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बलवा (Rioting) और दंगा (Affray) क्या है? BNS की धारा 191 और 194 की पूरी जानकारीi

धारा 511 में अपराध को कैसे परिभाषित किया गया है ?

भारतीय दण्ड संहिता की धारा 511 में आपराधिक प्रयत्न के अपराध का वर्णन किया गया है। जिसका मतलब है कि किसी अपराध करने का प्रयास करना अपराध की श्रेणी में जब तक नहीं आयेगा । परन्तु भारतीय दण्ड संहिता के अनुसार आजीवन कारावास या कारावास के दण्डनीय अपराध की करने या करवाने की चेष्टा करना और उसके फलस्वरूप उस अपराध दशा में कोई कार्य किये जाने पर यदि इस संहिता में उसके लिये कोई दण्ड की अवस्था न हो तो आजीवन कारावास के दण्ड वाले मामले में अधिकतम कारावास की अवधि के आधे तक के लिगे या दोनो से दण्डित किया जा सकता है। 

     धारा 511 को समझने के लिये एक उदाहरण के हम समझते है कि जिसमें किसी अभियुक्त द्वारा एक लड़की को पकड़ा और उसे बलपूर्वक झाडियो के पास ले गया उसे जमीन पर गिराकर उसके अंदरुनी कपडे हटाये, उसके ऊपर चढ़ गया और घुसाने का प्रयास किया लेकिन वह सफल होता इससे पहले ही लड़की को रक्तस्राव होने लगा। यहाँ पर अभियुक्त धारा 511 के अधीन बलात्कार के प्रयास का दोषी होगा । यहाँ पर अभियुक्त ने धारा 376 के अपराध की कारित करने का प्रयत्न किया है। 



      इसीप्रकार से यदि A नामक व्यक्ति नकली नोट " बनाने के उद्देश्य से कोई रंग की खरीदने के लिये जाता है। यह दृष्टांत आपराधिक प्रयत्न का नहीं है। क्योंकि A ने अभी तक रंग को खरीदा नहीं है। यह सिर्फ उसका विचार है और विचार बदल भी सकता है।


     यहाँ पर हम एक दूसरे उदाहरण पर चर्चा करें जैसे A नामक व्यक्ति द्वारा B की जेब काटने के उद्‌देश्य से जेब में हाथ डालता है परन्तु B की जेब में कुछ नहीं मिलता है। फिर भी मैंने अपराध किया है. क्योंकि A द्वारा B की जेब काटने का प्रयास ही उसको अपराधी की श्रेणी में लाता है। मानों यदि B की जेब में रुपये होते तो A ने तो वह रुपये निकाल ही लिये थे। वो तो B की जेब में कुछ था ही नहीं। लेकिन A का तो पूरा उद्‌देश्य उसकी जेब काटना था। जिसमें तो पूरी तरह से सफल भी हुआ। 



   एक दूसरे उदाहरण से हम समझते है कि A द्वारा एक सेठ के यहाँ चोरी करने के मकसद से A ने उसके घर में प्रवेश किया और उसकी तिजोरी को तोड़ डाला। लेकिन A के जाने से पहले ही B द्वारा सेठ की तिजोरी से सारा माल पहले ही चोरी कर लिया गया था। फिर भी A को चोरी करने का अपराधी माना जायेगा।


 ओम प्रकाश बनाम राज्य से अभियुक्त पति और उसकी मां ने अभियुक्त की पत्नी को जानबूझ कर भूखा रखा और उसके साथ दुर्व्यहार किया क्योंकि विवाह में वह पर्याप्त दहेज नहीं लाई थी। उसका स्वास्थ्य निरन्तर खराब होता चला गया और एक दिन वह घर से भाग कर अस्पताल पहुँचने में सफल हुई जहां उसे अन्तरंग रोगी के रूप में भर्ती कर लिया गया । जब अभियुक्त और उसकी मां ने रोगी को
उसके साथ वापस  भेज देने का अनुरोध किया डाक्टर ने चिकित्सीय आधारों पर ऐसा करने से इन्कार कर दिया। उस स्त्री को स्वास्थ लाभ करने में लगभग 10. माह का समय लगा। अभियुक्त और उसकी मां का हत्या करने का प्रयत्न करने के लिये सहिता की धारा 307 के अधीन दोष सिद्ध किया गया। उच्चतम न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि जैसा कि धारा 511 में है वैसे ही धारा 307 के अधीन भी दोष सिद्धि के लिये अभियुक्त द्वारा किया गया कार्य । अन्तिम निकटस्थ कार्य हो यह आवश्यक नहीं है।


