एक गांव के झगड़े से लेकर High Court में Quashing तक की पूरी कहानी भूमिका कई बार नए अधिवक्ता के पास ऐसा मुकदमा आता है जिसमें दोनों पक्षों के बीच वर्षों पहले लड़ाई हुई थी। FIR दर्ज हुई, चार्जशीट दाखिल हुई और मुकदमा न्यायालय में चलता रहा। फिर कुछ वर्षों बाद दोनों परिवारों में समझौता हो गया। समझौते में पैसे का लेन-देन भी हो गया और शिकायतकर्ता ने साफ कह दिया कि अब उसे आरोपी से कोई विवाद नहीं है। लेकिन आरोपी की समस्या वहीं खत्म नहीं होती। वह आज भी हर तारीख पर न्यायालय जा रहा है। उसका सवाल होता है— "साहब, जब हमारा समझौता हो चुका है और सामने वाला अब मेरे खिलाफ गवाही नहीं देना चाहता, तो मेरा मुकदमा खत्म क्यों नहीं हो रहा?" यहीं से एक नए अधिवक्ता की असली भूमिका शुरू होती है। 1. सबसे पहले पूरी कहानी समझिए मान लीजिए एक गांव में दो परिवारों के बीच पुराना विवाद था। एक दिन दोनों परिवार आमने-सामने आ गए और कहासुनी के बाद हाथापाई शुरू हो गई। इसी दौरान एक परिवार का लड़का दूसरे परिवार की महिला की तरफ दौड़ा। महिला भी बचने के लिए भागी। भागदौड़ और हाथापाई के दौरान महिला की साड़ी का एक ह...
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