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IPC की धारा 353 और BNS की धारा 132 लोक सेवकों की सुरक्षा से जुड़े कानून का पूरा विश्लेषण

आयकर अधिनियम 1916 के अंतर्गत हानियों के समायोजन सम्बन्धी प्रावधान कौन कौन से होते हैं ?[ Describe the provisions regarding the adjustment of losses under Income Tax Act , 1961. ]

 हानियों को किस प्रकार से वर्णित किया जा सकता है?

 ( Provisions Regarding the Adjustment of losses ) 


     आयकर अधिनियम के अंतर्गत किसी करदाता के द्वारा गतवर्ष में अर्जित की गई कुल आयकर की गणना की जाती है । कुल आय की गणना के दौरान अगर आय के किसी ( मद ) स्रोत में यदि हानि हुई हो तो उस हानि की पूर्ति ( Set off ) उसी वर्ष में आय के किसी अन्य स्त्रोत ( Source ) में हुए लाभ से कर ली जाती है । किन्तु किसी कारण वश यदि हानि की पूर्ति न हो सके तो उस हानि को आगे ले जाकर बाद के वर्षों में प्राप्त आयों में से पूरा किया जा सकता है जिसके सन्दर्भ में किये गये उपबन्धों का वर्णन निम्न प्रकार से किया गया है 


( I ) स्त्रोतों में आन्तरिक समायोजन ( Internal Adjustment in Source ) - आयकर की धारा -70 के अनुसार , यदि किसी करदाता को किसी कर निर्धारण वर्ष में किसी एक स्रोत से होने वाली हानि की पूर्ति करनी है तो वह उसी शीर्षक के किसी अन्य स्त्रोत से कर सकता है । अर्थात् आय के एक स्त्रोत की हानि को आय के उसी शीर्षक के अन्दर किसी अन्य स्त्रोत से होने वाले लाभ में से पूरा किया जा सकता है । किन्तु निम्नलिखित अपवाद स्वरूप परिस्थितियों में हानि की पूर्ति नहीं की जा सकती है


 ( d ) सट्टे के व्यापार की हानि पूर्ति सिर्फ सट्टे के व्यापार से ही हो सकेगी ।


 ( c ) अल्पकालीन पूँजी लाभ में से दीर्घकालीन पूँजी हानि की पूर्ति नहीं की जा सकेगी ।


 ( b ) घुड़दौड़ के घोड़ों के रख - रखाव एवं स्वामित्त्व सम्बन्धी हानियों की पूर्ति सिर्फ घुड़दौड़ से होने वाली आर्यों में से ही हो सकेगी । आय के अन्य किसी अन्य स्त्रोत से नहीं की जा सकेगी । 


( a ) आय के किसी कर मुक्त स्त्रोत की हानि की पूर्ति किसी भी कर योग्य आय में से नहीं की जा सकेगी ।


 ( II ) शीर्षक में आन्तरिक समायोजन ( Internal Adjustment in the Head ) आयकर अधिनियम की धारा -71 के अनुसार जब किसी करदाता को किसी कर निर्धारण वर्ष में किसी एक शीर्षक के अन्तर्गत हुई हानि की पूर्ति उसी शीर्षक के किसी स्त्रोत से पूरी नहीं हो पाती अवशेष बची हुई हानि को किसी अन्य शीर्षक की आय में से पूरा किया जा सकता है । जैसे  मकान सम्पत्ति से आय शीर्षक के अन्तर्गत हुई हानि की पूर्ति करदाता अन्य स्त्रोतों से आय शीर्षक  आय  में से कर सकता है । किन्तु निम्नलिखित अपवादस्वरूप परिस्थितियों में हानि की पूर्ति नही की जा सकती है 


 ( a ) घुड़दौड़ के घोड़ों के रखरखाव एवं स्वामित्व सम्बन्धी हानियों की पूर्ति घुड़दौड़ अन्य स्रोतों से आय शीर्षक में अन्य किसी आय से या अन्य किसी शीर्षक की आय से नहीं की जा सकती है ।


 ( b ) आयकर एवं पेशे से आय शीर्षक की हानि की पूर्ति वेतन से आय शीर्षक से नहीं को जा सकेगी ।

 ( c ) अल्पकालीन चाहे दीर्घकालीन पूँजी होनी हो पूँजीगत लाभ शीर्षक की हानि की पूर्ति सिर्फ पूँजीगत लाभ से की जा सकेगी अन्य किसी शीर्षक से नहीं की जा सकेगी । 


( d ) सट्टे कि व्यापार की हानि की पूर्ति सिर्फ सट्टे के व्यापार से ही हो सकेगी ।


 ( e ) लॉटरी या दौड़ों से हुई जीत या अन्य किसी प्रकार हुई जीत की खेल की आय से किसी भी हानि की पूर्ति नहीं की जा सकेगी ।


 ( II ) कर योग्य आयों में से पूर्ति किया जाना ( Set - off form Taxable Incomes ) - किसी भी हानि की पूर्ति सिर्फ कर योग्य आय में से की जा सकती है । किसी हानि को कर मुक्त आय पूरा नहीं किया जा सकता है और उस वर्ष की पूर्ति न हो सके तो उसे अगले वर्षों में पूरा किया सकता है । 



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