Skip to main content

Posts

दहेज हत्या क्या होती है ? इसमें किन किन लोगों को कितनी सजा हो सकती है ? विस्तार से बताओ।

Recent posts

भारतीय संविधान में स्त्रियों और बच्चों को कौन -कौन से अधिकार प्रदान किये गये हैं?

  भारतीय संविधान महिलाओं और बच्चों की चाबी मानवाधिकारों की रक्षा के लिये -  दोस्तों भारतीय संविधान सिर्फ कानूनों का संग्रह नहीं है। बल्कि ये सामाजिक न्याय और समानता का दस्तावेज भी है। आज हम बात करेंगे इसी संविधान के उन खास पहलुओं की जो महिलाओं और बच्चों के मानवाधिकारों की रक्षा करते हैं।  संविधान का सुरक्षा कवचः  हमारा संविधान महिलाओं और बच्चों को कई महत्व पूर्ण अधिकार देता है । आइये देखें कुछ खास  • समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14-18]:  ये अनुच्छेद लिंग जाति, धर्म या जन्म स्थान के आधार पर किसी भी तरह के भेदभाव को रोकता है।   स्वतन्नता का अधिकार [अनुच्छेद 19-22]: शोषण से मुक्ति, शिक्षा का अधिकार और स्वतन्त्र रूप से काम करने का अधिकार - ये वे चीजें हैं जिसकी गारण्टी संविधान देता है।  शोषण के खिलाफ संरक्षण [अनुच्छेद 23-24)-  • ये अनुच्छेद मानव तस्करी, बन्धुआ मजदूरी और बाल श्रम को रोकता है। संवैधानिक उपचारों का अधिकार [अनुच्छेद 32]- ये अधिकार महिलाओं और बच्चों को उनके मौलिक अधिकारों के उल्लघन के मामले में सीधे अदालत का दरवाजा खटखटाने का बल देता है। कभी-कभी संविधान का इस्तेमाल अन

भारतीय मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 के अन्तर्गत एक कर्मकार महिला को गर्भावस्था से सम्बन्धित कौन-कौन से प्रावधान हैं? वर्णन करो।

मातृत्व एक महिला के जीवन का सबसे खूबसूरत और महत्वपूर्ण अनुभव होता है। यह खुशी का अवसर होने के साथ-साथ, शारीरिक और  मानसिक रूप से थकाऊ भी होता है। प्रसव और उसके बाद एक महिला को शारीरिक और भावनात्मक रूप से स्वस्थ होने के लिये "समय और समर्थन की आवश्यकता होती है।     यहीं पर मातृत्व लाभ की महत्वपूर्ण भूमिका शुरु होती है। मातृत्व लाभ, कामकाजी महिलाओं को प्रसव और उसके बाद कुछ समय के लिये वेतन सहित छुट्टी लेने का अधिकार देता है । यह लाभ महिलाओं को शारीरिक रूप से ठीक होने अपने नवजात शिशु की देखभाल करने और मां बनने की जिम्मेदारी के लिये तैयार होने में मदद करता है।   भारत में मातृत्व लाभ: भारत में मातृत्व लाभ मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 द्वारा शासित होता है। यह अधिनियम सभी स्थायी महिला कर्मचारियों को 90 दिनों की भुगतान वाली मातृत्व छुट्टी का अधिकार देता है। कुछ राज्यों ने अपनी नीतियों के तहत 180 दिनों तक छुट्टी का भी प्रावधान किया है।   मातृत्व लाभ के लाभ  • महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार : मातृत्व लाभ महिलाओं को पर्याप्त आराम करने और शारीरिक रूप से ठीक होने का समय देता है। इससे प

भारतीय कानून में गर्भपात तथा नवजात शिशुओं के सम्बन्ध में अपराधों को रोकने के लिए क्या प्रावधान किये गये हैं?What provisions have been made in Indian law to prevent crimes related to abortion and newborn babies?

भूमिका : भारत में गर्भपात और नवजात शिशु हत्या गंभीर सामाजिक और कानूनी मुद्दे हैं।इन अपराधों के खिलाफ लड़ाई में भारतीय  दण्ड संहिता [IPC] महत्वपूर्ण  भूमिका निभाता है। यह कानून महिलाओं के प्रजनन अधिकारों की रक्षा करता है और नवजात शिशुओं के जीवन को सुरक्षा प्रदान करता है।    भारतीय दण्ड संहिता में बालकों और महिलाओं से सम्बन्धित विभिन्न अपराधों के बारे में निम्नलिखित प्रावधान किये गये हैं-  1. गर्भपात सम्बन्धी (धारा 312 से 314)  2. नवजात शिशु सम्बन्धी अपराध (धारा 315 से 318)  1. गर्भपात का अर्थ (Meaning of Miscarriage) - गर्भपात से तात्पर्य "गर्भाधान की अवधि पूर्ण होने के पूर्व ही किसी भी समय अविकसित बच्चे को या माता के गर्भ से भ्रूण को बाहर निकाल देना या अलग कर देने से है।      स्पन्दगर्भा से तात्पर्य, "स्त्री की उस अनुभूति से है जो उसे गर्भावस्था के चौथे या पाँचवे महीने में प्रतीत होती है।        भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 312, 313 और 314 में गर्भापात के बारे में प्रावधान किया गया है।  गर्भपात कारित करना (Causing Miscarriage) - भारतीय दण्ड संहिता की धारा 31

भारतीय संविधान में स्त्रियों के मूल कर्तव्य में क्या प्रावधान किये गये हैं?What provisions have been made regarding the fundamental duties of women in the Indian Constitution?

