। इसलिए, अगर आरोपी के पास इसका लाइसेंस नहीं है, तो आर्म्स एक्ट की धाराएं भी लगाई जा सकती हैं।


 वकील द्वारा बचाव के तर्क:→

आरोपी के वकील बचाव के लिए कई तर्क प्रस्तुत कर सकते हैं ताकि वह यह साबित कर सके कि उसका मुवक्किल निर्दोष है और यह मामला किसी प्रकार की गलतफहमी या साजिश के तहत तैयार किया गया है। 

1. हत्या की नियत का अभाव:→
   वकील यह तर्क दे सकता है कि हत्या की नियत को साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य का अभाव है। गोली पैर में लगी थी, जिससे यह कहा जा सकता है कि आरोपी का इरादा जान से मारने का नहीं था। यह घटना एक दुर्घटना भी मानी जा सकती है, जहां हाथापाई के दौरान गोली गलत दिशा में चली गई।

2. हाथापाई के कारण गोली का दिशा बदलना:→
   वकील इस बिंदु को उठाएगा कि फायर करने का वास्तविक उद्देश्य नहीं था और हाथापाई के कारण गोली सीने के बजाय पैर में लगी। इससे यह साबित होता है कि किसी भी प्रकार से जान से मारने का प्रयास नहीं किया गया था और यह महज दुर्घटना है।

3. पुलिस रिपोर्ट और गवाहों के बयान की जांच:→
   वकील गवाहों के बयान और पुलिस रिपोर्ट की प्रमाणिकता पर सवाल उठाएगा। वह गवाहों से यह साबित कराने की कोशिश करेगा कि घटना जानबूझ कर नहीं हुई थी। अगर गवाह पक्षपाती या संदेहास्पद पाए जाते हैं तो इसका उपयोग बचाव के लिए किया जा सकता है।

4. साजिश का आरोप:→
   वकील यह तर्क प्रस्तुत कर सकता है कि यह मामला एक साजिश का हिस्सा हो सकता है जिसमें उसके मुवक्किल को फंसाने की कोशिश की गई है। अगर यह साबित हो जाए कि गोली गलती से चली है, तो यह साबित हो सकता है कि मुवक्किल के खिलाफ आरोप दुर्भावनापूर्ण हो सकते हैं।

5. पिछला आपराधिक रिकॉर्ड का अभाव:→
   यदि आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है तो वकील इसे निर्दोष साबित करने के लिए उपयोग कर सकता है। इससे यह संकेत मिलेगा कि मुवक्किल का हिंसक प्रवृत्ति का इतिहास नहीं है और वह जानबूझकर ऐसा नहीं कर सकता।

6. फॉरेंसिक सबूतों का उपयोग:→
   वकील फॉरेंसिक विशेषज्ञों से यह साबित करवा सकता है कि गोली किस दिशा से चली और किस तरह से पैर में लगी। इससे यह साबित किया जा सकता है कि गोली जानबूझकर नहीं चलाई गई थी।  

7. किसी भी प्रकार की धमकी के अभाव को सिद्ध करना:→
   वकील यह भी तर्क दे सकता है कि आरोपी ने कभी भी पीड़ित को जान से मारने की धमकी नहीं दी थी। यह बिंदु इस धारणा को कमजोर कर सकता है कि आरोपी का इरादा हत्या का था। 

निष्कर्ष:→
इस केस में बचाव पक्ष के वकील को सावधानीपूर्वक प्रत्येक तथ्य का विश्लेषण करना होगा। अगर वकील इन तर्कों को मजबूती से प्रस्तुत कर पाता है, तो यह संभव है कि आरोपी को निर्दोष साबित किया जा सके या कम से कम सजा को कम किया जा सके।


जमानत प्रार्थना पत्र

अदालत
माननीय सत्र न्यायालय,  
[स्थान का नाम]

विषय: जमानत हेतु प्रार्थना पत्र

मामला संख्या: __________  
विरुद्ध: राज्य बनाम [आरोपी का नाम]

आरोपी: [आरोपी का पूरा नाम, पता, उम्र, आदि]

माननीय महोदय/महोदया,  
सविनय निवेदन है कि प्रार्थी के खिलाफ जान से मारने के प्रयास तथा अन्य धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। प्रार्थी को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। प्रार्थना है कि प्रार्थी को जमानत पर रिहा किया जाए। इस संबंध में निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान देने का कष्ट करें।

