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Striving for Equality: The Case for a Uniform Civil Code

पोस्को एक्ट क्या होता है ? यह कब लगाया जाता है ?What is POCSO Act? When is it imposed?

Pocso act क्या है? यह सवाल हमारे मन में आता है जब हम किसी न्यूज पेपर के कालम में कोई ऐसी खबर पढ़ते हैं जोकि यौन  अपराध से सम्बन्धित हो या जिसमें कि नाबालिक के साथ किसी भी प्रकार का यौन शोषण किया गया हो वहाँ पर इस पॉक्सो Act के तहत मुकदमा लिखा जाता है लेकिन हम आम बोलचाल की भाषा में फिर भी Pocso Act को समझ नहीं पाते हैं तो आज हम इस Act (अधिनियम) पर सीधि और सरल- भाषा में चर्चा करेगें कि आखिर ये Pocso है क्या ? 

Pocso Act यानी अगर हम इस एक्ट की बात  करे तो इसकी संविधानिक भाषा में अधिनियम और सरल भाषा में में कानून कहते हैं। ये पॉक्सो एक्ट है क्या ? जो आज कल हम पेपर अखबार और मीडिया के माध्यम से हम तक कुछ ऐसी खबरें पहुचती है जैसे किसी नाबालिक के साथ यौन हिंसा, यौन-शोषण जैसे मामलों पर अंकुश लगाने के लिये सरकार द्वारा पॉक्सो एक्ट लागू किया गया है।


 पॉक्सो एक्ट का फुल फॉर्म, Protection of children Against Sexual offence यानि कि बच्चों की यौन अपराधों से सुरक्षा | Pocso Act को भारत सरकार के महिला और बाल विकास मंत्रालय द्वारा साल 2012 में अधिनियमित किया गया था। POCSO Act 14 नवम्बर 2012 को लागू हुआ था जो वर्ष 1992 में बाल अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन के भारत के अनुसमर्थन के परिणामस्वरूप अधिनियमित किया गया था।



यह एक्ट बच्चों को 18 वर्ष से कम व्यक्ति के रूप में परिभाषित करता है और बच्चों का शारीरिक  भावनात्मक  बौद्धिक विकास सुनिश्चित करने के लिये हर चरण को ज्यादा और महत्व देते हुये बच्चों के कल्याण और उनके हितों की सुरक्षा की गारण्टी के रूप में है। 



संविधान के अनुच्छेद 15 का खंड (3) अन्य बातों के साथ राज्य को बालकों के लिये विशेष उपबन्ध करने के लिये सशक्त करता है। संयुक्त राष्ट्र की महासभा द्वारा अंगीकृत बालकों के अधिकारों में संबंधित अभिसमय को जो बालक के सर्वोत्तम हितों को सुरक्षित करने के लिये सभी राज्य पक्षकारों द्वारा पालन किये जाने वाले मानकों को विहित करता है. भारत सरकार ने तारीख 11 दिसम्बर 1992 को अंगीकृत किया है। 


बच्चों के साथ सेक्सुअल अपराध (child sexual Abuse) : एक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन होता है जिसमें बच्चों के खिलाफ यौन शोषण और उनके साथ यौन उत्पीड़न शामिल हो सकता है। बच्चों के साथ sexual अपराध में शामिल हो सकते है - छेडछाड़, यौन उत्पीड़न ,यौन शोषण, पोर्नोग्राफी का दर्शन या डिस्ट्रीब्यूशन और अन्य शोषण सबन्धित क्रियायें। यह सभी अपराधिक होते है और बच्चों की आत्मा और शारीरिक सुरक्षा को खतरे में डाल सकते हैं। Pocso Act और भारतीय दंड संहिता के तहत ऐसे अपराधों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाही की जाती है।



2. यौन उत्पीडन :

 इसमें शारीरिक और मानसिक 'रूप से बच्चों के साथ अनैतिक यौन शोषण और यौन उत्पीडन को परिभाषित किया जाता है। 18 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति को बच्चे के रूप में परिभाषित किया गया है। 'इसमें लड़के और लड़कियाँ दोनो यौन शोषण के शिकार हो सकते है और पीडित के लिंग की परवाह किये बिना ऐसा दुर्व्यवहार अपराध की श्रेणी में आता है।


 बच्चों की सुरक्षा : → 

बच्चों को तथा उनके माता-पिता और शिक्षको को सेक्सुअल अपराधों के बारे में साक्षरता दिलाना महत्वपूर्ण है ताकि वे खुद को सुरक्षित रख सकें। सामाजिक जागरुकता बढ़ाने के लिये लोगों को बच्चों के साथ सेक्सुअल अपराधों के बारे में जानकार और सतर्क रहने की जरूरत है। बच्चों को चाहिये कि वे खुले मन से अपने बड़ों को बता सकें यदि उन्हें किसी तरह का अपराध महसूस होता है।


