सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

बलवा (Rioting) और दंगा (Affray) क्या है? BNS की धारा 191 और 194 की पूरी जानकारीi

मुस्लिम विधि मे मुतवल्ली कौन होते हैं और यह किसके द्वारा नियुक्त किये जाते हैं इनके क्या अधिकार होते हैं?

मुतवल्ली (mutwalli): वक्फ के प्रबंधक या अधीक्षक को मुतवल्ली कहते हैं। दूसरे शब्दों में किसी सम्पत्ति का ईश्वर के प्रति धार्मिक  और दानार्थ कार्यों के लिये समर्पित  होने पर उसकी व्यवस्था करने वाले को प्रबन्धक या मुतवल्ली ( Mutwalli ) कहा जाता है । मुतवल्ली ऐसी वक्फ सम्पत्ति का स्वामी नहीं होता बल्कि ईश्वर का ऐसा सेवक होता है जो उसके ( ईश्वर ) प्राणियों की भलाई के लिए सम्पत्ति का प्रबन्ध करता है । मुतवल्ली वक्फ सम्पत्ति का न्यायधारी ( Trustee ) भी नहीं होता । वह सम्पत्ति का मात्र अधीक्षक या प्रबन्धक ही होता है । वक्फ की सम्पत्ति के संचालन और कार्यों के लिए उसकी स्थिति और दायित्व ट्रस्टी ( Trustee ) के समान हो । वक्फ सम्पत्ति का आधार नैतिक और आध्यात्मिक होता है । अतः उसके प्रबन्धक को ठीक से ट्रस्टी भी नहीं कहा जा सकता ।


 निम्नलिखित में से कोई भी मुतवल्ली हो सकता है-

 ( 1 ) स्वयं वाकिफ । 

( 2 ) वाकिफ की सन्तान और उसके उत्तराधिकारी । 

( 3 ) कोई अन्य व्यक्ति ( जिसमें स्त्रिया ) भी शामिल है किन्तु स्त्रियाँ धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों के उद्देश्यों के लिये मुतवल्ली नहीं हो सकती है । 


( 4 ) गैर - मुस्लिम । 

 उपर्युक्त ( 3 ) और ( 4 ) श्रेणी के व्यक्ति वक्फ सम्पत्ति के लिए मुतवल्ली तो हो सकता है परन्तु धार्मिक और आध्यात्मिक उद्देश्यों के लिए मुतवल्ली नहीं हो सकते । 


निम्नलिखित में से कोई भी मुतवल्ली नहीं हो सकता:-

 ( 1 ) कोई नाबालिग , 

( 2 ) विकृत मस्तिष्क वाला पुरुष , 

( 3 ) धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों को करने के लिए कोई स्त्री । 

इसका कारण यह होता है कि कोई भी स्त्री ( अ ) सज्जादानशील का कार्य नहीं कर सकती , ( ब ) खातिब द्वारा पत्र को पढ़ने वाला , ( स ) मस्जिद के इनाम का कार्य इत्यादि नहीं कर सकती । 


मुतवल्ली की नियुक्ति - मुतवल्ली की नियुक्ति वक्फ की स्थापना के साथ ही हो जाती है अन्यथा अबू - अनीसा और इमाम मुहम्मद के अनुसार रक्त समर्पण असफल हो जाता है जबकि काजी अबू युसुफ का विचार था कि समर्पण वैध होता है और वाकिफ को मुतवल्ली माना जा सकता है । वैसे आमतौर पर मुतवल्ली की नियुक्ति ( अ ) स्वयं वाकिफ , ( ब ) बाकिफ की सम्पत्ति का निष्पादन . ( स ) मुतवल्ली स्वयं जबकि वह मर्णासन्न अवस्था में हो ।

 ( द ) न्यायालय द्वारा की जा सकती है । 

  सामान्यतः ' जिला जज ' जो कि इन कार्यों के उद्देश्यों के लिए मूल अधिकार रखने वाला न्यायालय माना जाता है और पदेन काजी के अधिकार रखता है , मुतवल्ली की नियुक्ति संक्षिप्त विचारण के द्वारा करता है । 


मुतवल्ली का पद वंशानुगत नहीं होता । उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 312 में दिये गये उत्तरजीविता का पारिभाषिक नियम मुतवल्लियों पर लागू नहीं होता क्योंकि मुस्लिम कानून के नियम इस नियम के पक्ष में नहीं हैं । नये मुतवल्ली की नियुक्ति निम्नलिखित में से कोई भी कर सकता है 


