सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

FIR होने के बाद क्या करें? आरोपी के लिए पूरी कानूनी प्रक्रिया | BNSS 2023

किशोर अभियुक्त के विचारण के सम्बन्ध में आवेदन पत्र की drafting कैसे की जाती है ?

                               किशोर अभियुक्त के विचारण के सम्बन्ध में आवेदन पत्र     

                                                                                                     [अभियुक्त हिरासत में) 

                                                न्यायालय मुख्य न्यागिक दण्डाधिकारी .................................................)

 अपराध संख्या .................. 
                                                            राज्य बनाम अभियुक्त 


                                                                                                    धारा ..............

                                                                                                   थाना ..............

                                                                                                   जनपद .............

              प्रार्थना-पत्र में अभियुक्त (नाम) ...........पुत्र ............. निवासी .................थाना...........  तहसील ........... जनपद .........की ओर से निम्नलिखित निवेदन है,


 1. यह कि उपरोक्त वाद में अभियुक्त की थाना .......................की पुलिस द्वारा कल रात दिनांक ..............समय .......................... गिरफ्तार कर आज न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है।


 २. यह कि आज दिनांक ........................ को अभियुक्त की आयु स्कूल के जन्म प्रमाण-पत्र एवं नगर निगम के जन्म मृत्यु रजिष्टर की प्रविष्टियों के अनुसार 16 वर्ष से कम है। 


३. यह कि गिरफ्तारी के समय अभियुक्त द्वारा पुलिस वालों को उम्र के सम्बन्ध में बताये जाने पर यह कहा गया कि अपनी समस्त बातों को कल अधिवक्ता के माध्यम से न्यायालय में कहना।

 4. अभि यह कि अभियुक्त की उम्र ................... वर्ष है और वह किशोर न्याय अधिनियम 2015 के तहत किशोर की परिभाषा में आता है। उसकी मानसिक और शारीरिक अवस्था ऐसी है कि वह कानून की दृष्टि से किशोर माना जाता है।


5. अभियुक्त की पुलिस द्वारा उसके निवास स्थान से गिरफ्तार किया गया है। और गिरफ्तारी के समय पुलिस ने उसे उसके अधिकारों से अवगत नही कराया गया जोकि  भारतीय संविधान और किशोर न्याय अधिनियम के तहत अनिवार्य है। पुलिस ने बताया है कि अभियुक्त की बालू माफियाओं के साथ मुठभेड में पकड़ा गया था, लेकिन इस मामले में (अभियुक्त की संलिप्तता के सम्बन्ध में किसी ठोस या निर्णायक प्रमाण का खुलासा नहीं किया गया है। पुलिस का दावा केवल बयान पर आधारित है और अभियुक्त के खिलाफ कोई विशिष्ट और पुख्ता साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किये गये हैं। 


6. यह कि अभियुक्त का किसी भी प्रकार का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और उसके खिलाफ पहले कोई भी अपराध दर्ज नहीं किया गया है। अभियुक्त एक साधारण किशोर है जो अध्ययन में रुचि रखता है और सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय है। वह किसी प्रकार के आपराधिक गतिविधियों में लिप्त नहीं रहा है। उसकी शिक्षा और मानसिक स्थिति सामान्य है, और वह समाज में एक सकारात्मक व्यक्ति के रूप में पहचान बनाने  की दिशा में कार्यरत है ।


 ७. यह कि अभियुक्त के परिवार का सामाजिक और आर्थिक स्थिति सामान्य है। उसके माता-पिता उसे अच्छे संस्कार देने का प्रयास कर रहे है और उसे हमेशा सही मार्ग पर चलने कि लिए प्रेरित करते रहें है। परिवार का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है और वे अभियुक्त के भविष्य को लेकर चिंतित है। परिवार के सदस्य हमेशा से अभियुक्त के सुधार और विकास में सहायक रहे हैं।


8. यह कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत पुलिस को किशोरों की गिरफ्तारी और हिरासत में रखने की प्रक्रिया में अत्यंत सावधानी बरतनी होती है ताकि उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े। अभियुक्त को हिरासत में रखने से उसकी शिक्षा और मानसिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा, पुलिस 'की ओर से गिरफ्तारी के समय अभियुक्त की यह जानकारी नहीं दी गयी कि उसको जमानत का अधिकार है और उसे किसी भी प्रकार की कानून की प्रक्रिया से अवगत नहीं कराया गया।

 9. यह कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत यदि अभियुक्त के खिलाफ कोई ठोस आरोप नहीं है या आरोप संदेहास्पद है तो उसे जमानत पर रिहा किया जा सकता है। अभियुक्त की हिरासत में रखने पर से उसके सुधारात्मक प्रक्रिया पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इसके बजाय उसे जमानत पर रिहा किया जा सकता है ।


                                                                        प्रार्थना


         अतः माननीय महोदय से विनम्र अनुरोध है कि अभियुक्त की आयु 16 वर्ष से कम होने के कारण उक्त प्रकरण को किशोर न्यायालय में स्थानान्तरित करने की कृपा करें, जो कि न्याय हित में आवश्यक है।

 स्थान ...............।                                                                                  अभियुक्त