 4. मेल्डा आर्ट :

 मेल्डा आर्ट (Molestation Awareness and empowerment through Legal training and Action) एक सामाजिक प्रमुखाधिकार एवं शिक्षा संगठन होता है जो भारत में बच्चों के साथ सेक्सुअल उत्पीड़न और यौन शोषण के खिलाफ लड़ाई में शामिल है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों को उनके अधिकारों की जागरुकता दिलाना और उन्हें साक्षर बनाना है, जिससे वे सुरक्षित रूप से रह सकें।



मेल्डा आर्ट विभिन्न कार्यक्रमों, प्रशिक्षण सश्रों और जागरुकता कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को यौन उत्पीडन और शोषण के खिलाफ सुरक्षित बनाने के लिये कई प्रमुख पहलों का समर्थन करता है। इसका मूल उद्देश्य यह है कि बच्चे अपने अधिकारों को समझे यदि उन्हें किसी प्रकार के यौन अपराध का सामना करना 'पडे तो उन्हें सहयता और समर्थन मिले। 


Pocso Act का सारांश :→ भारतीय दंड संहिता 1860 के तहत 18 वर्ष से कम आयु के सभी बच्चों के साथ यौन अपराधों को Pocso Act के अन्तर्गत ही संचालित किया जायेगा एवं अपराधी के दोषी साबित होने पर उसको पॉक्सो एक्ट के तहत कार्यवाही की जायेगी। भारत में बच्चों  की सुरक्षा के लिए अनेक कानून है और बाल सुरक्षा को सामाजिक विकास के मुख्य घटक के रूप में तेजी से स्वीकार किया जा रहा है जमीनी स्तर पर मानव संसाधन क्षमता की कमी और पुनर्वास सेवाओं की कमी 'इन कानूनों को लागू करने की चुनौती है परिणाम स्वरूप लाखों बच्चों हिंसा, दुर्व्यवहार और शोषण का शिकार होते रहते हैं। बाल हिंसा कही भी हो सकती है चाहे वह घर, स्कूल या बाल देखभाल केन्द्र क्यों न हो। इसलिये बच्चों के भविष्य की सुरक्षा राष्ट्र की होती है। वह भी भारत जैसे देश में जहाँ की आबादी का एक बड़ा हिस्सा लगभग 150 मिलियनं 0-16 वर्ष आयु वर्ग के आयु वर्ग के बच्चे है। वही 472 मिलियन बच्चे जो 10 वर्ष तक के हैं देश की आबादी का 39% हैं। जो कि भारत का भविष्य निर्माण के रूप में आगे सहायक होगें।




पोक्सो एक्ट की पृष्ठभूमि :-

[i] बच्चों के यौन उत्पीडन एवं यौन शोषण के बढ़ते मामले:→ बच्चों के यौन उत्पीड़न के मामलों की बात की जाये तो 1980 में जहाँ यौन शोषण और उत्पीडन की शिकायतों की बात की जाये तो सिर्फ ऐसे मामले 80 ही दर्ज हुये थे। लेकिन यही आकड़ा 1990 में बढ़कर 1000 के पार पहुँच गया था। और 2010 तक यह करीब 25000 के पार हो गया ।


 2 . बच्चियों से जबरन देह व्यापार कराना :  बच्चियों से देह व्यापार के आकडे बताते हैं कि 2000 से 2010 के बीच यह आकडा करीब कई हजार गुना बढ़ गया है। बच्चों से दुष्कर्म के मामलों को बढ़ता देख एक विशेष कानून की आवश्यकता थी। क्योंकि दुष्कर्म से निपटने के लिये विशेष कानून का अभाव था। भारतीय दण्ड संहिता के तहत ही इस तरह के यौन शोषण और बाल उत्पीड़न के मामलों के तहत ही सजा का प्रावधान था जिनमें यह नाबालिकों को उचित न्याय की प्राप्ति का अभाव कम था। 

पोक्सो एक्ट में 9 अध्याय और 46 धाराये हैं|


धारा 3→ प्रवेशन लैंगिक हमले का जिक्र ।

 धारा 4→ जो कोई प्रवेशन लैंगिक हमला करेगा वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि सात वर्ष से कम की नही होगी किन्तु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी दंडित किया जायेगा।