( 1 ) वाकिफ । 

( 2 ) वाकिफ की सम्पत्ति का निष्पादक । 

( 3 ) पहले से नियुक्त वह मुतवल्ली जो मरणासन्न अवस्था में हो । 

( 4 ) न्यायालय जो निम्नलिखित बातों पर भी ध्यान देता है— 

( अ ) वाकिफ के निर्देश , यदि कोई हो तो । 

( ब ) वाकिफ के मुतवल्ली पद प्रत्याशी का सम्बन्ध 

( स ) वंश क्रमानुगत सम्पत्ति को माँग 

( 5 ) किसी विशेष सम्प्रदाय के समाज द्वारा भी मुतवल्ली नियुक्त किया जा सकता है । ऐसो नियुक्ति में रिवाज या नियमों द्वारा कुछ तरीके निश्चित रहते हैं ।

 मुतवल्ली की शक्तियाँ और कर्त्तव्य ( The Power & duties of Mutwalli ) मुतवल्ली ऐसे सभी कार्य कर सकता है जो परिस्थितियों के अनुसार वक्फ सम्पत्ति की रक्षा एवं वक्फ के प्रशासन के लिए युक्तियुक्त और उचित हो । मुतवल्ली की निम्नलिखित शक्तियाँ के होती हैं -


( 1 ) वक्फनामे में प्रत्यक्ष उल्लेख होने या न्यायालय की स्वीकृति होने पर वक्फ सम्पत्ति का बन्धक या विनिमय कर सकता है । 

( 2 ) कुछ परिस्थितियों और निर्धारित शर्तों के आधार पर वक्फ सम्पत्ति का पट्टा ( lease ) कर सकता है जो कि कृषि योग्य भूमि को 3 वर्ष तक और गैर कृषि योग्य भूमि को अधिकतम 1 वर्ष के लिए पट्टे पर दे सकता है । 

( 3 ) न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना वक्फ सम्पत्ति पर मान्य प्रभार ( Recognised charge ) या स्थायी भार नहीं लाद सकता । 

( 4 ) अन्य अधिकार ( Other Rights ) वक्फ सम्पत्ति पर मुतवल्ली के अन्य अधिकार इस प्रकार हैं -- ( अ ) वक्फनामे के अनुसार उसकी व्यवस्था करना , ( ब ) उसके सन्तुष्ट न होने पर न्यायालय द्वारा दशांश तक चढ़वाना , ( स ) इमाम की नियुक्ति ।


      मुतवल्ली अपने पद को किसी अन्य व्यक्ति को अन्तरित करने की शक्ति नहीं रखता । मुतवल्ली का पद सम्पत्ति नहीं है अतः वह किसी अन्तरण की विषय वस्तु नहीं हो सकता । 

मुतवल्ली संस्थापक द्वारा नियत किये गये पारिश्रमिक का अधिकारी होता है । यदि वह राशि बहुत कम हो तो मुतवल्ली उसे बढ़ाने के लिए न्यायालय में आवेदन कर सकता है । 


   मुतवल्ली का हटाया जाना ( Removal of Mutwalli ) - एक बार विधिवत् नियुक्ति हो जाने के बाद मुतवल्ली को हटाया नहीं जा सकता है । जब मुतवल्ली वक्फ की ख्याति पर काबिज हो जाय तो वक्फकर्ता उसे हटा नहीं सकता जब तक कि वक्फनामे में ऐसी शक्ति उसने रख नहीं छोड़ी हो । न्यायालय मुतवल्ली को तभी हटा सकता है जब कर्तव्य विमुखता या न्यायोलंघन का कोई सबूत हो जाय कि वह मुतवल्ली का पद धारण करने के योग्य नहीं रह गया है । मुतवल्ली द्वारा वक्फ ख्याति पर निजी अधिकार प्रदर्शित करना और वक्फ के को अस्वीकार करना उसे इस आधार पर हटाने के लिए पर्याप्त है कि इसको धारण करने के अस्तित्व - भी वक्फ की सम्पत्ति के परिसर की मरम्मत नहीं कराता अथवा जानबूझ कर वक्फ की सम्पत्ति को क्षति पहुँचाता है या कुप्रबन्ध करता है , या वह दिवालिया हो जाता है , या वह शारीरिक मानसिक रूप से असमर्थ हो जाता है तो इस पद से हटाया जा सकता है।


          यदि वाकिफ स्वंय प्रथम मुतवल्ली है तो वह अपने जीवन काल में अपने पद से त्याग पत्र दे सकता है और अपने स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को मुतवल्ली नियुक्त कर सकता है।

