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BNS धारा 109 “Attempt to murder” है, जबकि Regular Bail की प्रक्रिया

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Regular Bail under BNSS: जमानत कैसे मिलेगी? Section 480 & 483 की पूरी जानकारी

Regular Bail under BNSS: नियमित जमानत क्या है और कैसे मिलती है? आसान भाषा में पूरी जानकारी Regular Bail under BNSS यानी BNSS के तहत नियमित जमानत criminal cases में सबसे महत्वपूर्ण कानूनी remedies में से एक है। जब किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया हो और वह custody में हो , तब उसे जेल से बाहर आने के लिए Court से regular bail मांगनी पड़ सकती है। लेकिन सवाल यह है कि Regular Bail किस धारा में मिलती है? Magistrate से कब bail मिलेगी? Sessions Court कब जाना होगा? High Court में bail कब मांगनी चाहिए? Bail application में क्या लिखा जाता है? Court किन बातों को देखता है? इस article में इन्हीं सवालों को एक आसान कहानी, practical examples और Supreme Court के महत्वपूर्ण judgments के माध्यम से समझाया गया है। Legal4Helps.in का उद्देश्य: कानून को केवल कठिन कानूनी भाषा में बताना नहीं, बल्कि ऐसी भाषा में समझाना है जिसे एक सामान्य व्यक्ति, law student और junior advocate आसानी से समझ सके। Regular Bail क्या होती है? सरल भाषा में: जब किसी व्यक्ति को criminal case में गिरफ्तार कर लिया जाता है और वह p...

BNSS Section 35 Notice क्या है? गिरफ्तारी से कैसे बचें?

BNSS Section 35 Notice क्या है? पुलिस का नोटिस मिलने पर क्या करें? गिरफ्तारी से बचने के कानूनी नियम     BNSS Section 35 Notice क्या है? अगर पुलिस को किसी व्यक्ति के खिलाफ किसी संज्ञेय अपराध (Cognizable Offence) में उचित शिकायत, विश्वसनीय सूचना या उचित संदेह मिलता है, लेकिन उस व्यक्ति की गिरफ्तारी तत्काल आवश्यक नहीं है, तो पुलिस उसे BNSS Section 35(3) के तहत उपस्थित होने का नोटिस दे सकती है। सरल भाषा में इसे ऐसे समझें: Section 35(3) BNSS का Notice पुलिस की जांच में व्यक्ति की उपस्थिति सुनिश्चित करने का कानूनी माध्यम है। यह अपने-आप में गिरफ्तारी वारंट नहीं है। BNSS यानी Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 ने CrPC की जगह आपराधिक प्रक्रिया की नई व्यवस्था लागू की है। Section 35 में पुलिस द्वारा बिना वारंट गिरफ्तारी से संबंधित परिस्थितियों के साथ-साथ उस स्थिति में notice देने की व्यवस्था भी है, जब गिरफ्तारी आवश्यक नहीं है। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात है— Section 35 Notice को हल्के में लेना भी गलत है। नोटिस मिलने के बाद उसके terms का पालन करना कानूनन महत्वपूर्ण है। BNSS Sec...

CPC बिल्कुल Zero से सीखें: जमीन के विवाद में Plaint, Temporary Injunction और Order 39 Rules 1 & 2 की पूरी कहानी

जमीन के एक छोटे से विवाद से समझिए Civil Procedure Code अगर आप कानून के विद्यार्थी हैं या नए अधिवक्ता हैं और आपको लगता है कि CPC यानी Code of Civil Procedure, 1908 बहुत कठिन है , तो शुरुआत पूरी CPC की धाराएँ रटने से मत कीजिए। CPC को समझने का सबसे अच्छा तरीका है— एक वास्तविक जीवन जैसी कहानी को अदालत की पूरी प्रक्रिया के साथ जोड़कर समझना। इस लेख में हम एक काल्पनिक जमीन के विवाद की कहानी लेंगे। मान लीजिए राम के नाम एक जमीन है। वह जमीन पर शांतिपूर्वक खेती कर रहा है। अचानक उसका पड़ोसी श्याम उस जमीन पर निर्माण शुरू कर देता है और कहता है कि जमीन का एक हिस्सा उसका है। राम आपके पास अधिवक्ता के रूप में आता है और कहता है: “वकील साहब, श्याम मेरी जमीन पर निर्माण कर रहा है। उसे तुरंत रोकिए।” अब यहीं से एक Civil Lawyer की सोच शुरू होती है। आपको सबसे पहले यह नहीं सोचना है कि “कौन-सी धारा लगा दूँ?” आपको सोचना है: राम का अधिकार क्या है? श्याम ने क्या किया है? राम अदालत से क्या चाहता है? किस अदालत में जाना है? कौन-सा suit बनता है? क्या तुरंत temporary injunction चाहिए? यही CPC सीखने की वास्तविक शुरुआत ह...