धारा 5:- गुरुत्तर लैगिक हमले का जिक्र ।

स्पष्टीकरण : जब किसी पुलिस अधिकारी द्वारा पुलिस थाने या ऐसे परिसरों की सीमाओं के भीतर जहां उसकी नियुक्ति की गई है प्रवेशन लैंगिक 'हमला करता है। वह कठोर कारावास से जिसकी अवधि दस वर्ष से कम नही होगी किन्तु जो आजीवन कारावास तक की हो सकेगी दंडित किया जायेगा और जुर्माने से भी दंडनीय होगा। 


अश्लील प्रयोजनों के लिये बालक का उपयोग और उसके लिये दंड :→ कोई व्यक्ति जो वाणिज्यिक प्रयोजनों के लिये बालक को सम्मिलित करते हुये किसी अश्लील सामग्री का किसी भी रूप में भंडारकरण करेगा, वह किसी भांति के कारावास से जो तीन वर्ष तक का होगा या जुर्माने मा दोनों से दंडित किया जायेगा। 


मामलों की रिपोर्ट करने के लिये प्रक्रिया :→ 

[1] विशेष किशोर पुलिस यूनिट था


 [2] स्थानीय पुलिस । 

[3] उपधारा (1] के अधीन दी गई प्रत्येक रिपोर्ट में - -[A] एक प्रविष्टि संख्या अंकित होगी और लेखबद्ध की जायेगी 

[B] सूचना देने वाले को पढ़कर सुनाई जायेगी। 


 [C] पुलिस यूनिट द्वारा रखी जाने वाली पुलिस पुस्तिका में प्रविष्ठ की जायेगी।



Note: बच्चों पर यौन अपराध करने के लिये मौत की सजा सहित अधिक कठोर सजा देने के लिये 2019 में अधिनियम में संशोधन किया गया | पोक्सो एक्ट में संशोधन करके 16 साल से कम आयु के बच्चों से रेप के मामलो में 10 साल की न्यूनतम साजा को को बढ़ाकर 20 साल कर दिया गया ।


 पोक्सो एक्ट की धारा कब लगायी जाती है?


 बच्चो और नाबालिको के साथ यौन उत्पीड़न और यौन हिंसा जैसे अपराध जैसे कि अश्लीव हरकत करना, उनके प्राइवेट पाटर्स को छूना या  अपने प्राइवेट पार्ट्स को टच करवाना बच्चों को अश्लील फिल्में या पोर्नोग्राफी कंटेट दिखाना आता है।


 क्या हम पोक्सो एक्ट में समझौता (सुलहनामा कर सकते हैं? 


हाइकोर्ट का कथन है कि यदि पीडित और आरोपी में यदि समझौता [सुलहनामा] हो भी जाता है तो भी एफआईआर को खारिज नही किया जा सकता है।


 विशेष :→ जोधपुर कोर्ट द्वारा आशाराम नामक व्यक्ति को पोक्सो एक्ट तक आजीवन कारावास की सजा दी गई है जिसमें स्पष्ट और साफ शब्दों में बताया गया है कि (आजीवन कारावास मतलब अन्तिम सांस तक उसको जेल में बिताना पड़ेगा।




What is POCSO act?  This question comes to our mind when we read any such news in the column of any newspaper which is related to sexual crime or in which any kind of sexual exploitation has been done against a minor, there a case is registered under this POCSO Act.  But we are still not able to understand POCSO Act in common spoken language, so today we will discuss this Act in simple and straightforward language, what is POCSO after all?


 POCSO Act i.e. if we talk about this Act, then in its constitutional language it is called Act and in simple language it is called Law.  Is this POCSO Act?  These days, we reach us through paper, newspaper and media such news as POCSO Act has been implemented by the government to curb cases like sexual violence and sexual exploitation of minors.



 Full form of POCSO Act, Protection of children Against Sexual offense i.e. protection of children from sexual crimes.  The POCSO Act was enacted in the year 2012 by the Ministry of Women and Child Development, Government of India.  The POCSO Act came into force on 14 November 2012 as a result of India's ratification of the United Nations Convention on the Rights of the Child in the year 1992.



This Act defines children as persons under the age of 18 years and is intended to guarantee the welfare and protection of children's interests by giving greater importance to each stage of their physical, emotional and intellectual development.




 Clause (3) of Article 15 of the Constitution inter alia empowers the State to make special provisions for children.  The Convention on the Rights of the Child, adopted by the General Assembly of the United Nations, sets out the standards to be followed by all State Parties to protect the best interests of the child.  The Government of India has adopted the date 11 December 1992.