भारतीय संविधान के  भाग 4A में मौलिक कर्तव्यों को शामिल किया गया है। जो न केवल नागरिकों के अधिकारों को परिभाषित करते हैं, बल्कि समाज के प्रति उनके नैतिक दायित्वों को भी रेखांकित करते हैं। इन कर्तव्यों में से एक है स्त्रियों के प्रति सम्मान और गरिमा का भाव रखना।       संविधान का अनुच्छेद 51 -क [30] यह व्यवस्था करता है कि भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह भारत के लोगों में समरसता और समान भ्रातृत्व की भावना का निर्माण कर जो धर्म भाषण और प्रदेश या वर्ग पर आधारित भेदभाव मिटाती हैं, ऐसी प्रथा का त्याग करे जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हो।        मौलिक कर्तव्य 5( e) में कहा गया है कि हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह स्त्रियों के प्रति अपमानजनक रीति - रिवाजों का त्याग करे। यह कर्तव्य निम्नलिखित बिन्दुओं पर प्रकाश डालता है-  • समानता का सम्मानः स्त्रियों की पुरुषों के समान अधिकार और अवसर प्राप्त होने चाहिये। उन्हें शिक्षा, रोजगार स्वास्थ्य सेवा और 'राजनीतिक भागीदारी में समानता को अधिकार है।  • गरिमा का सम्मान: स्त्रियों को सम्मान और गरिमा के साथ जीने का अधिकार

तलाक क्या होता है? तलाक को कितने भागों में बांट सकते हैं जोकि महत्वपूर्ण हो?What is divorce? How many parts can divorce be divided into that are important?

विवाह, एक पवित्र बंधन, जिसके माध्यम से दो व्यक्ति जीवन भर साथ रहने का वादा करते हैं। इस्लाम में भी विवाह को अत्यंत महत्त्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन कुछ परिस्थितियों में तलाक का विकल्प भी मौजूद है। मुस्लिम विधि में तलाक को तलाक कहा जाता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से विवाहित जोड़ा कानूनी रूप से अलग हो जाता है।      मुस्लिम विधि में तलाक अर्थात विवाह-विच्छेद अत्यन्त आसान है। । यहाँ पति तीन बार तलाक शब्द का उच्चारण कर आपनी पत्नी को कभी भी तलाक दे सकता है। पत्नी की विशेष परिस्थितियों में अपने पति को तलाक देने का अधिकार है। यदि तलाक लिखित में दिया जाता है तो उसे तलाकनामा कहा जाता है। इसका यथासम्भव अरबी भाषा में होना अपेक्षित है।  तलाक के प्रकार:  [1] रज्जी तलाक : यह तलाक पति द्वारा तीन बार तलाक शब्द उच्चारण करने से होता है। प्रत्येक उच्चारण के बीच एक ईद्दा काल होता है। जिसमें सुलह की संभावना रहती है।  [2] खुला तलाक : इसमें पत्नी पति को तलाक के बदले में मेहर  विवाह अनुबन्ध में निर्धारित धनराशि का त्याग करके तलाक प्राप्त कर सकती है। खुला का अर्थ है परित्याग करना । इसम

राजस्व न्यायालय क्या होते हैं? इनका क्या कार्य होता है। वर्णन करो।What are revenue courts? What is their function? Describe.

राजस्व न्यायालय:-   राजस्व न्यायालय, भारत में भूमि,और कर से संबन्धित  सम्पत्ति मामलों को निपटाने वाली विशेष अदालतें है। इनकी स्थापना राजस्व कानूनों के तहत की जाती है। और इनका अधिकार क्षेत्र विभिन्न राज्यों में भिन्न हो सकता है। राजस्व न्यायालयों के मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं।-   [1] भूमि विवादों का समाधान: इसमें जमीन के स्वामित्व, सीमा विवाद पट्टे के अधिकार, और मुआवजे से संबन्धित मामले शामिल हैं।  [ 2] कर निर्धारण और वसूली: इसमें सम्पत्ति कर कृषि आयकर, और अन्य करों का आकलन, निर्धारण और वसूली से सम्बन्धित मामले शामिल है।  [ 3] विरासत और उत्तराधिकार: इसमें राजस्व कानूनों के तहत आने वाले अन्य मामले शामिल है, जैसे कि अवैध कब्जा, भूमि अधिग्रहण, और मुआवजा ।  राजस्व न्यायालयों का पदानुक्रम  राजस्व न्यायालयों का पदानुक्रम राज्य से राज्य में भिन्न होता है। लेकिन, सामान्य तौर पर, इसमें निम्नलिखित  स्तर शामिल होते हैं।  • प्राथमिक राजस्व न्यायालय: यह निचला स्तर का न्यायालय होता है, जो आमतौर पर तहसील या उप- विभागीय स्तर पर होता है।  • अपीलीय राजस्व न्यायालय: यह जिला स्तर का न्यायालय हो