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AIBE (All India Bar Examination) क्या है? फायदे, महत्व और FAQ | पूरी जानकारी विस्तार से उदाहरण सहित ।

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पत्नी ने मायके में आत्महत्या की तो पति पर कौन-सी धारा लगेगी?

  मुझसे लोगों  के द्वारा यह सवाल पूछा गया कि मान लो पति पत्नी के विवाद जब होता है तो धमकी का स्तर इतना बढ़ जाता है तो कि पत्नी पति को परेशान करने के लिए आत्महत्या जैसे कदमों को एक हथियार के रूप में भी इस्तेमाल कर सकती है । इसमें यह स्पष्ट रहेगा कि केवल पत्नी की आत्महत्या हो जाने से पति या ससुराल वालों पर अपराध अपने-आप सिद्ध नहीं हो जाता; पुलिस को उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर धाराएँ लगानी होती हैं। पत्नी ने मायके में आत्महत्या कर ली तो पति और ससुराल वालों पर कौन-सी धाराएँ लग सकती हैं? पूरी कहानी और कानूनी बचाव एक कहानी से समझिए पूरा मामला राकेश की शादी को लगभग तीन साल हुए थे। शादी के बाद कुछ समय तक सब ठीक चला, लेकिन धीरे-धीरे पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ने लगा। घरेलू विवाद के बाद राकेश की पत्नी पिछले लगभग एक साल से अपने मायके में रह रही थी। राकेश का कहना था कि वह पत्नी को वापस लाने के लिए कई बार बातचीत कर चुका था, लेकिन पत्नी अपने माता-पिता के साथ ही रहना चाहती थी। इसी बीच पत्नी के मायके वालों और राकेश के परिवार के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि मामला पुलिस, अधिकारियों और स्थ...

दहेज मृत्यु क्या है? BNS Section 80, सजा, सबूत और सुप्रीम कोर्ट के फैसले

दहेज मृत्यु क्या है? BNS धारा 80 के तहत सजा, आवश्यक तत्व, साक्ष्य और सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसले दहेज मृत्यु (Dowry Death) क्या है? विवाह के बाद किसी महिला की मृत्यु असामान्य परिस्थितियों में हो और मृत्यु से पहले उसे दहेज की मांग को लेकर पति या पति के किसी रिश्तेदार द्वारा क्रूरता या उत्पीड़न का सामना करना पड़ा हो, तो कानून की निर्धारित शर्तें पूरी होने पर वह मामला दहेज मृत्यु के अपराध के अंतर्गत आ सकता है। पुराने भारतीय दण्ड संहिता (IPC) में दहेज मृत्यु का प्रावधान धारा 304-B में था। अब भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) के लागू होने के बाद दहेज मृत्यु का प्रावधान धारा 80 में है। वहीं दहेज मृत्यु से संबंधित वैधानिक presumption अब भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (Bharatiya Sakshya Adhiniyam) की धारा 118 में है। महत्वपूर्ण:  पुराने मामलों में IPC की धारा 304-B और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 113-B का उल्लेख मिल सकता है। नए कानून के संदर्भ में इनके वर्तमान प्रावधानों को BNS धारा 80 और Bharatiya Sakshya Adhiniyam धारा 118 के साथ समझना चाहिए। दहेज मृत्यु की कानूनी परिभाषा क्य...

घरेलू हिंसा का केस कैसे करें? DV Act में FIR से लेकर Court तक पूरी प्रक्रिया

DV Act में केस कैसे करें? घरेलू हिंसा के मामले की पूरी प्रक्रिया, आवेदन, राहत और Case Law क्या पति ने पत्नी को घर से निकाल दिया है? क्या वह पत्नी और बच्चों का खर्च नहीं दे रहा? क्या पत्नी को मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है? क्या उसे अपने वैवाहिक घर में रहने का अधिकार चाहिए? ऐसी परिस्थितियों में महिलाओं के लिए Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 , जिसे सामान्य भाषा में DV Act या घरेलू हिंसा अधिनियम कहा जाता है, एक महत्वपूर्ण कानूनी remedy है। लेकिन DV Act का मामला केवल “पति ने पत्नी को घर से निकाल दिया” लिखकर दाखिल नहीं किया जाता। एक अधिवक्ता के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि वह पहले पूरे facts को समझे, domestic violence के specific incidents निकाले, evidence देखे और फिर उचित relief के लिए सही sections लगाए। इस लेख में हम एक उदाहरणात्मक कहानी के माध्यम से समझेंगे कि DV Act में केस कैसे किया जाता है, Section 12 application कैसे तैयार होती है, Section 23 में interim relief कैसे मांगी जाती है, maintenance और residence का दावा कैसे किया जाता है, मामला किस ...