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Striving for Equality: The Case for a Uniform Civil Code

भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत अश्लीलता एवं नंगेपन संबंधी कौन से प्रावधान हैं? What are the provisions of law relating to obscenity and Nudity under Indian Penal Code ? explain.

संहिता में अश्लील शब्द को परिभाषित नहीं किया गया है. अतः हमें इसके सामान्य अर्थ  को ही ग्रहण करना चाहिए. सामान्य रूप से विधि के अंतर्गत वे सभी अभिव्यक्ति या (expression) चाहे वो लिखित हो या मौखिक अथवा चाहे वह संकेत आदि के प्रदर्शन हो जो सामान्य मस्तिष्क वाले व्यक्तियों के नैतिक स्तर को निम्न करती है,' अश्लील' (Obscene) मानी जाती है.

                 अभिव्यक्तियों का रूप और गुण इस प्रकार का होना चाहिए कि सामान्य कोटि का मस्तिष्क रखने वाले व्यक्ति उससे   कुप्रभावित हो सके। कोई लेख वचन संकेत अथवा वस्तु अश्लील है या नहीं यह मामले के तथ्यों एवं उनकी परिस्थितियों पर निर्भर करता है क्योंकि नैतिक मूल्यों का कोई सार्वभौम एवं सामान्य मापदंड नहीं है इसलिए अश्लीलता का स्वभाव गुण और क्षेत्र देश और काल के अनुसार परिवर्तनीय  है कोई वस्तु एक स्थान पर अश्लील मानी जा सकती है किंतु वह दूसरे स्थान पर अश्लील नहीं मानी जा सकती है।



अश्लील पुस्तकों आदि का विक्रय आदि: - धारा 292 (1) के अनुसार उप धारा (2) के प्रयोजन के लिए किसी पुस्तक पुस्तिका कागज रेखा चित्र रंग चित्र रूपण आकृति या कोई अन्य वस्तु अश्लील समझी जाएगी यदि वह कामोद्दीपक है, या कामुक व्यक्तियों के रुचिकर है या उसका या (दो या अधिक सुभिन्न मदें  समाविष्ट है वहां) उसकी किसी मद का प्रभाव समग्र रूप से विचार करने पर ऐसा है जो उस व्यक्ति को दुराचारी भ्रष्ट बनाए जिसके द्वारा उनमें अंतर्विष्ट  या सन्निबिष्ट विषय का पढा जाना देखा जाना या सुना जाना सभी सुसंगत परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संभाव्य है.


(2)धारा292(2) के अनुसार जो कोई (a) अश्लील पुस्तक पुस्तिका कागज रेखाचित्र रंग चित्र विरूपण या आकृति या किसी भी अन्य अश्लील वस्तु को चाहे वह कुछ भी हो बेचेगा भाड़े पर देगा वितरित करेगा लोग प्रदर्शित करेगा या उसके किसी भी प्रकार परिचालित करेगा या उसे विक्रय भाड़े वितरण लोक प्रदर्शन या परिचालन के प्रयोजनों के लिए बचेगा उत्पादित करेगा या अपने कब्जे में रखेगा अथवा


(a) किसी अश्लील वस्तु का आयात व निर्यात या प्रवाह हरण पूर्वक प्रयोजनों में से किसी प्रयोजन के लिए करेगा या यह जानते हुए या यह विश्वास करने का कारण रखते हुए करेगा कि ऐसी वस्तु बेच भाड़े पर दी वितरित या लोक प्रदर्शित या किसी प्रकार से परिचालित की जाएगी अथवा


(b) किसी ऐसे कारोबार में भाग लेगा या उससे लाभ प्राप्त करेगा जिस कारोबार में वह यह जानता है या यह विश्वास करने का कारण लगता है कि कोई किसी अश्लील वस्तुएं पूर्वक प्रयोजनों में से किसी प्रयोजन के लिए रची जाती है उत्पादित की जाती है किराए की जाती है रखी जाती है आयात की जाती निर्यात की जाती है रावण की जाती है लोग प्रदर्शित की जाती है या किसी भी प्रकार से परिचालित की जाती है अथवा



