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कंपनी के संगम ज्ञापन से क्या आशय है? What is memorandum of association? What are the contents of the memorandum of association? When memorandum can be modified. Explain fully.

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Section 138 में कितने साल की सजा होती है? Cheque Bounce में कितना जुर्माना?

  Section 138 में कितने साल की सजा होती है? Cheque Bounce में कितना जुर्माना होता है? जानिए पूरी जानकारी Section 138 NI Act Punishment in Hindi: क्या चेक बाउंस होने पर 2 साल की जेल हो सकती है? क्या ₹1 लाख के चेक पर ₹2 लाख जुर्माना देना पड़ सकता है? क्या कोर्ट चेक की रकम से ज्यादा पैसा शिकायतकर्ता को दिला सकती है? और क्या पहली बार चेक बाउंस होने पर भी जेल हो सकती है? ये ऐसे सवाल हैं जो चेक बाउंस का मामला सामने आने पर हर आम आदमी के मन में उठते हैं। भारत में चेक से भुगतान करना व्यापार, उधार और व्यक्तिगत लेन-देन का एक सामान्य तरीका है। लेकिन जब कोई व्यक्ति भुगतान के लिए चेक देता है और बैंक उसे वापस कर देता है, तो अक्सर विवाद शुरू हो जाता है। ऐसी स्थिति में Negotiable Instruments Act, 1881 की Section 138 महत्वपूर्ण हो जाती है। इस धारा के अंतर्गत दोष सिद्ध होने पर आरोपी को: अधिकतम 2 वर्ष तक की जेल हो सकती है। चेक की राशि के दोगुने तक जुर्माना लगाया जा सकता है। जेल और जुर्माना दोनों हो सकते हैं। लेकिन क्या हर चेक बाउंस होने पर 2 साल की जेल और दोगुना जुर्माना लगता है? नहीं। इस लेख में हम...

Cheque Bounce में कितने दिन में Notice दें? गलत Amount वाले Notice का जवाब

  Cheque Bounce में कितने दिन में Notice देना होता है? Notice में गलत Amount लिख दिया हो तो क्या करें? Cheque Bounce Notice Time Limit in Hindi | Section 138 NI Act | Wrong Amount in Cheque Bounce Notice मान लीजिए आपने किसी व्यक्ति को ₹2,00,000 उधार दिए। उसने आपको भुगतान के लिए चेक दिया, लेकिन जब आपने बैंक में चेक लगाया तो वह बाउंस हो गया। अब आपके मन में सवाल है कि कितने दिन के भीतर कानूनी नोटिस भेजना होगा? दूसरी तरफ, यदि आपको चेक बाउंस का नोटिस मिलता है और उसमें ₹2,00,000 के बजाय ₹3,00,000 की मांग की गई है, तो क्या वह नोटिस अपने आप गलत हो जाएगा? ऐसे मामलों में छोटी-सी कानूनी गलती भी महत्वपूर्ण हो सकती है। लेकिन हर गलती के कारण नोटिस अमान्य हो जाए, ऐसा जरूरी नहीं है। इस लेख में हम कहानी और उदाहरण के माध्यम से समझेंगे कि Negotiable Instruments Act, 1881 की धारा 138 के अंतर्गत नोटिस कब भेजना चाहिए, नोटिस में गलत रकम होने पर क्या करना चाहिए और दोनों परिस्थितियों में सही कानूनी कदम क्या हैं। 1. Cheque Bounce में कितने दिन में Legal Notice देना होता है? चेक बाउंस के मामलों में कानूनी नो...

मेहर क्या है? मुस्लिम पत्नी का मेहर का अधिकार और पूरा कानून कहानी के माध्यम से

मेहर क्या है? एक कहानी से समझिए मुस्लिम पत्नी का अधिकार, प्रकार और कानूनी महत्व मेहर क्या होता है? क्या मेहर दहेज के समान है? निकाह में मेहर तय न हो तो क्या पत्नी मेहर मांग सकती है? मुअज्जल और मुअख्खर मेहर क्या होता है? पति की मृत्यु के बाद बाकी मेहर का क्या होगा? मुस्लिम विवाह से जुड़े इन सवालों को समझने के लिए आइए एक आसान कहानी से शुरुआत करते हैं। एक निकाह की कहानी से समझिए मेहर का पूरा कानून उत्तर प्रदेश के एक छोटे शहर में अयान नाम का युवक रहता था। उसकी शादी समीरा से तय हुई। दोनों परिवार निकाह के लिए एक जगह इकट्ठा हुए। निकाह के दौरान काजी ने पूछा— “मेहर कितना तय किया गया है?” समीरा के पिता ने कहा— “मेहर ₹3 लाख तय हुआ है।” काजी ने पूछा— “इसमें कितना अभी दिया जाएगा और कितना बाद में?” अयान के परिवार ने कहा— “₹1 लाख अभी और ₹2 लाख बाद में।” निकाह हो गया। समीरा ने सोचा कि उसका वैवाहिक जीवन अब ठीक से चलने लगेगा। लेकिन कुछ वर्षों बाद अयान और समीरा के बीच विवाद शुरू हो गया। समीरा ने एक दिन अयान से कहा— “निकाह के समय ₹3 लाख मेहर तय हुआ था। उसमें से ₹2 लाख अभी बाकी हैं।” अयान ने जवाब दिया— “...

Cheque Bounce और Civil Recovery में अंतर: Section 138 Case या Money Recovery Suit? पूरी जानकारी

Cheque Bounce और Civil Recovery में क्या अंतर है? आसान कहानी से समझिए पूरा कानून Cheque Bounce और Civil Recovery में क्या अंतर है? क्या cheque bounce होने पर केवल Section 138 NI Act का criminal case किया जा सकता है? क्या पैसा वापस लेने के लिए अलग से civil recovery suit भी किया जा सकता है? अगर दोनों मामले एक साथ चल सकते हैं तो पैसा दो बार तो नहीं मिलेगा? Civil suit कब करना चाहिए? Cheque Bounce Case में सजा होती है या केवल पैसा मिलता है? इन सवालों का जवाब एक आसान कहानी से समझते हैं। पहले सबसे आसान जवाब अगर किसी व्यक्ति ने आपका पैसा देना था और उसने cheque दिया, लेकिन cheque bounce हो गया, तो सामान्य रूप से आपके सामने दो अलग कानूनी रास्ते हो सकते हैं: 1. Cheque Bounce Case – Section 138 NI Act इसका उद्देश्य cheque dishonour के लिए कानून के तहत कार्रवाई करना है। इसमें criminal/quasi-criminal character और compensatory aspect दोनों मौजूद हैं। 2. Civil Recovery Suit इसका मुख्य उद्देश्य वास्तव में बकाया पैसा, ब्याज और उपलब्ध अन्य civil relief की recovery करना है। Supreme Court ने स्पष्ट किया ...