जमानत हेतु आधार (Grounds for Bail):→

1. हत्या की नियत का अभाव:→
   प्राथमिकी में भले ही जान से मारने का आरोप लगाया गया है, लेकिन घटना की प्रकृति और परिस्थिति को देखते हुए हत्या की नियत का अभाव स्पष्ट है। गोली हाथापाई में पैर में लगी, जो दर्शाता है कि जान से मारने का उद्देश्य नहीं था। अतः इसे केवल दुर्घटना माना जाना चाहिए।

2. मुकदमे का कमजोर मामला:→
   प्रथम दृष्टया तथ्यों से यह साबित नहीं होता कि प्रार्थी ने जान से मारने की नियत से फायर किया। घटना के दौरान मौजूद गवाहों के बयान भी स्पष्ट नहीं हैं, जिससे मामले की गंभीरता संदिग्ध है। फॉरेंसिक रिपोर्ट में भी जान से मारने का कोई ठोस प्रमाण नहीं है।

3. स्थायी निवास और समाज में सम्मानित स्थिति:→
   प्रार्थी का स्थायी निवास है और उसका समाज में अच्छा स्थान है। वह अपने परिवार के साथ वर्षों से उसी स्थान पर निवास करता है, जिससे वह किसी प्रकार से भागने का प्रयास नहीं करेगा। उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, और वह इस प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त नहीं रहा है।

4. साजिश का संदेह:→
   प्रार्थी यह मानता है कि उसे दुर्भावनापूर्ण तरीके से इस मामले में फंसाया गया है। यह घटना एक आपसी विवाद का परिणाम है और प्रार्थी निर्दोष है। यह भी संभव है कि दूसरे पक्ष ने झूठे आरोपों के आधार पर इसे जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया हो।

5. अनुसंधान पूरा हो चुका है:→
   पुलिस द्वारा अनुसंधान लगभग पूरा हो चुका है और सभी आवश्यक सबूत संकलित किए जा चुके हैं। ऐसे में प्रार्थी की गिरफ्तारी और हिरासत का कोई औचित्य नहीं रह गया है।  

6. मामले की सुनवाई के दौरान सहयोग का आश्वासन:→
   प्रार्थी अदालत को यह आश्वासन देने को तैयार है कि वह इस मामले की सुनवाई के दौरान पूरी तरह से सहयोग करेगा और किसी प्रकार से गवाहों या सबूतों को प्रभावित नहीं करेगा।

7. मानवीय आधार:→
   प्रार्थी के परिवार में कई सदस्य हैं जो प्रार्थी पर निर्भर हैं, और उसकी अनुपस्थिति में परिवार की देखभाल करने वाला कोई अन्य नहीं है। इसलिए मानवीय दृष्टिकोण से भी उसे जमानत पर रिहा करना उचित होगा।


निष्कर्ष:→

अतः प्रार्थना है कि उपरोक्त आधारों पर विचार करते हुए प्रार्थी को मानवीय दृष्टिकोण, स्थायी निवास और निर्दोषता के आधार पर जमानत पर रिहा करने की कृपा करें।  
आपकी अत्यंत कृपा होगी।  

प्रार्थी द्वारा हस्ताक्षर
दिनांक: ________  
स्थान: ________  


इस मामले में एक वकील अपने क्लाइंट के बचाव के लिए कुछ नए और ठोस तर्क जोड़ सकता है, जो उसकी स्थिति को और मजबूत बना सकते हैं। ये तर्क साक्ष्यों की कमज़ोरी, गवाहों के बयान, फॉरेंसिक साक्ष्य, और घटना की परिस्थितियों पर आधारित हो सकते हैं। यहां कुछ नए तर्क और उनके उदाहरण दिए गए हैं:→

1. आरोप का उद्देश्य नहीं होना:→
   तर्क→: वकील यह तर्क दे सकता है कि घटना के समय गोली सीने के बजाय पैर में लगी, जो दर्शाता है कि जान से मारने का इरादा नहीं था।  
   उदाहरण→:  
   "माननीय, अगर मेरे मुवक्किल का उद्देश्य जान से मारने का होता, तो वह सीधा सीने पर गोली मारता। लेकिन घटना में गोली पैर में लगी, जो साफ दर्शाता है कि जान से मारने की कोई योजना नहीं थी। यह केवल हाथापाई के कारण हुआ एक दुर्घटनाजनक शॉट था।"

