Skip to main content

.अल्पवयस्कों के लिये साधारण अपवादों के सम्बंध में क्या छूट दी गयी है ? (what exception has been made in favour of minors with respect to an offence under general exceptions .)

7 वर्ष से कम आयु के शिशु के कार्य:- भारतीय दंड संहिता की धारा 82  में यह कहा गया है कि कोई बाल अपराध नहीं है जो 7 वर्ष से कम आएगी शिशु द्वारा की जाती है।


           प्रस्तुत धारा का यह प्रावधान कि 7 वर्ष से कम आयु के बच्चे द्वारा किया गया कोई कार्य अपराध नहीं माना जाएगा , इस मान्यता पर आधारित है कि 7 वर्ष से कम आयु का शिशु आपराधिक दुराशय के अभाव में अपराध करने के लिए अयोग्य (doli incapex) होता है। ब्लैक स्टोन का कहना है कि विवेक का निर्माण ना कर सकने वाली आयु के बालक को किसी भी अपराधिक विधि के अधीन दंडित नहीं किया जाना चाहिए।


         आँग्ल विधि में ऐसी आयु के शिशुओं को अपराध करने में असक्षम माना गया है जो अच्छाई बुराई के बीच अंतर स्थापित करने में असमर्थ हो।


        बाबू सेन बनाम सम्राट के मामले में यह स्पष्ट किया गया है कि धारा 82 के अंतर्गत 7 वर्ष से कम आयु के बच्चों को अपराधिक दायित्व से उन्मुक्त केवल दंड संहिता की धारा 82 के अंतर्गत ही नहीं  अपितु अन्य सभी स्थानीय तथा विशिष्ट विधियों के अंतर्गत भी उपलब्ध है।


      मार्ग बनाम लोडर के वाद में सात वर्ष से कम आयु के बालक ने परिवादी के परिसर से लकडी चुरायी अतः उसे पुलिस अभिरक्षा में रख दिया गया लेकिन उसके दायित्व की आयु(age of responsibility ) को ध्यान में रखते हुए उस बालक के विरुद्ध कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सके।



श्याम बहादुर बनाम राज्य के मामले में 7 वर्ष से कम आयु के बालक को सोने की एक तस्तरी  पड़ी मिली , जिसकी उसने कहीं भी रिपोर्ट नहीं लिखवाई परंतु फिर भी उसके विरूद्ध कोई आयोजन नहीं चलाया जा सका।

7 वर्ष से अधिक किंतु 12 वर्ष से कम आयु के शिशु: कोई बात अपराध नहीं है जो 7 वर्ष से ऊपर और 12 वर्ष से कम आयु के ऐसे शिशु द्वारा की जाती है जिसकी समझ इतनी परिपक्व नहीं हुई है कि वह इस अवसर पर अपने आचरण की प्रकृति और परिणामों का निर्णय कर सके।

                        (धारा 83)


इस प्रकार धारा 83 के अनुसार 12 वर्ष से कम आयु का और 7 वर्ष से अधिक आयु का शिशु जिसने परिपक्व बुद्धि प्राप्त है और जो अपने व्यवहार प्रकृति को समझ सकता है अपने कृत्य के लिए उत्तरदाई होता है।


(1) परमेश्वर बसुमातरी बनाम राज्य, 1989 क्रि. एल. जे.196 (गौहाटी)


(2) राजाराम बनाम राज्य 1977 क्रि.एल. जे.(ए. ओ. सी.)85 इलाहाबाद


(3) भूपेंद्र सिंह ए. चुडासामा बनाम गुजरात राज्य 1998 क्रि. एल. जे. 75 (ए.सी.)


