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Supreme Court Judgments February 2026

भारत में बाल -विवाह एक कुरितियां कानून एवं सजा का क्या प्रावधान है ?आइये समझते हैं.

भारत में बाल विवाह एक लम्बे समय से चली आ रही सामाजिक बुराई रही है। यह प्रथा न केवल बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को प्रभावित करती है। बल्कि उनके भविष्य के अधिकारों का हनन करती है। बाल-विवाह अवरोध अधिनियम 1929 के उद्देश्य के लिये बालक ऐसे व्यक्ति को माना गया है जो यदि पुरुष है तो उसने 21 वर्ष की आयु पूरी नहीं की है और यदि नारी है तो उसने 18 वर्ष की आयु पूरी नहीं की है। इस समस्या को जड़ से  समाप्त करने के लिये भारत सरकार ने बाल विवाह अवरोध अधिनियम 2006 "[The Prohibition of child Marriage Act 2006] को लागू किया।

 बाल विवाह क्या है? (What is child marriage?) इस अधिनियम के अनुसार:-

 बालक (Boy):-  वह लड़का जिसकी उम्र 21 वर्ष से कम है। बालिका (Girl):⇒   वह लड़की जिसकी उम्र 18 वर्ष से कम है।


                         बाल-विवाह से तात्पर्य ऐसे विवाह से है जिसके दोनों पक्षकारों (अर्थात वर- वधू में से कोई भी बालूक हो । उदाहरणार्थ: वर 22 वर्ष की आयु का है  और वधू 17 वर्ष की आयु की है  तो उसे बाल- -- विवाह कहा जायेगा।


                 यदि इस आयु से कम उम्र में किसी भी बालक या बालिका का विवाह होता है तो वह बाल विवाह की श्रेणी में आता है जो कि अवैध माना जाता है।


        बाल-विवाह एक सामाजिक कुरीति है जिसका निवारण करने के लिये सन् 1929 में "बाल-विवाह अवरोध अधिनियम पारित किया गया समय-समय पर इसमें संशोधन भी किये गये ।


 [1] संक्षिप्त नाम, विस्तार और प्रारम्भ : ⇒यह अधिनियम बाल -विवाह अवरोध अधिनियम 1929 कहा जा सकेगा। इसका विस्तार सम्पूर्ण भारत पर है और यह भारत से बाहर तथा पूरे भारत के सभी नागरिकों पर भी लागू है। यह अप्रैल 1930 से अपने प्रथम दिन को लागू हुआ था। बालक से तात्पर्य ऐसे व्यक्ति से है जिसने यदि पुरुष है तो इक्कीस वर्ष की आयु पूरी नहीं की है और यदि नारी  है तो अठारह वर्ष की आयु पूरी नहीं की है। बाल-विवाह से तात्पर्य ऐसे विवाह से है जिसके बंधन में आने वाले दोनों पक्षकारों में से कोई भी बालक हो । विवाह बंधन में आने वाले पक्षकार से तात्पर्य पक्षकारों में से कोई भी जिसके विवाह का एतद्‌द्वारा अनुष्ठान किया जाय या किया जाने वाला हो से है तथा "अवयस्क से तात्पर्य किसी भी लिंग के व्यक्ति से है जो अठारह वर्ष से कम आयु का हो।


 महत्वपूर्ण धारायें [ Sections] और उनके प्रावधान :⇒


धारा 3:⇒ बाल विवाह को शून्य करार देना (Voldable Marriage]: 

⇒ यदि किसी बालक के या बालिका का विवाह हो चुका है तो वह विवाह बालिग होने पर अदालत में याचिका दायर कर उसे अवैध घोषित करवा सकता है। 


⇒ यह याचिका बालिग होने के  2 वर्ष के अंदर दायर करनी होगी।



[2]. धारा 9 ⇒

 बाल विवाह के लिये पुरुष को दण्ड: → यदि कोई व्ययस्क पुरुष (18 वर्ष से ऊपर) किसी बालिका से विवाह करता है तो उसे २वर्ष तक की सजा या 1 लाख रुपये तक का जुर्माना या दोनों दिये जा सकते हैं।


 [3] धारा 10 - विवाह कराने वाले व्यक्ति को दंड⇒

 जो व्यक्ति (पुजारी, पंडित, मौलवी आदि बाल विवाह कराने में सहायता करता है उसे भी 2 वर्ष की सजा या 1 लाख रुपये का जुर्माना. या दोनो का प्रावधान है।



 [4] धारा 11- माता-पिता या अभिभावको की सजा :⇒

यदि माता-पिता, रिश्तेदार या कोई अन्य व्यक्ति बाल विवाह में सहमति देता है या मजबूर करता है तो वह भी उपरोक्त सजा का पात्र होता है।


 [5] धारा 12- विवाह को पूर्णतः शून्य (void) करना:⇒

 यदि किसी बालिका का विवाह बलात्कार, धोखे, अपहरण, या तस्करी के तहत होता है तो वह विवाह पूरी तरह से अमान्य माना जायेगा।

 [6] धारा 13 संरक्षण और पुनर्वास : ⇒


यदि बाल विवाह शून्य घोषित कर दिया जाता है तो अदालत उस बालिका के संरक्षण, आवास और भरण-पोषण का प्रबन्ध करती है। 


क्या बाल-विवाह शून्य नहीं होता है? [Is Child Marriage not void?]