 अगर हम अपराध को देखे तो अपराध को हम चार भागों में बांट सकते है। जी हाँ अपराध के ये चार भाग सुनने में कुछ अजीब जरूर लगते है कि आप लोगों को लग रहा होगा कि अपराध के भी चार प्रकार हो सकते है क्योकि अपराध अपने आप में ही एक प्रकार है। लेकिन कानून के विद्वानों को ही पता है कि हम अपराध की चार प्रकार में बांट सकते है। 



[1] आशय Eintention]

 [2] तैयारी (Preparation)

 [3] चेष्टा (Attempt]


 [4] अपराध (Crime)


 'यहाँ पर समझने वाला एक बड़ा ही बारिक पॉइन्ट है कि यदि आप कि चेष्टा असफल होती है तो अपराध पूरा नही होता है। किन्तु किया गया प्रयत्न दण्डनीय है। क्योंकि यह एक चेतावनी  उत्पन्न करता है जो कि स्वंय उपहानि है और यह अपराधी का नैतिक दोष है। 


   भारतीय दण्ड संहिता की धारा 511 में आजीवन कारावास या अन्य कारावास से दण्डनीय अपराधों को करने के, प्रयत्न के लिये दण्ड का प्रावधान है। धारा 511 में वर्णित प्रयत्न के लिये दण्ड उस अपराध के लिये उपबन्धित अधिकतम अवधि के आधे तक हो सकेगा। 

Note: अभयानन्द मित्रा बिहार राज्य (1961), सुधीर कुमार मुखर्जी बनाम बंगाल राज्य (1973) तथा महाराष्ट्र बनाम मोहम्मद याकूब (1980) ये सभी वाद भारतीय दण्ड संहिता की धारा 511 में वर्णित आपराधिक प्रयत्न से सम्बन्धित है।



 Important:→ भारतीय दण्ड संहिता के अन्तर्गत हत्या करने की तैयारी दण्डनीय नहीं है जबकि डकैती करने की तैयारी धारा ३११, राज्य के विरुद्ध युद्ध करने की तैयारी धारा 122 तथा किसी मित्र शक्ति के राज्य क्षेत्र में लूटपाट करने की तैयारी धारा 126 के अधीन दण्डनीय अपराध है। 


भारतीय दण्ड संहिता की धारा 511 में यह उल्लेख किया गया है कि जो कोई उस संहिता द्वारा आजीवन कारावास या कारावास के दण्डनीय अपराध को करने का या ऐसे अपराध करवाने का प्रयास करता है और ऐसे प्रयास में अपराध करने की दिशा में कोई कार्य करता है तो वह जहाँ ऐसे प्रयास के दण्ड के लिये इस सहिता द्वारा कोई अभिव्यक्त व्यवस्था न की गयी हो अपराध में उपबन्धित किसी प्रकार के कारावास से ऐसी अवधि के लिये जो आजीवन कारावास की अधिकतम अवधि के आधे तक हो सकती है या जुर्माने से जोकि उस अपराध के  या दोनों से दण्डित किया जायेगा।


    कानूनन यदि आप किसी अपराध को करने का प्रयास करते है लेकिन वह आप का प्रयास यदि असफल भी हो जाता है फिर भी कानून इस प्रकार के प्रयत्न करने वाले को दण्डित करता है। प्रयास को कानून में इसलिये दण्डनीय बनाया गया है कि चाहे प्रयास के असफल हो जाने के कारण वांछित अपराध गठित न हो परन्तु उससे सतर्कता उत्पन्न होती है कि यदि अपराधी सफल हो गया होता तो किसी पक्ष को हानि हो जाती है। अता अपराधी मनोवृत्ति करने वाले या करने का इरादा रखने वाले व्यक्तियों को प्रयत्न करने के अपराध में दण्डित किया जाता है।



 हत्या के सम्बन्ध में विभिन्न न्यायालयों में मतभेद: धारा 511 का हत्या के प्रयत्न (धारा 307] के अपराध के सम्बन्ध में विभिन्न उच्च न्यायालयों में मतभेद है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय का कथन है कि हत्या धारा 511 के सम्बंध में लागू नहीं होती है क्योंकि हत्या करने का प्रयास स्वयं धारा 307 के अनुसार दण्डनीय है। कुछ न्यायालयों का मत है कि धारा 511 का क्षेत्र धारा 307 से कही अधिक विस्तृत है क्योंकि धारा  307  का सम्बन्ध सिर्फ किसी या किन्ही ऐसे कार्यों से है जिनका परिणाम किसी व्यक्ति की मृत्यु होना ही जबकि धारा 511 के अन्तर्गत किसी भीअपराध के लिये किया गया प्रयास दण्डनीय होता है ।

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