सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

दहेज मृत्यु क्या है? BNS Section 80, सजा, सबूत और सुप्रीम कोर्ट के फैसले

अभिहस्तान्तरण लेखन से क्या अभिप्राय है ? What is meant by writing of assignment?

अभिहस्तान्तरण लेखन से हमारा अभिप्राय ऐसे लेखन से है जिसमें किसी सम्पति का या उसमें के किसी हित का हस्तान्तरण अन्तरक और आन्तरिती के बीच किसी संविदा के अन्तर्गत होता है । सम्पत्ति अन्तरण अधिनियम की धारा 2 ( 10 ) के अनुसार हस्तान्तरण लेखन से अभिप्राय एकजीवित व्यक्ति द्वारा दूसरे जीवित व्यक्ति को चल या अचल सम्पत्ति के अन्तरण से है । चूँकि अभिहस्तान्तरण का कार्य किसी विलेख द्वारा ही किया जा सकता है , इसलिए ऐसे विलेख का निर्माण दूसरे प्रकार के हस्तान्तरण से या पक्षकारों से संविदा से उत्पन्न होने वाले अधिकार व दायित्व से होता है । हस्तान्तरण लेखन शब्द में वे सभी सत्यव्यवहार सम्मिलित होते हैं जिनके द्वारा कानूनी अधिकार उत्पन्न होते हैं और व्यक्तियों के बीच कानूनी सम्बन्ध की उत्पत्ति होती है । वास्तव में अभिहस्तान्तरण लेखन का अभिप्राय है कि उससे यह स्पष्ट रूप से पता चल सके कि किन परिस्थितियों में और किन अनुबन्धों सहित संविदा करने वाले व्यक्तियों का किसी सम्पत्ति से सम्बन्धित अधिकारों तथा दायित्वों में परिवर्तन हुआ । गिब्सन के अनुसार , " हस्तान्तरण लेखन की विषय वस्तु सम्बन्धी अन्तरण से सम्बद्ध विधि और सम्पत्ति के प्रकृति वाले अधिकार है जहाँ दस्तावेज का उस अभिप्राय से उपयोग किया जाता है । " 


  हस्तान्तरण लेखन का प्रमुख उद्देश्य स्पष्ट शब्दों में पक्षकारों के आगम को स्पष्ट रूप रूप से जानना है जिससे उसे स्पष्ट ज्ञान हो जाये कि पक्षकार क्या चाहते हैं और कैसे उनकी इच्छाओं को पूर्ति बिना विधि के उपबन्धों का उल्लंघन किये हुए की जा सकती है । एक हस्तान्तरण विलेख का पंजीकरण कराना भी आवश्यक है क्योंकि एक अरजिस्ट्रीकृत विक्रय पत्र साक्ष्य में मान्य नहीं होता है ।


By writing of assignment, we mean such writing in which the transfer of any property or any interest in it takes place under a contract between the transferor and the transferee.  According to Section 2 (10) of the Transfer of Property Act, writing of transfer means the transfer of movable or immovable property by one living person to another living person.  Since the act of assignment can be done only by a deed, such a deed is created by another type of transfer or by the rights and liabilities arising out of the contract between the parties.  The term conveyance writing includes all those true practices by which legal rights arise and legal relations between persons arise.  In fact, the intention of writing assignment is that it can be clearly known that in which circumstances and with which terms the rights and obligations related to any property of the contracting persons have changed.  According to Gibson, "The subject matter of the instrument of transfer is the law relating to the transfer and the rights in the nature of property where the instrument is used for that purpose."



 The main purpose of writing conveyance is to clearly know the intention of the parties in clear terms so that they get a clear idea of ​​what the parties want and how their wishes can be fulfilled without violating the provisions of the law.  It is also necessary to register a conveyance deed as an unregistered sale deed is not admissible in evidence.

