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IPC की धारा 353 और BNS की धारा 132 लोक सेवकों की सुरक्षा से जुड़े कानून का पूरा विश्लेषण

जबरी छुट्टी क्या है? What do you understand by lay off?

 जबरी छुट्टी


            जब भी छुट्टी से हमारा अभिप्राय ऐसी छुट्टी से है जो कि नियोजक द्वारा कुछ कारणवश दी जाती है जब भी छुट्टी के अंतर्गत श्रमिक तो काम के घंटों के दौरान काम पर उपस्थित होते हैं परंतु उन्हें काम नहीं मिल पाता है अधिनियम की मूल धारा 253 के में  जो भी छुट्टी की परिभाषा दी गई है उसी से स्पष्ट होता है कि किन किन परिस्थितियों में काम ना देना असंभव होता है परिभाषा इस प्रकार दी गई है कि किसी ऐसे कर्मकार को जिसका नाम मास्टर रोल पर दर्ज है और जिसकी छठवीं नहीं हुई है कोयले विद्युत शक्ति या अन्य सामग्री की कमी स्टॉक का भाव यंत्र बनके कारण या अन्य किसी कारणवश नियोजन देने में नियोजक की असमर्थता या अस्वीकृति से है इस प्रकार उपयुक्त परिभाषा में दी गई परिस्थितियां ऐसी हैं जिनमें नियोजक उत्पादन में वृद्धि चाहते हुए भी अपने कर्म कारों को कार्य देने में असमर्थ रहता है अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए जानने के अन्यथा किसी भी कारण से नियोक्ता द्वारा अतिरिक्त कर्मकार को उन्मुक्त करना चटनी के अंतर्गत माना जाएगा.



जबरी छुट्टी के कारण

        बिजली का अभाव  जिसमें मशीन का चलना संभव नहीं है.

          जलभराव जिससे मशीन का सुचारू रूप से संचालन कठिन हो गया है.

           कच्चे माल का भाव जिससे की मशीन में आवश्यकता से अधिक

            मशीन का खराब होना या मशीन का नष्ट हो जाना यह भी एक प्रकार की समस्या है जिसके कारण मजदूरों को जब भी छुट्टी के लिए कहा जाता है.


                 आपातकालीन स्थिति में भी काम करना पूर्व संभव नहीं होता है जैसे युद्ध काल में सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से रात्रिकालीन फैक्ट्री को बंद कर देना अत्यधिक आवश्यक है.


जब भी छुट्टी के लिए मजदूरों का प्रतिकार का अधिकार:

धारा 25 सी में उन परिस्थितियों का उल्लेख किया गया है जिनके अंतर्गत जब भी छुट्टी की जा सकती है या धारा बंधित करती है कि जब कभी बदली श्रमिक तथा आकस्मिक रूप से नियुक्त श्रमिकों को छोड़कर जिसका नाम औद्योगिक संस्थान के दर्ज नहीं है तथा जिसने नियोक्ता के अधीन लगातार सेवा का कम से कम 1 वर्ष पूरा कर लिया और उसे काम नहीं दिया जाना है चाहे लगातार हो या कुछ अंतराल को छोड़कर हो तो नियोजक उनके बीच में पड़ने वाली  छुट्टियों को छोड़कर बाकी बचे हुए काम करके दिनों का भुगतान का 50% मजदूर को देना अत्यधिक आवश्यक होगा.

            परंतु ऐसी स्थिति की धनराशि 12 माह की अवधि में पहले 45 दिनों से ज्यादा के लिए नहीं दी जाएगी यदि इस प्रकार का कर्मकार और नियोजन में कोई करार है तो


            धारा ट्रिपल के में उल्लेखित कारणों में लौटाए जाने वाले कर्मचारी उस प्रावधान के अंतर्गत लाभ पाने का अधिकारी होंगे 1964 एलएलजे 358.

          यदि प्रतिकार ऐसे कर्मकार को दे होगा जिसका नाम मास्टर रोल में दर्ज है वह सभी कर्मकार जो साल भर काम कर चुके हैं प्रतिकार पाने का अधिकारी होंगे.


निम्नलिखित अवस्था में कामगार प्रतिकार नहीं प्राप्त कर सकता है:

धारा 25a के अंतर्गत कोई भी कर्मकार निम्नलिखित अवस्थाओं में प्रतिकार प्राप्त नहीं कर सकता है -

( 1) यदि वह औद्योगिक संस्थाओं में जिस काम पर वह नियुक्त है उसी नियोजक के किसी दूसरे संस्थान में जो उसी नगर या गांव में या जिस संस्थान का रोजगार स्वीकार करने से इनकार करता है और यदि नियोजक की राय में ऐसे पर्यायवाची रोजगार के लिए किसी विशेष कौशल्या पूर्व अनुभव की आवश्यकता नहीं है और इसे कर्मकार द्वारा किया जा सकता है तो प्रतिकार नहीं दिया जाएगा परंतु यदि कामगार को समानता पहले मजदूरी भुगतान की गई थी है वैकल्पिक कार्य के लिए भी प्रस्तुत की जा सकती है.

( 2) यदि वह अपने उस औद्योगिक संस्थान में निश्चित समय पर काम के बीच में काम से कम दिन एक बार उपस्थित नहीं हो पाता है.

( 3) यदि ऐसी जब भी छुट्टी उस स्थापन के दूसरे भाग के कामगारों की हड़ताल या उत्पादन की गति मंद के कारण हुई है तो उसे कोई प्रति कर नहीं दिया जाएगा.


इंडस्ट्रियल एंप्लाइज यूनिट कानपुर बनाम जेके कॉटन स्पिनिंग एंड वीविंग मिल्स कंपनी'':

इस कंपनी के बाद में यह पारित किया गया था कि यदि नियोजक द्वारा किसी कुशल कर्मकार को कुली का काम देने का प्रस्ताव रखा जाता है तो यह नियोजन देने को प्रस्ताव नहीं माना जाएगा उसी काम को उसी प्रकार का होना चाहिए जैसा कि कर्मकार पहले करता रहा था.


नूतन मिल्स लिमिटेड बनाम एम्पलाइज स्टेट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन:

इस बात में माननीय मुख्य न्यायाधीश श्री पति छात्रा ने अवलोकन किया था कि काम बिना बने रहने देने की अवधि के दौरान नियोजित को किसी दूसरे मालिक के पास जाने और उसकी सेवा करने का अधिकार है उसे अपने संस्था पर दैनिक कार्य के लिए उपस्थित न होने या काम बिना बने रहने की अवधि के दौरान किसी दूसरे नियोक्ता की सेवा करने का एकमात्र परिणाम यह होगा कि वह यह काम बिना रहने देने के लिए प्रतिकार का हकदार नहीं होगा परंतु से अपने काम पर पुनः स्थापित किए जाने का अधिकार होगा जब भी वह उचित अवसर आए.


औद्योगिक विवाद अधिनियम धारा 25 सी तथा धारा 25:


ऐसे औद्योगिक संस्थानों पर लागू नहीं होगा जहां कर्म कारों की संख्या 50 से कम है या ऐसे संस्थान जो कि मौसम के अनुसार कार्य करते हैं मौसमी उद्योग में शक्कर उद्योग आते हैं.

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