 2.फॉरेंसिक साक्ष्यों की गहराई से जांच का अनुरोध:→  
 तर्क→: वकील यह साबित करने की कोशिश कर सकता है कि फॉरेंसिक साक्ष्य दिखाते हैं कि गोली चलने का कोण या दिशा घटना को हत्या के प्रयास से जोड़ने के बजाए दुर्घटना साबित करती है।  
   उदाहरण→:  
   "फॉरेंसिक रिपोर्ट यह दर्शाती है कि गोली का कोण नीचे की तरफ था, जो पैर में लगी। ऐसे कोण में जानलेवा हमला करना मुश्किल है, इससे यह सिद्ध होता है कि यह जान से मारने का प्रयास नहीं था।"

3. गवाहों के बयान में विरोधाभास:→
   तर्क→: वकील यह दिखा सकता है कि गवाहों के बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते और बयान में असंगति है, जो संदेह उत्पन्न करती है।  
   उदाहरण: →
   "माननीय, प्रथम गवाह ने कहा कि मेरा मुवक्किल बहुत ही शांत स्वभाव का व्यक्ति है और घटना के समय खुद को बचाने का प्रयास कर रहा था। दूसरे गवाह ने भी यही कहा कि किसी विवाद के दौरान गोली गलती से चली थी। गवाहों के बयान में विरोधाभास है, जिससे साफ है कि यह घटना हत्या का प्रयास नहीं थी।"

4.मुवक्किल का आपराधिक रिकॉर्ड न होना:→
   तर्क→: वकील अदालत को यह बताने का प्रयास करेगा कि उसका मुवक्किल एक सम्मानित व्यक्ति है और उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, जो इस घटना को गैर-इरादतन घटना के रूप में प्रस्तुत करता है।  
   उदाहरण→:  
   "मेरा मुवक्किल समाज में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति है और उसका कभी कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है। वह हमेशा से एक कानून का पालन करने वाला नागरिक रहा है। यह एक गलतफहमी के आधार पर झूठा आरोप है।"

5.पुलिस द्वारा तथ्यों का गलत प्रस्तुतिकरण:→
   तर्क→: वकील यह तर्क दे सकता है कि पुलिस ने आरोपी के खिलाफ सबूतों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया है, जिससे जानबूझकर उसे फंसाने की कोशिश की गई है।  
   उदाहरण→:  
   "माननीय, पुलिस ने जान से मारने का मामला बनाते समय तथ्यों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया है। यह एक सामान्य झगड़ा था, जिसमें जानलेवा हमला करने का कोई इरादा नहीं था।"

6.मेडिकल रिपोर्ट का विश्लेषण:→
   तर्क→: अगर घायल व्यक्ति की चोटें गंभीर नहीं हैं, तो वकील इसे अदालत में प्रस्तुत कर सकता है कि घटना को जान से मारने के प्रयास से जोड़ना अनुचित है।  
   उदाहरण→:  
   "मेडिकल रिपोर्ट से पता चलता है कि पीड़ित को हल्की चोटें आई हैं और यह जानलेवा हमला साबित नहीं होतीं। यह घटना गंभीर शारीरिक हानि का प्रयास नहीं था।"

7. आरोपी के परिवार की जिम्मेदारियाँ:→
   तर्क→: वकील अदालत को यह बता सकता है कि आरोपी के पास अपने परिवार की जिम्मेदारी है और वह भागने या न्याय प्रक्रिया में बाधा डालने का कोई प्रयास नहीं करेगा।  
   उदाहरण→:  
   "मेरा मुवक्किल अपने परिवार का एकमात्र सहारा है और अदालत में हर सुनवाई में उपस्थित रहेगा। ऐसे में उसे जमानत देना उचित होगा।"

निष्कर्ष:→
इन तर्कों को प्रस्तुत कर वकील अपने मुवक्किल की स्थिति को मजबूत कर सकता है और अदालत को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करेगा कि मामला गंभीर नहीं है या गलतफहमी के कारण दर्ज किया गया है।