 दिनांक ................।                                   द्वारा अधिवक्ता

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

बलवा (Rioting) और दंगा (Affray) क्या है? BNS की धारा 191 और 194 की पूरी जानकारीi

बलवा (Rioting) और दंगा (Affray) क्या है? BNS की धारा 191 और 194 की पूरी जानकारी बलवा क्या होता है? दंगा और बलवा में क्या अंतर है? पांच या उससे अधिक लोगों के समूह द्वारा हिंसा करने पर कौन-सी धारा लगती है? क्या हर व्यक्ति को केवल भीड़ में मौजूद रहने से बलवा का आरोपी बनाया जा सकता है? BNS Section 191 और Section 194 में क्या प्रावधान है? ये प्रश्न आपराधिक मामलों में बहुत महत्वपूर्ण हैं। पुराने भारतीय दंड संहिता (IPC) में बलवा से संबंधित मुख्य प्रावधान धारा 146 और 147 तथा Affray यानी दंगा से संबंधित प्रावधान धारा 159 और 160 में थे। अब 1 जुलाई 2024 से लागू भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) में इन विषयों के लिए नए section लागू हैं। वर्तमान कानून में BNS Section 189 unlawful assembly, Section 190 common-object liability, Section 191 rioting और Section 194 affray से संबंधित है। इस लेख में इन सभी प्रावधानों को उदाहरण और न्यायिक निर्णयों के माध्यम से आसान भाषा में समझेंगे। 1. बलवा (Rioting) क्या है? साधारण भाषा में जब कोई unlawful assembly यानी विधि-विरुद्ध जमाव अपने common object को ...

पुलिस स्पेशल सेल द्वारा मोटरसाइकिल जब्त करने पर क्या करें, जब कोई मुकदमा पंजीकृत न हो?

यहाँ एक विस्तृत,  ब्लॉग पोस्ट है जो कि कभी आपकी या  किसी व्यक्ति की मोटरसाइकिल को पुलिस विभाग की स्पेशल सेल पकड़ लेती है और किसी भी थाने में मुकदमा पंजीकृत नहीं करती है तो ऐसे स्थिति में क्या करें की गाड़ी को रिलीज करवा लिया जाये इस पर एक  blog post लिखकर मेरे द्तवारा  जितना सम्भव है उतना विशेष जानकारी के साथ  उदाहरण सहित समझाने की आप लोगों को कोशिश है ।🔥🔥🔥🔥 पुलिस स्पेशल सेल द्वारा मोटरसाइकिल जब्त करने पर क्या करें, जब कोई मुकदमा पंजीकृत न हो? कई बार ऐसी स्थिति सामने आती है जब पुलिस विभाग की स्पेशल सेल किसी व्यक्ति की मोटरसाइकिल या अन्य वाहन को रोककर अपने कब्जे में ले लेती है, लेकिन किसी भी थाने में उसके संबंध में FIR या मुकदमा पंजीकृत नहीं करती। इस तरह की परिस्थिति में वाहन मालिक के लिए यह समझना जरूरी है कि कानूनी प्रक्रिया क्या है और वाहन को रिलीज कराने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाएं। 1. सबसे पहले स्थिति की पुष्टि करें जिस पुलिस टीम या स्पेशल सेल ने गाड़ी पकड़ी है, उनसे लिखित या मौखिक रूप से पूछें कि वाहन क्यों रोका गया है। यह ...

असामी कौन है ?असामी के क्या अधिकार है और दायित्व who is Asami ?discuss the right and liabilities of Assami

अधिनियम की नवीन व्यवस्था के अनुसार आसामी तीसरे प्रकार की भूधृति है। जोतदारो की यह तुच्छ किस्म है।आसामी का भूमि पर अधिकार वंशानुगत   होता है ।उसका हक ना तो स्थाई है और ना संकृम्य ।निम्नलिखित  व्यक्ति अधिनियम के अंतर्गत आसामी हो गए (1)सीर या खुदकाश्त भूमि का गुजारेदार  (2)ठेकेदार  की निजी जोत मे सीर या खुदकाश्त  भूमि  (3) जमींदार  की बाग भूमि का गैरदखीलकार काश्तकार  (4)बाग भूमि का का शिकमी कास्तकार  (5)काशतकार भोग बंधकी  (6) पृत्येक व्यक्ति इस अधिनियम के उपबंध के अनुसार भूमिधर या सीरदार के द्वारा जोत में शामिल भूमि के ठेकेदार के रूप में ग्रहण किया जाएगा।           वास्तव में राज्य में सबसे कम भूमि आसामी जोतदार के पास है उनकी संख्या भी नगण्य है आसामी या तो वे लोग हैं जिनका दाखिला द्वारा उस भूमि पर किया गया है जिस पर असंक्रम्य अधिकार वाले भूमिधरी अधिकार प्राप्त नहीं हो सकते हैं अथवा वे लोग हैं जिन्हें अधिनियम के अनुसार भूमिधर ने अपनी जोत गत भूमि लगान पर उठा दिए इस प्रकार कोई व्यक्ति या तो अक्षम भूमिधर का आसामी होता ह...