सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

FIR होने के बाद क्या करें? आरोपी के लिए पूरी कानूनी प्रक्रिया | BNSS 2023

विवाह की परिभाषा दीजिए प्राचीन काल में जो विभिन्न विवाह की पद्धतियां प्रचलित थी उन की विवेचना कीजिए. Define marriage discuss the various kinds of marriage that were prevalent in ancient India.

विवाह की परिभाषा: - रघुनंदन ने विवाह की परिभाषा इस प्रकार दी है कि वर के द्वारा कन्या को स्त्री रूप में ग्रहण करने की स्वीकृति विवाह है वस्तु हिंदू धर्म में कन्या विवाह की पक्षकार नहीं होती पक्षकार कन्या का पिता तथा वर होता है जिसको दान में कन्या दी जाती है हिंदू विधि में कन्या के स्वामित्व का संपूर्ण अधिकार पिता या उसके संरक्षक को होता है कन्या की स्वीकृति या अस्वीकृति कोई महत्व नहीं रखती.

वेस्टर मार्क (westermark) के अनुसार एक या अधिक पुरुषों का एक या अधिक स्त्रियों के साथ होने वाला संबंध है जिसे प्रथा या कानून स्वीकार करता है और जिस में विवाह करने वाले व्यक्तियों के और उससे उत्पन्न हुए बच्चों के होने वाले अधिकारों और कर्तव्यों का समावेश होता है.

          इस प्रकार विवाह के अंतर्गत वर कन्या को पत्नी के रूप में स्वीकार करता है यह सक्रिय पक्षकार होता है जो विवाह करता है और कन्या निश्चेष्ट पक्षकार होती है जो विवाह में दान दी जाती है हिंदू विधि के अंतर्गत विवाह चाहे संस्कार माना जाए या संविदा परंतु यह संतान को जन्म देता है विवाह के प्रकार पति-पत्नी की  संस्थिति प्राप्त करते हैं विवाह की संतान धर्म की संस्तुति प्राप्त करती है विधि व्यवस्थाओं के वैद्य विवाह के लिए निम्नलिखित दो शर्तों का होना आवश्यक है.

(अ) वैवाहिक सामर्थ्य  का होना और

(ब) वैवाहिक अनुष्ठानों का संपन्न करना

         हिंदू शास्त्रों के अनुसार विवाह संस्कार प्रथम 10 संस्कारों में अंतिम संस्कार है विवाह बंधन एक ऐसा बंधन है जिसे कभी तोड़ा नहीं जा सकता और प्राचीन हिंदू विधि के अनुसार ऐसा संबंध है जो जन्म जन्मांतर होता है स्त्री को पुरुष की अर्धांगिनी माना जाता है उसके बिना कोई धार्मिक यज्ञ आदि पूर्ण नहीं माने जाते हैं उसे गृह लक्ष्मी का सम्मान दिया जाता है हिंदू विवाह के अंतर्गत एक पिता अपनी कन्या को किसी सुयोग्य वर के हाथ में सौंपना अपना पुनीत कर्तव्य समझता है हिंदू विवाह की यह पद्धति वैदिक काल से प्रचलित है.


विवाह की पद्धतियां: - हिंदू विवाह की 8 पद्धतियां मानी गई हैं चार मान्य पद्धतियां तथा चार अमान पद्धतियां मान्य तथा अमान्य विवाह पद्धतियों के परिणाम भिन्न-भिन्न थे मान्य पद्धति में विवाह स्त्री को पत्नी कहा जाता था समाज में उसे आदर की दृष्टि से देखा जाता था परंतु अमान्य पद्धति में पत्नी को हेय दृष्टि से देखा जाता था ये विवाह पद्धतिया निम्नलिखित हैं.

( 1) ब्रह्म पद्धति

( 2) दैव पद्धति

( 3) आर्ष पद्धति

( 4) प्रजापत्य 

( 5) आसुर

( 6) गान्धर्व

( 7) राक्षस

( 8) पैशाच विवाह

       उपयुक्त   प्रथम चार विवाह पद्धति मान्य पद्धतियां हैं।बाद की चार पद्धतियां  अमान्य पद्धतियां है.

मान्य  पद्धतियां

( 1) ब्रह्म विवाह   मनु के अनुसार जब पिता वेदों में पारंगत और सच्चरित्र वर को निमंत्रित करके हीरे जवाहरातों का दान देकर कन्या को अमूल्य आभूषणों से सजाकर वर को दान में दे देता है तो उसे ब्रह्म विवाह कहते हैं इस प्रकार ब्रह्म विवाह सबसे उच्च विवाह माना गया है यह विवाह पूर्ण रूप से पिता द्वारा अपनी पुत्री का दान है जिससे पिता अपनी पुत्री पर अपना आधिपत्य का हस्तांतरण वर को अपनी सुरक्षा और बिना किसी अनुदान के करता है प्रारंभ में द्विज ब्राह्मण क्षत्रिय और वैश्य  ही इस विवाह को करते थे.

