Skip to main content

पत्नी मायके चली गई और वापस आने से मना कर दिया – मेरा असली अनुभव और कानूनी समाधान (2026)

जबरी छुट्टी क्या है? What do you understand by lay off?

 जबरी छुट्टी


            जब भी छुट्टी से हमारा अभिप्राय ऐसी छुट्टी से है जो कि नियोजक द्वारा कुछ कारणवश दी जाती है जब भी छुट्टी के अंतर्गत श्रमिक तो काम के घंटों के दौरान काम पर उपस्थित होते हैं परंतु उन्हें काम नहीं मिल पाता है अधिनियम की मूल धारा 253 के में  जो भी छुट्टी की परिभाषा दी गई है उसी से स्पष्ट होता है कि किन किन परिस्थितियों में काम ना देना असंभव होता है परिभाषा इस प्रकार दी गई है कि किसी ऐसे कर्मकार को जिसका नाम मास्टर रोल पर दर्ज है और जिसकी छठवीं नहीं हुई है कोयले विद्युत शक्ति या अन्य सामग्री की कमी स्टॉक का भाव यंत्र बनके कारण या अन्य किसी कारणवश नियोजन देने में नियोजक की असमर्थता या अस्वीकृति से है इस प्रकार उपयुक्त परिभाषा में दी गई परिस्थितियां ऐसी हैं जिनमें नियोजक उत्पादन में वृद्धि चाहते हुए भी अपने कर्म कारों को कार्य देने में असमर्थ रहता है अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए जानने के अन्यथा किसी भी कारण से नियोक्ता द्वारा अतिरिक्त कर्मकार को उन्मुक्त करना चटनी के अंतर्गत माना जाएगा.



जबरी छुट्टी के कारण

        बिजली का अभाव  जिसमें मशीन का चलना संभव नहीं है.

          जलभराव जिससे मशीन का सुचारू रूप से संचालन कठिन हो गया है.

           कच्चे माल का भाव जिससे की मशीन में आवश्यकता से अधिक

            मशीन का खराब होना या मशीन का नष्ट हो जाना यह भी एक प्रकार की समस्या है जिसके कारण मजदूरों को जब भी छुट्टी के लिए कहा जाता है.


                 आपातकालीन स्थिति में भी काम करना पूर्व संभव नहीं होता है जैसे युद्ध काल में सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से रात्रिकालीन फैक्ट्री को बंद कर देना अत्यधिक आवश्यक है.


जब भी छुट्टी के लिए मजदूरों का प्रतिकार का अधिकार:

धारा 25 सी में उन परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है जिनके अंतर्गत जब भी छुट्टी की जा सकती है या धारा बंधित करती है कि जब कभी बदली श्रमिक तथा आकस्मिक रूप से नियुक्त श्रमिकों को छोड़कर जिसका नाम औद्योगिक संस्थान के दर्ज नहीं है तथा जिसने नियोक्ता के अधीन लगातार सेवा का कम से कम 1 वर्ष पूरा कर लिया और उसे काम नहीं दिया जाना है चाहे लगातार हो या कुछ अंतराल को छोड़कर हो तो नियोजक उनके बीच में पड़ने वाली  छुट्टियों को छोड़कर बाकी बचे हुए काम करके दिनों का भुगतान का 50% मजदूर को देना अत्यधिक आवश्यक होगा.

            परंतु ऐसी स्थिति की धनराशि 12 माह की अवधि में पहले 45 दिनों से ज्यादा के लिए नहीं दी जाएगी यदि इस प्रकार का कर्मकार और नियोजन में कोई करार है तो


            धारा ट्रिपल के में उल्लेखित कारणों में लौटाए जाने वाले कर्मचारी उस प्रावधान के अंतर्गत लाभ पाने का अधिकारी होंगे 1964 एलएलजे 358.

          यदि प्रतिकार ऐसे कर्मकार को दे होगा जिसका नाम मास्टर रोल में दर्ज है वह सभी कर्मकार जो साल भर काम कर चुके हैं प्रतिकार पाने का अधिकारी होंगे.


