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क्या पति या पत्नी सिर्फ़ गुस्से में घर छोड़ देने से रिश्ता खत्म हो जाता है? अलग रहना, वैवाहिक अधिकार और अदालत की सोच – एक ऐसी कहानी जो हर विवाहित व्यक्ति को पढ़नी चाहिए

बस... अब मैं इस घर में एक मिनट भी नहीं रहूँगी!" रात के लगभग 10 बजे थे। घर में तेज़ बहस चल रही थी। गुस्से में सीमा ने अपना बैग उठाया और दरवाज़े की ओर बढ़ गई। उसके पति विवेक ने कहा— "सीमा... कम से कम बैठकर बात तो कर लो।" लेकिन सीमा बिना कुछ बोले मायके चली गई। विवेक पूरी रात सो नहीं पाया। उसके मन में सिर्फ़ एक सवाल था— "क्या सिर्फ़ घर छोड़ देने से हमारा रिश्ता खत्म हो गया?" अगले दिन वह अपने वकील के पास पहुँचा। वकील ने सबसे पहले क्या कहा? वकील मुस्कुराए और बोले— "नहीं विवेक... शादी कोई ऐसा रिश्ता नहीं है जो केवल गुस्से में घर छोड़ देने से अपने-आप खत्म हो जाए।" उन्होंने आगे कहा— "लेकिन यह भी उतना ही सच है कि हर मामला अलग होता है। सबसे पहले यह समझना होगा कि घर छोड़ने का कारण क्या था।" अगर पत्नी सुरक्षा या प्रताड़ना की वजह से गई हो तो? वकील ने समझाया— यदि पत्नी यह कहती है कि— उसके साथ शारीरिक या मानसिक क्रूरता हुई, घरेलू हिंसा हुई, दहेज की अवैध माँग की गई, या उसकी सुरक्षा खतरे में थी, तो ऐसी परिस्थितियों में कानून उसे संरक्षण और उचित कानूनी उपाय प्...

अगर पति या पत्नी अदालत में किए गए समझौते की शर्तें तोड़ दें, तो क्या करें? समझौता टूटने के बाद कानून कौन-कौन से रास्ते देता है – एक वास्तविक जैसी कहानी

सर... उसने कोर्ट में वादा किया था, फिर भी वापस नहीं आई। अब मैं क्या करूँ?" जिला न्यायालय का परिसर। मध्यस्थता (Mediation) के कुछ सप्ताह बाद की बात थी। अमन अपने वकील के चैंबर में बैठा था। उसके हाथ में अदालत के सामने हुए समझौते की प्रति थी। उसने निराश होकर कहा— "सर, हमने अदालत में समझौता किया था। सबके सामने उसने कहा था कि वह साथ रहेगी, लेकिन अब उसने अपना फोन भी बंद कर दिया है। क्या अदालत में किया गया समझौता सिर्फ़ कागज़ का टुकड़ा है?" वकील ने फाइल बंद की और शांत स्वर में कहा— "नहीं अमन, पहले यह समझते हैं कि समझौते की कानूनी स्थिति क्या है।" अदालत में हुआ समझौता क्यों महत्वपूर्ण होता है? वकील ने समझाया— जब कोई समझौता अदालत या मध्यस्थता केंद्र के माध्यम से होता है और उसके आधार पर अदालत कोई आदेश पारित करती है, तो उसकी कानूनी महत्ता बढ़ जाती है। लेकिन आगे क्या होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि— समझौते की शर्तें क्या थीं, अदालत ने कौन-सा आदेश दिया, और बाद में किस प्रकार का उल्लंघन हुआ। अगर कोई पक्ष समझौते से मुकर जाए तो? अमन ने पूछा— "अगर वह जानबूझकर अपनी बात ब...

पति-पत्नी के बीच समझौता (Mediation) कैसे होता है? अदालत समझौता क्यों कराती है और अगर कोई पक्ष बाद में मुकर जाए तो कानून क्या कहता है? – एक वास्तविक जैसी कहानी

