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IPC की धारा 353 और BNS की धारा 132 लोक सेवकों की सुरक्षा से जुड़े कानून का पूरा विश्लेषण

भारतीय राज्य क्षेत्र में सर्वत्र व्यापार वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता: Freedom of trade commerce and intercourse throughout the territory of India

समस्त भारत क्षेत्र में मुक्त परिवहन एवं मालों के आगमन को कायम रखना देश की आर्थिक एकता के लिए परम आवश्यक है भारतीय संविधान में ऐसी व्यवस्था दी गई है कि जिससे सभी राज्यों के बीच स्वतंत्र वाणिज्य पनप सके अनुच्छेद 301से लेकर अनुच्छेद 307 के तहत अंतर्राज्यिक  व्यापार व वाणिज्य को स्वतंत्र बनाया गया है यह व्यवस्था आस्ट्रेलिया के संविधान की धारा 92 से ली गई है भारतीय संविधान के अनुच्छेद 301 में व्यापार वाणिज्य तथा समागम के बारे में उपबंधित  किया गया है कि इस भाग के अन्य उपबंधों के अधीन रहते हुए भारत राज्य क्षेत्र में सर्वत्र व्यापार वाणिज्य और समागम आबाध होगा.

           भारतीय संविधान के अनुच्छेद 301 के अनुसार भारत राज्य क्षेत्र में सभी व्यापार वाणिज्य एवं समागम बिना किसी अवरोध के होंगे यह स्वतंत्रता केवल अंतर्राज्यिक व्यापार के लिए ही नहीं बल्कि राज्य के अंदर होने वाले वाणिज्य के लिए भी है ऐसी स्वतंत्रता संपूर्ण नहीं है अनुच्छेद 302 से 305 के तहत कुछ निबंधन लगाए जा सकते हैं किंतु यह निरबंधन केवल अनुच्छेद को विनियमित करने के लिए लगाए जा सकते हैं वाहनों के लिए लाइसेंस ट्रैफिक निगम मूल्य नियंत्रण इत्यादि व्यापार वाणिज्य एवं समागम को भी नियमित करने के उद्देश्य से ही लगाए जाते हैं इसलिए यह संवैधानिक है यदि सडक या पुल  का टैक्स लिया जाता है तो भी गैर संवैधानिक नहीं है क्योंकि इनका उद्देश्य भी समागम के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराना ही है.

महत्वपूर्ण मामले: -

अटियाबारी टी कंपनी बनाम असम राज्य ए.आई. आर. 1961एस.सी. 232 के मामले में के असम राज्य में असम से बाहर जाने वाली चाय पर टैक्स लगा दिया जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने गैर संवैधानिक माना क्योंकि इनका उद्देश्य व्यापार विनियमन के लिए प्रतीत नहीं होता था.

मैसूर सरकार ए.आई.आर.1967 एस. सी. 1989 के मामले में मैसूर सरकार द्वारा बनाए गए नियम की वैधता को चुनौती दी गई थी जिसके अंतर्गत शाम से लेकर सुबह तक की अवधि में जंगल की पैदावार ले जाने के ऊपर रोक लगा दी गई थी न्यायालय ने इस नियम की असंवैधानिक घोषित कर दिया क्योंकि वह भी विनियात्मक नहीं बल्कि प्रतिबंधात्मक था जो कि अनुच्छेद 301 द्वारा प्रदत स्वतंत्रता के अधिकार का अतिक्रमण करता था.


तमिलनाडु राज्य बनाम मैसर्स ट्रेडिंग कंपनी ए.आई.आर 1993एस.सी. 237 के मामले में तमिलनाडु सरकार ने टिंबर की लकड़ी को राज्य से बाहर ले जाने पर पूर्ण रोक लगा दी ऐसी क्षेत्रीय आवश्यकता को देखकर किया न्यायालय ने इसे भी विधिमान्य   घोषित किया और कहा कि अनुच्छेद 301 तथा 304 बी का उल्लंघन नहीं करता है तथा यह विनियमात्मक उपाय है.