(c) यह विज्ञप्ति करें कि या किन्हीं साधनों द्वारा चाहे वह कुछ भी हो यह ज्ञान कराएगा कि कोई व्यक्ति किसी ऐसे कार्य में जो इस धारा के अधीन अपराध है लगा हुआ है या लगने के लिए तैयार है या यह कोई अश्लील वस्तु किसी व्यक्ति से या किसी व्यक्ति के द्वारा प्राप्त की जा सकती है अथवा


(d) किसी ऐसे कार्य को जो इस धारा के अधीन अपराध है करने का प्रस्ताव करेगा या प्रयत्न करेगा


            वह प्रथम बार दोष सिद्ध किए जाने पर दोनों में से किसी भारतीय के कारावास से जिसकी अवधि 2 वर्ष तक हो सकेगी तथा जुड़वाने में से ₹2000 तक हो सकेगा तथा दूसरी बार या उसके बाद भी दोष सिद्ध होने पर दोनों में से किसी भगत के कारावास से जिसकी अवधि 5 वर्ष तक हो सकेगी तथा जुर्माने में भी यह ₹5000 तक हो सकेगा दंडित किया जाएगा.



तरुण व्यक्ति को अश्लील वस्तुओं के विक्रय आदि धारा 293 के अनुसार जो कोई भी इस वर्ष से कम आयु के किसी व्यक्ति को कोई ऐसी अश्लील वस्तु जो अंतिम पूर्व गामी धारा में निर्दिष्ट है बेचेगा भाड़े पर देगा विवरण करेगा प्रदर्शित करेगा या परिचालित करेगा या ऐसे करते का प्रस्ताव या प्रयत्न करेगा प्रथम दोष सिद्धि पर दोनों भक्ति के जुर्माने में से किसी भी प्रकार के कारावास से जो 3 वर्ष तक का हो सकेगा और जुर्माने से जो ₹2000 तक का हो सकेगा और द्वितीय या पश्चात वर्ती किसी दोस्त सिद्ध की दशा में दोनों भांति के कारावास में से किसी भी प्रकार के कारावास से जो 7 वर्ष तक का हो सकेगा और ऐसे जुर्माने से जो कि 5000 तक का हो सकेगा या दोनों से दंडित किया जाएगा.



अश्लील कार्य और गाने धारा 294 के अनुसार जो कोई () किसी लोग स्थान में कोई अश्लील कार्य करेगा अथवा () किसी लोग स्थान में या उसके समीप कोई अश्लील फावड़े या शब्द गाएगा सुनाएगा या उच्चारित करेगा जिससे दूसरों को छांव होता हो वह दोनों में से किसी भांति के कारावास से जिसकी अवधि 3 महीने तक हो सकेगी या जुर्माने से या दोनों से दंडित किया जाएगा.


        सामान्य रूप से नया लोगों ने कामोत्तेजक वस्तुएं वचनों लेखों संगीत को आदि को ही अश्लील माना है अश्लील की जांच इस आधार पर करनी चाहिए कि वस्तु आदि से अलौकिक आचरण पर क्या प्रभाव पड़ता है वह किसी प्रकार और किस मात्रा में लोगों पर अनैतिक प्रभाव डालती है या नैतिक पतन भ्रष्टाचार अथवा दूर आचरण की ओर प्रेरित करती है यदि कोई व्यक्ति किसी अश्लील वस्तु की नकल करता है तो वह भी इस धारा के अधीन दंडनीय होगा स्मरणीय है कि रेस्टोरेंट में लड़कियों को केवल अंडर वियर ब्लेजर पहन कर कैमरे नेत्र करना और अंगों को स्पंदित करना केवल पेंटीज पहनकर करना ग्राहकों की मेजों के इर्द-गिर्द घूमना अपनी पीठों और स्तनों को ग्राहकों से रगड़ वाना अपने स्तनों के अग्रभाग को ग्राहकों के मुंह में डाल देना और संभोग क्रियाओं की नकल करना आदि यद्यपि अश्लील क्रिया है लेकिन वह दंडनीय नहीं है क्योंकि इन सब से ग्राहकों को क्षोभ नहीं होता है। वे सम्मति पूर्वक के यह सब देखते हैं इस धारा में प्रयुक्त शब्द आधिपत्य से अभिप्राय जानकारी पूर्ण आधिपत्य(Conscious Possession) से है. अश्लीलता के निम्नलिखित उदाहरण है -


