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Striving for Equality: The Case for a Uniform Civil Code

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What is the Bail in Law?

                      Introduction:-  bail is a set of pre trial restrictions that are imposed on a suspect to  ensure that they comply with the judicial process. Bail is the conditional release of a defendant with the promise to appear in court when required .The Code of Criminal procedure 1973 does not defie bail although the terms bailable offence and non- bailable offence have been defined in section 2(a) of the code.   Bailable offence:- A bailable offence is an offence which is shown as  bailable in the first schedule of the code or which is made bailable by any other Law. It is use serious offence.   Non-Bailable offence: It means any other offence. These are serious nature crimes. The police can not grant bails. it can only be granted by a Judicial magestrate / Judge.  Section 436 to 450 Set out the provisions for the grant of bail in criminal cases.   Object of Bail: The provisions regarding the release of the accused person on bail are aimed at ensuring the presen

SC/ST Act क्या है ? इसमें कितनी सजा हो सकती है ?What is SC/ST Act? How much punishment can there be in this?

SC/ST Act संसद द्वारा 1989 पारित किया गया। इसके बाद राष्ट्रपति ने 30 जनवरी 1990 को इस पर मुहर लगाई और ये कानून लागू किया गया।      हिन्दी में बात की जाये अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण कानून) कहा जाता है। इस कानून के अन्तर्गत कुल 5 अध्याय एवं 23 धारायें हैं। इसमें 2018 में संशोधन हो चुका है।       SC/ST Act अध्याय-1 में [ खख] आश्रितं से पीडित का ऐसा पति या पत्नी बालक माता -पिता भाई और बहिन जो ऐसे पीडित पर अपनी सहायता और भरण-पोषण के लिये पूर्णतः या मुख्यता आश्रित है:  [ख ग] "आर्थिक बहिष्कार से निम्नलिखित अभिप्रेत है -  [[i] अन्य व्यक्ति से भांडे पर कार्य से सम्बन्धित किसी अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति को उसके कार्य का मेहनताना न दिया जाना।  [ खड़] वन अधिकार का वह अर्थ होगा जो अनुसूचित जनजाति और अन्य परम्परागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता अधिनियम 2006 (2007 का 2) की धारा 3 की उपधारा (2) में है। [([खच] हाथ से मैला उठाने वाले कर्मी का वह अर्थ होगा जो हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम (2013 (2013 का 25 )

केवल जमानत शर्तों का उल्लंघन जमानत रद्ध करने के लिये पर्याप्त नहीं होगा।

राजिया बनाम हरियाणा राज्य  पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने न्यायमूर्ति जसजीत सिंह बेदी द्वारा जमानत शर्तों की स्वचालित रूप से रद्द करने पर यह कहा गया है कि एक बार जमानत मिलने के बाद उसे रद्द करने के लिये ठोस कारण होने चाहिये। केवल जमानत शर्तों का उल्लंघन जमानत रद्द करने के लिये पर्याप्त नहीं होगा।  सुप्रीम कोर्ट के कथनानुसार जमानत को रद्द किया जा सकता है यदि साक्ष्य अपराध के रहस्य या सामाजिक प्रभाव पर ध्यान नहीं दिया गया हो।         राजिया बनाम हरियाणा राज्य के मामले में जमानत देने के आदेश में एक शर्त शामिल थी जिसमें कहा गया था, "यह स्पष्ट है कि अगर जमानत देने के आदेश  में कोई अन्य मामला शामिल है तो मामले में जमानत दी जायेगी।   धारा 482 CrPC के तहत यदि आवेदक समान प्रकृति के किसी दूसरे मामले में शामिल है तो मौजूदा मामले में दी गयी जमानत को खारिज कर दिया जायेगा। सत्र न्यायाधीश  फरीदाबाद ने पुलिस स्टेशन सुराजकुण्ड फरीदाबाद हरियाणा में एनडीपीएस अधिनियम की धारा 20-61-85 के तहत दर्ज था जिससे याचिकाकर्ता को दी गयी जमानत को रद्द कर दिया गया। क्योंकि याचिकाकर्ता के खिलाफ NDPS अधिन

भारतीय दंड संहिता की धारा 76 क्या कहती है? इसमें प्रयुक्त शब्द तथ्य की भूल क्षम्य है लेकिन कानून की भूल क्षम्य नहीं है क्या संबंध है?What does section 76 of the Indian Penal Code say? The words used in it are excusable mistake of fact but not excusable mistake of law what is the relation?

 भारतीय दण्ड संहिता की धारा 76 में यह उपबन्धित किया गया है कि " कोई बात अपराध नहीं है जो किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा किया जाय जो उसे करने के लिए विधि द्वारा आबद्ध हो या जो तथ्य की भूल के कारण न कि विधि की भूल के कारण , सद्भावनापूर्वक विश्वास करता हो कि उसे करने के लिए विधि द्वारा आबद्ध है ।   उदाहरण 2  ( क ) विधि के समादेशों के अनुवर्तन में अपने वरिष्ठ ऑफिसर के आदेश से एक सैनिक ' क ' भीड़ पर गोली चलाता है । ' क ' ने कोई अपराध नहीं किया ।  ( ख ) न्यायालय का ऑफिसर ' क ' , ' म ' को गिरफ्तार करने के लिए उसे न्यायालय द्वारा अदिष्ट किये जाने पर और सम्यक् जाँच के पश्चात् यह विश्वास करके कि ' य ' , ' म ' है , ' य ' को , गिरफ्तार कर लेता है । ' क ' ने कोई अपराध नहीं किया ।   इस धारा में तथ्य की भूल को आपराधिक दायित्व से बचने के लिए एक उचित आधार के माना गया है । स्टोरी के अनुसार , " भूल से अभिप्राय एक ऐसी निरुद्देश्य कार्य अथवा चूक ( act or omission ) से है जो अज्ञान , विस्मय अथवा गलती से किये गये विश्वास के कारण नि हुई है ।

cyber crime क्या होता है?

आज का युग कम्प्यूटर और इंटरनेट की बढ़ती हुई उपयोगिता का युग है । जिसने हमको तकनीकी क्षेत्र  में बहुत आगे पहुंचा दिया है। आज हमारी रोज मर्रा के काम इस इन्टरनेट और मोबाइल के बिना आधे-अधूरे से लगते हैं। इस तकनीक क्षेत्र में  हमारी प्रगति के कारण हमारे जीवन को बदलने के लिये काफी मौके दे रहा है। जैसे की  इन्टरनेट बैंकिंग, के माध्यम से पैसों की निकासी जैसे कई कार्य कम्प्यूटर और इन्टरनेट के उपयोग ने तकनीकी क्षेत्र में हमें बहुत आगे पहुंचा दिया है लेकिन ये तकनीक अपने साथ कई ऐसे खतरे लायी है जिनके बारे में आपको पता होना चाहिये।  साइबर अपराध एक ऐसा खतरा है जो बीते कुछ वर्षो में तेजी से बढ़ा है और इसने दुनिया भर में इन्टरनेट इस्तेमाल करने वाले लाखों लोगों को अपनी चपेट में ले लिया है। हैकर्स और स्पमर्श इन साइवर अटैक से किसी भी व्यक्ति की पर्सनल जानकारी से लेकर किसी व्यापारिक संस्थान को कही भी सिर्फ बैठे-बैठे निशाना बना सकते हैं। इस तरह के साइबर हमलों से एक ही पल में कोई व्यक्ति और संस्थान बर्बाद किये जा सकते हैं। अपने आप को इन साइबर हमलों से बचाने के लिये आप को इनके बारे में जानकारी रखना बहुत ही आव