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IPC की धारा 353 और BNS की धारा 132 लोक सेवकों की सुरक्षा से जुड़े कानून का पूरा विश्लेषण

किसी स्त्री के उसकी स्त्री धन संपत्ति पर क्या अधिकार है? What are the rights of women over her stridhan property?

स्त्री धन के ऊपर स्त्री के अधिकार को उसकी प्रस्थिति के अनुसार निर्धारित किया जाता है.

( 1) अविवाहित अवस्था: - कोई भी स्त्री जो अविवाहित है तथा वयस्क है अपनी संपत्ति को किसी को भी हस्तांतरण कर सकती है परंतु यदि वह अवयस्क है तो वह अपनी संपत्ति का हस्तांतरण नहीं कर सकती है.

( 2) विवाहित अवस्था: - विवाहित अवस्था में स्त्री अपनी सौदायिक धन अर्थात पिता व भाई द्वारा प्राप्त धन का निर्वतन पति की बिना अनुमति के भी कर सकती है ऐसा धन जो स्त्री पति से प्राप्त करती थी जिसे वह बिना पति के अनुमति के अन्य संक्रमण नहीं कर सकती थी.

            जहां पति पत्नी साथ रहते हैं वहां असौदायिक धन के निर्वचन के लिए पति की अनुमति आवश्यक नहीं है.

                 नियम यह है कि पति का पत्नी के स्त्रीधन पर कोई अधिकार नहीं होता है किंतु आपत्ति काल में वह स्त्री की सहमति के बिना भी उसके धन का उपयोग कर सकता है दुर्भिक्ष धर्म कार्य तथा व्याधियों आदि की दशा में यदि पति के स्त्रीधन को लिया हो तो उसको लौटाना अथवा उसकी अदायगी करना पति की इच्छा पर निर्भर करता है.

विधवा अवस्था में: - विधवावस्था में स्त्री को संपत्ति के निर्वचन के संबंध में पूर्ण अधिकार प्राप्त संपत्ति चाहे पति की मृत्यु के पूर्व अथवा बाद में प्राप्त की गई हो इस अवस्था में समस्त संपत्ति उसकी अबाधित संपत्ति होती थी  अन्य संक्रमण स्वेच्छा से कर सकती है.

         देवदासियो अथवा नर्तकियों   की संपत्ति  न्यागमन सामान्यतः रूढियों अथवा प्रचलित प्रथाओं के आधार पर होता था ।उनके यहां माता और उनकी पुत्रियों में कोई सहदायिकी नहीं निर्मित होती। अतएव कोई पुत्री माता के विरूध्द  किसी प्रकार की संपत्ति में विभाजन का दावा नहीं कर सकती .

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