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भारतीय संविधान और आपराधिक न्याय प्रणाली का मूल सिद्धांत है कि हर व्यक्ति तब तक निर्दोष माना जाता है, जब तक सक्षम न्यायालय उसे दोषी घोषित न कर दे। इसी सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए कानून आरोपी को कई महत्वपूर्ण अधिकार प्रदान करता है। इन अधिकारों का उद्देश्य अपराधियों को बचाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को बिना निष्पक्ष प्रक्रिया के दंडित न किया जाए। इस लेख में हम आरोपी के प्रमुख कानूनी अधिकारों को सरल भाषा में समझेंगे। आरोपी कौन होता है? आरोपी (Accused) वह व्यक्ति होता है जिसके विरुद्ध किसी अपराध का आरोप लगाया गया हो या जिसके खिलाफ आपराधिक कार्यवाही चल रही हो। केवल आरोपी होना और दोषी होना अलग-अलग बातें हैं। अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा साक्ष्यों और कानून के आधार पर किया जाता है। 1. निर्दोष माने जाने का अधिकार (Presumption of Innocence) भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली का मूल सिद्धांत यह है कि अभियोजन पक्ष पर आरोप सिद्ध करने का दायित्व होता है। जब तक न्यायालय दोष सिद्ध नहीं करता, तब तक आरोपी को निर्दोष माना जाता है। 2. निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार (Right to...