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

बलवा (Rioting) और दंगा (Affray) क्या है? BNS की धारा 191 और 194 की पूरी जानकारीi

बलवा (Rioting) और दंगा (Affray) क्या है? BNS की धारा 191 और 194 की पूरी जानकारी बलवा क्या होता है? दंगा और बलवा में क्या अंतर है? पांच या उससे अधिक लोगों के समूह द्वारा हिंसा करने पर कौन-सी धारा लगती है? क्या हर व्यक्ति को केवल भीड़ में मौजूद रहने से बलवा का आरोपी बनाया जा सकता है? BNS Section 191 और Section 194 में क्या प्रावधान है? ये प्रश्न आपराधिक मामलों में बहुत महत्वपूर्ण हैं। पुराने भारतीय दंड संहिता (IPC) में बलवा से संबंधित मुख्य प्रावधान धारा 146 और 147 तथा Affray यानी दंगा से संबंधित प्रावधान धारा 159 और 160 में थे। अब 1 जुलाई 2024 से लागू भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) में इन विषयों के लिए नए section लागू हैं। वर्तमान कानून में BNS Section 189 unlawful assembly, Section 190 common-object liability, Section 191 rioting और Section 194 affray से संबंधित है। इस लेख में इन सभी प्रावधानों को उदाहरण और न्यायिक निर्णयों के माध्यम से आसान भाषा में समझेंगे। 1. बलवा (Rioting) क्या है? साधारण भाषा में जब कोई unlawful assembly यानी विधि-विरुद्ध जमाव अपने common object को ...

पुलिस स्पेशल सेल द्वारा मोटरसाइकिल जब्त करने पर क्या करें, जब कोई मुकदमा पंजीकृत न हो?

यहाँ एक विस्तृत,  ब्लॉग पोस्ट है जो कि कभी आपकी या  किसी व्यक्ति की मोटरसाइकिल को पुलिस विभाग की स्पेशल सेल पकड़ लेती है और किसी भी थाने में मुकदमा पंजीकृत नहीं करती है तो ऐसे स्थिति में क्या करें की गाड़ी को रिलीज करवा लिया जाये इस पर एक  blog post लिखकर मेरे द्तवारा  जितना सम्भव है उतना विशेष जानकारी के साथ  उदाहरण सहित समझाने की आप लोगों को कोशिश है ।🔥🔥🔥🔥 पुलिस स्पेशल सेल द्वारा मोटरसाइकिल जब्त करने पर क्या करें, जब कोई मुकदमा पंजीकृत न हो? कई बार ऐसी स्थिति सामने आती है जब पुलिस विभाग की स्पेशल सेल किसी व्यक्ति की मोटरसाइकिल या अन्य वाहन को रोककर अपने कब्जे में ले लेती है, लेकिन किसी भी थाने में उसके संबंध में FIR या मुकदमा पंजीकृत नहीं करती। इस तरह की परिस्थिति में वाहन मालिक के लिए यह समझना जरूरी है कि कानूनी प्रक्रिया क्या है और वाहन को रिलीज कराने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाएं। 1. सबसे पहले स्थिति की पुष्टि करें जिस पुलिस टीम या स्पेशल सेल ने गाड़ी पकड़ी है, उनसे लिखित या मौखिक रूप से पूछें कि वाहन क्यों रोका गया है। यह ...

असामी कौन है ?असामी के क्या अधिकार है और दायित्व who is Asami ?discuss the right and liabilities of Assami

अधिनियम की नवीन व्यवस्था के अनुसार आसामी तीसरे प्रकार की भूधृति है। जोतदारो की यह तुच्छ किस्म है।आसामी का भूमि पर अधिकार वंशानुगत   होता है ।उसका हक ना तो स्थाई है और ना संकृम्य ।निम्नलिखित  व्यक्ति अधिनियम के अंतर्गत आसामी हो गए (1)सीर या खुदकाश्त भूमि का गुजारेदार  (2)ठेकेदार  की निजी जोत मे सीर या खुदकाश्त  भूमि  (3) जमींदार  की बाग भूमि का गैरदखीलकार काश्तकार  (4)बाग भूमि का का शिकमी कास्तकार  (5)काशतकार भोग बंधकी  (6) पृत्येक व्यक्ति इस अधिनियम के उपबंध के अनुसार भूमिधर या सीरदार के द्वारा जोत में शामिल भूमि के ठेकेदार के रूप में ग्रहण किया जाएगा।           वास्तव में राज्य में सबसे कम भूमि आसामी जोतदार के पास है उनकी संख्या भी नगण्य है आसामी या तो वे लोग हैं जिनका दाखिला द्वारा उस भूमि पर किया गया है जिस पर असंक्रम्य अधिकार वाले भूमिधरी अधिकार प्राप्त नहीं हो सकते हैं अथवा वे लोग हैं जिन्हें अधिनियम के अनुसार भूमिधर ने अपनी जोत गत भूमि लगान पर उठा दिए इस प्रकार कोई व्यक्ति या तो अक्षम भूमिधर का आसामी होता ह...