(4) आई .एल .आर. रंगून 400


(5)(1963) 14 सी.बी.एन. एस. 536




धारा 83 के प्रावधान इस मान्यता पर आधारित है कि 7 वर्ष से 12 वर्ष के बीच आयु के सभी बच्चों का मानसिक विकास इतना नहीं हो पाता कि वे अपने कृत्यों के भले बुरे परिणामों के बारे में ठीक  सोच समझ सकें । अतः इनके आपराधिक दायित्व का निर्धारण न्यायाधीश मजिस्ट्रेट के न्यायिक विवेक पर निर्भर करता है जो मामले की परिस्थितियों तथा अपराधी बालक के मानसिक विकास के आधार पर यह निर्धारित करता है कि उसमें अपने कृत्य के परिणामों के बारे में ठीक समझने की क्षमता है अथवा नहीं।


     सरल शब्दों में धारा 83 में यह उल्लेख है कि यदि बालक या बालिका की आयु 7 वर्ष से अधिक लेकिन 12 वर्ष से कम हो और वह अच्छे बुरे का भेद समझने में  असक्षम हो तो उसे आपराधिक दायित्व से उन्मुक्ति दी जा सकेगी।


उदाहरण: एक 10 वर्ष का बालक ₹5 मूल्य का पेन चुराकर ₹2 में उसी आदमी को बेच देता है। इस मामले में बालक को इस बात का ज्ञान था कि पेन की कीमत कितनी है और चोरी होने के कारण उसको इसका कम मूल्य मिला है अर्थात उसने यह कार्य कार्य की प्रकृति और परिणाम को जानकर ही लालचवश  किया है।अतः  वह दंड का भागीदार है।


(1) ए.आई.आर. 1967 , पटना, B12


(2) 1948 क्रि.एल.जे.336


(3)1950 कटक 293

(4) 1917 क्रि एल. जे. 943


अब्दुल सत्तार के मामले में 12 वर्ष से कम आयु के अभियुक्त गणों ने एक दुकान का ताला तोड़कर दालों की चोरी की। उन्हें इस आधार पर दोषी ठहराया गया कि वह अपने आचरण की प्रकृति और परिणामों का निर्णय कर सकते थे। उल्ला महापात्रा के मामले में अभियुक्त 11 वर्ष से अधिक पर 12 वर्ष से कम आयु का बालक था। वह मृतक की ओर इस हावभाव के साथ दौड़ा की वह उसे टुकड़े-टुकड़े कर देगा और उसने ऐसा ही किया। न्यायालय ने उसे सिद्ध दोष ठहराते हुए 5 वर्ष के लिए सुधारालय में भेज दिया। नगा टैन कैंग के मामले में 12 वर्ष से कम आयु के बालक को बलात्संग के प्रयत्न  के लिए दोषी ठहराया गया।






Comments

Popular posts from this blog

बलवा और दंगा क्या होता है? दोनों में क्या अंतर है? दोनों में सजा का क्या प्रावधान है?( what is the riot and Affray. What is the difference between boths.)

बल्बा(Riot):- भारतीय दंड संहिता की धारा 146 के अनुसार यह विधि विरुद्ध जमाव द्वारा ऐसे जमाव के समान उद्देश्य को अग्रसर करने के लिए बल या हिंसा का प्रयोग किया जाता है तो ऐसे जमाव का हर सदस्य बल्बा करने के लिए दोषी होता है।बल्वे के लिए निम्नलिखित तत्वों का होना आवश्यक है:- (1) 5 या अधिक व्यक्तियों का विधि विरुद्ध जमाव निर्मित होना चाहिए  (2) वे किसी सामान्य  उद्देश्य से प्रेरित हो (3) उन्होंने आशयित सामान्य  उद्देश्य की पूर्ति हेतु कार्यवाही प्रारंभ कर दी हो (4) उस अवैध जमाव ने या उसके किसी सदस्य द्वारा बल या हिंसा का प्रयोग किया गया हो; (5) ऐसे बल या हिंसा का प्रयोग सामान्य उद्देश्य की पूर्ति के लिए किया गया हो।         अतः बल्वे के लिए आवश्यक है कि जमाव को उद्देश्य विधि विरुद्ध होना चाहिए। यदि जमाव का उद्देश्य विधि विरुद्ध ना हो तो भले ही उसमें बल का प्रयोग किया गया हो वह बलवा नहीं माना जाएगा। किसी विधि विरुद्ध जमाव के सदस्य द्वारा केवल बल का प्रयोग किए जाने मात्र से जमाव के सदस्य अपराधी नहीं माने जाएंगे जब तक यह साबित ना कर दिया जाए कि बल का प्रयोग कि...

