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IPC की धारा 353 और BNS की धारा 132 लोक सेवकों की सुरक्षा से जुड़े कानून का पूरा विश्लेषण

स्वैच्छिक परिसमापन में परिसमापक के अधिकार एवं कर्तव्य right and duties of liquidator in voluntary winding up

स्वैच्छिक परिसमापन में परिसमापक के निम्न कर्तव्य एवं अधिकार होते हैं

परिसामापक के सामान्य अधिकार

(1) अंशदाताओं की सूची तैयार करना एवं उसे अंतिम रूप देना

(2) अंशदाताओं के अंशों पर देय राशि की मांग करना।

(3) कंपनी की सामान्य सभाओं का आयोजन करना।

              इन अधिकारों का प्रयोग करते समय परिसमापक कंपनी लाॅ अधिकरण के नियंत्रण के अधीन होता है, क्योंकि कोई भी ऋण दाई या अंशदाई कंपनी लाॅ अधिकरण से प्रार्थना कर सकता है। परिसमापक का यही कर्तव्य है कि वह कंपनी लाॅ अधिकरण को एक रिपोर्ट दें  जिसमें इस तथ्य का उल्लेख हो कि उसके मतानुसार कंपनी के गठन, विकास या  प्रोन्नति में किसी पदाधिकारी द्वारा कोई कपट पूर्ण कार्य किया गया है। इस रिपोर्ट के पश्चात ही व्यक्ति सार्वजनिक परीक्षा हेतु उपस्थित किया जा सकता है।

परिसमापक के कुछ विशेष अधिकार( some special power of liquidator)

परिमापन संबंधी उपयुक्त अधिकारों के अतिरिक्त परिसमापक के कुछ ऐसे अधिकार भी होते हैं, जिनका संबंध कंपनी की वित्तीय स्थिति, व्यापार एवं सुरक्षा से होता है। इनमें निम्नलिखित अधिकार ऐसे होते हैं, जिनका प्रयोग समापक, यदि परिसमापन ऋण दाताओं की स्वेच्छा से किया गया हो तो, कंपनी लाॅ अधिकरण की स्वीकृति से कर सकता है, परंतु यदि सदस्यों द्वारा स्वैच्छिक परिसमापन हो तो परिसमापक को कंपनी के विशेष प्रस्ताव की स्वीकृति जरूरी है।

(a) कंपनी के नाम से और उसकी ओर से किसी वाद, अभियोजन या अन्य कोई दीवानी, फौजदारी, विधिक कार्यवाही करने या उनका प्रतिवाद करने का।

(b) कंपनी का ऐसा कारोबार चलाने का जो कंपनी के लाभप्रद परिसमापन के लिए जरूरी हो।

(c) कंपनी की चल व अचल संपत्ति और वाद योग्य दावों को बेचने के लिए वह ऐसी बिक्री या तो सार्वजनिक नीलामी या निजी तौर पर की गई संविदा के द्वारा कर सकेगा और एक ही साथ या थोड़ा-थोड़ा करके उनके अंतरण( transfer) का अधिकार होगा।

(d) कंपनी की आस्तियों की प्रतिभूति पर अपेक्षित धनराशि प्राप्त करने का।

(e) कोई भी ऐसा कार्य करने का जो कंपनी के परिसमापन और उस आस्तियों के लिए जरूरी हो।

ऐसे कर्तव्य जिनका उपयोग परिसमापक बिना कंपनी लॉ बोर्ड की स्वीकृति के कर सकता है

(अ) कंपनी के नाम पर और उसकी ओर से सभी कार्य कर सकेगा और सभी विलेखों रसीदों और दस्तावेजों का निष्पादन कर सकेगा और उक्त प्रयोजनार्थ  जरूरत पड़ने पर कंपनी की मोहर(seal) का उपयोग कर सकेगा।

(ब) कंपनी के अभिलेखों और विवरणियों या रजिस्ट्रार को पत्रावलियों का निशुल्क(free) रूप से निरीक्षण कर सकेगा।

(स) अपनी संपदा के खिलाफ किसी बकाया के किसी अंशदान के लिए तथा किसी दिवालियेपन को सिद्ध करने का दावा कर सकेगा और वह दिवालियेपन में लाभांश प्राप्त कर सकेगा।

(द) वह कंपनी की ओर से किसी वचन पत्र तथा विनिमय पत्र को लिख सकेगा या स्वीकार एवं पृष्ठांकित कर सकेगा।

(म) अपने आधिकारिक नाम पर किसी मृतक के प्रशासन पत्रों को प्राप्त कर सकेगा और अधिकारिक अंशदान करने वाले व्यक्ति या उसकी पृष्ठ अंकित को प्राप्त  कर सकेगा और अधिकारिक अंशदान करने वाले व्यक्ति या उसकी संपदा से किसी देय धन की अदायगी देने के लिए कोई अन्य जरूरी कार्य कर सकेगा।

(भ) ऐसे  कार्य करने के लिए एक अभिकर्ता की नियुक्ति कर सकेगा जिसे परिसमापक(liquidator) स्वयं नहीं कर सकता है।

(ज) अन्य ऐसी सभी कार्य कर सकेगा जो कंपनी के परिसमापन के लिए तथा परिसंपत्तियों के बंटवारे के लिए जरूरी हो।





            

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