( 2) दैव पद्धति: - यज्ञ मे विधि पूर्वक कर्म करते हुए ऋत्वक  के लिए वस्त्र आभूषण से अलंकृत कन्या का दान करने को दैव विवाह कहते हैं.

( 3) आर्य  विवाह इस पद्धति में वर कन्या के पिता को दो जोड़ा गाय देता था तथा विवाह के समय कन्या का पिता कन्या के साथ इन गायों को भी लौटा देता था.

( 4) प्रजापत्य इस प्रकार की पद्धति में कन्या के पिता द्वारा तुम दोनों वर कन्या साथ-साथ धर्मांचरण करो ऐसा कहकर वह वस्त्रालंकार आदि से उन्हें पूजित कर कन्यादान किया जाता है यह विवाह ब्रह्म विवाह जैसा ही है किंतु इसमें यह आवश्यक नहीं है कि वर कुँवारा  हो.

आमान्य पध्दति 

( 5) आसुर पद्धति है: - मनु के अनुसार जब वर अपनी इच्छा से वधू और वधू के नातेदारों को इतनी संपत्ति देकर जितनी भी दे सकता है वधु को प्राप्त करता है तो वह विवाह आसुर विवाह कहलाता है यह प्रथा दक्षिणी भारत के शूद्रों  में प्रचलित है यह पद्धति एक प्रकार की  क्रय विक्रय की पद्धति है इस प्रकार की विवाह पद्धति के बारे में यह मत है कि इसमें लड़की को बेच दिया जाता है कन्या का पिता कन्या के विवाह में जो शुल्क पाता था वह उसका प्रतिफल था.

( 6) गान्धर्व विवाह:: कन्या और पुरुष की इच्छा अनुसार परस्पर प्रेम से आलिंगन आदि एवं मैथुन होने को गंधर्व विवाह कहा गया है मित्र मिश्र के अनुसार जब वर-वधू आपस में स्वेच्छा  से विवाह बंधन यह कहकर तुम मेरे पति और बंध जाते हैं तो उसे गान्धर्व विवाह के नाम से पुकारा जाता है इस विवाह में भी अन्य विवाहों की भांति वैवाहिक अनुष्ठानों का संपन्न कराना आवश्यक है इस प्रकार का विवाह दुष्यंत तथा शकुंतला का हुआ था क्षत्रियों में गंधर्व विवाह का काफी प्रचलन था.

( 7) राक्षस विवाह इस विवाह पद्धति के अंतर्गत कन्या के पक्ष वालों की हत्या करके या उनको अंगच्छेदनादि कर और ग्रह अथवा द्वार आदि को तोड़कर सहायता के लिए चिल्लाती तथा रोती हुई कन्या का बलाता अपहरण कर के विवाह किया जाता है.

( 8) पैशाच  विवाह यह विवाह अति निन्दनीय माना है  इस विवाह के अंतर्गत सोई हुई मद आदि से मत अथवा विकृत मस्तिष्क वाली कन्या के साथ मैथुन  करके के विवाह किया जाता है.

      इस प्रकार प्राचीन हिंदू विधि के अनुसार 8 पद्धतियां होती थी इन पद्धतियों में ब्रह्म तथा आसुर पद्धति को आदर की दृष्टि से देखा तथा बाकी सब पध्दतियां हेय दृष्टि से देखी जाती थी तथा वे अप्रचलित हो चुकी है.

हिंदू विवाह की शर्तें: -

     प्राचीन हिंदू विवाह के अनुसार वैद्य विवाह के लिए तीन शर्ते विहित  की गई है

( 1) पक्षकार सजातीय हो.

( 2) विवाह के पक्षकार  प्रतिषिध्द संबंध के अंतर्गत ना आते हों तथा वे एक दूसरे के संपिण्ड ना हो.

