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कानूनी मामलों में चिकित्सा साक्ष्य की क्या भूमिका होती है?What role does medical evidence play in legal cases?

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झूठे केस में फंसाए जाने पर क्या करें?What to do if you are implicated in a false case?

तुरंत शांत रहें: घबराना या उत्तेजित होना स्वाभाविक है, लेकिन शांत रहना महत्वपूर्ण है। आपकी स्पष्ट सोच और तर्कसंगत कार्रवाई ही आपको इस मुश्किल परिस्थिति से निकाल सकती है। पुलिस के साथ सहयोग करें: यदि पुलिस आपको पूछताछ के लिए बुलाती है, तो विनम्रता से जाएं और पूछताछ में सहयोग करें। झूठ बोलने या कोई भी बयान देने से बचें जो गलत व्याख्या की जा सके। वकील से सलाह लें: जितनी जल्दी हो सके, एक अनुभवी आपराधिक वकील से सलाह लें। वकील आपको आपके कानूनी अधिकारों समझने, पुलिस पूछताछ का सामना करने और आगे की रणनीति बनाने में मदद करेंगे। सबूत इकट्ठा करें: अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए सबूत इकट्ठा करना शुरू करें। इसमें गवाहों के बयान, घटनास्थल से सीसीटीवी फुटेज, या कोई अन्य दस्तावेज शामिल हो सकते हैं जो आपके पक्ष में हो। एफआईआर दर्ज करें: यदि आप झूठे आरोपों का शिकार हुए हैं, तो बिना देरी किए पुलिस में एफआईआर दर्ज करें। अन्य विकल्पों पर विचार करें: यदि आवश्यक हो, तो आप राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग या राज्य मानवाधिकार आयोग जैसे उच्च अधिकारियों से भी शिकायत कर सकते हैं। कुछ महत्वपूर्ण बातें: अपनी

क्या कोई व्यक्ति पहले से शादीशुदा हैं तो क्या वह दूसरी शादी धर्म बदल कर कर सकता है?If a person is already married, can he change his religion and marry again?

मुस्लिम विधि जिसे शरीयत के नाम से भी जाना जाता है इस्लाम धर्म से प्राप्त एक व्यापक कानून प्रणाली है। यह ईश्वर (अल्लाह) के निर्देशों का समूह माना जाता है। जैसे कि कुरआन और हदीस में उल्लेखित है। शरीयत जीवन के सभी पहलुओं को नियत्रित करती है।   मुस्लिम कौन है?  कोई भी व्यक्ति मुस्लिम दो तरीकों से कहा जा सकता है  [1] जन्म से  [ⅱ] धर्म परिवर्तन के आधार पर मुस्लिम  [1] जन्म से:- कोई भी व्यक्ति जन्म से तब मुस्लिम कहा जाता है जबकि उसके माता-पिता जन्म से मुस्लिम हो।  भैय्या शेरबहादुर VS भैय्या गंगा बाक्श सिंह [ 1914 (41.I.A. इसके अतिरिक्त यदि माता-पिता में से कोई भी व्यक्ति किसी अन्य धर्म का और दूसरा पक्षकार मुस्लिम है तब जिस भी पक्षकार के धर्म के अनुसार उस बच्चे का पालन-पोषण किया जाता है वह बच्चा उस धर्म का माना जायेगा।  [2] धर्म परिवर्तन के आधार पर मुस्लिम: भारतीय संविधान भारत में रहने वाले किसी भी व्यक्ति को किसी भी धर्म को मानने व उसके आचरण करने की स्वतंत्रता अपवादों के साथ प्रदान करता है । इसी संवैधानिक आधार के अनुसार भारत में रहने वाला कोई भी मुस्लिम व्यक्ति मुस्लिम धर्म छोड़कर

अग्रिम जमानत याचिका का क्या अर्थ होता है ? What is the meaning of anticipatory bail petition?

जब कोई व्यक्ति किसी अपराध में गिरफ्तार होने वाला हो या उसे इस बात का डर हो की उसे किसी ऐसे केस में फसा कर जेल में बंद किया जा सकता है जो कि उसने किया ही नहीं है तो ऐसे में जेल जाने से बचने के लिये वह न्यायालय से गिरफ्तार होने से पहले ही अग्रिम जमानत के लिये आवेदन कर सकता है। जब न्यायालय उस आवेदन को स्वीकृति दे देती है तो न्यायालय के आदेशानुसार पुलिस उस व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकती है। न्यायालय द्वारा जमानत का ये आदेश अग्रिम जमानत (एंटीसिपेटरी बेल] कहलाता है। ये अग्रिम जमानत दो प्रकार से की जा सकती है।  [1] FIR होने से पहले.  [2] FIR होने के बाद   [1] FIR होने से पहले: यदि दो लोगों की आपस में अनबन है और उनमें से एक को ऐसा लगता है कि दूसरा उस पर कोई झूठा केस बनवा कर गिरफ्तार करा सकता है और यदि पहले को कही से ये पता चलता है कि दूसरा ऐसा कुछ करने का प्लान बना रहा है या फिर ऐसे हालत हो गये है कि उसके खिलाफ कभी भी FIR हो सकती है तो पहला व्यक्ति - न्यायालय में अपनी अग्रिम जमानत [ एंटीसिपेटरी बेल] के लिये आवेदन कर सकता है। इसमें न्यायालय पुलिस को यह आदेश देती है कि अगर कोई FIR

महिलाओं पर होने वाले अपराध किस प्रकार से अपराधिक न्याय प्रशासन एवं समाज पर एक आलोचक के रूप में सदैव सामने आते रहते हैं क्या कारण है?How do crimes against women always come forward as a critique on criminal justice administration and society? What is the reason?

बलात्कार को भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत बलात्संग कहते हैं। धारा 375 के अनुसार "बलात्संग जो पुरुष एतस्मिन पश्चात अपवादित दशा के सिवाय किसी स्त्री के साथ निम्न 6 की तरह की परिस्थितियों में से किसी में मैथुन करता है, वह पुरुष बलात्संग करता है, यह कहा जाता है:  (a) उस स्त्री की इच्छा के खिलाफ,  (b) उस स्त्री की सम्मति के बिना,  (c) उस स्त्री की सम्मति से, जबकि उसकी सम्मति उसे या ऐसे किसी व्यक्ति को जिसके साथ वह हितबद्ध है. मृत्यु या उपहति के भय में डालकर अभिप्राप्त की गई है,  (d) उस स्त्री की सम्मति से, जबकि वह पुरुष यह जनता है कि वह उस स्त्री का पति नहीं है और उस स्त्री ने सम्मति इसलिए दी है कि वह विश्वास करती है कि वह ऐसा पुरुष है जिससे वह विधिपूर्वक विवाहित है या विवाहित होने का विश्वास करती है,  (e) उस स्त्री की सम्मति से जबकि ऐसी सम्मति देने के समय वह विकृतचित्त या मत्तता के कारण उस पुरुष द्वारा व्यक्तिगत रूप में किसी अन्य के माध्यम से कोई संज्ञा शून्यकारी या अस्वास्थ्यकर पदार्थ दिए जाने के कारण उस बात की जिसके बारे में वह सम्मति देती है, प्रकृति एवं परिणामों को समझने में असमर्थ