अनुच्छेद 301 के सिद्धांत (principles of article 301): -

उपयुक्त विषयों में दिए गए निर्णयों  के आधार पर अनुच्छेद 301 के संबंध में निम्नलिखित सिद्धांत सामने आते हैं -

(a) अनुच्छेद 301 अंतर्राज्यों तथा राज्यों के आंतरिक भागों में व्यापार वाणिज्य एवं अंतर व्यवहारों की स्वतंत्रता को सुनिश्चित करता है.

(b) व्यापार वाणिज्य और समागम शब्दावली बड़ी विस्तृत अर्थ वाली है और इसके अंतर्गत व्यक्ति और वस्तुओं दोनों का आवागमन सम्मिलित है.

(c) स्वतंत्रता केवल विधायिका द्वारा प्रदत्त शक्ति के अधीन निर्मित ऐसी विधियों के विरुद्ध की संरक्षण नहीं है जो व्यापार और वाणिज्य तथा उत्पाद आपूर्ति और मालों के वितरण से संबंधित है वरन कर आधिरोपित करने वाली सभी प्रकार की विधियों के विरुद्ध संरक्षण है.

(d) केवल वही विधियां जो कि प्रत्यक्ष एवं तत्काल प्रभाव से व्यापार अथवा वाणिज्य की स्वतंत्रता को निर्बंधित करती है अनुच्छेद 301 की स्वतंत्रता ओं के प्रतिकूल मानी जाएंगी.

(e) ऐसी विधियां जो केवल विनियमन करती है या प्रतिकारात्मक कर लगाती है और जिनका उद्देश्य व्यापार की स्वतंत्रता को बढ़ाना है अनुच्छेद 301 उनके क्षेत्र के बाहर मानी जाएंगे.


संसद तथा राज्य विधानमंडल को प्रतिबंधित लगाने की शक्ति: Power of Parliament and the state legislature to impose restriction

( 1) लोकहित में व्यापार तथा वाणिज्य को भी नियमित करने की संसद की शक्ति: - संसद विधि द्वारा एक राज्य तथा दूसरे राज्य के बीच भारतीय राज्य क्षेत्र के किसी भाग के अंदर ऐसे निरबंधन लगा सकती है जो कि लोकहित में और लोकहित शब्द की जांच न्यायालय द्वारा की जा सकती है.

           संसद भारतीय राज्य क्षेत्र के किसी भाग में वस्तुओं की दुर्बलता से उत्पन्न किसी भी स्थिति से निपटने के लिए भेदभाव करते हुए विधि बना सकते हैं.

( 2) कर लगाने की शक्ति: - अनुच्छेद 304 का खंड का राज्यों को यह अधिकार देता है कि दूसरे राज्यों से आयात की गई किसी वस्तु पर ऐसा कोई कर लगा सकते हैं जो उसी प्रकार की राज्य के अंतर उत्पादित या निर्मित वस्तु पर लगाया गया हो.

        परंतु इसके लिए निम्नलिखित शर्तों का पूर्ण होना आवश्यक है -

(a) उस विषय पर राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी प्राप्त कर लेनी चाहिए

(b) विधि को लोकहित में होना चाहिए

(c) लगाए गए निरबंधन युक्ति युक्त होना चाहिए


मद्रास राज्य बनाम भाई लाल भाई ए.आई.आर.1964 एस.सी.1006 के मामले में राज्य द्वारा तमाखू पर लगाया गया विक्री कर असंवैधानिक घोषित कर दिया गया क्योंकि यह केवल दूसरे राज्य से आयात की गई तम्बाकू पर लगा था.

मेहताब भजीद बनाम मद्रास राज्य ए.आई.आर.1964एस. सी.1729 में चमड़े पर लगाया गया बिक्री इसलिए असंवैधानिक घोषित कर दिया गया की  कर का भार आयात किए गए चमड़े पर राज्य के अंदर तैयार किए गए चमड़े से अधिक था।

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