( 3) विवाह धार्मिक रीति से संपन्न किया गया हो

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

बलवा (Rioting) और दंगा (Affray) क्या है? BNS की धारा 191 और 194 की पूरी जानकारीi

बलवा (Rioting) और दंगा (Affray) क्या है? BNS की धारा 191 और 194 की पूरी जानकारी बलवा क्या होता है? दंगा और बलवा में क्या अंतर है? पांच या उससे अधिक लोगों के समूह द्वारा हिंसा करने पर कौन-सी धारा लगती है? क्या हर व्यक्ति को केवल भीड़ में मौजूद रहने से बलवा का आरोपी बनाया जा सकता है? BNS Section 191 और Section 194 में क्या प्रावधान है? ये प्रश्न आपराधिक मामलों में बहुत महत्वपूर्ण हैं। पुराने भारतीय दंड संहिता (IPC) में बलवा से संबंधित मुख्य प्रावधान धारा 146 और 147 तथा Affray यानी दंगा से संबंधित प्रावधान धारा 159 और 160 में थे। अब 1 जुलाई 2024 से लागू भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) में इन विषयों के लिए नए section लागू हैं। वर्तमान कानून में BNS Section 189 unlawful assembly, Section 190 common-object liability, Section 191 rioting और Section 194 affray से संबंधित है। इस लेख में इन सभी प्रावधानों को उदाहरण और न्यायिक निर्णयों के माध्यम से आसान भाषा में समझेंगे। 1. बलवा (Rioting) क्या है? साधारण भाषा में जब कोई unlawful assembly यानी विधि-विरुद्ध जमाव अपने common object को ...

पुलिस स्पेशल सेल द्वारा मोटरसाइकिल जब्त करने पर क्या करें, जब कोई मुकदमा पंजीकृत न हो?

यहाँ एक विस्तृत,  ब्लॉग पोस्ट है जो कि कभी आपकी या  किसी व्यक्ति की मोटरसाइकिल को पुलिस विभाग की स्पेशल सेल पकड़ लेती है और किसी भी थाने में मुकदमा पंजीकृत नहीं करती है तो ऐसे स्थिति में क्या करें की गाड़ी को रिलीज करवा लिया जाये इस पर एक  blog post लिखकर मेरे द्तवारा  जितना सम्भव है उतना विशेष जानकारी के साथ  उदाहरण सहित समझाने की आप लोगों को कोशिश है ।🔥🔥🔥🔥 पुलिस स्पेशल सेल द्वारा मोटरसाइकिल जब्त करने पर क्या करें, जब कोई मुकदमा पंजीकृत न हो? कई बार ऐसी स्थिति सामने आती है जब पुलिस विभाग की स्पेशल सेल किसी व्यक्ति की मोटरसाइकिल या अन्य वाहन को रोककर अपने कब्जे में ले लेती है, लेकिन किसी भी थाने में उसके संबंध में FIR या मुकदमा पंजीकृत नहीं करती। इस तरह की परिस्थिति में वाहन मालिक के लिए यह समझना जरूरी है कि कानूनी प्रक्रिया क्या है और वाहन को रिलीज कराने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाएं। 1. सबसे पहले स्थिति की पुष्टि करें जिस पुलिस टीम या स्पेशल सेल ने गाड़ी पकड़ी है, उनसे लिखित या मौखिक रूप से पूछें कि वाहन क्यों रोका गया है। यह ...

असामी कौन है ?असामी के क्या अधिकार है और दायित्व who is Asami ?discuss the right and liabilities of Assami

अधिनियम की नवीन व्यवस्था के अनुसार आसामी तीसरे प्रकार की भूधृति है। जोतदारो की यह तुच्छ किस्म है।आसामी का भूमि पर अधिकार वंशानुगत   होता है ।उसका हक ना तो स्थाई है और ना संकृम्य ।निम्नलिखित  व्यक्ति अधिनियम के अंतर्गत आसामी हो गए (1)सीर या खुदकाश्त भूमि का गुजारेदार  (2)ठेकेदार  की निजी जोत मे सीर या खुदकाश्त  भूमि  (3) जमींदार  की बाग भूमि का गैरदखीलकार काश्तकार  (4)बाग भूमि का का शिकमी कास्तकार  (5)काशतकार भोग बंधकी  (6) पृत्येक व्यक्ति इस अधिनियम के उपबंध के अनुसार भूमिधर या सीरदार के द्वारा जोत में शामिल भूमि के ठेकेदार के रूप में ग्रहण किया जाएगा।           वास्तव में राज्य में सबसे कम भूमि आसामी जोतदार के पास है उनकी संख्या भी नगण्य है आसामी या तो वे लोग हैं जिनका दाखिला द्वारा उस भूमि पर किया गया है जिस पर असंक्रम्य अधिकार वाले भूमिधरी अधिकार प्राप्त नहीं हो सकते हैं अथवा वे लोग हैं जिन्हें अधिनियम के अनुसार भूमिधर ने अपनी जोत गत भूमि लगान पर उठा दिए इस प्रकार कोई व्यक्ति या तो अक्षम भूमिधर का आसामी होता ह...