 Child sexual abuse: A serious human rights violation that may include sexual exploitation and abuse against children.  Sexual crimes against children can include molestation, sexual assault, sexual exploitation, viewing or distribution of pornography and other exploitative activities.  All of these are criminal and can put children's mental and physical safety at risk.  Strict legal action is taken against such crimes under the POCSO Act and the Indian Penal Code.




 2. Sexual harassment:


 It defines immoral sexual exploitation and sexual abuse of children in physical and mental form.  Any person under the age of 18 is defined as a child.  'In this, both boys and girls can be victims of sexual abuse and regardless of the gender of the victim, such abuse comes under the category of crime.



 Children's safety: →


 It is important to educate children and their parents and teachers about sexual crimes so that they can protect themselves.  To increase social awareness, people need to be aware and alert about sexual crimes against children.  Children should be able to openly tell their elders if they feel any kind of guilt.

    
4. Melda Art:


 MELDA ART (Molestation Awareness and empowerment through Legal training and Action) is a social empowerment and education organization involved in the fight against sexual harassment and sexual exploitation of children in India.  Its main objective is to make children aware of their rights and make them literate, so that they can live safely.




 Melda Art supports several key initiatives to protect children against sexual harassment and exploitation through various programmes, training courses and awareness programs.  Its basic objective is that children understand their rights and get help and support if they face any kind of sexual crime.



 Summary of POCSO Act: → Under the Indian Penal Code 1860, sexual offenses against all children below 18 years of age will be handled under the POCSO Act and if the culprit is proven guilty, action will be taken under the POCSO Act.  India has many laws for the protection of children and child protection is increasingly being accepted as a core component of social development. Lack of human resource capacity at the grassroots level and lack of rehabilitation services 'challenge implementation of these laws'  As a result, millions of children remain victims of violence, abuse and exploitation.  Child violence can happen anywhere, whether it is home, school or child care center.  Therefore, the future of children is safeguarded by the nation.  That too in a country like India where a large part of the population, about 150 million, are children in the age group of 0-16 years.  The same 472 million children who are up to 10 years of age are 39% of the country's population.  Which will be helpful in building the future of India.


Background of POCSO Act:-


 [i] Increasing cases of sexual exploitation and abuse of children: → If we talk about cases of sexual exploitation of children, in 1980, if we talk about complaints of sexual exploitation and abuse, only 80 such cases were registered.  But this figure had increased to beyond 1000 in 1990.  And by 2010 it had crossed 25,000.



 2 .  Forced prostitution of girls: Statistics of prostitution of girls show that between 2000 and 2010 this figure has increased several thousand times.  Seeing the increasing cases of child rape, there was a need for a special law.  Because there was a lack of special law to deal with rape.  Under the Indian Penal Code, there was a provision of punishment only for such cases of sexual exploitation and child molestation in which these minors were deprived of getting proper justice.


 There are 9 chapters and 46 sections in the POCSO Act.



 Section 3→ Entry Mention of sexual assault.


 Section 4 → Whoever commits penetrative sexual assault shall be punished with imprisonment of either description for a term which shall not be less than seven years but which may extend to imprisonment for life.




 Section 5:- Mention of aggravated sexual assault.


 Explanation: When a police officer commits penetrative sexual assault within the limits of a police station or the premises to which he is appointed.  He shall be punished with rigorous imprisonment for a term which shall not be less than ten years but which may extend to imprisonment for life and shall also be liable to fine.



 Use of child for obscene purposes and punishment therefor: → Any person who stores any obscene material in any form involving a child for commercial purposes shall be punished with imprisonment of either description for a term which may extend to three years or with fine.  Ma will be punished by both.


Procedure for reporting cases :→


 [1] The Special Juvenile Police Unit was



 [2] Local police.


 [3] Every report given under sub-section (1) shall bear - [A] an entry number and shall be recorded in writing.


 [B] The information will be read out to the person giving it.



 [C] Shall be entered in the police book maintained by the police unit.




 Note: The Act was amended in 2019 to provide more stringent punishment, including death penalty, for committing sexual offenses against children.  By amending the POCSO Act, the minimum punishment of 10 years was increased to 20 years in cases of rape of children below 16 years of age.



 When is the section of POCSO Act invoked?



 Crimes like sexual harassment and sexual violence against children and minors such as doing obscene acts, touching their private parts or getting their private parts touched include showing obscene films or pornography content to children.



 Can we compromise in POCSO Act?



 The High Court says that even if a settlement is reached between the victim and the accused, the FIR cannot be dismissed.



 Special:→ Jodhpur Court has given life imprisonment to a person named Asharam till POCSO Act, in which it has been clearly stated that (life imprisonment means he will have to spend in jail till his last breath).


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