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पत्नी पर पेट्रोल डालकर आग लगाने की कोशिश: BNS धारा 109 में जमानत कैसे मिलेगी? पूरी कानूनी प्रक्रिया और Bail Arguments

राजस्व न्यायालय की क्या होता है ?राजस्व न्यायालय एवं राजस्व अधिकारी में क्या अन्तर है ? ( Explain Revenue court . Distinguish between Revenue court and Revenue officer . )

राजस्व न्यायालय ( Revenue Court )


 " राजस्व न्यायालय से आशय ऐसे न्यायालय से है जिसे कृषि प्रयोजनार्थ उपयोग में लाई गई किसी भूमि के लगान , मालगुजारी अथवा लाभ से सम्बन्धित किसी वाद अथवा अन्य कार्यवाइयों को स्वीकार करने का  क्षेत्राधिकार रखने वाले सिविल न्यायालय शामिल नहीं है।

 उत्तर प्रदेश भूराजस्व प्रशासन जिन दो प्रकार के प्राधिकारियों के हाथों में दिया गया है , वे हैं : राजस्व न्यायालय एवं राजस्व अधिकारी भूराजस्व अधिनियम की धारा 4 ( 8 ) के अनुसार राजस्व न्यायालय का अर्थ है : रिवेन्यू बोर्ड या उसका कोई सदस्य , कमिश्नर , अतिरिक्त कमिश्नर , कलेक्टर , अतिरिक्त कलेक्टर , सहायक कलेक्टर , बंदोबस्त अधिकारी , सहायक बंदोबस्त अधिकारी , अभिलेख अधिकारी सहायक अभिलेख अधिकारी एवं तहसीलदार ।


 राजस्व अधिकारी एवं राजस्व न्यायालय में अंतर ( Difference Between Revenue officer and Revenue court )


 राजस्व अधिकारी से तात्पर्य ऐसे अधिकारी से है जो इस अधिनियम के अन्तर्गत मालगुजारी के कार्य के लिए या राजस्व - अभिलेख तैयार करने के लिए नियुक्त किया गया हो । इसका अर्थ यह हुआ कि रेवेन्यू बोर्ड और उसके सदस्यों को छोड़कर उपर्युक्त अधिकारी राजस्व अधिकारी है ; अर्थात् कमिश्नर , अतिरिक्त कमिश्नर , कलेक्टर , अतिरिक्त



भू - राजस्व के अवधारण की प्रक्रिया pro ( Procedure for Assessment of Land Revenue )


 अधिनियम की धारा 246 प्रावधान करती है कि ( 1 ) धारा 245 के अधीन भूमिधरों  द्वारा  देय मालगुजारी की अवधारण करने के प्रयोजनार्थ असिस्टेंट कलेक्टर प्रत्येक गाँव के लिये अस्थायी विवरण - पत्र तैयार करायेगा ।
 

 ( 2 ) अस्थायी विवरण - पत्र ऐसे रूप ( From ) में प्रकाशित किया जायेगा जैसा कि  नियत किया जाये ।

( 3 ) अस्थायी विवरण - पत्र में किसी प्रविष्टि से व्यक्ति कोई व्यक्ति उपधारा ( 2 ) के अधीन अस्थायी विवरण पत्र के प्रकाशन के दिनांक से 15 दिन के भीतर परगना के अधिकारी सहायक कलेक्टर को आपत्ति जता सकता है । 


( 4 ) परगने का अधिकारी सहायक कलेक्टर सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देने के पश्चात् आपत्ति पर निर्णय देगा और उनका निर्णय अन्तिम होगा

 ( 5 ) अस्थायी विवरण - पत्र का , यदि आवश्यक हो , उपधारा ( 4 ) के अधीन आदेश के अनुसार पुनरीक्षण किया जायेगा , और तदुनपरान्त उस पर परगना के अधिकारी सहायक कलेक्टर द्वारा हस्ताक्षर किया जायेगा और मुहर लगाई जायेगी और वह अन्तिम और निश्चयात्मक हो जायेगा । 

( 6 ) परगने का अधिकारी सहायक कलेक्टर उपधारा ( 5 ) में अभिदिष्ट विवरण में किसी लिपिक या गणित सम्बन्धी भूल या किसी आकस्मिक चूक अथा लोप से होने वाली त्रुटि को ठीक कर सकता है । 


             धारा 247 के अनुसार धारा 246 में अभिदिष्ट अन्तिम विवरण - पत्र में विनिर्दिष्ट धनराशि , यथास्थिति , भूमिधर द्वारा देय मालगुजारी होगी और पूर्ववत् रहेगी जब तक कि उसमें इस अध्याय के उपबन्धों के अनुसार सम्यक रूप में परिवर्तन न कर दिया जाये ।


       उपर्युक्त , मालगुजारी बढ़ाने के अतिरिक्त उ . प्र . भूमि विधि ( संशोधन ) अधिनियम , 1978 द्वारा उ.प्र . भूमि सुधार अधिनियम संशोधित किया गया ।

                उ . प्र . भू - राजस्व अधिनियम में निम्नलिखित भूमिधर भू - राजस्व को देने से मुक्त कर दिये गये हैं । अधिनियम की धारा -257 ( ए ) के अन्तर्गत कोई भूमिधर जिसके द्वारा और जिसके परिवार के सदस्यों द्वारा मिलाकर उत्तर प्रदेश में धृत समस्त भूमि का क्षेत्रफल 3 1/8 एकड़ से अधिक न हो । 


    

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