आज आख़िरी मौका है... अगर आज भी बात नहीं बनी, तो मामला फिर अदालत जाएगा।" जिला न्यायालय परिसर। सुबह के 11 बजे थे। राहुल और उसकी पत्नी निशा अलग-अलग कुर्सियों पर बैठे थे। दोनों के बीच कई महीनों से विवाद चल रहा था। मुकदमा अदालत तक पहुँच चुका था। तभी कोर्ट के कर्मचारी ने आवाज़ लगाई— "राहुल बनाम निशा... दोनों पक्ष मध्यस्थता कक्ष (Mediation Centre) में आएँ।" राहुल ने अपने वकील से पूछा— "सर, क्या अब कोर्ट फैसला नहीं करेगी?" वकील मुस्कुराए— "फैसला होगा, लेकिन उससे पहले अदालत यह देखना चाहती है कि क्या बातचीत से रिश्ता बच सकता है।" मध्यस्थता (Mediation) क्या होती है? राहुल और निशा एक शांत कमरे में पहुँचे। वहाँ एक प्रशिक्षित मध्यस्थ (Mediator) बैठे थे। उन्होंने सबसे पहले कहा— "मैं जज नहीं हूँ। मेरा काम किसी को सही या गलत ठहराना नहीं है। मेरा उद्देश्य केवल यह देखना है कि क्या आप दोनों बातचीत से कोई समाधान निकाल सकते हैं।" कमरे का माहौल अदालत जैसा नहीं था। यहाँ न गवाह थे, न बहस, न कोई फैसला। सिर्फ़ बातचीत। मध्यस्थ सबसे पहले क्या पूछता है? मध्यस्थ ने राहुल ...

क्या शादी के बाद पत्नी पति का घर छोड़कर हमेशा मायके में रह सकती है? कानून क्या कहता है – एक ऐसी कहानी जो हर विवाहित परिवार को जाननी चाहिए

मैं तुम्हारे साथ नहीं रहूँगी... अब मैं हमेशा अपने मायके में ही रहूँगी।" यह सुनते ही आदित्य कुछ पल के लिए चुप हो गया। शादी को अभी दो साल ही हुए थे। शुरुआत में सब कुछ ठीक था। लेकिन धीरे-धीरे छोटी-छोटी बातों पर झगड़े होने लगे। एक दिन उसकी पत्नी पूजा अपना सामान लेकर मायके चली गई। कुछ दिन बाद आदित्य ने फोन किया— "चलो, घर वापस आ जाओ। बैठकर बात करेंगे।" पूजा ने जवाब दिया— "अब मैं कभी वापस नहीं आऊँगी। मुझे मायके में ही रहना है।" आदित्य पूरी रात सोचता रहा— "क्या शादी के बाद पत्नी बिना किसी कारण हमेशा मायके में रह सकती है?" अगले दिन वह अपने वकील से मिलने पहुँचा। वकील ने सबसे पहले क्या कहा? वकील मुस्कुराए और बोले— "इस सवाल का जवाब 'हाँ' या 'न' में नहीं दिया जा सकता। हर मामला उसकी परिस्थितियों पर निर्भर करता है।" उन्होंने आगे कहा— "सबसे पहले यह समझना होगा कि पत्नी मायके क्यों रह रही है।" अगर पत्नी के पास उचित कारण हो तो? वकील ने समझाया— यदि पत्नी यह कहती है कि— उसके साथ क्रूरता या हिंसा हुई, उसकी सुरक्षा खतरे में है...

498A के केस में पति और पत्नी—दोनों के कानूनी अधिकार क्या हैं? एक ऐसी कहानी जो हर परिवार को जाननी चाहिए

सर... क्या 498A का केस दर्ज होते ही पति अपराधी मान लिया जाता है?" जिला महिला थाना। सुबह के 11 बजे थे। कमरे में एक तरफ़ नेहा बैठी थी। दूसरी तरफ़ उसका पति रोहित। दोनों के चेहरों पर तनाव साफ़ दिखाई दे रहा था। महिला अधिकारी ने दोनों से कहा— "आज यहाँ किसी को दोषी या निर्दोष घोषित नहीं किया जाएगा। पहले दोनों पक्षों की बात सुनी जाएगी।" रोहित ने अपने वकील से धीरे से पूछा— "क्या अब मेरी बात कोई सुनेगा भी?" उधर नेहा की आँखों में आँसू थे। वह बोली— "अगर मेरी शिकायत सही है, तो क्या मुझे न्याय मिलेगा?" वकील ने दोनों की ओर देखा और कहा— "यही कानून की सबसे बड़ी खूबी है—यह दोनों पक्षों को सुनता है।" 498A का मामला शुरू कैसे होता है? नेहा ने महिला थाना में शिकायत दी। उसने आरोप लगाया कि विवाह के बाद उसके साथ दहेज की माँग और प्रताड़ना हुई। पुलिस ने उसकी शिकायत दर्ज की और प्रारंभिक जानकारी एकत्र करनी शुरू की। इसके बाद रोहित को भी बुलाया गया ताकि उसका पक्ष सुना जा सके। क्या केवल शिकायत से पति दोषी हो जाता है? रोहित ने पूछा— "क्या शिकायत होते ही मैं अपराधी हूँ?...