( 1) जफर अहमद ए आई आर 1963 में अभियुक्त ने दो प्रतिष्ठित लड़कियों को जिनका उससे कोई परिचय नहीं था उसके साथ लैंगिक संबंध स्थापित करने के लिए खुले रुप में पुकारा और अपने साथ रिक्शा गाड़ी में चलने के लिए कहा निर्णय लिया गया कि वह अश्लील कार्य का दोषी था क्योंकि अभियुक्त द्वारा उच्चारित शब्द कामोत्तेजक अथवा कामुकता पूर्ण थे.


( 2) कुंजीलाल ए आई आर 1970 मे अभियुक्त ने पुराने ख्याति प्राप्त लेखकों द्वारा लिखित पुस्तकों कामसूत्र रतीश राज्य अंग रंग आदि का हिंदी अनुवाद प्रकाशित किया इन पुस्तकों में महिलाओं के नग्न चित्र दिए गए थे जिनका पुस्तकों की विषय वस्तु से कोई संबंध नहीं था इन चित्रों को प्रकाशित करने का उद्देश्य स्वास्थ्य सेक्स शिक्षा देना नहीं अपितु पुस्तकों की अधिकाधिक बिक्री करना था यह निर्णय लिया गया कि अभियुक्त धारा 292 के अंतर्गत अपराध का दोषी था.


अपवाद - धारा 292 कुछ अपवाद भी प्रस्तुत करती है अर्थात इस धारा का विस्तार -

( 1) किसी पुस्तक पुस्तिका कागज लेखन रेखाचित्र रंग चित्र विरूपण या आकृति -

(a) जिसका प्रकाशन इस आधार पर लोकहित के रूप में न्यायोचित होना सिद्ध किया जाता है कि ऐसी पुस्तक पुस्तिका कागज रेखाचित्र रंग चित्र लेखन रूपण या आकृति विज्ञान साहित्य कला शिक्षा प्राप्ति या जनसाधारण के अन्य आशय के लिए हितकर है या

(b) जो धार्मिक उद्देश्य के लिए सद्भावना से रखि  या प्रयोग की जाती है.

( 2) किसी ऐसे रूपण पर: -

(a) जो प्राचीन स्मारक तथा पुरातात्विक स्थल तथा अवशेष अधिनियम 1958 के अर्थ के अंतर्गत किसी प्राचीन स्मारक पर या

(b) किसी मंदिर में या मूर्तियों के पर्यावरण के उपयोग में आने वाले किसी धार्मिक प्रयोजन के लिए रखे गए या उपयोग में लाए जाने वाले किसी रथ पर या

तक्षित उत्कीर्ण रंग चित्रित या अन्यथा रिपीट हो नहीं होगा.


               इस प्रकार की कलात्मक कृतियों को अश्लील नहीं माना गया है किसी महिला को नग्न रूप में चित्रित करना मात्र अपने आप में असली नहीं है जब तक कि वह चित्र एक सामान्य श्रेष्ठ व्यक्ति को को प्रभावित नहीं करता है इसी प्रकार होटल एवं रेस्टोरेंट में नग्नता एवं अश्लीलता विहीन भारतीय संस्कृति के अनुरूप के कैबरे डांस का आयोजन किया जाना दंण्डनीय नहीं है।

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