निम्नलिखित अवस्था में कामगार प्रतिकार नहीं प्राप्त कर सकता है:

धारा 25a के अंतर्गत कोई भी कर्मकार निम्नलिखित अवस्थाओं में प्रतिकार प्राप्त नहीं कर सकता है -

( 1) यदि वह औद्योगिक संस्थाओं में जिस काम पर वह नियुक्त है उसी नियोजक के किसी दूसरे संस्थान में जो उसी नगर या गांव में या जिस संस्थान का रोजगार स्वीकार करने से इनकार करता है और यदि नियोजक की राय में ऐसे पर्यायवाची रोजगार के लिए किसी विशेष कौशल्या पूर्व अनुभव की आवश्यकता नहीं है और इसे कर्मकार द्वारा किया जा सकता है तो प्रतिकार नहीं दिया जाएगा परंतु यदि कामगार को समानता पहले मजदूरी भुगतान की गई थी है वैकल्पिक कार्य के लिए भी प्रस्तुत की जा सकती है.

( 2) यदि वह अपने उस औद्योगिक संस्थान में निश्चित समय पर काम के बीच में काम से कम दिन एक बार उपस्थित नहीं हो पाता है.

( 3) यदि ऐसी जब भी छुट्टी उस स्थापन के दूसरे भाग के कामगारों की हड़ताल या उत्पादन की गति मंद के कारण हुई है तो उसे कोई प्रति कर नहीं दिया जाएगा.


इंडस्ट्रियल एंप्लाइज यूनिट कानपुर बनाम जेके कॉटन स्पिनिंग एंड वीविंग मिल्स कंपनी'':

इस कंपनी के बाद में यह पारित किया गया था कि यदि नियोजक द्वारा किसी कुशल कर्मकार को कुली का काम देने का प्रस्ताव रखा जाता है तो यह नियोजन देने को प्रस्ताव नहीं माना जाएगा उसी काम को उसी प्रकार का होना चाहिए जैसा कि कर्मकार पहले करता रहा था.


नूतन मिल्स लिमिटेड बनाम एम्पलाइज स्टेट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन:

इस बात में माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री पति छात्रा ने अवलोकन किया था कि काम बिना बने रहने देने की अवधि के दौरान नियोजित को किसी दूसरे मालिक के पास जाने और उसकी सेवा करने का अधिकार है उसे अपने संस्था पर दैनिक कार्य के लिए उपस्थित न होने या काम बिना बने रहने की अवधि के दौरान किसी दूसरे नियोक्ता की सेवा करने का एकमात्र परिणाम यह होगा कि वह यह काम बिना रहने देने के लिए प्रतिकार का हकदार नहीं होगा परंतु से अपने काम पर पुनः स्थापित किए जाने का अधिकार होगा जब भी वह उचित अवसर आए.


औद्योगिक विवाद अधिनियम धारा 25 सी तथा धारा 25:


ऐसे औद्योगिक संस्थानों पर लागू नहीं होगा जहां कर्म कारों की संख्या 50 से कम है या ऐसे संस्थान जो कि मौसम के अनुसार कार्य करते हैं मौसमी उद्योग में शक्कर उद्योग आते हैं.

Comments

Popular posts from this blog

बलवा और दंगा क्या होता है? दोनों में क्या अंतर है? दोनों में सजा का क्या प्रावधान है?( what is the riot and Affray. What is the difference between boths.)

बल्बा(Riot):- भारतीय दंड संहिता की धारा 146 के अनुसार यह विधि विरुद्ध जमाव द्वारा ऐसे जमाव के समान उद्देश्य को अग्रसर करने के लिए बल या हिंसा का प्रयोग किया जाता है तो ऐसे जमाव का हर सदस्य बल्बा करने के लिए दोषी होता है।बल्वे के लिए निम्नलिखित तत्वों का होना आवश्यक है:- (1) 5 या अधिक व्यक्तियों का विधि विरुद्ध जमाव निर्मित होना चाहिए  (2) वे किसी सामान्य  उद्देश्य से प्रेरित हो (3) उन्होंने आशयित सामान्य  उद्देश्य की पूर्ति हेतु कार्यवाही प्रारंभ कर दी हो (4) उस अवैध जमाव ने या उसके किसी सदस्य द्वारा बल या हिंसा का प्रयोग किया गया हो; (5) ऐसे बल या हिंसा का प्रयोग सामान्य उद्देश्य की पूर्ति के लिए किया गया हो।         अतः बल्वे के लिए आवश्यक है कि जमाव को उद्देश्य विधि विरुद्ध होना चाहिए। यदि जमाव का उद्देश्य विधि विरुद्ध ना हो तो भले ही उसमें बल का प्रयोग किया गया हो वह बलवा नहीं माना जाएगा। किसी विधि विरुद्ध जमाव के सदस्य द्वारा केवल बल का प्रयोग किए जाने मात्र से जमाव के सदस्य अपराधी नहीं माने जाएंगे जब तक यह साबित ना कर दिया जाए कि बल का प्रयोग कि...

