अगर पति या पत्नी अदालत में किए गए समझौते की शर्तें तोड़ दें, तो क्या करें? समझौता टूटने के बाद कानून कौन-कौन से रास्ते देता है – एक वास्तविक जैसी कहानी
सर... उसने कोर्ट में वादा किया था, फिर भी वापस नहीं आई। अब मैं क्या करूँ?" जिला न्यायालय का परिसर। मध्यस्थता (Mediation) के कुछ सप्ताह बाद की बात थी। अमन अपने वकील के चैंबर में बैठा था। उसके हाथ में अदालत के सामने हुए समझौते की प्रति थी। उसने निराश होकर कहा— "सर, हमने अदालत में समझौता किया था। सबके सामने उसने कहा था कि वह साथ रहेगी, लेकिन अब उसने अपना फोन भी बंद कर दिया है। क्या अदालत में किया गया समझौता सिर्फ़ कागज़ का टुकड़ा है?" वकील ने फाइल बंद की और शांत स्वर में कहा— "नहीं अमन, पहले यह समझते हैं कि समझौते की कानूनी स्थिति क्या है।" अदालत में हुआ समझौता क्यों महत्वपूर्ण होता है? वकील ने समझाया— जब कोई समझौता अदालत या मध्यस्थता केंद्र के माध्यम से होता है और उसके आधार पर अदालत कोई आदेश पारित करती है, तो उसकी कानूनी महत्ता बढ़ जाती है। लेकिन आगे क्या होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि— समझौते की शर्तें क्या थीं, अदालत ने कौन-सा आदेश दिया, और बाद में किस प्रकार का उल्लंघन हुआ। अगर कोई पक्ष समझौते से मुकर जाए तो? अमन ने पूछा— "अगर वह जानबूझकर अपनी बात ब...