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Showing posts from December, 2025

IPC की धारा 353 और BNS की धारा 132 लोक सेवकों की सुरक्षा से जुड़े कानून का पूरा विश्लेषण

IPC की धारा 353 और BNS की धारा 132 लोक सेवकों की सुरक्षा से जुड़े कानून का पूरा विश्लेषण

IPC की धारा 353 और BNS की धारा 132 : एक विस्तृत विश्लेषण→ भारतीय कानून व्यवस्था में समय-समय पर बदलाव होते रहे हैं ताकि यह आधुनिक जरूरतों और चुनौतियों के साथ तालमेल बनाए रख सके। इसी बदलाव के तहत हाल ही में भारतीय दंड संहिता ( Indian Penal Code ) यानी IPC की धारा 353 को भारतीय न्याय संहिता ( Bharatiya Nyaya Sanhita - BNS) की धारा 132 में स्थानांतरित किया गया है। इस लेख में हम इन दोनों धाराओं का विस्तार से अध्ययन करेंगे, उनके बीच समानताओं और अंतर को समझेंगे और यह भी जानेंगे कि इनका उपयोग किन परिस्थितियों में किया जाता है। IPC की धारा 353: लोक सेवक पर हमला या आपराधिक बल का प्रयोग→ IPC की धारा 353 लोक सेवकों ( public servants ) की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई थी। इस धारा के तहत किसी भी व्यक्ति द्वारा लोक सेवक को उसकी ड्यूटी निभाने से रोकने के लिए हमला करना या आपराधिक बल का प्रयोग करना अपराध माना जाता है। मुख्य तत्व→ लोक सेवक: यह धारा केवल लोक सेवकों पर लागू होती है। कानूनी कर्तव्य: लोक सेवक को अपनी आधिकारिक ड्यूटी करते समय रोका या बाधित किया जाना चाहिए। आपराधिक बल या ...

BNS की धारा 127(5)अवैध बंधक बनाकर रिट आदेश की अवहेलना का क्या मतलब है?

भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 345 और इसके नवीनतम स्वरूप भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 127(5) का उद्देश्य है कि कोई भी व्यक्ति किसी को अवैध रूप से बंधक बनाकर कानून के आदेश की अवहेलना न करे। यह प्रावधान नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा करता है और यह सुनिश्चित करता है कि न्यायालय के आदेश का सम्मान किया जाए।     IPC की धारा 345 :→ IPC की धारा 345 के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति किसी को अवैध रूप से बंधक बनाकर रखता है और उस व्यक्ति को रिहा करने के लिए अदालत द्वारा रिट (जैसे Habeas Corpus ) जारी की जा चुकी है, फिर भी वह व्यक्ति रिट के आदेश का पालन नहीं करता, तो यह अपराध माना जाएगा।   दंड: → इस अपराध के लिए दोषी को अधिकतम दो साल तक का कारावास या आर्थिक दंड या दोनों की सजा हो सकती है।   BNS की धारा 127(5): नया प्रावधान → नए कानून में इसे अधिक विस्तृत और प्रभावी बनाया गया है। BNS की धारा 127(5) में न केवल अवैध बंधक बनाए रखने की सजा का प्रावधान है, बल्कि रिट आदेश की अवहेलना को भी गंभीर अपराध माना गया है।   मुख्य बिंदु: → 1. रिट आदेश की अवहेलना: →...

दलित व्यक्ति के साथ किसी भी प्रकार की अमानवीय घटना कारित करने वाले व्यक्तियों को सजा कैसे दिलायें ?

एक मामला Tv के माध्यम से सामने आया कि एक दलित व्यक्ति की पिटाई कुछ दबंगों द्वारा की गयी है।उन दबंगों में से एक व्यक्ति ने तो उसके ऊपर पेशाब करने का अपना विडियो भी बनवाया।ऐसी घटना से अपमान से क्षुब्ध वो दलित व्यक्ति थाने में अपनी रिपोर्ट दर्ज करवाने गया लेकिन उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गयी बस यह कहा गया कि जांच करने की बात की गयी। ऐसी स्थिति में अगर वह आप को अपना अधिवक्ता नियुक्त करता है तो आप उसकी किस प्रकार से मदद करेंगे उदाहरण देकर समझाओ।तथा उन अपराधियों को किन-किन तर्कों को देकर कोर्ट में मामले की गम्भीरता को बताओगे। विस्तार से जानकारी दो।                इस प्रकार की घटना न केवल एक जघन्य अपराध है बल्कि यह संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों का भी उल्लंघन है। इस स्थिति में, यदि पीड़ित व्यक्ति मुझे अधिवक्ता नियुक्त करता है, तो मैं निम्नलिखित कानूनी और व्यावहारिक कदम उठाऊंगा। 1. FIR दर्ज करवाने का प्रयास→ •सबसे पहले, मैं धारा 154 CrPC के तहत थाना प्रभारी को अनिवार्य रूप से प्राथमिकी दर्ज करने के लिए लिखित शिकायत दूंगा। यदि थाना प्रभारी फिर भी FI...