अब्दुल रज्जाक बनाम अली बखरा ( I. L. R. 1945 ) Lahore 540

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

बलवा (Rioting) और दंगा (Affray) क्या है? BNS की धारा 191 और 194 की पूरी जानकारीi

बलवा (Rioting) और दंगा (Affray) क्या है? BNS की धारा 191 और 194 की पूरी जानकारी बलवा क्या होता है? दंगा और बलवा में क्या अंतर है? पांच या उससे अधिक लोगों के समूह द्वारा हिंसा करने पर कौन-सी धारा लगती है? क्या हर व्यक्ति को केवल भीड़ में मौजूद रहने से बलवा का आरोपी बनाया जा सकता है? BNS Section 191 और Section 194 में क्या प्रावधान है? ये प्रश्न आपराधिक मामलों में बहुत महत्वपूर्ण हैं। पुराने भारतीय दंड संहिता (IPC) में बलवा से संबंधित मुख्य प्रावधान धारा 146 और 147 तथा Affray यानी दंगा से संबंधित प्रावधान धारा 159 और 160 में थे। अब 1 जुलाई 2024 से लागू भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) में इन विषयों के लिए नए section लागू हैं। वर्तमान कानून में BNS Section 189 unlawful assembly, Section 190 common-object liability, Section 191 rioting और Section 194 affray से संबंधित है। इस लेख में इन सभी प्रावधानों को उदाहरण और न्यायिक निर्णयों के माध्यम से आसान भाषा में समझेंगे। 1. बलवा (Rioting) क्या है? साधारण भाषा में जब कोई unlawful assembly यानी विधि-विरुद्ध जमाव अपने common object को ...

पुलिस स्पेशल सेल द्वारा मोटरसाइकिल जब्त करने पर क्या करें, जब कोई मुकदमा पंजीकृत न हो?

यहाँ एक विस्तृत,  ब्लॉग पोस्ट है जो कि कभी आपकी या  किसी व्यक्ति की मोटरसाइकिल को पुलिस विभाग की स्पेशल सेल पकड़ लेती है और किसी भी थाने में मुकदमा पंजीकृत नहीं करती है तो ऐसे स्थिति में क्या करें की गाड़ी को रिलीज करवा लिया जाये इस पर एक  blog post लिखकर मेरे द्तवारा  जितना सम्भव है उतना विशेष जानकारी के साथ  उदाहरण सहित समझाने की आप लोगों को कोशिश है ।🔥🔥🔥🔥 पुलिस स्पेशल सेल द्वारा मोटरसाइकिल जब्त करने पर क्या करें, जब कोई मुकदमा पंजीकृत न हो? कई बार ऐसी स्थिति सामने आती है जब पुलिस विभाग की स्पेशल सेल किसी व्यक्ति की मोटरसाइकिल या अन्य वाहन को रोककर अपने कब्जे में ले लेती है, लेकिन किसी भी थाने में उसके संबंध में FIR या मुकदमा पंजीकृत नहीं करती। इस तरह की परिस्थिति में वाहन मालिक के लिए यह समझना जरूरी है कि कानूनी प्रक्रिया क्या है और वाहन को रिलीज कराने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाएं। 1. सबसे पहले स्थिति की पुष्टि करें जिस पुलिस टीम या स्पेशल सेल ने गाड़ी पकड़ी है, उनसे लिखित या मौखिक रूप से पूछें कि वाहन क्यों रोका गया है। यह ...

असामी कौन है ?असामी के क्या अधिकार है और दायित्व who is Asami ?discuss the right and liabilities of Assami

अधिनियम की नवीन व्यवस्था के अनुसार आसामी तीसरे प्रकार की भूधृति है। जोतदारो की यह तुच्छ किस्म है।आसामी का भूमि पर अधिकार वंशानुगत   होता है ।उसका हक ना तो स्थाई है और ना संकृम्य ।निम्नलिखित  व्यक्ति अधिनियम के अंतर्गत आसामी हो गए (1)सीर या खुदकाश्त भूमि का गुजारेदार  (2)ठेकेदार  की निजी जोत मे सीर या खुदकाश्त  भूमि  (3) जमींदार  की बाग भूमि का गैरदखीलकार काश्तकार  (4)बाग भूमि का का शिकमी कास्तकार  (5)काशतकार भोग बंधकी  (6) पृत्येक व्यक्ति इस अधिनियम के उपबंध के अनुसार भूमिधर या सीरदार के द्वारा जोत में शामिल भूमि के ठेकेदार के रूप में ग्रहण किया जाएगा।           वास्तव में राज्य में सबसे कम भूमि आसामी जोतदार के पास है उनकी संख्या भी नगण्य है आसामी या तो वे लोग हैं जिनका दाखिला द्वारा उस भूमि पर किया गया है जिस पर असंक्रम्य अधिकार वाले भूमिधरी अधिकार प्राप्त नहीं हो सकते हैं अथवा वे लोग हैं जिन्हें अधिनियम के अनुसार भूमिधर ने अपनी जोत गत भूमि लगान पर उठा दिए इस प्रकार कोई व्यक्ति या तो अक्षम भूमिधर का आसामी होता ह...