 नहीं । बाल विवाह इस अधिनियम के अन्तर्गत दण्डनीय अवश्य है लेकिन वह न तो शून्य (void) है और न ही अविधिमान्य (Invalid)। यही कारण है कि कोई भी व्यक्ति मात्र इस आधार पर बाल - विवाह से उत्पन्न अन्य दायित्वों से बच नहीं सकता कि ऐसा विवाह । बाल-विवाह अवरोध अधिनियम के अन्तर्गत दण्डनीय है।


 प्रक्रिया [Procedure]: ⇒

बाल-विवाह अवरोध अधिनियम 1929 की परिधि में आने वाले अपराधों को कुछ उद्देश्यों के लिये संज्ञेय माना गया है। ऐसे मामलों का विचारण करने की अधिकारिता महानगर मजिस्ट्रेट को प्रदान किया गया है। क्षेत्राधिकार का निश्चय विवाह स्थल के आधार पर किया जाता है तिलक के स्थान पर नहीं।



 बाल-विवाह रोकने के लिये व्यादेश जारी करना [ To issue Injunction for prevention of Child marriage]:⇒


 अधिनियम की धारा 12 काफी महत्वपूर्ण है। इसमें बाल- विवाह को रोकने के लिये व्यादेश जारी किये जाने हेतु प्रावधान किया गया है। जब भी न्यायालय को परिवाद पर या अन्यथा यह प्रतीत हो कि इस अधिनियम का उल्लघन में- 

(1) कोई बाल-विवाह होने वाला है या

 (11) किसी बाल - विवाह का ठहराव हो गया है या 


(111) उसका अनुष्ठान होने वाला है 


         तो न्यायालय ऐसे विवाह को रोकने के आशय का व्यादेश जारी कर सकेगा। लेकिन ऐसा -व्यादेश जारी करने से पूर्व विपक्षी को कारण दिखाने का अवसर प्रदान किया जाना आवश्यक है।
         यदि कोई व्यक्ति ऐसे व्यादेश का साशय उल्लघंन करता है तो उसे तीन माह तक की अवधि के कारावास था ₹1000 तक के जुर्माने या दोनों से दण्डित किया जा सकेगा। लेकिन ऐसे दण्डित करने के पूर्व उसे सुनवाई का अवसर प्रदान करना
आवश्यक है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि उसे व्यादेश की जानकारी थी या नहीं। धारा 12 के अन्तर्गत व्यादेश जारी करने का मुख्य उद्देश्य बाल-विवाहों को सम्पन्न होने से पहले ही रोक देना है। 

         इस प्रकार बाल-विवाह अवरोध अधिनियम बाल - विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के निवारण की दिशा में बनाया गया एक सामाजिक विद्यायन है। 

    बाल-विवाह का प्रमाण (Proof of child marriage इस अधिनियम के अन्तर्गत किसी व्यक्ति को दोषसिद्ध एवं दण्डित करने के लिये यह तथ्य सन्देह से परे साबित हो जाना चाहिये कि तथाकथित विवाह बाल-विवाह ही था। 


⇒ कान्तिलाल बनास प्रेमचन्द्र 1990 c.r. l.R. 456 Raj में राजस्थान उच्च न्यायालय द्वारा यह निर्धारित किया गया है कि यदि लड़के एवं लड़की की आयु के सम्बन्ध में न तो किसी की जानकारी हो और न ही कोई दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध हो तो अभियुक्त को दोषसिद्ध किया जा सकता है। 


→ Independent Thought V. Union of India (2017 Sc): सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि 15-18 वर्ष की आयु में बालिका से विवाह और यौन संबन्ध बनाना बलात्कार की श्रेणी में आयेगा । भले ही वह शादीशुदा हो। यह निर्णय बालिकाओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था।



(२) Seema V. Ashok Kumar (2006):⇒


 यह मामला विवाहों के पंजीकरण की अनिवार्यता से सम्बन्धित था। कोर्ट ने कहा कि सभी विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य किया जाये ताकि बाल विवाह की पहचान हो सके। 


