Skip to main content

कानूनी मामलों में चिकित्सा साक्ष्य की क्या भूमिका होती है?What role does medical evidence play in legal cases?

बिना परमिट के वाहन के उपयोग करने पर क्या सजा दी जा सकती है?What is the punishment for using a vehicle without a permit?

 परमिट के बिना यान का उपयोग:-

 (1) कोई व्यक्ति जो धारा 66 की उपधारा (1) के उपबन्धों के उल्लंघन में या ऐसे परमिट की उस मार्ग सम्बन्धी जिस पर और उस क्षेत्र सम्बन्धी, जिसमें और उस प्रयोजन सम्बन्धी, जिसके लिए उस यान का उपयोग किया जा सकेगा, किसी शर्त का उल्लंघन करके मोटर यान को चलायेगा, मोटर यान का उपयोग करायेगा या किये जाने देगा, वह प्रथम अपराध के लिए जुर्माने से, जो पाँच हजार रुपये तक हो सकेगा किन्तु दो हजार रुपये से कम नहीं होगा और किसी पश्चात्वर्ती अपराध के लिए कारावास से, जो एक वर्ष तक हो सकेगा किन्तु तीन मास के कम नहीं होगा या जुर्माने से, जो दस हजार रुपये तक हो सकेगा किन्तु पाँच हजार रुपये से कम नहीं होगा या दोनों से दण्डनीय होगा-

Use of vehicle without permit:-


 (1) Any person who, in contravention of the provisions of sub-section (1) of section 66 or any condition of such permit relating to the route over which and the area in which and the purpose for which the vehicle may be used,  drives a motor vehicle, causes a motor vehicle to be used or allows a motor vehicle to be used in contravention of this Act, shall be punishable with fine for the first offence, which may extend to five thousand rupees but shall not be less than two thousand rupees and with imprisonment for any subsequent offence,  Which may extend to one year but not less than three months or with fine which may extend to ten thousand rupees but not less than five thousand rupees or with both -



 परन्तु न्यायालय लेखबद्ध किये जाने वाले कारणों से न्यूनतम दण्ड अधिरोपित कर सकेगा।

Provided that the court may impose minimum punishment for reasons to be recorded in writing.


 (2) इस धारा की कोई बात आपात के दौरान ऐसे व्यक्तियों को ले जाने के लिए, जो रोग से या क्षति से ग्रस्त हैं या मरम्मत के लिए सामग्री के या कष्ट निवारण के लिए खाद्य या सामग्रियों के वैसे ही प्रयोजन के लिए चिकित्सीय प्रदायों को परिवहन के लिए मोटर यान के उपयोग के सम्बन्ध में लागू न होगी। 

परन्तु यह तब जबकि वह व्यक्ति, जो यान का उपयोग कर रहा है उसके बारे में रिपोर्ट प्रादेशिक परिवहन प्राधिकरण को ऐसे उपयोग किए जाने से सात दिन के अन्दर दे दे।

(2) Nothing in this section shall apply to the supply during an emergency of medical supplies for the transportation of persons suffering from disease or injury or of materials for repairs or of food or materials for the relief of suffering for the same purpose.  Will not apply in relation to the use of motor vehicles for transportation.


 Provided that this is provided that the person using the vehicle reports the same to the Regional Transport Authority within seven days of such use.


 (3) न्यायालय जिसमें उपधारा (1) में विनिर्दिष्ट प्रकृति के अपराध के सम्बन्ध में किसी दोषसिद्धि से अपील की जाती है, अवर न्यायालय द्वारा किये गये किसी आदेश को इस बात के होते हुए अपास्त कर सकेगा या भिन्न कर सकेगा कि कोई अपील उस दोषसिद्धि के विरुद्ध दाखिल नहीं होती, जिसके सम्बन्ध में ऐसा आदेश किया गया था। 

(3) The Court to which an appeal lies from a conviction in respect of an offense of the nature specified in sub-section (1) may set aside or vary any order made by an inferior Court, notwithstanding that an appeal may be made against that conviction.  is not filed against the person in respect of whom such order was made.

Comments

Popular posts from this blog

मेहर क्या होती है? यह कितने प्रकार की होती है. मेहर का भुगतान न किये जाने पर पत्नी को क्या अधिकार प्राप्त है?What is mercy? How many types are there? What are the rights of the wife if dowry is not paid?

