मुसलमान कौन है? मुस्लिम विधि किन पर लागू होती है?( who is mohammedan? Describe those person on which the Muslim law is applicable.)
मुसलमान कौन है:- कोई व्यक्ति जो इस्लाम या मुस्लिम धर्म को मानता है वह मुसलमान है। मुसलमान शब्द मुसल्लम ईमान शब्द से बना है। जिसका तात्पर्य है खुदा की एकता तथा पैगंबर में विश्वास। अतः जो व्यक्ति अल्लाह की एकता तथा पैगंबर में विश्वास करता है वह मुसलमान है। एक मुसलमान के लिए आवश्यक है कि वह कलमा में पूर्ण आस्था रखें।कलमा में आस्था से अभिप्राय ला इलाहा इल्लिल्लाह मोहम्मद रसूल उल्लाह में आस्था। इस कलमा का अर्थ है:- अल्लाह( ईश्वर) केवल एक है। पैगंबर मोहम्मद अल्लाह के रसूल (दूत) हैं। मुसलमानों का यह धार्मिक कर्तव्य है कि वह 5 बार (प्रात: ,मध्यान्ह, मध्यान्ह के पश्चात सूर्यास्त और रात्रि में) मक्का की तरफ अपना मुख करके नवाज( प्रार्थना)पढें । एक मुसलमान को अपनी आय का कुछ भाग गरीबों तथा फकीरों को दान भी करना चाहिए तथा रमजान के महीने में रोजा रखना चाहिए। एक व्यक्ति जो व्यय वहन करने में समर्थ हो तथा जिसकी आस्था इस्लाम धर्म में हो जीवन में एक बार वर्ष के एक विहित समय में मक्का का पवित्र दर्शन अवश्य करना चाहिए।
शरीयत के अनुसार अगर किसी बच्चे के मां-बाप में कोई भी इस्लाम धर्म को मानने वाला हो तो बच्चे के विषय में यह उप धारणा होगी कि वह भी मुसलमान है परंतु आधुनिक भारत में यह नियम लागू नहीं होता है। वर्तमान भारत में नियम यह है कि यदि माता-पिता में से केवल एक व्यक्ति मुसलमान है तो बच्चा तभी मुसलमान माना जाएगा यदि उसका पालन पोषण मुस्लिम धर्म के अनुसार किया गया है।
न्यायालयों ने अपने निर्णय में यह निर्धारित किया है कि मुस्लिम विधि के प्रयोजन के लिए वह व्यक्ति मुसलमान है जो तोहीद और रसूल में विश्वास करता है अर्थात जो यह विश्वास करता है कि प्रथमतः- खुदा एक है और जो मोहम्मद साहब खुदा के दूत या रसूल थे। अमीर अली का कथन है कि जो इस्लाम धर्मावलंबी है अर्थात जो अल्लाह के एकत्व और मोहम्मद की पैगंबरी में विश्वास करता है वह मुसलमान है। नरौकथ बनाम पाशकल के वाद में न्यायालय द्वारा यह अभिनिर्धारित किया गया है कि इस्लाम का सारभूत सिद्धांत यह है कि अल्लाह एक है और मोहम्मद उसके रसूल हैं और कोई विश्वास कम से कम विधि के न्यायालयों के लिए निष्प्रयोजन है।
कोई भी व्यक्ति जन्म से या धर्म परिवर्तन द्वारा मुसलमान हो सकता है। जन्म द्वारा मुसलमान होने वाला व्यक्ति उस समय तक मुसलमान बना रह सकता है जब तक वह उसका परित्याग नहीं कर देता। हिंदू धर्म की कुछ पूजा की विधियों को केवल अपनाने से ही इस्लाम धर्म का परित्याग नहीं होता।
जन्म से मुसलमान व्यक्ति जब तक वह इस्लाम धर्म का त्याग ना करें मुसलमान बना रहेगा। पूजा या किसी हिंदू रीति को ग्रहण कर लेना मात्र इस्लाम का त्याग नहीं हो जाता।
मुस्लिम विधि किन पर लागू होगी: मुस्लिम विधि एक वैयक्तिक विधि है और यह केवल उन व्यक्तियों पर लागू होती है जो मुसलमान हैं। ईसाई ,पारसी, यहूदी और हिंदुओं पर यह विधि लागू नहीं होती है।
मुस्लिम विधि का संपूर्ण भाग भारत में लागू नहीं होता। मुस्लिम दंड विधि साक्ष्य विधि संविदा विधि और दासता विधि अब हमारे देश में लागू नहीं है। यह विधि अब केवल विवाह मेहर विवाह विच्छेद भरण पोषण संरक्षता धर्मजता दान वक्फ वसीयत पूर्वक्रयाधिकार उत्तराधिकार और दान प्राप्ति तक ही सीमित है। जिन मामलों में अब मुस्लिम विधि लागू है उनमें भी यह विधि काफी हद तक संशोधित और परिवर्तित हो गई है।
मुस्लिम विधि ना केवल उन लोगों पर लागू होती है जो जन्म से मुसलमान हैं वरन उन लोगों पर भी लागू होती है इस्लाम धर्म में परिवर्तित हो जाते हैं। जब कोई व्यक्ति किसी धर्म का परित्याग कर इस्लाम धर्म स्वीकार करता है तो उसके ऊपर पुराने धर्म की विधि लागू नहीं होती है। इस्लाम धर्म में परिवर्तित होते ही उसके ऊपर मुस्लिम विधि लागू होने लगती है। मुस्लिम वैयक्तिक विधि प्रयोग( शरीयत) अधिनियम 1937 के प्रविधानुसार मुस्लिम धर्म में परिवर्तित कोई भी व्यक्ति उत्तराधिकार के मामले में किसी प्रथा या रूढि का सहारा नहीं ले सकता है।
मुस्लिम विधि एक वैयक्तिक विधि है अर्थात ऐसी विधि जो कि केवल एक विशेष प्रकार के लोगों पर लागू होती है ना की किसी विशेष क्षेत्र के सभी निवासियों पर। मुस्लिम विधि का अनुप्रयोग उन लोगों पर होता है जो या तो (क) जन्म से या (ख) धर्म परिवर्तन द्वारा इस्लाम धर्म मानते हैं ।
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