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बलवा (Rioting) और दंगा (Affray) क्या है? BNS की धारा 191 और 194 की पूरी जानकारीi

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बिना तलाक दूसरी शादी करने पर क्या होगी सजा? पत्नी को कितने साल की जेल हो सकती है?

बिना तलाक दूसरी शादी करने पर क्या होगी सजा? पत्नी को कितने साल की जेल हो सकती है? क्या कोई पत्नी अपने पहले पति से तलाक लिए बिना दूसरी शादी कर सकती है? क्या दूसरी शादी करने से पहली शादी अपने-आप खत्म हो जाती है? अगर पत्नी ने दूसरी शादी कर ली तो उसे कितने साल की सजा हो सकती है और क्या दूसरी शादी करने वाले पुरुष को भी जेल हो सकती है? ये सवाल आजकल वैवाहिक विवादों में काफी महत्वपूर्ण हो गए हैं। मान लीजिए कि नेहा की शादी राहुल से हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। शादी के बाद दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया और नेहा अपने मायके चली गई। कई महीने तक दोनों अलग-अलग रहने लगे। इसी दौरान नेहा ने किसी दूसरे व्यक्ति, अमित, के साथ शादी कर ली। अब सवाल उठता है— क्या राहुल और नेहा की पहली शादी खत्म हो गई? उत्तर है— सिर्फ अलग रहने या दूसरी शादी कर लेने से पहली शादी खत्म नहीं मानी जाती। यदि पहली शादी कानूनी रूप से वैध थी और उसका तलाक न्यायालय से नहीं हुआ था, तो सामान्यतः वह विवाह subsisting यानी कायम रहता है। हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 5 में विवाह की आवश्यक शर्तों में यह भी है कि विवाह के समय किसी पक्ष का पति या पत...

पत्नी मायके चली गई और परिवार ने विधायक-पुलिस से दबाव बनाया तो क्या करें? कानूनी अधिकार और BNS 351 की पूरी जानकारी

शादी के कुछ महीने बाद पत्नी मायके चली गई, फिर विधायक और पुलिस से दबाव: क्या पति को जबरन ‘हिसाब-किताब’ करना पड़ेगा? Shadi ke kuch mahine rahne ke baad  कुछ ही महीने हुए थे, लेकिन एक दिन सब बदल गया... मान लीजिए अमित की शादी को अभी कुछ ही महीने हुए थे। शादी के बाद कुछ समय तक सब ठीक चला। लेकिन धीरे-धीरे पति-पत्नी के बीच मतभेद बढ़ने लगे। एक दिन घर में विवाद इतना बढ़ गया कि पत्नी ने पुलिस को फोन कर दिया। कुछ ही समय बाद पत्नी के मायके वाले भी वहां पहुंच गए। बातचीत हुई और पत्नी अपने मायके चली गई। अमित ने सोचा कि शायद कुछ दिनों में दोनों परिवार बैठेंगे और समस्या का समाधान निकालेंगे। लेकिन कहानी यहां खत्म नहीं हुई। असल परेशानी तो अब शुरू हुई। “ कोर्ट-कचहरी मत करो, हिसाब-किताब करके मामला खत्म करो” पत्नी के मायके वालों ने अमित के परिवार को फोन करना शुरू कर दिया। उनकी तरफ से बार-बार एक ही बात कही जाती— “हमें कोर्ट-कचहरी नहीं जाना है।” “आप लोग बैठकर हिसाब-किताब कर दो।” “जो देना है, लेकर मामला खत्म करो।” अमित ने जवाब दिया— “अगर मेरी पत्नी मेरे साथ नहीं रहना चाहती तो वह कानून के अनुसा...

समझौता हो गया, फिर भी मुकदमा क्यों चल रहा है?

एक गांव के झगड़े से लेकर High Court में Quashing तक की पूरी कहानी भूमिका कई बार नए अधिवक्ता के पास ऐसा मुकदमा आता है जिसमें दोनों पक्षों के बीच वर्षों पहले लड़ाई हुई थी। FIR दर्ज हुई, चार्जशीट दाखिल हुई और मुकदमा न्यायालय में चलता रहा। फिर कुछ वर्षों बाद दोनों परिवारों में समझौता हो गया। समझौते में पैसे का लेन-देन भी हो गया और शिकायतकर्ता ने साफ कह दिया कि अब उसे आरोपी से कोई विवाद नहीं है। लेकिन आरोपी की समस्या वहीं खत्म नहीं होती। वह आज भी हर तारीख पर न्यायालय जा रहा है। उसका सवाल होता है— "साहब, जब हमारा समझौता हो चुका है और सामने वाला अब मेरे खिलाफ गवाही नहीं देना चाहता, तो मेरा मुकदमा खत्म क्यों नहीं हो रहा?" यहीं से एक नए अधिवक्ता की असली भूमिका शुरू होती है। 1. सबसे पहले पूरी कहानी समझिए मान लीजिए एक गांव में दो परिवारों के बीच पुराना विवाद था। एक दिन दोनों परिवार आमने-सामने आ गए और कहासुनी के बाद हाथापाई शुरू हो गई। इसी दौरान एक परिवार का लड़का दूसरे परिवार की महिला की तरफ दौड़ा। महिला भी बचने के लिए भागी। भागदौड़ और हाथापाई के दौरान महिला की साड़ी का एक ह...