मेहर ( Dowry ) - ' मेहर ' वह धनराशि है जो एक मुस्लिम पत्नी अपने पति से विवाह के प्रतिफलस्वरूप पाने की अधिकारिणी है । मुस्लिम समाज में मेहर की प्रथा इस्लाम पूर्व से चली आ रही है । इस्लाम पूर्व अरब - समाज में स्त्री - पुरुष के बीच कई प्रकार के यौन सम्बन्ध प्रचलित थे । ‘ बीना ढंग ' के विवाह में पुरुष - स्त्री के घर जाया करता था किन्तु उसे अपने घर नहीं लाता था । वह स्त्री उसको ' सदीक ' अर्थात् सखी ( Girl friend ) कही जाती थी और ऐसी स्त्री को पुरुष द्वारा जो उपहार दिया जाता था वह ' सदका ' कहा जाता था किन्तु ' बाल विवाह ' में यह उपहार पत्नी के माता - पिता को कन्या के वियोग में प्रतिकार के रूप में दिया जाता था तथा इसे ' मेहर ' कहते थे । वास्तव में मुस्लिम विवाह में मेहर वह धनराशि है जो पति - पत्नी को इसलिए देता है कि उसे पत्नी के शरीर के उपभोग का एकाधिकार प्राप्त हो जाये मेहर निःसन्देह पत्नी के शरीर का पति द्वारा अकेले उपभोग का प्रतिकूल स्वरूप समझा जाता है तथापि पत्नी के प्रति सम्मान का प्रतीक मुस्लिम विधि द्वारा आरोपित पति के ऊपर यह एक दायित्व है

वाद -पत्र क्या होता है ? वाद पत्र कितने प्रकार के होते हैं ।(what do you understand by a plaint? Defines its essential elements .)

वाद -पत्र किसी दावे का बयान होता है जो वादी द्वारा लिखित रूप से संबंधित न्यायालय में पेश किया जाता है जिसमें वह अपने वाद कारण और समस्त आवश्यक बातों का विवरण देता है ।  यह वादी के दावे का ऐसा कथन होता है जिसके आधार पर वह न्यायालय से अनुतोष(Relief ) की माँग करता है ।   प्रत्येक वाद का प्रारम्भ वाद - पत्र के न्यायालय में दाखिल करने से होता है तथा यह वाद सर्वप्रथम अभिवचन ( Pleading ) होता है । वाद - पत्र के निम्नलिखित तीन मुख्य भाग होते हैं ,  भाग 1 -    वाद- पत्र का शीर्षक और पक्षों के नाम ( Heading and Names of th parties ) ;  भाग 2-      वाद - पत्र का शरीर ( Body of Plaint ) ;  भाग 3 –    दावा किया गया अनुतोष ( Relief Claimed ) ।  भाग 1 -  वाद - पत्र का शीर्षक और नाम ( Heading and Names of the Plaint ) वाद - पत्र का सबसे मुख्य भाग उसका शीर्षक होता है जिसके अन्तर्गत उस न्यायालय का नाम दिया जाता है जिसमें वह वाद दायर किया जाता है ; जैसे- " न्यायालय सिविल जज , (जिला) । " यह पहली लाइन में ही लिखा जाता है । वाद - पत्र में न्यायालय के पीठासीन अधिकारी का नाम लिखना आवश्यक

अंतर्राष्ट्रीय विधि तथा राष्ट्रीय विधि क्या होती है? विवेचना कीजिए.( what is the relation between National and international law?)

अंतर्राष्ट्रीय विधि को उचित प्रकार से समझने के लिए अंतर्राष्ट्रीय विधि तथा राष्ट्रीय विधि के संबंध को जानना अति आवश्यक है ।बहुधा यह कहा जाता है कि राज्य विधि राज्य के भीतर व्यक्तियों के आचरण को नियंत्रित करती है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय विधि राष्ट्र के संबंध को नियंत्रित करती है। आधुनिक युग में अंतरराष्ट्रीय विधि का यथेष्ट विकास हो जाने के कारण अब यह कहना उचित नहीं है कि अंतर्राष्ट्रीय विधि केवल राज्यों के परस्पर संबंधों को नियंत्रित करती है। वास्तव में अंतर्राष्ट्रीय विधि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सदस्यों के संबंधों को नियंत्रित करती है। यह न केवल राज्य वरन्  अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, व्यक्तियों तथा कुछ अन्य राज्य इकाइयों पर भी लागू होती है। राष्ट्रीय विधि तथा अंतर्राष्ट्रीय विधि के बीच घनिष्ठ संबंध हैं। दोनों प्रणालियों के संबंध का प्रश्न आधुनिक अंतरराष्ट्रीय विधि में और भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि व्यक्तियों के मामले जो राष्ट्रीय न्यायालयों के सम्मुख आते हैं वे भी अंतर्राष्ट्रीय विधि के विषय हो गए हैं तथा इनका वृहत्तर  भाग प्रत्यक्षतः व्यक्तियों के क्रियाकलापों से भी संबंधित हो गया है।