[3] Lajja devi V. State (NCT of Delhi). (2012)⇒

 दिल्ली हाइकोर्ट ने कहा कि भले ही बाल-विवाह अमान्य न हो लेकिन बालिका की सह‌मति की कानूनी वैधता नही मानी जायेगी और उसे सुरक्षा और पुर्नवास दिया जाना चाहिये । बाल विवाह न केवल एक सामाजिक अपराध है बल्कि यह बच्चों के जीवन शिक्षा और स्वास्थ्य की गंभीर रूप से प्रभावित करता है। बाल विवाह अवरोध अधिनियम 2006 ने इस कुप्रथा को रोकने के लिये सख्त प्रावधान बनायें है ।

            बाल विवाह भारत की एक पुरानी सामाजिक कुरीति है जो आज भी पिछडे और ग्रामीण दोनों में प्रचलित है। इसमें लड़के और लड़कियों की कच्ची उम्र में विवाह कर दिया जाता है जिससे उनका शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास बाधित होता है। विशेषकर लड़कियाँ इस कुप्रथा की सबसे अधिक शिकार होती हैं। इसे रोकने के लिये सरकार ने समय-समय पर कानून बनाये और जागरुकता अभियान चलाये हैं।


 बाल विवाह के दुष्परिणाम: ⇒

*  शिक्षा में रुकावट . 

*  मातृ मृत्यु दर में वृद्धि 

*  किशोरावस्था में मातृत्व खतरे 

*  घरेलू हिंसा और शोषण की संभावना 

* मानसिक और सामाजिक दबाव



सरकार द्वारा उठाये गये कानूनी कदमः ⇒


(१). बाल विवाह निषेध अधिनियम 1929 (Child marriage. Restraint Act 1929)⇒

 * इसे शारदा एक्ट भी कहा जाता है।

* यह भारत में बाल विवाह रोकने के लिये पहला प्रयास था। इस  अधिनियम के तहत 

* लडको की विवाह योग्य उम्र 18 वर्ष ( लड़कियों की 14 वर्ष निर्धारित की गयी थी ( बाद में 18 की गयी। )

* बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 (Prohibition of child Marriage Act 2006) :⇒

यह अधिनियम पुराने कानून की जगह लाया गया और अधिक प्रभावशाली बनाया गया ।


 Important Section और उनके प्रावधान :⇒

Section 2 परिभाष :> 

*Boy: ⇒जिसकी उम्र 21 वर्ष से कम है। 

*Girls:⇒जिसकी उम्र 18 वर्ष से कम है

 * Section 3- विवाह को अवैध घोषित करने का अधिकार:⇒

* Girl और Boy बालिग होने पर विवाह को शून्य [ Voidable] घोषित करवा सकता है। 

* याचिका बालिग होने के २ वर्ष के भीतर दाखिल की जानी चाहिये।

 * Section 9 :⇒
  व्यस्क पुरुष द्वारा बालिका से विवाह २वर्ष की सजा या 1 लाख जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। 

* Section 10:⇒
 विवाह कराने वाले (पंडित, मौलवी आदि) को दण्ड:⇒

  * 2 वर्ष की सजा या 1 लाख जुर्माना या दोनों । 

Section 11:⇒
 माता - पिता / रिश्तेदार की सजा

*  यदि उन्होंने विवाह में सहयोग किया हो या सहमति दी हो तो उन्हें भी सजा का प्रावधान है। 

* Section 12:⇒
 कुछ मामलों में विवाह पूर्ण रूप से अमान्य ( void):⇒

 जब विवाह बलपूर्वक धोखे  से या तस्करी के माध्यम से कराया गया हो।

* Section 13:⇒
 बालिका के संरक्षण का प्रावधान:

*  अदालत द्वारा बालिका को सुरक्षित स्थान, भरण पोषण और शिक्षा दिलाने का प्रावधान।


 सरकारी योजनायें और पहलें :⇒
 बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना :- बालिका शिक्षा और विवाह की उम्र तक पढ़ाई को बढावा देना। 

* सुकन्या समृद्धि योजना: माता-पिता को बेटी के भविष्य के लिये (आर्थिक सहायता प्रदान करना ।


 स्कूल में नामांकन अनिवार्यता : ⇒

* 6 से 14 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिये शिक्षा अनिवार्य जिससे बाल विवाह में कमी लाई जा सके।


*  महिला बाल विकास मंत्रालय और चाइल्ड लाइन (1090) बाल विवाह की सूचना मिलने पर तुरन्त कार्यवाही की जाती है।


 न्यायिक दृष्टिकोण (Judicial support]:⇒ Independent Thought V. union of India (2017)

*  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 18 साल से कम उम्र की पत्नी से यौन सम्बन्ध बलात्कार माना जायेगा भले ही शादी हो चुकी हो।

    
    

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