पुलिस स्पेशल सेल द्वारा मोटरसाइकिल जब्त करने पर क्या करें, जब कोई मुकदमा पंजीकृत न हो?

यहाँ एक विस्तृत,  ब्लॉग पोस्ट है जो कि कभी आपकी या  किसी व्यक्ति की मोटरसाइकिल को पुलिस विभाग की स्पेशल सेल पकड़ लेती है और किसी भी थाने में मुकदमा पंजीकृत नहीं करती है तो ऐसे स्थिति में क्या करें की गाड़ी को रिलीज करवा लिया जाये इस पर एक  blog post लिखकर मेरे द्तवारा  जितना सम्भव है उतना विशेष जानकारी के साथ  उदाहरण सहित समझाने की आप लोगों को कोशिश है ।🔥🔥🔥🔥 पुलिस स्पेशल सेल द्वारा मोटरसाइकिल जब्त करने पर क्या करें, जब कोई मुकदमा पंजीकृत न हो? कई बार ऐसी स्थिति सामने आती है जब पुलिस विभाग की स्पेशल सेल किसी व्यक्ति की मोटरसाइकिल या अन्य वाहन को रोककर अपने कब्जे में ले लेती है, लेकिन किसी भी थाने में उसके संबंध में FIR या मुकदमा पंजीकृत नहीं करती। इस तरह की परिस्थिति में वाहन मालिक के लिए यह समझना जरूरी है कि कानूनी प्रक्रिया क्या है और वाहन को रिलीज कराने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाएं। 1. सबसे पहले स्थिति की पुष्टि करें जिस पुलिस टीम या स्पेशल सेल ने गाड़ी पकड़ी है, उनसे लिखित या मौखिक रूप से पूछें कि वाहन क्यों रोका गया है। यह ...

असामी कौन है ?असामी के क्या अधिकार है और दायित्व who is Asami ?discuss the right and liabilities of Assami

अधिनियम की नवीन व्यवस्था के अनुसार आसामी तीसरे प्रकार की भूधृति है। जोतदारो की यह तुच्छ किस्म है।आसामी का भूमि पर अधिकार वंशानुगत   होता है ।उसका हक ना तो स्थाई है और ना संकृम्य ।निम्नलिखित  व्यक्ति अधिनियम के अंतर्गत आसामी हो गए (1)सीर या खुदकाश्त भूमि का गुजारेदार  (2)ठेकेदार  की निजी जोत मे सीर या खुदकाश्त  भूमि  (3) जमींदार  की बाग भूमि का गैरदखीलकार काश्तकार  (4)बाग भूमि का का शिकमी कास्तकार  (5)काशतकार भोग बंधकी  (6) पृत्येक व्यक्ति इस अधिनियम के उपबंध के अनुसार भूमिधर या सीरदार के द्वारा जोत में शामिल भूमि के ठेकेदार के रूप में ग्रहण किया जाएगा।           वास्तव में राज्य में सबसे कम भूमि आसामी जोतदार के पास है उनकी संख्या भी नगण्य है आसामी या तो वे लोग हैं जिनका दाखिला द्वारा उस भूमि पर किया गया है जिस पर असंक्रम्य अधिकार वाले भूमिधरी अधिकार प्राप्त नहीं हो सकते हैं अथवा वे लोग हैं जिन्हें अधिनियम के अनुसार भूमिधर ने अपनी जोत गत भूमि लगान पर उठा दिए इस प्रकार कोई व्यक्ति या तो अक्षम भूमिधर का आसामी होता ह...