असामी कौन है ?असामी के क्या अधिकार है और दायित्व who is Asami ?discuss the right and liabilities of Assami

अधिनियम की नवीन व्यवस्था के अनुसार आसामी तीसरे प्रकार की भूधृति है। जोतदारो की यह तुच्छ किस्म है।आसामी का भूमि पर अधिकार वंशानुगत   होता है ।उसका हक ना तो स्थाई है और ना संकृम्य ।निम्नलिखित  व्यक्ति अधिनियम के अंतर्गत आसामी हो गए (1)सीर या खुदकाश्त भूमि का गुजारेदार  (2)ठेकेदार  की निजी जोत मे सीर या खुदकाश्त  भूमि  (3) जमींदार  की बाग भूमि का गैरदखीलकार काश्तकार  (4)बाग भूमि का का शिकमी कास्तकार  (5)काशतकार भोग बंधकी  (6) पृत्येक व्यक्ति इस अधिनियम के उपबंध के अनुसार भूमिधर या सीरदार के द्वारा जोत में शामिल भूमि के ठेकेदार के रूप में ग्रहण किया जाएगा।           वास्तव में राज्य में सबसे कम भूमि आसामी जोतदार के पास है उनकी संख्या भी नगण्य है आसामी या तो वे लोग हैं जिनका दाखिला द्वारा उस भूमि पर किया गया है जिस पर असंक्रम्य अधिकार वाले भूमिधरी अधिकार प्राप्त नहीं हो सकते हैं अथवा वे लोग हैं जिन्हें अधिनियम के अनुसार भूमिधर ने अपनी जोत गत भूमि लगान पर उठा दिए इस प्रकार कोई व्यक्ति या तो अक्षम भूमिधर का आसामी होता ह...

कंपनी के संगम ज्ञापन से क्या आशय है? What is memorandum of association? What are the contents of the memorandum of association? When memorandum can be modified. Explain fully.

संगम ज्ञापन से आशय  meaning of memorandum of association  संगम ज्ञापन को सीमा नियम भी कहा जाता है यह कंपनी का एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। हम कंपनी के नींव  का पत्थर भी कह सकते हैं। यही वह दस्तावेज है जिस पर संपूर्ण कंपनी का ढांचा टिका रहता है। यह कह दिया जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि यह कंपनी की संपूर्ण जानकारी देने वाला एक दर्पण है।           संगम  ज्ञापन में कंपनी का नाम, उसका रजिस्ट्री कृत कार्यालय, उसके उद्देश्य, उनमें  विनियोजित पूंजी, कम्पनी  की शक्तियाँ  आदि का उल्लेख समाविष्ट रहता है।         पामर ने ज्ञापन को ही कंपनी का संगम ज्ञापन कहा है। उसके अनुसार संगम ज्ञापन प्रस्तावित कंपनी के संदर्भ में बहुत ही महत्वपूर्ण अभिलेख है। काटमेन बनाम बाथम,1918 ए.सी.514  लार्डपार्कर  के मामले में लार्डपार्कर द्वारा यह कहा गया है कि "संगम ज्ञापन का मुख्य उद्देश्य अंश धारियों, ऋणदाताओं तथा कंपनी से संव्यवहार करने वाले अन्य व्यक्तियों को कंपनी के उद्देश्य और इसके कार्य क्षेत्र की परिधि के संबंध में अवग...