इस मामले में, अगर बचाव पक्ष यह साबित कर सके कि बरामद हुआ तमंचा आरोपी का नहीं था और वह वारदात के समय घटनास्थल पर मौजूद नहीं था, तो यह केस कमजोर हो सकता है। इस स्थिति में वकील निम्नलिखित नए तर्कों का सहारा लेकर आरोपी के बचाव को और मजबूत बना सकता है:

1.तमंचे पर फिंगरप्रिंट या डीएनए की गैरमौजूदगी:→
   तर्क→: वकील यह तर्क दे सकता है कि पुलिस द्वारा बरामद किए गए तमंचे पर आरोपी के फिंगरप्रिंट या डीएनए मौजूद नहीं हैं, जिससे यह साफ हो जाता है कि वह तमंचा उसका नहीं था।  
   उदाहरण→:  
   "माननीय, फॉरेंसिक रिपोर्ट में इस तमंचे पर मेरे मुवक्किल के फिंगरप्रिंट या डीएनए नहीं मिले हैं। यह स्पष्ट संकेत है कि पुलिस द्वारा आरोप गलत तरीके से लगाए गए हैं और मुवक्किल को इस मामले में फंसाया गया है।"

2. मोबाइल लोकेशन से अनुपस्थिति का सबूत:→
   तर्क→: वकील यह साबित करने का प्रयास कर सकता है कि घटना के समय आरोपी की मोबाइल लोकेशन किसी अन्य स्थान पर थी, जिससे पता चलता है कि वह वारदात वाली जगह पर मौजूद नहीं था।  
   उदाहरण→:  
   "घटना के समय मेरे मुवक्किल की मोबाइल लोकेशन किसी अन्य स्थान की पुष्टि करती है, जिससे साफ है कि वह वारदात वाली जगह पर मौजूद नहीं था।"

 3. गवाहों के बयान में विरोधाभास:→
   तर्क→: वकील गवाहों के बयान में असंगति पर जोर डाल सकता है, जिससे यह साबित हो सकता है कि आरोपी को जानबूझकर फंसाया जा रहा है।  
   उदाहरण→:  
   "माननीय, जिन गवाहों ने मेरे मुवक्किल को घटनास्थल पर देखा होने का दावा किया है, उनके बयानों में असंगति है। इसका मतलब है कि मेरे मुवक्किल को दुर्भावनापूर्ण तरीके से फंसाने का प्रयास किया गया है।"

4.पुलिस द्वारा साजिशन फंसाने का आरोप:→
   तर्क→: वकील यह दावा कर सकता है कि पुलिस किसी अन्य व्यक्ति के दबाव में आकर या किसी पुरानी रंजिश के कारण आरोपी को फंसा रही है।  
   उदाहरण→:  
   "मेरे मुवक्किल का घटना से कोई संबंध नहीं है। पुलिस ने बिना ठोस सबूत के सिर्फ पुरानी रंजिश की वजह से मेरे मुवक्किल को फंसा दिया है।"

5. प्रत्यक्ष साक्ष्य का अभाव:→
   तर्क→: वकील इस तथ्य को उठा सकता है कि आरोपी के खिलाफ किसी भी प्रकार का प्रत्यक्ष साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, जिससे पुलिस के आरोप कमज़ोर साबित होते हैं।  
   उदाहरण→:  
   "इस मामले में मेरे मुवक्किल के खिलाफ कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं है। बिना साक्ष्य के पुलिस का यह आरोप केवल पुरानी रंजिश का परिणाम है।"

6. सीसीटीवी फुटेज का उपयोग:→
   तर्क→: अगर घटनास्थल के आसपास सीसीटीवी फुटेज है जो आरोपी की गैरमौजूदगी को सिद्ध कर सकता है, तो वकील इसे अदालत में प्रस्तुत कर सकता है।  
   उदाहरण→:  
   "हमारे पास घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज हैं जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण देते हैं कि मेरा मुवक्किल वहां मौजूद नहीं था। इससे साफ हो जाता है कि यह मामला उसे गलत तरीके से फंसाने का प्रयास है।"

इन तर्कों के माध्यम से, वकील यह दिखा सकता है कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप झूठे हैं और उसे बिना किसी ठोस साक्ष्य के फंसाया गया है। इससे अदालत आरोपी की जमानत मंजूर करने या उसे निर्दोष मानने के पक्ष में झुक सकती है।

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